Virtual Memory Aur Demand Paging Kya Hai Hindi Me

हेलो स्टूडेंट्स, इस पोस्ट में हम आज Virtual Memory Aur Demand Paging Kya Hai Hindi Me के बारे में पढ़ेंगे | इंटरनेट में ऑपरेटिंग सिस्टम के नोट्स हिंदी में बहुत कम उपलब्ध है, लेकिन हम आपके लिए यह हिंदी में डिटेल्स नोट्स लाये है, जिससे आपको यह टॉपिक बहुत अच्छे से समझ आ जायेगा |

virtual memory हमारे सिस्टम को ऐसा बना देती है कि जो सिस्टम की फिजिकल मैमोरी होती है उससे कहीं अधिक हमें प्रतीत होती है. अर्थात virtual memory सिस्टम की physical memory को कहीं अधिक बड़ा बना देती है.

“एक प्रोग्राम के डेटा तथा निर्देशों को secondary memory में स्टोर करना तथा जब उनकी जरुरत पडती है तब उनको main memory में लोड करना.” virtual memory का बेसिक कांसेप्ट है.

दुसरे शब्दों में कहें तो “एक प्रोग्राम का वह हिस्सा जिसकी जरूरत जब कभी पडती है तो वह main memory में लोड हो जाता है तथा बाकी का शेष हिस्सा secondary memory में ही रहता है.”

virtual memory का प्रयोग यूजर के लिए उपलब्ध logical address space तथा वास्तविक physical memory को seperate करने के लिए किया जाता है.

सी.पी.यू. के द्वारा generate हुए address को logical address या virtual address कहते है. प्रोग्रामर्स virtual address का प्रयोग एप्लीकेशन में करते है. MMU(memory management unit) जो है वह virtual address को physical मेमोरी एड्रेस में बदलती है.

virtual memory का बड़ा फायदा यह है कि programmers बड़े प्रोग्राम को भी लिख(write) सकते है क्योंकि physical memory की तुलना में virtual memory बहुत large होती है.
image Fig:-चित्र में दिखाया गया है कि virtual मेमोरी फिजिकल मेमोरी से बड़ी होती है।

Demand paging in hindi: (डिमांड पेजिंग)

virtual memory को एक non-contiguos memory allocation तकनीक का प्रयोग करके implement किया जाता है जिसे Demand paging(डिमांड पेजिंग) कहते है. यह तकनीक paging की तरह ही समान है परन्तु इसमें swapping का प्रयोग किया जाता है. अर्थात् तब तक pages को secondary memory(हार्डडिस्क) से main memory(RAM) में लोड नही किया जाता है जब तक कि उनकी जरुरत नही पड़ जाती है.
image fig:-demand paging

सामन्यतया एक प्रोग्राम secondary memory में स्टोर रहता है. जब प्रोग्राम में उपस्थित page की आवश्यकता पडती है तो यह main memory में swap हो जाता है. इसे ही demand paging कहते है क्योंकि जब तक page की आवश्यकता नही पडती तब तक इसे लोड नही किया जाता है.

हम आशा करते है कि यह operating system के हिंदी में नोट्स आपकी स्टडी में उपयोगी साबित हुए होंगे | अगर आप लोगो को इससे रिलेटेड कोई भी किसी भी प्रकार का डॉउट हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूंछ सकते है | आप इन्हे अपने Classmates & Friends के साथ शेयर करे |

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