RBSE Solutions for Class 11 Sociology Chapter 8 पारिस्थितिकी एवं समाज

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Rajasthan Board RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 पारिस्थितिकी एवं समाज

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर  

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी विज्ञान अध्ययन करता है
(अ) केवल मानव समाज का
(ब) केवल पशु समाज का
(स) भौतिक पर्यावरण व जीवों के सम्बन्ध का
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) भौतिक पर्यावरण व जीवों के सम्बन्ध का

प्रश्न 2.
निम्न में से कौनसा जीव प्राकृतिक सन्तुलन को कृत्रिम रूप से हानि पहुँचा सकता है?
(अ) मनुष्य
(ब) पशु
(स) पक्षी
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) मनुष्य

प्रश्न 3.
डेसीबल इकाई है
(अ) ध्वनि की तीव्रता मापने के लिए
(ब) वायु की तीव्रता मापने के लिए
(स) जल की अशुद्धि नापने के लिए
(द) भूमि की अशुद्धि नापने के लिए।
उत्तर:
(अ) ध्वनि की तीव्रता मापने के लिए

प्रश्न 4.
रेडियोधर्मी प्रदूषण का मुख्य कारण है
(अ) परमाणु परीक्षण
(ब) ज्वालामुखी विस्फोट
(स) औद्योगीकरण
(द) नगरीकरण।
उत्तर:
(अ) परमाणु परीक्षण

प्रश्न 5.
वैकल्पिक ऊर्जा है
(अ) सौर ऊर्जा
(ब) पेट्रोलियम पदार्थों से उत्पन्न ऊर्जा
(स) परमाणु ऊर्जा
(द) अन्य।
उत्तर:
(अ) सौर ऊर्जा

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी में किसका अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
पारिस्थितिकी में भौतिक पर्यावरण तथा जीवों में सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी पर कितने प्रतिशत पानी है?
उत्तर:
पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी है।

प्रश्न 3.
पृथ्वी पर कितने प्रतिशत स्थल भाग है?
उत्तर:
पृथ्वी पर 29 प्रतिशत स्थल भाग है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण की संरचना के कितने अंग हैं?
उत्तर:
पर्यावरण की संरचना के चार प्रमुख अंग हैं।

प्रश्न 5.
ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता को किस इकाई में नापा जाता है?
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता को डेसीबिल में नापा जाता है।

प्रश्न 6.
ध्वनि प्रदूषण का एक दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण से मानसिक चिड़चिड़ापन उत्पन्न होता है।

प्रश्न 7.
जल प्रदूषण का एक दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर:
प्रदूषित जल के उपयोग से मनुष्य में पेट के रोग हो जाते हैं।

प्रश्न 8.
वायु प्रदूषण का एक दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर:
प्रदूषित वायु से फेफड़े का रोग हो जाता है।

प्रश्न 9.
जलवायु किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी स्थान पर उपस्थित जल, वायु एवं अन्य कारणों की गुणवत्ता को जलवायु (Climate) कहते हैं।

प्रश्न 10.
जलवायु परिवर्तन के कारणों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
जलवायु परिवर्तन के कारणों को मुख्य दो भागों में बाँटा जा सकता है मानवीय कारण तथा प्राकृतिक कारण।

प्रश्न 11.
ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाली किसी एक गैस का नाम बताइए।
उत्तर:
क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFCs)

प्रश्न 12.
हम प्राणवायु किसे कहते हैं?
उत्तर:
ऑक्सीजन गैस को हम प्राणवायु कहते हैं।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
धारणी क्षमता किसे कहते हैं?
उत्तर:
धारणी क्षमता (Carrying capacity) :
पारिस्थितिकी में एक समय में जीवों की एक सीमित संख्या ही आश्रित रहकर अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है। अर्थात् किसी पारितंत्र में जीवों की निश्चित संख्या को पर्याप्त भोजन एवं आराम प्राप्त हो सकता है, पर्यावरण की इस क्षमता को ‘धारणी क्षमता’ कहते हैं। यह क्षमता प्राकृतिक रूप से अपना संतुलन बनाये रहती है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण (Environment) :
किसी जीवधारी के आस-पास का वह सब जो उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है। दूसरे शब्दों में, हमारे चारों ओर व्याप्त आवरण जिसमें सूक्ष्म जीवाष्म से लेकर सभी जीव, पेड़-पौधे जलवायु, नदी, तालाब, पर्वत, समुद्र, चट्टानें मिलकर पर्यावरण बनाते हैं।

प्रश्न 3.
जलमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर:
जलमण्डल (Hydrosphere) :
जलमण्डल से हमारा तात्पर्य जल की उस परत से है जो महासागरों, नदियों, झीलों, तालाबों तथा अन्य रूपों में पृथ्वी की सतह पर फैली है। पृथ्वी पर पाये जाने वाले सम्पूर्ण जलस्रोतों को जलमण्डल कहते हैं। पृथ्वी का 71% भाग पर जल तथा शेष 29% भाग पर स्थल है।

प्रश्न 4.
वायुमण्डल का अर्थ बताइए।
उत्तर:
वायुमण्डल (Atmosphere) :
पृथ्वी के चारों ओर पाए जाने वाले वायु के आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। वायुमण्डल विभिन्न प्रकार की गैसों जैसे-ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड आदि का मिश्रण है। वायुमण्डल पृथ्वी पर जीवों के लिए अत्यन्त आवश्यक होता है। बिना इसके जीवन संभव नहीं है।

प्रश्न 5.
स्थलमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर:
स्थलमण्डल (Lithosphere) :
पृथ्वी की सम्पूर्ण बाहरी परत जिस पर महाद्वीप और महासागर स्थित है, उसे स्थलमण्डल कहते हैं। यह स्थलमण्डल हमारे मिट्टी आदि का प्रमुख स्रोत है। स्थलमण्डल पर ही हम फसलों और पेड़-पौधों को उगाते हैं तथा रहने के लिए मकान इत्यादि बनाते हैं।

प्रश्न 6.
पर्यावरण प्रदूषण को समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण (Environmental pollution) :
पर्यावरण तथा उसके किसी अंग में दूषित पदार्थों के प्रवेश के कारण पर्यावरण के प्राकृतिक सन्तुलन के बिगड़ने को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। अर्थात् पानी, हवा, प्राकृतिक सम्पदा, मिट्टी आदि में दूषित, विषैले और अवांछित पदार्थों के मिलने के कारण जीवों व वनस्पतियों पर इनका विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है और पारिस्थितिक तंत्र को हानि पहुँचने लगती है। इस स्थिति को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।

प्रश्न 7.
प्रदूषक किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रदूषण (Pollutions) :
ऐसे पदार्थ जो वायु, जल, मृदा एवं अन्य प्राकृतिक पदार्थों की भौतिक, रासायनिक अथवा जैविक संरचना एवं गुणवत्ता में हानिकारक परिवर्तन लाते हैं, प्रदूषक कहलाते हैं। जैसे-कूड़ा, कचरा, वाहित मल, कीटनाशक विषैली गैसें, धुआँ, प्लास्टिक आदि।

प्रश्न 8.
मलजल किसे कहते हैं?
उत्तर:
मलजल-घरेलू और सार्वजनिक शौचालयों व मूत्रालयों से निकलने वाला मल-मूत्र बड़ी मात्रा में जल में मिल जाता है और बहकर जलस्रोतों को प्रदूषित करता है। इसे मल-जल कहते हैं। अधिकांश शहरों एवं गाँवों में मलजल के निष्कासन की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह स्वच्छ जल स्रोतों को प्रदूषित करता है।

प्रश्न 9.
रेडियोसक्रिय प्रदूषक किससे पैदा होता है?
उत्तर:
रेडियोसक्रिय प्रदूषक (Radio active pollutions) :
परमाण्विक पदार्थों में विस्फोट से पैदा होता है। यह जलस्रोतों में मिलकर जल को दूषित कर देता है।

प्रश्न 10.
जल प्रदूषण के दो दुष्प्रभाव बताइए।
उत्तर:
जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं :

  1. प्रदूषित जल के उपयोग से मानव एवं पशुओं के शरीर में अनेक रोग हो जाते हैं।
  2. प्रदूषित जल में जलीय पौधों एवं जन्तुओं के जीवन पर संकट उत्पन्न हो जाता है।

प्रश्न 11.
वायु प्रदूषण का अर्थ बताइए।
उत्तर:
वायुप्रदूषण (Air Pollution) :
जब शुद्ध वायु में धुआँ, धूल, हानिकारक गैसें व अन्य प्रदूषक मिल जाते हैं और इस कारण यह मनुष्य, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों व अन्य जीवधारियों के लिए हानिकारक हो जाती है तो इसे वायु प्रदूषण कहते हैं।

प्रश्न 12.
भूमि प्रदूषण के दो कारण बताइए।
उत्तर:
भूमि प्रदूषण के कारण :

  1. कल-कारखानों से निकलने वाले हानिकारक रासायनिक अपशिष्ट को भूमि में फेंक दिया जाना।
  2. घरों का कचरा, प्लास्टिक, पॉलीथीन, काँच आदि का मिट्टी में मिलना।

प्रश्न 13.
प्रकाश प्रदूषण का अर्थ बताइए।
उत्तर:
प्रकाश प्रदूषण (Light or Luminous Pollutions) :
आजकल विकसित देशों तथा बड़े महानगरों में कृत्रिम प्रकाश के अत्यधिक उपयोग के कारण सामान्य नागरिक जीवन और अन्य जीवों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इस कृत्रिम प्रकाश को अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग ने एक नए प्रदूषण को जन्म दिया है, इसे प्रकाश प्रदूषण कहते हैं।

प्रश्न 14.
जलवायु परिवर्तन का अर्थ बताइए।
उत्तर:
जलवायु परिवर्तन से तात्पर्य किसी क्षेत्र विशेष में वर्षों से चले आ रहे औसत मौसम में परिवर्तन हो जाने से है। जलवायु में अचानक परिवर्तन से उस स्थान की वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं की आजादी पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होता है।

प्रश्न 15.
जलवायु परिवर्तन का एक मानवीय कारण बताइए।
उत्तर:
मनुष्य का एक प्रमुख क्रियाकलाप औद्योगीकरण है, जिसके कारण पृथ्वी के वायुमण्डल के तापमान में भारी वृद्धि हो रही है। तापमान में वृद्धि से पर्यावरण सन्तुलन के लिए खतरा पैदा हो गया है और जलवायु परिवर्तित हो रही है।

प्रश्न 16.
ग्रीन हाउस प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर:
ग्रीनहाउस प्रभाव (Green house effect) :
ग्रीन हाउस काँच की दीवारों वाला कमरा होता है जिसके अन्दर का ताप बाहर की अपेक्षा अधिक होता है। पृथ्वी के चारों ओर का वायुमण्डल भी ग्रीनहाउस की काँच की दीवारों की तरह कार्य करता है, जिससे पृथ्वी व वातावरण का तापमान नियंत्रित रहता है। इसे ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 17.
पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए कोई एक उपाय बताइए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमें ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा आदि के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए और पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।

प्रश्न 18.
पुनः चक्रण किसे कहते हैं?
उत्तर:
पुनः चक्रण (Recycling) :
कुछ पदार्थों को एक बार प्रयोग करने के पश्चात् इन्हें गलाकर या पिघलाकर या रूपान्तरित करके पुनः प्रयोग में लाया जा सकता है। इस प्रक्रिया को पुनः चक्रण कहते हैं। उदाहरण के लिए, टिन के प्रयोग किए हुए केन, काँच की अनुपयोगी बोतलें आदि को पिघलाकर पुनः नयी वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं। अतः पदार्थों के इस चक्रण को पुनः चक्रण करते हैं।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी का अर्थ बताइए तथा पर्यावरण की संरचना के दो अंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इकोलॉजी (Ecology) :
शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम जर्मन जीव वैज्ञानिक अर्स्ट हैकेल ने सन् 1869 में किया था। पारिस्थितिकी वह विज्ञान है जिसके अन्तर्गत पृथ्वी के समस्त जीवों तथा भौतिक पर्यावरण के मध्य आपसी सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। दूसरे शब्दों में, पारिस्थितिकी जीवों का एक-दूसरे के साथ तथा अपने आस-पास के भौतिक पर्यावरण के साथ अन्तःक्रिया का अध्ययन है। पर्यावरण की संरचना के मुख्य चार अंग जलमण्डल, वायुमण्डल, स्थलमण्डल तथा जैवमण्डल हैं। पर्यावरण के दो प्रमुख अंगों का वर्णन निम्नलिखित है :

i. जलमण्डल (Hydrosphere) :
जलमण्डल से हमारा तात्पर्य जल की उस परत से है जो महासागरों, नदियों, झीलों, तालाबों तथा अन्य रूपों में पृथ्वी की सतह पर उपस्थित है। पृथ्वी के 71 प्रतिशत भाग में जल पाया जाता है तथा 24 प्रतिशत भाग स्थल है। हम भलीभाँति जानते हैं कि जल ही जीवन है अर्थात् बिना जल के किसी भी जीव का जीवित रहना सम्भव नहीं है। ध्यान देने योग्य बात है कि पृथ्वी पर पाया जाने वाला सम्पूर्ण 71% जल पीने योग्य नहीं है।

ii. वायुमण्डल (Atmosphere) :
पृथ्वी के चारों ओर पाये जाने वाले हवा के आवरण को हम वायुमण्डल कहते हैं। यह वायुमण्डल अनेक प्रकार की गैसों का मिश्रण है। यह पृथ्वी पर रहने वाले जीवों तक सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolate rays) को पहुँचने से रोकता है तथा पृथ्वी के तापमान को स्थिर बनाये रखता है, इससे जीवों और पेड़-पौधों का जीवन सम्भव हो पाता है। हम सभी जानते हैं कि वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन गैस के बिना हम श्वास नहीं ले पाएंगे।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रदूषण के दो प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण के दो प्रकार :

i. जलप्रदूषण (Water pollution) :
प्राकृतिक जल शुद्ध होता है, किन्तु जब जर्ल-स्रोतों जैसे समुद्र, नदियों, भूजल, झीलों, तालाबों व कुओं इत्यादि में रासायनिक व अन्य पदार्थों को मिला दिया जाता है तो यह जल प्रदूषित हो जाता है, इसे जलप्रदूषण कहते हैं। इन रासायनिक और हानिकारक पदार्थों के कारण यह जल कृषि, मछली पालन, मानव, पशु-पक्षियों एवं जलीय जीवों के स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल हो जाता है। जल को प्रदूषित करने वाले तत्वों को जलप्रदूषक (Water pollution) कहते हैं। जल प्रदूषण के लिए निम्नलिखित प्रमुख प्रदूषक जिम्मेदार हैं :

  1. औद्योगिक प्रदूषक
  2. घरेलू प्रदूषक
  3. मल-मूत्र
  4. कृषि प्रदूषक
  5. रेडियो सक्रिय प्रदूषक।

ii. वायु प्रदूषण (Air pollution) :
जब शुद्ध वायु में धुआँ, धूल, हानिकारक गैसें व अन्य प्रदूषक मिल जाते हैं और इस कारण यह वायु मानव, पशुपक्षियों, पेड़-पौधों एवं अन्य जीवधारियों के लिए हानिकारक हो जाती है, तो इसे वायुप्रदूषण कहते हैं। अर्थात् शुद्ध वायु का दूषित हो जाना ही वायु प्रदूषण है। प्रदूषित वायु में हमें श्वास लेना मुश्किल होता है और यह हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

वायुप्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं :

  1. घरों में ईंधन जलने से निकला धुआँ,
  2. कारखानों, भट्टों की चिमनियों से निकला धुआँ
  3. वाहनों से निकला धुआँ,
  4. तेल शोधन संयंत्रों से निकली गैसें,
  5. ज्वालामुखी विस्फोट से निकली गैसें।

प्रश्न 3.
जलवायु परिवर्तन पर लेख लिखिए।
उत्तर:
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) :
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जलवायु में भी लगातार परिवर्तन होता रहता है किन्तु प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन की गति इतनी धीमी होती है कि समस्त जीवधारी परिवर्तित हो रही जलवायु के अनुसार स्वयं को अनुकूल कर लेते हैं और किसी भी प्रकार का कोई संकट उत्पन्न नहीं होता है। जलवायु में होने वाले परिवर्तन से जीवधारियों के साथ-साथ पारिस्थितिक तंत्र भी प्रभावित होता है। औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व जलवायु परिवर्तन में मानवीय हस्तक्षेप अधिकांशतः ऐसे साधनों, तकनीकों व वस्तुओं के उपयोग से पूर्ण कर लेते थे कि पर्यावरण व जलवायु पर कोई गम्भीर एवं नकारात्मक प्रभाव नहीं होता था किन्तु औद्योगिक क्रांति व अत्यधिक नगरीकरण के कारण विकास की ऐसी यात्रा प्रारम्भ हो गई है जो हमें विनाश की ओर अग्रसर कर रही है।

जलवायु में परिवर्तन का आशय है कि किसी स्थान के वर्षों से चले आ रहे औसत मौसम में परिवर्तन हो जाना। यह परिवर्तन मुख्यतः उस स्थान के तापमान (गर्मी-सर्दी), वर्षा, नमी, हवा इत्यादि में होता है और यह चिन्ताजनक तब होता है जब यह परिवर्तन पिछली कुछ सदियों की परिवर्तन की औसत गति से अधिक तेजी से होने लगता है, क्योंकि तेजी से जलवायु परिवर्तन होने पर पशु-पक्षी व अन्य जीवधारी और पेड़-पौधे बदलती जलवायु से अनुकूलन स्थापित नहीं कर पाते हैं तथा उनकी प्रजातियों के समक्ष अस्तित्व का संकट उत्पन्न होने लगता है। पिछले लगभग 200 वर्षों की हमारी गतिविधियों के कारण तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, जिसके साथ जीव जगत . व वनस्पति जगत समन्वय स्थापित नहीं कर पा रहा है। ये मुश्किलें निरन्तर बढ़ती ही जा रही हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण :
जलवायु परिवर्तन के दो प्रमुख कारण हैं :
i. प्राकृतिक कारण (Natural Causes) :
आज के थार रेगिस्तान के स्थान पर कुछ करोड़ वर्ष पूर्व समुद्र था। एक समुद्र का रेगिस्तान में परिवर्तित हो जाना बहुत बड़ी प्राकृतिक घटना है। हम जानते हैं कि प्रकृति सदैव परिवर्तनशील है, बहुत-सी प्राकृतिक घटनाएँ हमारी जलवायु को प्रभावित करती हैं और उसमें परिवर्तन लाती हैं जैसे ज्वालामुखी विस्फोट होने पर बड़ी मात्रा में गैस और तरल पदार्थ पर्यावरण में मिलते हैं और जलवायु को प्रभावित करते हैं। भूकम्प भी किसी स्थान की जलवायु को प्रभावित करते हैं।

ii. मानवीय कारण (Man Mads Causes) :
पिछले 150-200 वर्षों से हमने विकास की जिस राह को पकड़ा है और जिन साधनों को इसके लिए अपनाया है उससे उत्पन्न प्रभाव जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें प्रमुख कारण है, कोयला, पेट्रोलियम पदार्थ तथा गैसों का उपयोग जिन्हें हम प्रमुख रूप से औद्योगिक आवश्यकताओं तथा यातायात के साधनों में उपयोग करते हैं। खेतों में बढ़ते रासायनिक उर्वरकों का उपयोग तथा वनों की कटाई भी इसके लिए जिम्मेदार है। हमारी बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हम प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण उपयोग कर रहे हैं। मानवीय हस्तक्षेप के कारण जलवायु परिवर्तन को अधिक समझने के लिए हम ओजोन परत का क्षरण एवं ग्रीनहाउस प्रभाव के उदाहरण दे सकते हैं।

प्रश्न 4.
पर्यावरण की रक्षा के लिए उपाय के रूप में चार सामाजिक दायित्वों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण की रक्षा के लिए सामाजिक दायित्व (Social responsibility to environment conservation) :
हम पर्यावरण का एक अभिन्न अंग हैं और अच्छे पर्यावरण के अभाव में हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। अतः पर्यावरण की सुरक्षा एक सामाजिक दायित्व है। हमें निम्नलिखित उपायों को हमारे सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाना होगा :

  • जनसंख्या नियंत्रण :
    तीव्रता से बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कृषि, भूमि, उद्योगों और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे प्राकृतिक अस्थिरता उत्पन्न हो रही है। अतः सर्वप्रथम हमें जनसंख्या नियंत्रण की नीतियाँ अपनानी चाहिए।
  • पुनः चक्रण :
    हमें उन वस्तुओं का पुनः उपयोग करना चाहिए जिनका कि पुनः उपयोग संभव है जैसे कि कागज जैसी चीजें पुनः चक्रण (recycle) के पश्चात् दुबारा उपयोग की जा सकती हैं। ऐसा न करने पर पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनावश्यक दोहन होता है। यदि हम एक टन (एक हजार किग्रा) कागज का पुनः चक्रण करके उपयोग में लेते हैं तो लगभग 17 पेड़ों को काटने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • औद्योगिक प्रदूषण :
    हमें उद्योगों में उपयोग किए जा रहे हानिकारक पदार्थों का उपयोग बन्द या सीमित करना होगा जिसर, पर्यावरण में कम-से-कम हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन हो तथा उद्योगों से निकलकर नदियों में मिलने वाले हानिकारक अपशिष्टों को भी रोकना होगा क्योंकि अधिकांश नदियाँ औद्योगिक अपशिष्ट के कारण ही दूषित हो रही हैं।
  • वृक्षारोपण :
    वृक्ष हमें न केवल प्राणवायु (आक्सीजन) देते हैं बल्कि ये कार्बनडाईऑक्साइड गैस को ग्रहण करके हमारे पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। वृक्ष हमें फल-फूल, लकड़ी, औषधि आदि उपलब्ध कराते हैं और मृदा अपरदन को रोकते हैं। अतः पर्यावरण की रक्षा के लिए यह हमारा उत्तरदायित्व है कि हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।

प्रश्न 5.
पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए चार सुझाव दीजिए।
उत्तर :
पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए सुझाव हम सामूहिक रूप से निम्न उपायों को अपनाकर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक नियंत्रण में ला सकते हैं।

  • घरेलू मल-मूत्र प्रबंधन :
    नियोजित शहरीकरण के कारण अधिकांश शहरों में घरेलू मल-मूत्र के उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं है जिससे यह मलमूत्र बहकर आसपास के जलस्रोतों में मिल जाता है और जल को दूषित करता है। इसे रोकने के लिए मल-मूत्र की निकासी का उचित प्रबन्ध होना आवश्यक है। मल-मूत्र का उपचार करके इससे जैविक खाद बनायी जा सकती है। .
  • वाहनों द्वारा प्रदूषण पर नियंत्रण :
    आजकल स्वचालित वाहनों का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है। इनसे निकलने वाला जहरीला धुआँ हमारे लिए अनेक समस्याएँ पैदा कर रहा है। अतः हमें पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहनों के स्थान पर सौर ऊर्जा चालित या बैटरी चालित वाहनों का प्रयोग करना चाहिए।
  • वैकल्पिक ऊर्जा :
    हमें वर्तमान में कोयला व पेट्रोलियम पदार्थों पर आधारित ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने की आवश्यकता है, जिसके लिए हम सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा पर आधारित साधनों को अपना सकते हैं। सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा के स्रोत हैं। इनके उपयोग से हम पर्यावरण प्रदूषण को कम कर सकते हैं।
  • पर्यावरण जागरूकता :
    आज के समय में सबसे अधिक आवश्यकता वर्तमान पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की है। वर्तमान पीढ़ी को यह बताना अति आवश्यक है कि हमें पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखना क्यों आवश्यक है और इसे कैसे शुद्ध रखा जा सकता है। इसके लिए शिक्षा में पर्यावरण सम्बन्धी पाठ्यक्रम लागू करना अति आवश्यक है। इसके साथ-साथ वृक्षारोपण व वनसंरक्षण, जल की शुद्धि व संचयन, प्लास्टिक उत्पादों का सीमित उपयोग आदि की जानकारी भी कराना आवश्यक है।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
इकोलॉजी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया
(अ) चार्ल्स डार्विन ने
(ब) अर्ट हेकल ने
(स) पी. ओडम ने
(द) राबर्ट ब्राउन ने।
उत्तर:
(ब) अर्ट हेकल ने

प्रश्न 2.
यदि पर्यावरण के किसी एक घटक को नष्ट कर दिया जाए तो
(अ) ऊर्जा प्रवाह बाधित होगा।
(ब) पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव होगा
(स) खाद्य श्रृंखला बाधित हो जाएगी
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 3.
पर्यावरण के अवयवों में शामिल हैं।
(अ) सभी जीव-जन्तु
(ब) सभी पेड़-पौधे
(स) वायु, पानी, मृदा
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 4.
पृथ्वी का यह भाग जिस पर जीवधारी निवास करते हैं, कहलाता है।
(अ) वायुमण्डल
(ब) समतापमण्डल
(स) जैवमण्डल
(द) जलमण्डल।
उत्तर:
(स) जैवमण्डल

प्रश्न 5.
जलप्रदूषक है
(अ) वाहनों का धुआँ
(ब) ज्वालामुखी उद्गार
(स) कृषि प्रदूषक
(द) वर्षा।
उत्तर:
(स) कृषि प्रदूषक

प्रश्न 6.
एक स्वस्थ व्यक्ति 24 घण्टे में कितनी ऑक्सीजन लेता है?
(अ) 6-7 किग्रा
(ब) 10-11 किग्रा
(स) 13-14 किग्रा
(द) 15-16 किग्रा।
उत्तर:
(द) 15-16 किग्रा।

प्रश्न 7.
कितनी तीव्रता की ध्वनि हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है?
(अ) 60 डेसीबल
(ब) 80 डेसीबल से अधिक
(स) 100 डेसीबल से अधिक
(द) 120 डेसीबल से अधिक।
उत्तर:
(ब) 80 डेसीबल से अधिक

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी की अवधारणा किस पर आधारित है?
उत्तर:
पारिस्थितिकी की अवधारणा जीवों एवं पर्यावरण के अन्तर्सम्बन्धों पर आधारित है।

प्रश्न 2.
पारिस्थितिकी किस विज्ञान की शाखा है?
उत्तर:
पारिस्थितिकी जीवशास्त्र अर्थात् जीवविज्ञान की शाखा है।

प्रश्न 3.
पारिस्थितिक तंत्र किसका परिणाम है?
उत्तर:
पारिस्थितिक तंत्र करोड़ों वर्षों के प्राकृतिक उद्विकास (Evaluation) का परिणाम है।

प्रश्न 4.
वह कौन सा जीव है, जिसने प्राकृतिक संतुलन को सर्वाधिक खतरा उत्पन्न किया है?
उत्तर:
मनुष्य एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसने प्राकृतिक संतुलन को सर्वाधिक खतरा पहुँचाया है।

प्रश्न 5.
वायुमण्डल के दो कार्य बताइए।
उत्तर:

  1. वायुमण्डल पृथ्वी का ताप स्थिर रखता है।
  2. यह हमें श्वास के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है।

प्रश्न 6.
उद्योगों से निकलने वाले दो जल प्रदूषकों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. पारा
  2. ग्रीस।

प्रश्न 7.
दो प्रमुख वायु प्रदूषक गैसों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. कार्बन मोनोऑक्साइड
  2. नाइट्रोजन ऑक्साइड।

प्रश्न 8.
रेलगाड़ी और जेट विमान द्वारा उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता बताइए।
उत्तर:
रेलगाड़ी-90 डेसीबल, जेट विमान का उड़ना-120 डेसीबल।

प्रश्न 9.
अमेरिका ने जापान के किन दो शहरों पर परमाणु बम गिराये?
उत्तर:
हिरोशिमा और नागासाकी पर।

प्रश्न 10.
ओजान परत क्षरण का प्रभाव कहाँ देखा जा सकता है?
उत्तर:
ओजोन परत क्षरण का प्रभाव एन्टार्कटिका क्षेत्र पर देखा जा सकता है।

प्रश्न 11.
ब्रन्डटलेण्ड आयोग 1987 किससे सम्बन्धित था?
उत्तर:
ब्रन्डटलेण्ड आयोग (Brundtland commission 1987) पर्यावरण तथा विकास से सम्बन्धित विश्व आयोग था।

प्रश्न 12.
धारणीय विकास क्या है?
उत्तर:
ऐसा विकास जिसमें पर्यावरण की क्षमता बनी रहे, धारणीय विकास या सतत् विकास कहलाता है।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
पारिस्थितिकी (Ecology) :
पारिस्थितिकी जीवविज्ञान की वह शाखा है, जिसमें वनस्पति, जन्तुओं एवं मनुष्यों का पर्यावरण के साथ अन्तर्निर्भरता का अध्ययन उनकी प्राकृतिक अवस्था में किया जाता है अर्थात् पारिस्थितिकी जीवों का एक-दूसरे के साथ तथा अपने आस-पास के भौतिक पर्यावरण के साथ अन्त:क्रिया का अध्ययन है। Ecology शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जर्मन जीव वैज्ञानिक अर्नेर्ट हैकेल ने 1869 में किया और आगे चलकर ‘Occalogy’ के स्थान पर ‘Ecology’ का प्रयोग शुरू हो गया।

प्रश्न 2.
पर्यावरण क्या है? समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण दो शब्दों ‘परि’ तथा ‘आवरण’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है-चारों ओर का वातावरण। अतः किसी स्थान विशेष के जीव या जीव समूह के आसपास पाया जाने वाला वह सबकुछ जो उसे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, उस जीव या जीव समूह का पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण में हवा, जल, वायु, प्रकाश, ताप, मृदा, चट्टान, वर्षा, हिमापात, सूक्ष्मजीव, वनस्पतियाँ एवं जन्तु आदि सभी सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 3.
पर्यावरण की विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषाएँ लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण की परिभाषाएँ :
जिस्बर्ट – (P. Gisbert) के अनुसार “पर्यावरण वह सब कुछ है जो किसी वस्तु को चारों ओर से घेरे हुए है और प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है।”

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार – “भौगोलिक पर्यावरण में वह समस्त दशाएँ सम्मिलित हैं जो प्रकृति मनुष्य को प्रदान करती है।”

हर्सकोविट्ज (M.J. herskovits) के अनुसार – “पर्यावरण उन सभी बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है जो जीवधारियों के जीवन, उनके विकास और उनकी अनुक्रियाओं पर प्रभाव डालती है।”

प्रश्न 4.
पर्यावरण संस्थान के एक प्रमुख अंग जैवमण्डल को समझाइए।
उत्तर:
जैवमण्डल (Biosphere) :
“स्थलमण्डल, वायुमण्डल व जलमण्डल का वह भाग जहाँ तक जीवन संभव है मिलकर जैवमण्डल बनाते हैं। जैवमण्डल में ही विभिन्न जीवधारी तथा पर्यावरण आपस में अन्त:क्रिया करते हैं। जैवमण्डल में होने वाला परिवर्तन सभी जीवधारियों को प्रभावित करता है।

प्रश्न 5.
पर्यावरण क्षरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण क्षरण (Environmental Degradation) :
हम जानते हैं कि पर्यावरण विभिन्न जीवधारियों, वनस्पतियों, जल, वायु, मृदा, प्रकाश, वर्षा आदि का सामूहिक स्वरूप है। ये सभी पर्यावरण के घटक कहलाते हैं। जब पर्यावरण के एक या अधिक घटक की हानि होने लगती है, तो पर्यावरण असंतुलित होने लगता है, इसे पर्यावरण क्षरण कहते हैं।

प्रश्न 6.
प्रमुख वायु प्रदूषकों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
प्रमुख वायु प्रदूषक निम्नलिखित हैं :

  1. कल-कारखानों से निकलने वाली दूषित और जहरीली गैसें जो हवा में मिलकर शुद्ध वायु को भी दूषित कर देती हैं।
  2. वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआँ जिसमें नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें होती हैं।
  3. घरेलू उपयोग के लिए जलाई जाने वाली लकड़ियों व छानों इत्यादि का धुआँ।
  4. पारा शोधन संयंत्र, कपास की ब्लीचिंग, तेल शोधनशाला आदि से निकलने वाला जहरीला धुआँ
  5. ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली गैसें।

प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव बताइए।
उत्तर:
वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
प्रदूषित वायु में किसी भी जीवधारी का स्वस्थ रहना सम्भव नहीं है क्योंकि हम भोजन व जल की तुलना में वायु का अधिक उपयोग करते हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति 24 घण्टे में लगभग 15 से 16 किलोग्राम आक्सीजन लेता है। प्रदूषित वायु के कारण श्वसन तंत्र के रोगों के साथ-साथ, आँखों, किडनी व शरीर के अन्य अंगों के गम्भीर रोग हो जाते हैं। वायु प्रदूषण से अन्य जीवों व पेड़-पौधों पर भी दुष्प्रभाव होता है। विशेष तौर पर महानगरों में वायु प्रदूषण एक गम्भीर चुनौती बनता जा रहा रहा है।

प्रश्न 8.
कुछ प्रमुख ध्वनि स्रोतों की ध्वनि तीव्रता बताइए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 11 Sociology Chapter 8 पारिस्थितिकी एवं समाज 1

प्रश्न 9.
ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव बताइए।
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव-ध्वनि प्रदूषण के कारण मनुष्य तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य तथा व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। चिड़चिड़ापन, बहरापन, उच्च रक्तचाप, तनाव, नींद न आना, अवसाद तथा मानसिक रोग इत्यादि अनेक बीमारियों का कारण ध्वनि प्रदूषण भी है। अधिक शोर हमारी कार्य-क्षमता को भी कम करता है और आपसी वार्तालाप भी सहज तरीके से नहीं हो पाता है।

प्रश्न 10.
रेडियोधर्मी प्रदूषण क्या है? इसका प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive Pollution) :
कुछ पदार्थ ऐसी हानिकारक किरणें उत्सर्जित करते हैं जो मनुष्य तथा अन्य जीवधारियों के लिए अत्यंत घातक होती हैं। ऐसी हानिकारक विकिरणों के वातावरण में व्याप्त होने को रेडियो प्रदूषण कहते हैं। परमाणु विस्फोट रेडियोधर्मी प्रदूषण का प्रमुख कारण है। कभी-कभी परमाणु भट्टियों के रिसाव के कारण भी यह पैदा होता है।

प्रश्न 11.
रेडियोधर्मी प्रदूषण के दुष्प्रभाव एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर :
रेडियोधर्मी प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण बहुत से शारीरिक तथा मानसिक रोग हो जाते हैं और सबसे बड़ी बात इन प्रदूषण को एक बार फैलाने के बाद रोकना अत्यन्त कठिन है। इसी भयावह त्रासदी का एक उदाहरण जापान के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी हैं, जहाँ अमेरिका द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध में परमाणु बम गिराए गए, इससे लाखों की संख्या में लोग मारे गए और उसके विकिरण से वहाँ आज भी कुछ बच्चे अपंग पैदा होते हैं।

प्रश्न 12.
प्रकाश प्रदूषण के दुष्प्रभाव बताइए।
उत्तर:
प्रकाश प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
कृत्रिम प्रकाश का अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग प्रकाश प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न करता है। इसके कारण बेचैनी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा तथा अन्य रोग उत्पन्न हो जाते हैं। यह कृत्रिम प्रकाश प्राकृतिक व्यवस्था में दखल देता है जिससे जीवों की दिनचर्या प्रभावित होती है।

प्रश्न 13.
जलवायु से आप क्या समझते हैं? जलवायु की पर्यावरण में क्या भूमिका है?
उत्तर:
जलवायु (Climate) :
मौसम विज्ञानी प्रतिदिन विविध स्थानों का मौसम दर्ज करते हैं तथा ये आँकड़े वर्षों तक सुरक्षित रखे जाते हैं। आँकड़ों के आधार पर किसी स्थान का औसत मौसम प्रतिमान निर्धारित किया जाता है। यह लम्बे समय तक औसत मौसम उस स्थान की जलवायु कहलाता है। जलवायु को मनुष्य सहित सभी जीव, वनस्पति, मिट्टी, जलस्रोत इत्यादि प्रभावित होते हैं। इसलिए जलवायु की पर्यावरण के नियंत्रण व निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारा जीवन जलवायु से सबसे अधिक प्रभावित होता है।

प्रश्न 14.
ओजोन परत से आप क्या समझते हैं? यह कहाँ स्थित है?
उत्तर:
पृथ्वी के वायुमण्डल के ऊपर समताप मण्डल में ओजोन गैस की एक मोटी परत पायी जाती है। इसे ओजोन परत कहते हैं। ओजोन गैस ऑक्सीजन का ही एक रूप है, जिसका अणुसूत्र 0, होता है। यह नीले रंग की गैस है। यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी के चारों ओर एक परत के रूप में मौजूद है।

प्रश्न 15.
ओजोन परत के महत्व को समझाइए।
उत्तर:
ओजोन परत पृथ्वी के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाए हुए है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर नहीं आने देती, जिससे पृथ्वी पर जीव-जन्तु एवं वनस्पतियाँ, पराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभाव से सुरक्षित रहती हैं। यह परत पराबैंगनी किरणों को पुनः ऊपर की ओर परावर्तित कर देती है।

प्रश्न 16.
ग्रीन हाउस (पौधघर) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ग्रीनहाउस (पौधघर) :
यह पारदर्शी सीसे की दीवारों का बना झोपड़ीनुमा कमरा होता है। इसका प्रयोग ठंडे स्थानों पर गर्म मौसम के पौधे उगाने के लिए किया जाता है। जब सूर्य का प्रकाश इसकी दीवारों पर पड़ता है तो इसके अन्दर का तापमान बाहर की अपेक्षा अधिक हो जाता है। शीशे की दीवारें ताप का उत्सर्जन नहीं होने देती हैं।

प्रश्न 17.
ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाली दो गैसों तथा ग्रीनहाउस प्रभाव उत्पन्न करने वाली दो गैसों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाली दो गैसें :

  1. क्लोरीन
  2. फ्लोरीन।

ग्रीन हाउस गैसें :

  1. कार्बन डाई ऑक्साइड
  2. मीथेन।

प्रश्न 18.
ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि से क्या परिणाम होंगे?
उत्तर:
ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि होने से पृथ्वी के वातावरण का तापमान बढ़ जाएगा। जिससे पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तित होने का खतरा बढ़ जाएगा। बढ़े तापमान के कारण ग्लेशियरों और ध्रुवों की बर्फ पिघलने लगेगी, जिससे नदियाँ उफनने लगेंगी, बाढ़ आएगी, समुद्र-जल का स्तर बढ़ जाएगा, तूफान और चक्रवातों में वृद्धि होगी। कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ की स्थिति हो जाएगी।

प्रश्न 19.
हमारी प्राचीन परम्पराओं व रीति-रिवाजों में भी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व विकास हेतु गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। दो उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
प्राचीन भारतीय हिन्दू ग्रन्थ मत्स्य पुराण में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है, जो वृक्षों के प्रति हमारे आदर को बताता है। धर्म सिन्धु नामक ग्रन्थ में एक श्लोक है “हस्तान्द्वादश सत्यज्य मूत्रं कुयोज्जलाशयात्। अवकाशे षोडस वा पुरीषे तु चतुर्गुणम्।”

जिसका अर्थ है कि किसी जलाशय से बारह अथवा सोलह हाथ की दूरी पर मूत्र त्याग और उससे चार गुणा अधिक दूर पर मलत्याग करना चाहिए। ये उदाहरण हमारी प्राचीन परम्पराओं में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व विकास हेतु गहरी संवेदनशीलता व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 20.
धारणीय विकास की अवधारणा क्या है? समझाइए।
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable development) :
ब्रन्डटलैण्ड आयोग के अनुसार भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता न करते हुए वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता धारणीय विकास है। इसे सतत् विकास भी कहते हैं। इस मान्यता के अनुसार वर्तमान तथा भविष्य की आवश्यकता पूर्ण करने के लिए विकास जरूरी है किन्तु इसके लिए प्राकृतिक पर्यावरण की क्षमता के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। सारांशतः प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग कर आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा पर्यावरण की क्षमता को बनाए रखना धारणीय विकास है।

प्रश्न 21.
हमें पर्यावरणीय संसाधनों का मितव्ययतापूर्वक उपयोग करना चाहिए। इस कथन की उदाहरण देकर व्याख्या करें।
उत्तर:
हमें हमेशा यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि वस्तुओं को खरीदने से हमें उसके उपयोग का अधिकार तो मिलता है किन्तु उसे नष्ट करने तथा हानि पहुँचाने का अधिकार हमें नहीं है। उदाहरण के लिए, हम अन्न खरीदकर उसका उपयोग भोजन के लिए कर सकते हैं किन्तु उसको झूठा छोड़कर बर्बाद करने का अधिकार हमें नहीं है क्योंकि इससे दूसरे लोगों तथा जीवों की आवश्यकता प्रभावित होती है और प्रकृति पर अनावश्यक भार बढ़ता है।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक अन्तःक्रिया को समझाइए। पारितंत्र असन्तुलन क्यों उत्पन्न होता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पारिस्थितिकी जीवों का एक दूसरे के साथ तथा अपने आसपास के भौतिक पर्यावरण के साथ अन्तः क्रिया का अध्ययन है। हम जानते हैं कि पशु-पक्षी अपने आहार के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं व पूरे दिन सक्रिय रहते हैं। कुछ पशु शाकाहारी होते हैं, वे घास व अन्य शाकाहारी भोजन पाने के लिए एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं, इसी प्रकार मांसाहारी पशु अन्य जीवों के शिकार के लिए प्रयासरत रहते हैं। पारिस्थितिकी में एक स्वाभाविक संतुलन बना रहना आवश्यक है। हमारी पृथ्वी पर पाये जाने वाले सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी तथा विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ इत्यादि सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

पेड़-पौधे हमें भोजन, औषधि, सुरक्षा इत्यादि प्रदान करते हैं। पक्षी पेड़ों पर अपने घर भी बनाते हैं। इसी प्रकार पक्षी और पशुओं के मल के माध्यम से पेड़-पौधों के बीज एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलते हैं, जिससे नये पेड़-पौधे उगने में मदद मिलती है। शाकाहारी पशु-पक्षी, फल-फूल एवं वनस्पति को खाते हैं और मांसाहारी पशु-पक्षी अन्य पशु-पक्षियों को खाते हैं। अनुपयोगी लगने वाले कीड़े-मकोड़े भी व्यर्थ व निर्जीव वस्तुओं को खाकर, नष्ट करके पारिस्थितिक संतुलन को बनाये रखते हैं। इस तरह एक पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) का निर्माण होता है।

यह पारिस्थितिक तंत्र करोड़ों वर्षों के प्राकृतिक उद्विकास का परिणाम है। पारिस्थितिकी में एक समय में जीवों की एक सीमित संख्या ही आश्रित रहकर अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है। इस क्षमता को धारणी क्षमता कहते हैं। यह क्षमता प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती है। यदि पारिस्थितिकी में से किसी एक घटक को समाप्त कर दिया जाए अथवा कम या ज्यादा कर दिया जाए तो यह संतुलन बिगड़ने लगता है जिससे पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए संकट उत्पन्न हो सकता है। पृथ्वी पर केवल मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो पारितंत्र को अपनी क्रियाओं द्वारा असन्तुलित कर सकता है और कर भी रहा है।

प्रश्न 2.
जल प्रदूषण उत्पन्न करने वाले प्रमुख प्रदूषकों का वर्णन कीजिए। इसके दुष्प्रभाव बताएँ।
उत्तर:
जल प्रदूषण के लिए निम्नलिखित प्रदूषक जिम्मेदार हैं :

  • औद्योगिक प्रदूषक :
    ग्रीस, तेल, विविध अम्ल, उद्योगों से निकलने वाला दूषित पानी और अन्य तरल पदार्थ, रसायनयुक्त औद्योगिक अपशिष्ट जिसमें सीसा, जस्ता, पारा, क्रोमियम, प्लास्टिक, आदि, मिले होते हैं। ये उद्योगों से बहकर जलस्रोत व भूमिगत जल में मिलकर जल को प्रदूषित करते हैं।
  • घरेलू प्रदूषक :
    घरेलू गतिविधियाँ जैसे-नहाने, कपड़े धोने, साफ-सफाई इत्यादि में बड़ी मात्रा में जल का उपयोग होता है। उपयोग के पश्चात् इस जल में कास्टिक सोड़ा, भोजन के कण इत्यादि मिल जाते हैं, जिससे जल दूषित हो जाता है।
  • मल-मूत्र :
    घरेलू व सार्वजनिक शौचालयों व मूत्रालयों से निकलने वाला मलमूत्र बड़ी मात्रा में जल को प्रदूषित करता है। मलयुक्त जल को मलजल कहते हैं। हमारे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मलमूत्र की उचित निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्वच्छ जलस्रोतों में मिलकर जल को प्रदूषित करता है।
  • कृषि प्रदूषक :
    वर्तमान समय में कृषि कार्यों में अनेक प्रकार के उर्वरकों, कीटनाशकों एवं शाकाहारी रसायनों का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है। ये रसायन वर्षा जल के साथ बहकर जलस्रोतों में मिल जाते और जल को प्रदूषित करते हैं।
  • रेडियोसक्रिय प्रदूषक :
    विस्फोटक पदार्थों में विस्फोट से रेडियोसक्रिय पदार्थ पैदा होते हैं, जो जलस्रोतों में मिलकर जल को दूषित कर देते हैं।

जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
प्रदूषित जल के उपयोग से मानव एवं पशुओं के शरीर में अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं तथा इस जल से सिंचित फलों एवं सब्जियों के उपयोग से भी अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। प्रदूषित जल से जलीय पौधों व जलीय जन्तुओं पर भी संकट उत्पन्न हो जाता है। खाद्य श्रृंखला (food chain) भी प्रभावित हो जाती है।

प्रश्न 3.
भूमि प्रदूषण क्या है? प्रमुख भूमि प्रदूषकों तथा भूमि प्रदूषक के दुष्प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भूमि प्रदूषण (Land Pollution) :
वर्तमान समय में तेज गति से हो रहे औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण के कारण उत्पन्न होने वाला ठोस कचरा भूमि के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों को दूषित कर रहा है, जिससे भूमि की प्राकृतिक गुणवत्ता कम हो रही है, इसे भूमि प्रदूषण कहते हैं। दूसरे शब्दों में, अपशिष्ट पदार्थों के मिल जाने के कारण भूमि का उपयोगी न रहना, भूमि प्रदूषण कहलाता है। हमें ध्यान देना है कि पृथ्वी एक स्थिर इकाई होने के कारण इसमें तनिक भी वृद्धि होना सम्भव नहीं है। लगभग 80 प्रतिशत खाद्य पदार्थ हमें मृदा से ही प्राप्त होते हैं और कृषि योग्य भूमि अत्यन्त सीमित है। यह भूमि भी प्रदूषण के कारण अनुपयोगी होती जा रही है।

प्रमुख भूमि प्रदूषक निम्नलिखित हैं :

  1. कल-कारखानों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट।
  2. घरों का कचरा, पालीथीन की थैलियाँ, काँच की व्यर्थ वस्तुएँ, टिन, केन आदि।
  3. कृषि कार्यों में उपयोग में लाये गये रासायनिक उर्वरक व खाद।
  4. इलेक्ट्रोनिक अपशिष्ट व पुराने वाहनों का कबाड़।
  5. भवन निर्माण से बचे रेत बचे कंकड़, पत्थर, ईंट के टुकड़े व अन्य अवशेष।
  6. ऊर्जा केन्द्रों व कारखानों से निकलने वाली राख।
  7. मल-मूत्र, नगरपालिका का कचरा, अस्पतालों का जैविक कचरा आदि।
  8. परमाणु विस्फोटों से रेडियो सक्रिय पदार्थ पृथ्वी पर गिरते हैं और लम्बे समय तक भूमि को प्रदूषित करते रहते हैं।
  9. खनन क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट।

भूमि प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
मिट्टी की उर्वरता में कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होता है। फसलें प्रदूषित व जहरीली हो जाती हैं। मक्खी, मच्छर तथा बीमारी फैलाने वाले अन्य जीव तेजी से पनपने लगते हैं। रहने योग्य स्वच्छ स्थान सीमित हो जाते हैं। वातावरण दुर्गन्ध युक्त हो जाता है, जिससे घुटन होती है। दूषित भूमि के कारण जल प्रदूषण में वृद्धि होती है।

प्रश्न 4.
ध्वनि प्रदूषण क्या है? ध्वनि प्रदूषण के कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) :
हम ध्वनि के कारण ही सुन सकते हैं किन्तु जब तीव्रध्वनि हमारी शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं पर विपरीत प्रभाव डालने लगे तो वह शोर कहलाती है। अत्यधिक शोर तथा अवांछित ध्वनियों में मनुष्य तथा अन्य जीवों को परेशानियाँ होने लगती हैं तो यह ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। ध्वनि की तीव्रता को डेसीबल में नापा जाता है। 80 डेसीबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि इसके लिए नुकसानदायक होती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि 85 डेसीबल से अधिक तीव्र ध्वनि के प्रभाव में लम्बे समय तक रहने पर व्यक्ति बहरा हो सकता है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :

  • यातायात के साधन :
    सड़कों पर बढ़ते यातायात के साधनों के कारण उनके चलने पर होने वाला शोर तथा हार्न बजाने पर उत्पन्न होने वाला शोर ध्वनि प्रदूषण का बड़ा कारण है। विशेषतौर पर महानगरों में यह समस्या अत्यंत गंभीर है। इसी प्रकार रेलगाड़ियाँ भी ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाती हैं। सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ वर्तमान समय में हवाई यातायात का भी अत्यधिक विस्तार हो गया है, जिसके कारण विमानों से निकलने वाला शोर भी ध्वनि प्रदूषण को बढ़ा रहा है।
  • कल-कारखाने तथा मशीनें :
    नगरीकरण तथा औद्योगीकरण के कारण बड़े-बड़े उद्योगों तथा कल-कारखानों की संख्या बहुत बढ़ गई है, जिनसे उत्पन्न शोर ध्वनि प्रदूषण को बढ़ा रहा है। बड़े उद्योगों के अतिरिक्त शहरी क्षेत्रों में आरा मशीनें तथा अन्य मशीनें भी ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाती हैं।
  • मनोरंजन के साधन :
    मनोरंजन के विविध साधन जैसे सिनेमा, टेलीविजन, रेडियो तथा संगीत के अन्य माध्यमों के कारण भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। विविध कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर का उपयोग तथा पटाखों का बढ़ता प्रचलन भी ध्वनि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।

प्रश्न 5.
ओजोन परत के क्षरण के कारणों एवं इससे होने वाली हानियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ओजोन परतक्षय (Ozone Layer Depletion) :
ओजोन एक प्रकार की गैस है जो पृथ्वी के समतापमण्डल में पायी जाती है। यह ऑक्सीजन का ही एक रूप है। यह गैस पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव से पृथ्वी के चारों ओर एक मोटी परत के रूप में मौजूद है। यह गैस समताप मण्डल में ऑक्सीजन तथा सूर्य । की पराबैंगनी किरणों (Ultra voiloet rays) के क्रिया करने से बनती है तथा यह गैस पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करके पुनः ऑक्सीजन में बदल जाती है। इस प्रकार प्राकृतिक रूप से ओजोन गैस का संतुलन बना रहता है। ओजोन परत का सबसे महत्वपूर्ण कार्य सूर्य से पृथ्वी की ओर आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करना है।

ओजोन परत के कारण सूर्य से निकलने वाली 99% से भी अधिक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुँच पाती हैं और पृथ्वी पर उपस्थित जीवजगत इनके हानिकारक प्रभाव से बच जाता है। एक प्रकार से ओजोन परत पृथ्वी के रक्षा कवच या छाते का कार्य करती है। यदि पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर आने लगी तो जीवों के डी.एन.ए. और प्रोटीन इन किरणों को अवशोषित कर क्षतिग्रस्त हो जाएँगे जिससे त्वचा के कैंसर हो जाएँगे और असमय बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगेंगे। हमारी कोशिकाएँ नष्ट होने लगेंगी और आँखों में मोतियाबिन्द रोग हो सकता है।

ओजोन परत का क्षय होना अथवा ओजोन परत में छिद्र होने का अर्थ है कि ओजोन गैस का पर्याप्त मात्रा में न बनना और ओजोन के अणुओं का नष्ट होकर ओजोन परत का पतला होना। विशेष तौर पर एन्टार्कटिका क्षेत्र पर इसका प्रभाव देखा जा सकता है। एन्टार्कटिका के ऊपर प्रतिवर्ष अगस्त के उत्तरार्द्ध एवं अक्टूबर के प्रारम्भ में यह छिद्र बनता है। ओजोन परत में छोटे-छोटे छिद्र आस्ट्रेलिया, अर्जेण्टीना. चिली आदि में भी स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।

ओजोन परत में छिद्र अथवा ओजोन परत के क्षय का प्रमुख कारण हैलोजनित गैसें (Halogentated gases) हैं। इनमें क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) हेलन्स तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड प्रमुख हैं। क्लोरोफ्लोरो कार्बन यौगिक का प्रमुख उपयोग एयरकण्डीशनर तथा रेफ्रिजरेटरों में तथा पैकेजिंग उद्योग, डनलप के गद्दों, तकियों इत्यादि में किया जाता है, यह गंधनाशक (डियोडरन्ट) शेविंग क्रीम तथा हेयर स्प्रे में भी प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार जीवाश्म ईंधन जैसे पेट्रोलियम पदार्थ, कोयला व गैस के प्रयोग से बनने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड आदि भी ओजोन परत को क्षतिग्रस्त कर रही है।

प्रश्न 6.
ग्रीन हाउस प्रभाव एवं वैश्विक ऊष्णन को समझाते हुए बताइए कि यह आजकल एक बड़ी चिन्ता का विषय क्यों बन रहा है?
उत्तर:
ग्रीन हाउस प्रभाव एवं वैश्विक ऊष्णन (Green House Effect and Global Warming) पृथ्वी का वातावरण जिस प्रकार से सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करता है उसे ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण पृथ्वी की सतह व वायुमण्डल प्राकृतिक रूप से गर्म रहता है। पृथ्वी के चारों ओर ग्रीन हाउस गैसों-कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और क्लोरोफ्लोरो कार्बन की एक परत है। यह परत सूर्य की ऊर्जा को सोखकर पृथ्वी पर सभी दिशाओं में पहुँचाती है। ग्रीन हाउस प्रभाव के अभाव में पृथ्वी का तापमान-18 डिग्री हो सकता है। इतने तापमान पर अधिकांश जीवों का विकसित होना सम्भव नहीं होता।

पृथ्वी का वायुमण्डल काँच के एक घर की तरह काम करता है जो प्रकाश को अन्दर तो आने देता है लेकिन ताप को बाहर नहीं जाने देता है। सूर्य की ऊर्जा का कुछ भाग वायुमण्डलीय ग्रीन हाउस गैसों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। इन गैसों के अणु ऊष्मीय ऊर्जा को विकरित करते हैं और इसका अधिकांश भाग पृथ्वी की सतह पर लौट आता है। इससे पृथ्वी की सतह व निम्नतर वायुमण्डल गर्म रहता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से पृथ्वी का तापमान गर्म रखती है, किन्तु ग्रीन हाउस प्रभाव वर्तमान समय में इसलिए एक समस्या बन गया है क्योंकि ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होने से पृथ्वी का औसत तापमान भी बढ़ रहा है।

ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि का वर्तमान कारण इन गैसों को उत्सर्जित करने वाली गतिविधियों व पदार्थों के उपयोग में वृद्धि है। इसमें सबसे बड़ा कारण कोयला व पेट्रोलियम पदार्थों का उपयोग है, जिससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड व अन्य गैसें निकलती हैं। वनोन्मूलन ने इस समस्या को और अधिक बढ़ा दिया है।

ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि के कारण पृथ्वी का तापमान भी बढ़ रहा है, जिससे पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ रहा है तथा सूखा, अतिवृष्टि, हिमपात, समुद्री जलस्तर का बढ़ना, चक्रवात, तूफान, ग्लेशियर की बर्फ का पिघलना, फसलों के उत्पादन पर प्रभाव तथा असामान्य बारिश जैसी स्थिति विश्व के अलग-अलग हिस्सों में देखी जा रही है। वनस्पति और वन्य जीव भी प्रभावित हो रहे हैं। पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित हो रहा है।

प्रश्न 7.
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन, कृषि में सुधार तथा वर्षा जल संचयन की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन-ठोस अपशिष्टों में आमतौर पर प्लास्टिक, कागज, खाद्य अपशिष्ट, चमड़ा, वस्त्र, धातु के टुकड़े, काँच, रबड़ इत्यादि आते हैं, जिन्हें हम घरों, कार्यालयों आदि से कचरे के रूप में बाहर फेंक देते हैं। ये अपशिष्ट मक्खी, मच्छरों आदि के लिए प्रजनन स्थल बन जाते हैं और बरसात के कारण भूमिगत जल में भी प्रवेश कर जाते हैं।

हम ठोस अपशिष्टों को तीन भागों में बाँट सकते हैं :

  1. जैव निम्नीकरणीय (बायो डिग्रेडेबल) पदार्थ
  2. पुनः चक्रण योग्य पदार्थ
  3. जैव अनिम्नीकरण पदार्थ।

इनमें से जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ सर्वाधिक हानिकारक होते हैं और ये हमारे पर्यावरण के लिए खतरा साबित होते हैं। हमें ऐसे पदार्थों का उपयोग सीमित करना चाहिए तथा ऐसे अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण की अच्छी व्यवस्था करनी चाहिए।

कृषि में सुधार :
फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए आजकल अनेक प्रकार के रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक एवं शाकनाशकों का व्यापक प्रयोग किया जाता है। इन पदार्थों के अवशेष हमारे जलस्रोतों को प्रदूषित करके पर्यावरण को हानि पहुँचाते हैं। हमें अपनी कृषि पद्धतियों में सुधार लाने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें उर्वरकों और रासायनिक पदार्थों पर निर्भरता को कम करके जैविक खेती की पद्धतियाँ अपनानी चाहिए।

वर्षा जल संचयन ;
जल संसाधनों में अत्यधिक दोहन तथा पर्यावरण असन्तुलन के कारण वर्तमान समय में पेयजल संकट पैदा हो गया है। अनेक नदियाँ, तालाब एवं अन्य जलस्रोत जलविहीन हो रहे हैं। भूमिगत जल का स्तर लगातार कम हो रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए हमें वर्षा जल को संचय करने की आवश्यकता है। हमारे देश में वर्षा का अधिकांश जल नदियों में बहकर समुद्र में चला जाता है जो किसी उपयोग का नहीं रहता। हमें जल संकट से बचने के लिए वर्षा जल को तालाबों, झीलों, टैंकों आदि में संचित करना चाहिए तथा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाकर वर्षा-जल को भूमि के अन्दर पहुँचाना चाहिए।

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