Bsc Chemistry Notes in Hindi

ज्वीटर आयन | एम्फोलाइट क्या है | परिभाषा | सूत्र | समविभव बिन्दु

ज्वीटर आयन / एम्फोलाइट :  एमीनो अम्ल लवण के समान व्यवहार करते है , क्योंकि इनमे अम्लीय एवं क्षारीय दोनों समूह उपस्थित होते है। जलीय विलयन में -COOH समूह H+ त्यागकर एवं NH2 समूह H+ ग्रहण करके द्विध्रुवीय आयन का निर्माण करते है , जिसे ज्विटर आयन उदासीन स्पीशीज होता है परन्तु इसमें धनावेश व ऋणावेश दोनों आवेश उपस्थित होते है। …

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वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन

 वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन :- स्थिर क्वाथी मिश्रण (azeotropic mixture in hindi ) : दो भिन्न क्वथनांक वाले द्रव पदार्थो का मिश्रण जिसे प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता एजियोट्रोप्स कहते हैं।वे द्विअंगी मिश्रण जिनके द्रव एवं वाष्प प्रावस्था में संगठन एक समान होते है , एजियोट्रोप्स कहलाते है।राउल्ट नियम से धनात्मक व …

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ओस्टवाल्ड तथा वॉकर की गतिक विधि

ओस्टवाल्ड तथा वॉकर की गतिक विधि : इस विधि में शुष्क वायु को क्रमशः विलयन विलायक व किसी अभिक्रमक में से प्रवाहित किया जाता है , चूँकि सामान्यत: जलीय विलयन लिए जाते है अत: अभिक्रमक के रूप में CaCl2 को काम में लिया जाता है , इस विधि में प्रयुक्त उपकरण को चित्रानुसार दर्शाया जाता है , …

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विलयन के क्वथनांक में उन्नयन

विलयन के क्वथनांक में उन्नयन :क्वथनांक की परिभाषा : वह ताप जिस पर किसी द्रव का वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब (1 atm /1bar) के बराबर हो जाता है , उसे द्रव का क्वथनांक कहते है।जैसे H2O का क्वथनांक 100′ C (373.15k) होता है , अर्थात 100 डिग्री सेल्सियस ताप पर जल की वाष्पदाब का मान वायुमंडलीय दाब …

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परासरण दाब | बॉयल वान्ट हॉफ का नियम | वान्टहॉफ चार्ल्स | आवोगाद्रो |विलयनों का सामान्य समीकरण

परासरण दाब : वह द्रव स्थैतिक दाब जो अर्द्धपारगम्य झिल्ली (S.P.M) द्वारा और पर्याप्त हो परासरण दाब कहलाता हैं।विलयन के ऊपर लगाया गया अतिरिक्त दाब जो परासरण की क्रिया को रोक दे परासरण दाब कहलाता है।इसे π से दर्शाते है।π = hdgयहाँ π = परासरण दाबh = केश नली में चढ़े द्रव की ऊंचाईd = घनत्वg = गुरुत्वीय त्वरण परासरण …

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सक्रियता एवं सक्रियता गुणांक | प्रतिलोम परासरण के उपयोग | परासरण दाब एक अणुसंख्यक गुण

 व्युत्क्रम परासरण /प्रतिलोम परासरण (reverse osmosis) : यदि विलयन पर परासरण दाब से अधिक दाब लगाया जाए तो परासरण की प्रक्रिया विपरीत दिशा में होने लगती हैं।  अर्थात विलायक के कण अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा विलयन से शुद्ध विलायक की और गमन करने लगते है।  यही परिघटना व्युत्क्रम परासरण कहलाती हैं। प्रतिलोम परासरण के उपयोग 1. …

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एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी की परिभाषा क्या है

एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी   : क्षेत्र (region) : रेडियो तरंग (radio waves) जिस प्रकार परमाणु में नाभिक के चारों ओर electron गति करते है उसी प्रकार कई नाभिक भी चक्रण करते है जिनके चक्रण कोणीय संवेग का मान (h/2π) √I(I+1) के बराबर होता है। यहाँ I = नाभिक चक्रण क्वांटम संख्या। नाभिक के लिए I के कई प्रकार के …

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तुल्य व अतुल्य प्रोटॉन | नाभिकीय परिक्षण व विपरिक्षण की परिभाषा क्या है

तुल्य व अतुल्य प्रोटॉन की परिभाषा क्या है तथा नाभिकीय परिक्षण व विपरिक्षण : तुल्य proton : किसी अणु में उपस्थित वे proton जिनके बंध कोण , बंध लम्बाई आदि के मान समान होते है अर्थात जिनका वातावरण एक समान होता है , समतुल्य प्रोटॉन कहलाते है। ये प्रोटॉन समान सामर्थ्य वाले चुम्बकीय क्षेत्र में अवशोषित होते …

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रासायनिक विस्थापन की परिभाषा क्या है

रासायनिक विस्थापन : इलेक्ट्रॉन के परिरक्षण से प्रोटोन का सिग्नल उच्च क्षेत्र की ओर एवं विपरिक्षण के कारण निम्न क्षेत्र की ओर विस्थापित हो जाते है , इस प्रकार proton के परिरक्षण अथवा विपरीरक्षण से एनएमआर (NMR) सिग्नल का उच्च क्षेत्र या निम्न क्षेत्र की ओर विस्थापन रासायनिक विस्थापन (chemical shift) कहलाता है। प्रोटोन के …

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रासायनिक विस्थापन को प्रभावित करने वाले कारक

रासायनिक विस्थापन को प्रभावित करने वाले कारक : रासायनिक विस्थापन को निम्न कारक प्रभावित करते हैं – प्रेरणिक प्रभाव /I प्रभाव : अधिक विद्युत ऋणी परमाणु जैसे F,O,N,Cl आदि -I प्रभाव के कारण प्रोटोन के चारों ओर स्थित electron को अपनी ओर आकर्षित कर लेते है , जिससे प्रोटोन के चारों ओर electron घनत्व कम …

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एनएमआर संकेतो का विपाटन | चक्रण चक्रण | युग्मन स्थिरांक | जैमिनल | विसिनल | दीर्घ परासी

एनएमआर संकेतो का विपाटन :splitting (विपाटन) = (n +1 )यहाँ n = पडोसी c पर उपस्थित प्रोटॉन की संख्याnote : NMR signal में splitting चक्रण चक्रण युग्मन के कारण होती है। चक्रण चक्रण विपाटन /चक्रण चक्रण युग्मन (spin spin splitting /spin spin coupling) एक प्रोटोन की चक्रण की उसकी निकटवर्ती proton या protons के चक्रण से …

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विषम चक्रीय यौगिक | पिरोल क्या है | परिभाषा | संरचना | एरोमैटिकता | पिरॉल की अणुकक्षक संरचना  

विषम चक्रीय यौगिक : वे स्थायी चक्रीय यौगिक जिनकी वलय में कम से कम 1 विषम परमाणु N , O ,S उपस्थित हो एवं यौगिक ऐरोमैटिक हो , विषम चक्रीय यौगिक कहलाते हैं।उदाहरण : पिरॉल , फ्यूरेन , थायोफीन , पिरिडीन। 1. पिरोल (pyrrole) : IUPAC = एजोलबनाने की विधियां :1. अमोनियम म्यूसेट द्वारा : …

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