Sniffing क्या है?

हेलो स्टूडेंट्स, इस पोस्ट में हम आज Sniffing क्या है के बारे में पढ़ेंगे | इंटरनेट में नेटवर्क सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी के नोट्स हिंदी में बहुत कम उपलब्ध है, लेकिन हम आपके लिए यह हिंदी में डिटेल्स नोट्स लाये है, जिससे आपको यह टॉपिक बहुत अच्छे से समझ आ जायेगा |

Sniffing in Hindi

Sniffing एक प्रक्रिया है जिसमें उन सभी data packets को monitor और collect किया जाता है जो कि एक computer network से होकर गुजरते हैं. Sniffing की प्रक्रिया को करने के लिए packet sniffers का इस्तेमाल किया जाता है.

Packet sniffers का प्रयोग network administrator के द्वारा उनके network से होकर गुजरने वाले data traffic को track करने के लिए किया जाता है. इन्हें network protocol analyzers भी कहा जाता है.

जिस प्रकार sniffing का इस्तेमाल network administrator करते हैं उसी प्रकार attacker और hacker भी इसका इस्तेमाल data को collect और monitor करने के लिए करते हैं.

Hacker या attacker इसका इस्तेमाल करके data को collect कर सकते हैं और हमारी बहुत ही sensitive information को चुरा सकते हैं जैसे कि – password, credit card details, username आदि.

Attacker इन packet sniffers को हमारे computer में software या hardware के रूप में install कर देते हैं. आजकल बहुत सारें sniffing tools का प्रयोग किया जाता है जैसे कि – Wireshark, Ettercap, BetterCAP, Tcpdump, और WinDump आदि.

Sniffing का ज्यादातर प्रयोग hackers और attackers के द्वारा illegal तरीके से data को collect करने के लिए किया जाता है.”

sniffing in hindi
Packet sniffer structure

Types of Sniffing in Hindi

Sniffing दो प्रकार की होती हैं:-

  1. Active sniffing
  2. Passive sniffing

Active sniffing – इस प्रकार की sniffing में traffic को देखा जा सकता है और इसे बदला भी जा सकता है. इस sniffing को swicth के माध्यम से पूरा किया जाता है. Switch एक networking device है जिसका प्रयोग दो network devices को एक दूसरे से connect करने के लिए किया जाता है.

एक स्विच MAC address का प्रयोग destination ports को data ट्रांसमिट करने के लिए करता है. इसका फायदा attacker उठाते है और LAN में traffic को inject कर देते हैं.

Passive sniffing – इस प्रकार की sniffing में traffic को केवल देखा जा सकता है परंतु इसे बदला नहीं जा सकता. इस sniffing को hub के माध्यम से पूरा किया जाता है. इसमें attacker को केवल hub को LAN से connect करना होता है.

Hub का प्रयोग आजकल बहुत कम किया जाता है इसलिए passive sniffing एक बहुत पुरानी प्रक्रिया बन चुकी है. इसका इस्तेमाल अब ना के बराबर किया जाता है.

Sniffing attacks से कैसे बचें?

इससे बचने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाने चाहिए –

  1. हमें encryption का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे कि जो data हम receive और send करें वह encrypted हो.
  2. हमें केवल उन WI-FI networks का उपयोग करना चाहिए जो trusted हों. किसी unknown WI-FI से हमें connect नहीं करना चाहिए.
  3. किसी भी प्रकार की समस्या होने पर हमें अपने network को scan करना चाहिए.

इसे पढ़ें:- Spoofing क्या है?

Difference between Sniffing and Spoofing in Hindi

इनके मध्य अंतर निम्नलिखित हैं:-

SniffingSpoofing
इसमें attacker, traffic को packet sniffers के द्वारा monitor और collect करता है.इसमें attacker किसी दूसरे व्यक्ति के IP address का प्रयोग करता है जिसके वो अपने आप एक legitimate (वैध) user दिखा सके.
यह एक passive attack होता है जो कि system को किसी प्रकार का नुकसान नहीं करता है.यह एक active attack होता है जो कि system में खतरनाक malicious programs को insert कर सकता है.
sniffing को रोकने के लिए के लिए encryption सबसे अच्छा तरीका है.spoofing को रोकने के लिए digital signature सबसे बेहतर तरीका है.

हम आशा करते है कि यह Network Security & Cryptography के हिंदी में नोट्स आपकी स्टडी में उपयोगी साबित हुए होंगे | अगर आप लोगो को इससे रिलेटेड कोई भी किसी भी प्रकार का डॉउट हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूंछ सकते है | आप इन्हे अपने Classmates & Friends के साथ शेयर करे |

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