RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 33 मानव में भ्रूणीय परिवर्धन

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Rajasthan Board RBSE Class 12 Biology Chapter 33 मानव में भ्रूणीय परिवर्धन

RBSE Class 12 Biology Chapter 33 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

RBSE Class 12 Biology Chapter 33 बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तूतक (Morula) अवस्था में कोशिका की संख्या कितनी होती है ?
(अ) 4
(ब) 8
(स) 16
(द) 32
उत्तर:
(स) 16

प्रश्न 2.
कोरकभवन के दौरान किस गुहा का निर्माण होता है ?
(अ) सक्रिय ध्रुव
(ब) अल्पक्रिय ध्रुव
(स) कोरकगुहा
(द) ऐम्निओटिक गुहा
उत्तर:
(स) कोरकगुहा

प्रश्न 3.
नेत्र के अधिकांश भाग का निर्माण किस जनन स्तर के द्वारा होता है ?
(अ) एक्टोडर्म
(ब) मीसोडर्म
(स) एण्डोडर्म
(द) उपरोक्त में से कोई भी नहीं
उत्तर:
(अ) एक्टोडर्म

प्रश्न 4.
वृक्क का निर्माण किस जनन स्तर के द्वारा होता है ?
(अ) एक्टोडर्म
(ब) मीसोडर्म
(स) एण्डोडर्म
(द) उपरोक्त में से कोई भी नहीं
उत्तर:
(ब) मीसोडर्म

प्रश्न 5.
मानव में भ्रूणीय अवस्था के दौरान प्रथम सप्ताह से कौन-सी क्रिया नहीं होती ?
(अ) रोपण क्रिया
(ब) कोरकग्रही का निर्माण
(स) तूतक का निर्माण
(द) आदि रेखा का निर्माण
उत्तर:
(द) आदि रेखा का निर्माण

प्रश्न 6.
मानव में भ्रूणीय विकास के समय हृदय का निर्माण कितने दिनों में पूर्ण हो जाता है ?
(अ) प्रथम सप्ताह
(ब) द्वितीय सप्ताह
(स) तृतीय से छठे सप्ताह
(द) सात से आठ सप्ताह
उत्तर:
(द) सात से आठ सप्ताह

RBSE Class 12 Biology Chapter 33 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भ्रूणोद्भवन क्या होता है ?
उत्तर:
युग्मनज (Zygote) में कोशिका विभाजन व कोशिकीय विभेदन से भ्रूणीय विकास को भ्रूणोद्भवन (Embryogenesis) कहते हैं।

प्रश्न 2.
विदलन के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है ?
उत्तर:
विदलन के दौरान समसूत्री कोशिका विभाजन होता है।

प्रश्न 3.
ब्लास्टोमीयर्स क्या होते हैं ?
उत्तर:
ब्लास्टोमीयर्स कोरकखण्ड होते हैं जिनका निर्माण चार बार के समसूत्री विभाजन द्वारा होता है।

प्रश्न 4.
मनुष्य तूतक में कितने ब्लास्टोमीयर्स होते हैं ?
उत्तर:
मनुष्य तूतक में 16 ब्लास्टोमीयर्स होते हैं।

प्रश्न 5.
मनुष्यों में ब्लास्टोपोर से क्या बनता है ?
उत्तर:
मनुष्यों में ब्लास्टोपोर से गुदा या मुख बनता है।

RBSE Class 12 Biology Chapter 33 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मनुष्य में कोरकपुट्टी का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर:
मनुष्य में कोरकपुट्टी का निर्माण गर्भाशयी तरल के तूतक में स्राव होने से पोषकोरके, आन्तरिक कोशिका समूह (Inner cell mass) से अलग हो जाती है। इससे एक गुहा का निर्माण होता है, जिसे कोरकगुहा (Blastocoel) कहते हैं। इसमें तरल भरा रहता है। जैसे-जैसे तरल की मात्रा बढ़ती है, गुहा का आकार बढ़ता जाता है तथा आन्तरिक कोशिका समूह भ्रूण के एक सिरे पर स्थित हो जाता है। पोषकोरक कोशिकाएँ भी अत्यन्त चपटी हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में ही कोरकपुट्टी (Blastocyst) का निर्माण होता है।

प्रश्न 2.
ब्लास्टूलाभवन एवं गैस्ट्रलाभवन में अन्तर बताइए।
उत्तर:
ब्लास्टूलाभवन (Blastulation)-कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होते रहने से मारूला के मध्य में कोरकगुहा या ब्लास्टोसील (Blastocoel) बन जाती है। इस दशा को ब्लास्टूला भवन कहते हैं।
गैस्ट्रलाभवन (Gastrulation)-ब्लास्टुला की भीतरी कोशिकाएँ पुनर्व्यवस्थित होकर तीन जनन स्तरों का निर्माण करती हैं। ये जनन स्तर हैं—

  • बाह्य जनन स्तर या एक्टोडर्म (Ectoderm),
  • मध्य जनन स्तर या मीसोडर्म (Mesoderm) एवं
  • अन्तः जनन स्तर या एण्डोडर्म (Endoderm)। वस्तुत: ब्लास्टुला से गैस्टुला बनने और भ्रूण की इस त्रिस्तरीय अवस्था को गैस्ट्रलाभवन कहते हैं।

RBSE Class 12 Biology Chapter 33 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कोरकपुट्टी का निर्माण मनुष्य में कब और कैसे होता हैं?
उत्तर:
मनुष्य में कोरकपुट्टी (Blastocyst) का निर्माण गर्भाशय में पहुँचने पर मॉरूला गर्भाशयी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित ग्लाइकोजन युक्त पोषक तरल पारदर्शी अण्डावरण (Zona Pellucida) के माध्यम से पोषण के रूप में प्राप्त करने लगता है। अब भ्रूण में मॉरूला के बाहरी कोशिकीय स्तर और भीतरी कोशिकीय पिण्ड के मध्य इस पोषक तरल के एकत्रित हो जाने से एक बड़ी-सी गुहा बन जाती है जिसे कोरकगुहा अथवा ब्लास्टोसील (Blastocoel) कहते हैं। इस अवस्था में भ्रूण को कोरक या ब्लास्टुला (Blastula) कहते हैं।

ब्लास्टुला अवस्था में भ्रूण एक गोल सिस्ट जैसा दिखायी देता है। इसलिए इसे कोरकपुट्टी या ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst) भी कहते हैं। कोरकपुट्टी या ब्लास्टोसिस्ट बनते-बनते भ्रूण का पारदर्शी अण्डावरण समाप्त हो जाता है एवं कोरकगुहा के दीवार की कोशिकाएँ चपटी हो जाती हैं। अब इनको ट्रोफोब्लास्ट (Trophoblast) कहा जाता है।

प्रश्न 2.
मनुष्यों में गैस्टूलाभवन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्यों में गैस्ट्रलाभवन–मनुष्यों में भ्रूण के रोपण के पश्चात् विभिन्न क्रियाओं के बाद भ्रूणीय विकास के क्रम में प्रमुख प्रक्रिया गैस्टूला भवन (Gastrulation) की होती है। गैस्ट्रलाभवन के समय भीतरी कोशिका पिण्ड से कुछ कोशिकाएँ भीतर की ओर अलग हो जाती हैं तथा समसूत्रण के द्वारा संख्या में बढ़ती जाती हैं और ट्रोफोब्लास्ट के बीच अन्त: जनन स्तर एण्डोर्डम (Endoderm) का निर्माण करती हैं। एण्डोडर्म के निर्मित होने के बाद शेष बचे हुए भीतरी कोशिका पिण्ड को भ्रूणीय डिस्क कहते हैं।

इस पिण्ड के पिछले हिस्से से कुछ कोशिकाएँ अलग होकर मध्य जनन स्तर अर्थात् मीसोडर्म (Mesoderm) का निर्माण करती हैं। अन्ततोगत्वा शेष बची हुई कोशिकाएँ बाह्य जनन स्तर अथवा एक्टोडर्म (Ectoderm) बनाती हैं। इस प्रकार गैस्ट्रलाभवन की क्रिया तीन प्राथमिक जनन स्तरों के निर्माण के रूप में सम्पन्न होती है।

प्रश्न 3.
सात महीने का जन्मा शिशु कैसे जीवित रह जाता है ? समझाइए।
उत्तर:
मानव में सगर्भता अवधि लगभग 9 माह होती है। इस अवधि के बाद जन्म लेने वाले शिशु सामान्य स्थितियों में स्वस्थ होते हैं। कभी-कभी शिशु समय से पहले अथवा 7 महीने में जन्म ले लेता है और जीवित रह जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भधारण के लगभग 6 माह बाद शिशु के सभी शारीरिक अंग विकसित हो चुके होते हैं तथा विकास की अवस्था जारी रहती है। 7वें माह में शिशु की त्वचा के नीचे भूरी वसा का निर्माण होता है जो जन्म के बाद ताप नियंत्रण का कार्य करता है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह ‘ताप नियंत्रण’ ही ऐसी दशा है। जो माता के गर्भ और बाह्य वातावरण के वांछित तापमान के बीच संतुलन स्थापित करता है। दूसरे शब्दों में, यदि शिशु की त्वचा के नीचे भूरी वसा का निर्माण न हुआ होता तो सम्भवतः शिशु का जीवित रहना सम्भव न होता।

उपर्युक्त के अतिरिक्त अन्य कारक भी होते हैं जो शिशु के जीवित रहने या न रहने के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। वस्तुत: नवीन चिकित्सा पद्धतियों ने समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों | को जीवित रखने में अत्यधिक सफलता अर्जित की है। चिकित्सक विभिन्न दवाओं एवं तकनीकों के द्वारा समय से पहले जन्में शिशु को जीवित रखने में सफल रहते हैं।

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