RBSE Solutions for Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 स्नेहमयी मम भारतमाता

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Rajasthan Board RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 स्नेहमयी मम भारतमाता

RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 पाठ्य-पुस्तकस्य अभ्यास प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 वस्तुनिष्ठप्रश्नाः

प्रश्न 1.
भारतमाता वितरति
(क) स्नेहम्
(ख) दु:खम्
(ग) कमलम्
(घ) हिमम्।
उत्तरम्:
(क) स्नेहम्

प्रश्न 2.
भारतमाता नास्ति-
(क) हिमकिरीटिनी
(ख) धनधान्यरहिता
(ग) सिन्धुमेखला
(घ) गंगासलिलनिर्मला
उत्तरम्:
(ख) धनधान्यरहिता

प्रश्न 3.
असुरमर्दिनी अस्ति
(क) श्री
(ख) लक्ष्मी
(ग) शर्वाणी
(घ)सरस्वती
उत्तरम्:
(ग) शर्वाणी

प्रश्न 4.
या संस्कृति: कमलम्
(क) दिशति
(ख) हसति
(ग) मुञ्चति
(घ) वहति
उत्तरम्:
(घ) वहति

RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 लघूत्तरात्मकप्रश्नाः

प्रश्न 1.
भारतमाता हृदये कीदृशी अस्ति?
उत्तरम्:
भारतमाता हृदये गंगासलिल इव निर्मला।

प्रश्न 2.
भारतमातुः अञ्चलः केन पूरितः।
उत्तरम्:
भारतमातुः अञ्चल: धनधान्येन पूरित:?

प्रश्न 3.
भारतामाता करे किं वहति?
उत्तरम्:
भारतमाता करे संस्कृति-कमलं वहति।

प्रश्न 4.
भारतमाता कथं हसति?
उत्तरम्:
भारतमाता चारु सित-पंकज-विमलं हासे हसति?

RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9  निबन्धात्मक प्रश्नाः

प्रश्न 1.
‘स्नेहमयी मम भारतमाता’ कवितायाः आधारेण भारतमातुः वैशिष्ट्यं वर्णयत।
उत्तरम्:
स्नेहमयी मम भारतमाता सदैव सर्वेभ्यः जनेभ्यः स्नेहं वितरति। सा हिमालयस्य किरीटं सिन्धोः मेखलां च धारयति। तस्याः हृदये गंगायाः निर्मलं जलम् अस्ति।  एषा सुजला, सुफला सस्य श्यामला चास्ति। अस्याः अञ्चलः धनधान्यपूर्णः अस्ति। इयं क्षेममयी वर्तते। भारतमातुः श्रेष्ठा वाणी शान्तिदायिनी अस्ति। एषा असुरसंहारिणी दुर्गा कल्याणकारिणी लक्ष्मी इव अस्ति। इयं देवभूमिः पुण्यपूर्णा, ज्ञान-शक्ति-सुख-दायिनी वर्तते। धर्ममयी एषा भारतमाता हस्ते संस्कृतेः प्रतीकं कमलं वहति, सुन्दर श्वेतं कमलमिव स्वच्छं हसति। वरदमुद्रया एषा सुदर्शना सदैव मङ्गलं प्रसारयति, बन्धनेभ्यः मुक्तिं च ददाति।

RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 व्याकरणात्मक प्रश्नाः

1. अधोलिखितपदेषु धातु-लकार-पुरुषवचनानां निर्देश कुरुत।
उत्तरम्:
RBSE Solutions for Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 स्नेहमयी मम भारतमाता 1

2. अधोलिखितपदेषु वचनपरिवर्तनं कुरुत
उत्तरम्:
1. विश्वजनेभ्यः      (एकवचनम्)   विश्वजनाय
2. वितरति           (बहुवचनम्)   वितरन्ति
3. हृदयं              (बहुवचनम्)   हृदयानि
4. अञ्चलः            (बहुवचनम्)   अञ्चलाः
5. पूरितः             (बहुवचनम्)   पूरिताः
6. मम                (बहुवचनम्)   अस्माकम्
7. यस्याः             (बहुवचनम्)   यासाम्
8. या                  (बहुवचनम्)   याः
9. वहति              (बहुवचनम्)   वहन्ति
10. हसति           (बहुवचनम्)   हसन्ति
11. दिशति          (बहुवचनम्)   दिशन्ति

3. अधोलिखितपदानां आधारेण वाक्यनिर्माणं कुरुतउत्तरम्

1. स्नेहम्        मम माता सर्वेभ्यः भ्रातृभ्यः स्नेहं वितरति।
2. अञ्चलः      उत्तराञ्चलः पर्वतीयः प्रदेशः अस्ति।
3. सुखदा      श्रीदेवी सुखदा वर्तते।
4. वहति        गर्दभः भारं वहतिः
5. हसति       बालक: उच्चैः हसति।
6. मङ्गलम्     सदाचारः सर्वस्य मङ्गलं करोति।
7. सुदर्शना     मम भारतमाता सुदर्शना अस्ति।
8. धर्ममयी     भारतभूमि: धर्ममयी वर्तते।

4. अधोलिखितानाम् स्थूल पदेषु आधारेण प्रश्ननिर्माण कुरुत –

1. भारतमाता स्नेहं वितरति।
2. अञ्चल: धनधान्यपूरितः अस्ति।
3. भारतमाता मङ्गलम् दिशति।
4. भारतमाता करे संस्कृति-कमलं वहति।
5. शर्वाणी असुर-मर्दिनी अस्ति।
उत्तरम्:
1. भारतमाता किं वितरति?
2. अञ्चलः कीदृशः अस्ति?
3. भारतमाता किं दिशति?
4. भारतमाता करे किं वहति।
5. का असुर-मर्दिनी अस्ति?

5. अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासस्य नामनिर्देशनं कुरुत –
उत्तरम्:
   पदम्                 समासविग्रहः             समासस्य नाम
1. सिन्धुमेखला         सिन्धु एव मेखला         बहुव्रीहि
यस्याः सा
2. गंगासलिलम्         गंगाया सलिलम्         षष्ठी तत्पुरुष
3. सस्य श्यामला       सस्येन श्यामला         तृतीया तत्पुरुष
4. सुरधरणी             सुराणां धरणी             षष्ठी तत्पुरुष
5. संस्कृति कमलम्   संस्कृते: कमलम्         षष्ठी तत्पुरुष

6. सः/सा/तत् योजयत –

  1. सा माता
  2. सः असुरः
  3. तत् कमलम्
  4. सा कल्याणी
  5. तत् पंकजम्
  6. सः अञ्चलः

7. (क) खण्ड (ख) खण्डेन सह योजयत –

(क) खण्डः       (ख) खण्डः
1. सुखदा           (i) दिशति
2. कमलं            (ii) वितरति
3. श्रीस्वरूपिणी   (iii) वहति
4. विमलं            (iv) कल्याणी
5. असुरमर्दिनी    (v) हसति
6. मंगलं             (vi) सुरधरणी
7. स्नेहं               (vii) शर्वाणी
उत्तरम्:
1 – (vi)
2 – (iii)
3 – (iv)
4 – (v)
5 – (vii)
6 – (i)
7 – (ii)

8. विपरीतार्थकशब्दान् लिखत
उत्तरम्:
1. अज्ञानम् = ज्ञानम्
2. दु:खम् = सुखम्
3. रोदिति = हसति
4. पापम्.= पुण्यम्
5. सुरः = अमुर:
6. अशान्तिः = शान्तिः
7. मलिना = विमला

RBSE Class 9 Sanskrit सरसा Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तराणि

अधोलिखित प्रश्नान् संस्कृतभाषया पूर्णवाक्ये उत्तरत –

प्रश्न 1.
भारतमाता केभ्यः स्नेहं वितरति?
उत्तरम्:
भारतमाता विश्वजनेभ्यः स्नेहं वितरति।

प्रश्न 2.
मम भारतमाता कीदृशी अस्ति?
उत्तरम्:
मम भारतमाता स्नेहमयी अस्ति।

प्रश्न 3.
लोकानां कलुष विषं कः हरते?
उत्तरम्:
लोकानां कलुष विषं भारतमाता हरते।

प्रश्न 4.
अमृतमयी का अस्ति?
उत्तरम्:
अमृतमयी भारतमाता अस्ति।

प्रश्न 5.
भारत माता किं-किं धारयति? के
उत्तरम्:
भारतमाता हिमगिरि-किरीट, सिंधु मेखला हृदये च गंगा सलिलं धारयति।

प्रश्न 6.
भारतमातुः वाणी कीदृशी?
उत्तरम्:
भारतमातुः वाणी शान्तिमयी अस्ति।

प्रश्न 7.
भारतमातुः अञ्चलः कीदृशः?
उत्तरम्:
भारतमातुः अञ्चल: धन-धान्य पूरितः

प्रश्न 8.
भारतमाता करे किं.वहित?
उत्तरम्:
भारतमाता करे संस्कृति-कमलं वहति।

प्रश्न 9.
भारतमाता कथं हसति?
उत्तरम्:
भारतमाता चारु सित-पंकज विमलं हसति।

प्रश्न 10.
भारतमाता वरद-मुद्रया किं प्रसारयति?
उत्तरम्:
भारतमाता वरद-मुद्रया मङ्गलं प्रसारयति।

स्थूलपदानि आह्त्य प्रश्न-निर्माणं कुरुत।

प्रश्न 1.
विश्वजनेभ्यो वितरति स्नेहम्।
उत्तरम्:
विश्वजनेभ्यो किं वितरति?

प्रश्न 2.
स्नेहमयी मम भारतमाता।
उत्तरम्:
स्नेहमयी का?

प्रश्न 3.
कलुष-विषं हरते लोकानाम्।
उत्तरम्:
केषां कलुष-विषम् हरते?

प्रश्न 4.
हिम किरीटिनी भारतमाता।
उत्तरम्:
हिम किरीटिनी का?

प्रश्न 5.
भारतमाता हृदय गंगा-सलिल निर्मला अस्ति;
उत्तरम्:
भारतमाता हृदये केन निर्मला अस्ति ?

पाठ परिचय

मीरापुरस्कार से सम्मानित आचार्य हरीराम महोदय किससे परिचित नहीं हैं। आप आशुकवि हैं। इन महाभाग ने अनेक ग्रन्थ लिखे हैं। कवि के साथ आप सफल अभिनेता भी हैं। आपके द्वारा लिखे गये काव्यों की भाषा सरस – सरल और सहज है। आपके द्वारा लिखी गयी कविताओं में एक यहाँ दी जा रही है, यह भारतमाता का स्नेह कैसा है – यह स्पष्ट करती है।

मूलपाठ, अन्वय, शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं सप्रसङ्ग संस्कृत व्याख्या

1. विश्वजनेभ्यो वितरति स्नेहम् स्नेहमयी मम भारतमाता। कलुष – विषं हरते लोकानाम् अमृतमयी मेम भारत – माता। हिम – किरीटिनी सिंधुमेखला, हृदये गंगा – सलिल – निर्मला, सुजला सुफला सस्य – श्यामला, यदञ्चलः धन – धान्यपूरितः क्षेममयी मम भारतमाता।

अन्वयः – स्नेहमयी मम भारतमाता विश्वजनेभ्यः स्नेहं वितरति। यदञ्चलः धन – धान्य – पूरितः (अस्ति तादृशी) मम भारतमाता हिमकिरीटिनी, सिन्धुमेखला हृदये गंगा – सलिल – निर्मला, सुजला सुफला सस्यश्यामला क्षेममयी (च अस्ति )।

शब्दार्था: – स्नेहमयी = अनुरागमयी, (स्नेहमयी)। मम = मे (मेरी)। विश्वजनेभ्यः = संसारस्य सर्वेभ्यः मानवेभ्यः। संसार के सभी मनुष्यों के लिये। स्नेहम् = अनुरागम् (प्रेम को)। वितरति = ददाति (देती है/वितरण करती है।) कलुष – विषं = कालुष्य हलाहलं = (गन्दा जहर) हरते – निवारते – (दूर करते हैं।) लोकानां – जनानां (लोगों के) अमृतमयी – सुधामयी (अमृतमय)यदञ्चलः = यस्य प्रान्तभागः (जिसका अंचल)। धन – धान्य – पूरितः = वित्तेन – अन्नेन च परिपूर्णः (धन और अन्न से परिपूर्ण)। अस्ति = वर्तते (है)। तादृशी = तथा विधा (वैसी)। मम = मे (मेरी)। हिमकिरीटिनी = हिमस्य मुकुटयुता (बर्फ का मुकुट धारण करने वाली)। सिन्धुमेखला = सिन्धुः इव मेखला यस्याः (सिन्धु आदि नदियाँ जिसकी मेखला हैं)। मेखला – कटिभागस्य आभूषणं = रसना करधनी कौंधनी, कमर का आभूषण। हृदये – गंगा = यस्याः हृदये गंगा (जिसके हृदय में गंगा है)। सलिलनिर्मला = जलेन विगतमला (जल से निर्मल)। सुजला = स्वच्छ स्वादिष्ट जलोपेता (सुन्दर जल वाली)। सुफला = स्वादिष्ट: फलैः परिपूर्णः (फलों से भरीपूरी)। सस्यश्यामला = सस्येन श्यामा (फसल से साँवली)। क्षेममयी = कुशलमयी आनन्द/मंगलमयी (आनन्दमयी)। च अस्ति = च वर्तते (और है)।

हिन्दी – अनुवाद – प्रेम से परिपूर्ण मेरी (भारत भूमि रूपी) भारत – माता लोगों के कालु – यरूपी जहर को दूर करके सभी लोगों को प्रेम का वितरण करती है (अर्थात् प्रेम बाँटती है।) जिसका अंचल (वस्त्र) धन और अन्न से परिपूर्ण है (ऐसी) मेरी भारत माता बर्फ का मुकुट धारण करने वाली नदियों की करधनी वालो (यो सागररूपी रसना धारण करने वाली) जिसका हृदय गंगा के जल से निर्मल है, स्वच्छ और स्वादिष्ट जलवाली सुन्दर फलों से परिपूर्ण, फसल से साँवली (हरीभरी) और आनन्दमयी है।

सप्रसंग संस्कृत व्याख्या – अयं पद्यांशः अस्माकं ‘सरसा इति पाठ्य – पुस्तकस्य ‘स्नेहमयी मम भारतमाता’ इति पाठात् उद्धृतः। पद्योऽयं आशुकवि – गीतकार रूपककार प्रो० हरिरामविरचितः अस्ति। अत्र कवि: भारतमातुः स्वरूपं समृद्धि च वर्णयन् कथयति–अनुरागमयी इयं मे भारतमाता सर्वेभ्यः जनेभ्यः प्रणयं वितरति। अमृतरसेनयुक्ता मम भारत माता सर्वलोकानां (जनानां) हृदये (अन्तः करणे) व्याप्तं हलाहलं दूरीकरोति। यस्याः अञ्चल: (वस्त्रान्त) वित्तेन – अन्नेन च परिपूर्णः वर्तते। तादृशी मे भारतमाता तुषारमुकुटधारिणी अर्थात् या हिमालय पर्वतं मुकुटवत् धारयति सिन्धुः नद्य एव यस्याः रसना मनसा या गंगायाः जलेन निर्मला मलहीना वा, स्वच्छ स्वादिष्टेन च जलेनयुता, स्वादिष्टः फलैः च परिपूर्णा, सस्यक्षेत्रैः श्यामल वर्णा, सुखस्वरूपिणी च वर्तते।।

♦ व्याकरणिक – बिन्दव –

1. स्नेहमयी = स्नेह + मयट्
2. हिमकिरीटिनी = हिमं किरीटवत् धारयति या सा (बहुव्रीहि)।

2. शान्तिमयी यस्या वर – वाणी, असुर – मर्दिनी या शर्वाणी, श्री – स्वरूपिणी या कल्याणीज्ञान – शक्ति – सुखदा सुरधरणी पुण्यमयी मम भारतमाता॥

अन्वयः – यस्याः शान्तिमयी वर – वाणी (अस्ति), या असुर – मर्दिनी शर्वाणी (अस्ति), या श्रीस्वरूपिणी कल्याणी (अस्ति) (तादृशी) मम भारतमाता ज्ञान – शक्ति – सुखदा, सुरधरणी, पुण्यमयी अस्ति।

शब्दार्था: – यस्याः = यद्भारतमातुः (जिस भारत माँ की)। वर – वाणी = श्रेष्ठावाणी, उत्तमावाणी (श्रेष्ठवाणी)। अस्ति = वर्तते (है)। असुरमर्दिनी = असुराणां राक्षसानां संहारिणी (असुरों का संहार करने वाली)। शर्वाणी = दुर्गा, पार्वती (दुर्गा)। यो श्रीस्वरूपिणी = लक्ष्मीस्वरूपा (लक्ष्मीस्वरूपा, धनदायिनी)। कल्याणी = कल्याणं, भद्रं कर्जी (कल्याण करने वाली)। तादृशी = तथैव (वैसी)। सुरधरणी = देवानां भूमिः (देवताओं की भूमि)।

हिन्दी – अनुवाद – जिस भारत माता की श्रेष्ठवाणी शान्ति से युक्त (है)। जो असुरों, राक्षसों अर्थात् दुष्टों का संहार करने वाली, दुर्गा (है), जो लक्ष्मीस्वरूपा कल्याणकारिणी (है)। (वैसी) मेरी भारत माता ज्ञान, शक्ति और सुख देने वाली देवभूमि पुण्यों से परिपूर्ण है। सप्रसङ्ग संस्कृत – व्याख्या – अयं पद्यांशः अस्माकं ‘सरसा इति पाठ्य – पुस्तकस्य ‘स्नेहमयी मम भारतमाता’ इति पाठात् उद्धृतः। इयं कविता कविगीतकारेण प्रो० हरिराम आचार्यमहाभागेन विरचिता अस्ति। गीतेन अनेन गीतकारः पुण्यमयी भारतमातुः गुणान् गायति। सः कथयति यद् भारतमातुः श्रेष्ठा वाणी शान्तिपूर्णा वर्तते। या भारतमाता असुराणां राक्षसानां संहारिणी दुर्गा अस्ति, या भारतमाता लक्ष्मीस्वरूपा कल्याणकारिणी वर्तते, तथैव मे भारतजननी ज्ञानदायिनी, शक्तिदायिनी, सुखदायिनी च। देवानां भूमि: पुण्यैः परिपूर्णा च वर्तते।

♦ व्याकरणिक – बिन्दवः –

1. शान्तिमयी = शम् + क्तिन् = शान्ति + मयट् + ङीप् = शान्तिमयी,
2. वरवाणी = वरा च असौ वाणी (कर्मधारय)।

3. वहति करे या संस्कृति – कमलम्, हसति चारु सित – पंकज – विमलम्,
वरद – मुद्रया दिशति मङ्गलम् यो सुदर्शना बन्ध – मोक्षदा धर्ममयी मम भारतमाता॥

अन्वयः – या करे संस्कृति – कमलं वहति, चारु – सित – पंकज – विमलं हसति, वरद – मुद्रया मङ्गलं दिगृति, यो सुदर्शना, बन्ध – मोक्षदा (अस्ति) (तादृशी) मम भारतमाता धर्ममयी (अस्ति)।

शब्दार्था: – या = या भारतमाता (जो भारत माता)। करे = (हाथ में)। संस्कृति – कमलं = संस्कृति रूपं कमलं सरोजं। संस्कृतिरूपी या संस्कृति के प्रतीक कमल को)। वहति = दधाति (धारण करती है)। चारु = सुन्दरं (सुन्दर।। सित = श्वेत (सफेद)। पङ्कज = कमलवत् (कमल की तरह)। विमलम् = निर्मलम्, स्वच्छम् (स्वच्छ अर्थात् सुन्दर सफेद कमल की तरह स्वच्छ)। वरदमुद्रया = वरदायक आकृत्या (वर देने वाली मुद्रा से)। मङ्गलं = कल्याणं, भद्रम् (कल्याण)। दिशति = प्रसारयति (फैलाती है)। सुदर्शना = प्रियदर्शना (सुन्दर दिखने वाली)। बन्धमोक्षदा = मोक्ष – दात्री (मोक्ष देने वाली)। तादृशी = तथा (वैस)। मम = मे (मेरी)। भारतमाता। धर्ममयी = धर्मयुता (धर्ममय)।।

हिन्दी – अनुवाद – जो (भारतमाता) हाथ में संस्कृतिरूपी कमल को धारण करती है, सुन्दर श्वेत कमल जैसी हँसी हँसती है, वरदान की मुद्रा से कल्याण करती है, जो (भारतापाता) सुन्दर दिखने वाली और बन्धनों से मुक्त कराने वाली है, वैसी मेरी भारतमाता धर्ममयी है।। सप्रसंग संस्कृत व्याख्या – अयं पद्यांशः अस्माकं सरसा इति पाठ्य पुस्तकस्य ‘स्नेहमयी मम भारतमाता’ इति पाठात् उद्धृतः। अनेन पद्यांशेन कवि: प्रो० हरिराम: सुलक्षणां धर्ममयी भारतमातुः सुलक्षणान् वर्णयति। कवि कथयति यत् या भारतमाता हस्ते संस्कृति – सरोजं दधाति, सुन्दरश्वेतकमलमिव स्वच्छं हासं हसुति। वरदान दायिन्या आकृत्या कल्याणं प्रददातिप्रसारयति या भारतमाता प्रियदर्शना शोभना वा, बन्धनात् मुक्ति प्रदायिनी (मोक्षदात्री) तथा मे भारतमाता धर्मयुता वर्तते।

♦ व्याकरणिक – बिन्दवः –

1. संस्कृति – कमलम् = संस्कृतिः कमलुमिव (कर्मधारय समास),
2. सितपङ्कजे – विमलम् = सितपंकजम् इव विमलम्।

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