RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता

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BoardRBSE
TextbookSIERT, Rajasthan
ClassClass 9
SubjectScience
ChapterChapter 7
Chapter Nameजैव विविधता
Number of Questions Solved78
CategoryRBSE Solutions

Rajasthan Board RBSE Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सबसे अधिक विकसित पादपों का प्रभाग है–
(अ) ब्रायोफाइटा
(ब) आवृतबीजी
(स) अनावृतबीजी
(द) थैलोफाइटा
उत्तर:
(ब) आवृतबीजी

प्रश्न 2.
निम्न में से बीजों का जरायुज अंकुरण किन पादपों में पाया जाता है ?
(अ) जलोभिद
(ब) समोभिद
(स) शुष्कोभिद
(द) लवणमृदोभिद।
उत्तर:
(द) लवणमृदोभिद।

प्रश्न 3.
पत्तियों में गर्तीरन्ध्र पाया जाना अनुकूलन है
(अ) मरुभिद
(ब) लवणमृदौभिद
(स) जरलोभिद
(द) समोभिद
उत्तर:
(अ) मरुभिद

प्रश्न 4.
किस पादप वर्ग के पादप संवहनी क्रिप्टोगैम्स कहलाते
(अ) टेरिडोफाइटा
(ब) ब्रायोफाइटा
(स) अनावृतबीजी
(द) कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) टेरिडोफाइटा

प्रश्न 5.
आर्थोपोडा संघ का जन्तु है
(अ) जोंक
(च) फीताकृमि
(स) घरेलू मक्खी
(द) तारा मछली
उत्तर:
(स) घरेलू मक्खी  

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6.
दिनाम पद्धति के जनक का नाम लिखिए।
उत्तर:
कैरोलस लीनियस।

प्रश्न 7.
मेंढक किस जन्तु वर्ग का जन्तु है ?
उत्तर:
एम्फीबिया बर्ग का।

प्रश्न 8.
अनुकूलन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जीव के ऐसे आकारिकी, शारीरिक, कार्यिकीय या व्यवहारगत गुण जो उसे किसी पर्यावरण विशेष में सफलतापूर्वक जीवनयापन करने व प्रजनन करने में सक्षम बनाते हैं, अनुकूलन कहलाते हैं, जैसे-पक्षियों में अग्रपादों का परों (Wings) में रूपान्तरण।

प्रश्न 9.
पंच जगत अवधारणा का प्रतिपादन किसने किया था ?
उत्तर:
राबर्ट व्हिटेकर ने।

प्रश्न 10.
नील हरित शैवाल (साइनोबैक्टीरिया) किस प्रभाग का सदस्य है ?
उत्तर:
जगत मोनेरा (Monera) का।

प्रश्न 11.
लाइकेन क्या है ?
उत्तर:
लाइकेन सहजीविता व परोपकारिता (Symbiosis and Mutualism) प्रदर्शित करने वाले विशिष्ट प्रकार के पादप समान जीव हैं जिनमें शरीर एक नील हरित शैवाल व एक कवक से मिलकर बना होता है।

प्रश्न 12.
अनावृतबीजी पादपों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • चीड़ या पाइनस (Pinus 5pp.)
  • साइकस (Cycas spp)

प्रश्न 13.
ऐसे जन्तु का नाम लिखिए जिसमें श्वसन, क्लोम, फेफड़ों व त्वचा तीनों द्वारा होता है।
उत्तर:
मेंढक की लारवा अवस्था में श्वसन क्लोम द्वारा तथा वयस्क अवस्था में त्वचा व फेफड़ों द्वारा होता है।

प्रश्न 14.
ऐसे स्तनधारी का नाम लिखिए जो अण्डे देता है।
उत्तर:

  • इकबिल्ड प्लेटोपस या एकिङना (Echidna)
  • स्पाइन एंटईटर (Spiny ant eater)

प्रश्न 15.
मैंग्रोव वनस्पति किस आवास में पाई जाती है ?
उत्तर:
दलदली लवणमृदोभिद आवास में।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1,
लवणमूदोभिद पादपों में पायी जाने वाली दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इनमें निम्न विशेषताएँ पाई जाती हैं

  1. श्वसन मूल-दलदलयुक्त मृदा में ऑक्सीजन का अभाव होता है। अत: वायुमण्डल से ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए इनकी जड़ों की कुछ शाखाएँ भूमि से ऊपर निकल आती हैं। इन ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती (Negatively geotropic) जड़ों पर सूक्ष्म रन्ध्र पाये जाते हैं जिनके द्वारा यह ऑक्सीजन ग्रहण कर मूल तन्त्र की ऑक्सीजन की कमी को पूरा करती है। इन्हें श्वसन मूल या न्यूमेटोफोर (Pneumatophore) कहा जाता है।
  2. जरायुजता (Vivipary)-अधिकांश मैंग्रोव पादपों में बीजों का अंकुरण फलों के अन्दर ही हो जाता है। इससे नवोद्भिद जमीन पर सीधे गिरकर मूलांकुर को आसानी से दलदल में स्थापित करा देता है। बीजों का फल में (जब वह वृक्ष से लगा हो) अंकुरण जरायुजता कहलाता हैं।

प्रश्न 2.
जलीय जन्तुओं में पाये जाने वाले अनुकूलन लिखिए।
उत्तर:
जलीय जन्तुओं के अनुकूलन (Adaptations of Aquatic Animals) शारीरिक व आकारिकीय अनुकूलन–

  1. जलीय जन्तुओं का शरीर धारारेखीय (stream lined) (अर्थात् आगे से सँकरा या नाव के आकार का होता है जिससे यह जल में आसानी से तैर लेते हैं। पूँछ दिशा बदलने में मदद करती है।
  2. इन जन्तुओं में तैरने में सहायता के लिए फिन (fin) जैसे मछली में, या फ्लिपर (flipper) जैसे व्हेल में पाये जाते हैं। मेंढक के पश्च पाद व बत्तख के पैर जालीदार (Webbed) होते हैं।
  3. श्वसन के लिए गलफड़े (gills) पाये जाते हैं।
  4. गर्दन अनुपस्थित होती है। कुछ के शरीर में स्विम ब्लैडर (Swirm bladder) होता है।
  5. शरीर को जल से बचाने के लिए सतह पर शल्क (Scales) व मोम जैसे पदार्थ पाये जाते हैं। कार्यिकीय अनुकूलन
  6. स्वच्छ जलीय जीवों के शरीर में प्रवेश पा गये अतिरिक्त जल को शरीर से बाहर निकालने हेतु अति तनु (dilute) मूत्र का विसर्जन, जल का मुख से प्रवेश कर गिल्स से बाहर निकालने की व्यवस्था होती है।
  7. समुद्री आवास (लवणीय जल) में पाये जाने वाले जन्तुओं में शरीर से अतिरिक्त लवणों को बाहर निकालने के लिए लवण उत्सर्जक ग्रन्थियाँ (Salt excretory glands) पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
शीत आवास की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
शीत प्रदेशों जैसे ध्रुवों व बर्फीली भूमि आदि की निम्न पारिस्थितिक विशेषताएँ होती हैं
(a) अत्यधिक कम तापमान।
(b) तरल जल की कमी व तेज बर्फीली शुष्क हवाएँ। यहाँ पाये जाने वाले पादप शीतौभिद कहलाते हैं जो बर्फ के पिघलने पर उगते हैं तथा अल्प अवधि में अपना जीवन चक्र पूरा कर लेते हैं। यहाँ पाये जाने वाले जन्तु प्राय: आकार में बड़े, हल्के या सफेद रंग के होते हैं तथा इनकी त्वचा पर घने बाल पाये जाते हैं।

प्रश्न 4.
स्तनधारी वर्ग के जन्तुओं के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
स्तनधारी वर्ग (Class Marmirmalia) के जन्तुओं के लक्षण-

  • शिशु के पोषण के लिए मादी में स्तनों (Mammary glands) का पाया जाना इस वर्ग का सर्वप्रमुख लक्षण है।
  • शरीर पर बालों का पाया जाना।
  • बाह्य कर्ण (external car) या पिन्ना (pinna) का पाया जाना।
  • हृदय चार कोष्ठीय, समतापी मुख्यत: सजीव प्रजक (Viviparous) जन्तु कुछ अपवाद हैं, जैसे- एकिडनी अण्डे देता है, जबकि कंगारू अल्पविकसित शिशुओं को जन्म देते

प्रश्न 5.
आर्थोपोडा संघ के जन्तुओं के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
आर्थोपोडा संघ (Phylum Arthropoda) के जन्तुओं के लक्षण-

  • शरीर पर संधित या जोड़ वाले पाद (jointed legs) पाये जाते हैं। उपांग भी संधित होते हैं।
  • शरीर पर काइटिन का बना बाह्य कवच (exoskeleton) पाया जाता है।
  • शरीर में रुधिर से भरी देहगुहा या होमौसील (haermocoel) पायी जाती है। खुला परिसंचरण तंत्र (open circulatory System) होता है।
  • द्विपाश्र्व सममित, त्रिकोरकी प्राणी हैं। जगत का सबसे बड़ा संघ है। उदाहरण- मक्खी, मच्छर, झगा, कॉकरोच, टिड्डुवा, बिच्छू।

प्रश्न 6,
अनावृतबीजी पादपों में कवक मूल व प्रवाल मूल का कार्य बताइए।
उत्तर:
अनावृतबीजी पादपों में कवक मूल-कुछ अनावृतबीजी पादपों, जैसे- पाइनस की जड़े कुछ विशिष्ट कवक तन्तुओं के साथ सहजीवी (Symbiotic) सम्बन्ध बनाती है जिन्हें कवकमूल कहते हैं। इस सम्बन्ध से दोनों ही भागीदार लाभान्वित होते हैं। कवक तन्तु कम ताप पर भी जल व खनिज लवणों विशेष रूप से फॉस्फोरस अवशोधित करने में सक्षम होते हैं। ये जल व खनिज लवण पाइनस की जड़ तक पहुँचा देते हैं जो यह काम करने में असमर्थ होती हैं। कवक तन्तु जड़ के चारों ओर लिपटकर एक सुरक्षात्मक आवरण भी बनाते हैं जो पाइनस की रोगकारी जीवों से रक्षा करता है। बदले में कवक तन्तु पाइनस को जड़ से कार्बनिक भोज्य पदार्थ प्राप्त करते हैं। प्रवाल मूल साइकस की जड़ व नील-हरित शैवाल एनाबीना (Arnabarna) के बीच का सहजीवी सम्बन्ध हैं। एनाबीना यातावरणीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (fixation) कर साइकस के पादप को देता है। बदले में साइकस, एनाबीना को सुरक्षित स्थान, जल व कुछ खनिज प्रदान करता है। ये जड़े प्रवाल रूपी (coral like) होने के कारण कॉरलाइड जड़ कहलाती हैं व ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होती हैं।

प्रश्न 7.
लाइकेन में सहजीविता को समझाइए।
उत्तर:
लाइकेन (Lichen)-लाइकेन विशिष्ट प्रकार के पादप हैं जो एक शैवाल अर्थात् एल्गा (alga) व एक फंगस के बीच के सहजीवी सम्बन्ध (mutualistic relation) से निर्मित होते हैं। इसमें शैवाल प्रकाश संश्लेषी होता है व सूर्य के प्रकाश में कार्बनिक खाद्य पदार्थों का निर्माण करता है जिसको फंगस भागीदार द्वारा भी साझा किया जाता है। फंगस जल व खनिज लवणों का अवशोषण कर शैवाल को उपलब्ध कराता है। फंगस शैवाल का सुरक्षात्मक आवरण भी बनाता हैं तथा प्रजनन में भी मदद करता है। कुछ लाइन में यह सम्बन्ध इतने प्रगाढ़ होते हैं कि दोनों साझीदारों को अलग कर देने पर दोनों ही जीवित नहीं रह पाते।

प्रश्न 8.
टेरिडोफाइटा वर्ग के पादपों को संवहनी क्रिप्टोगैम्स क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
टेरिडोफाइटा समूह के पौधों में वास्तविक जड़, तना व पत्तियाँ पायी जाती हैं। इनमें संवहन ऊतक जाइलम व फ्लोएम भी पाया जाता है। अत: यह संवहनी पादप (vascular plants) हैं। लेकिन इन पादपों में निम्न वर्ग के पादपों जैसे थैलोफाइटा व ब्रायोफाइटा की तरह जनन अंग छिपे हुए व अस्पष्ट होते हैं। अत: इन्हें थैलोफाइटा व ब्रायोफाइटा के साथ क्रिप्टोगैस (Cryptogarms) पादपों में रखा गया है। इस प्रकार टेरिडोफाइटा वर्ग के पादप संवहनी क्रिप्टोगैम्स हैं।

प्रश्न 9,
मरुभिद पादपों में पाये जाने वाले अनुकूलनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मरुद्भिद (Xerophyte) पादप शुष्क परिस्थितियों अर्थात् जल की कमी वाले स्थानों में पाये जाने वाले पादप हैं। इनमें निम्न अनुकूलन पाये जाते हैं
(a) आकारिकीय अनुकूलन (Morphological Adaptations)

  • जड़ तन्त्र सुविकसित व गहरा होता है ताकि गहराई से पानी अवशोषित किया जा सके। नागफनी जैसे मरुभदौ पौधों में कम बारिश के पानी को भी पूर्णत: अवशोधित करने के लिए जड़े भूमि की सतह के ठीक नीचे फैली रहती हैं।
  • वाष्पोत्सर्जन कम करने हेतु पत्तियाँ या तो बहुत छोटी, काँटों (Spines) में रूपान्तरित या अनुपस्थित होती हैं।
  • तना चपरा, हरा होकर प्रकाश संश्लेषण का कार्य करता है। यह माँसल (Succulent) होकर जल का संचय करता है।

(b) शारीरिकीय अनुकूलन (Anatomical Adaptations)

  • पत्तियों पर क्यूटीकिल की मोटी पर्त पायी जाती है ताकि वाष्पोत्सर्जन को कम किया जा सके।
  • वाष्पोत्सर्जन कम करने के लिए पर्णरन्ध्र गर्ती (Sunkert stomata) प्रकार के होते हैं।
  • वाष्पोत्सर्जन कम करने के लिए पत्तियों व तने पर रोम पाये जाते हैं।
  • यान्त्रिक ऊतक अधिक विकसित होते हैं।
  • कार्यिकीय अनुकू लन–
  • मरुभिदी पादपों की कोशिकाओं में परासरण सान्द्रता (0smotic concentration) अधिक होती है।
  • पुष्प रात्रि में खिलते हैं ताकि जल हानि को रोका जा सके।

प्रश्न 10.
मृतजीवी किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मृतजीवी (Saprotrophi)- मृतजीवी वह जीव हैं जो सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों, जैसे- कृषि अपशिष्ट, गोबर आदि से अपना पोषण प्राप्त करते हैं, जैसे- फेजाई। ये जीव विषमपोषी व अवशोषी (Heterotrophic absorptive) प्रकार का पोषण प्रदर्शित करते हैं। ये जीव अपने शरीर से अपने उगने के स्थान में एन्जाइम मुक्त करते हैं। ये बाह्य कोशिकीय एन्जाइम जटिल कार्बनिक पदार्थ का पाचन कर देते हैं। पाचन से बने सरल, जल में विलेय व ओटै अणु फंगस द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। इसीलिए ये विषमपौघी व अवशोषी कहे जाते हैं। मशरूम व यीस्ट मृतजीवी जीव हैं।

प्रश्न 11.
ब्रायोफाइटा व टेरिडोफाइटा वर्ग के पादपों में दो समानताएँ बताइए।
उत्तर:
ब्रायोफाइटा व टेरिडोफाइटा में समानताएँ-

  1. दोनों वर्ग के पादपों में निषेचन के लिए बाह्य जल आवश्यक होता है। अत: दोनों को ही पादप जगत के उभयचर (amphibians of the plant world) की श्रेणी में रखा जाता है।
  2. दोनों ही क्रिप्टोगैम्स (Cryptogams) समूह के पादप हैं अर्थात् दोनों में अन्न अंग छिपे व अस्पष्ट होते हैं। दोनों ही वर्ग के पादपों में पुंधानी व स्त्रीधानी का विकास होता है जो रचना में समानता प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 12.
एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री पादप किसे कहते हैं ?
उत्तर:
एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री पादप पुष्पीय पादपों या आवृतबीजी पादपों (Angiosperms) के दो प्रमुख समूह हैं। एकबीजपत्रीं पादपों के बीज में एक बीजपत्र (Cotyledon) पाया जाता है तथा खाद्य पदार्थ भुणपोष (endosperm) में जमा होता हैं। द्विबीजपत्री पादपों (Dicotyledons) के बीजों में दो बीजपत्र पाये जाते हैं जो प्राय: भोजन संचय का कार्य करते हैं।

प्रश्न 13.
पृष्ठवंशी व अपृष्ठवंशी जन्तुओं में दो अन्तर बताइए।
उत्तर:
पृष्ठवंशी व अपृष्ठवंशी जन्तुओं में अन्तर
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 1

प्रश्न 14,
लवणमृदोभिद पादपों में न्यूमेटोफोर का क्या कार्य है ?
उत्तर:
लवण मृदोद्भिद पादप ऐसी लवण युक्त दलदली जमीन में पाये जाते हैं जहाँ ऑक्सीजन की कमी होती हैं। अत: उनके मूल तन्त्र (root system) को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऑक्सीजन की कमी की भरपाई के लिए उनकी कुछ जड़ें ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती (Negatively peopironic) होकर खैट की तरह जमीन से बाहर निकल आती हैं। इन जड़ों पर छेटे-लेटे छिद्र पाये जाते हैं जिनकी मदद से यह ऑक्सीजन ग्रहण करती हैं। इन्हीं जड़ों को श्वसन मूल (respiratory roots) या न्यूमेटोफोर (Pneumatophore) कहा जाता है। ये मैग्नीव पादपों (Mangrove plants) जैसे राइजोफोरा आदि में पाई जाती हैं।

प्रश्न 15.
सिंघाड़ा में स्वांगीकारी जड़ का क्या कार्य है ?
उत्तर:
सिंघाड़ा (Trapa) एक जलीय पौधा है। इसकी जड़े क्लोरोफिल निर्माण हो जाने के कारण हरे रंग की हो जाती हैं। व प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाने अथवा स्यांगीकरण का कार्य करती हैं। यह जड़ों का एक प्रकार का रूपान्तरण हैं। इन्हीं जड़ों को स्वांगीकारी जड़ें (Assimilatory roots) कहा जाता है।

प्रश्न 16.
नभचर जन्तुओं के अनुकूलन बताइए।
उत्तर:
नभचर जन्तु आकाशीय जीवन (Aerial node of life) के लिए अनुकूलित होते हैं। इनके शरीर में उड़ने में मदद करने हेतु व जल की कमी से जूझने सहित कई प्रकार के निम्न अनुकूलन होते हैं

  • पक्षियों को उड़ने में मदद करने के लिए अप्रपाद (forelimbs) पंखों (wings) में रूपान्तरित हो जाते हैं।
  • शरीर नौकाकार या धारारेखित (Strearnlined) होता है। ताकि वायु का प्रतिरोध कम हो।
  • शरीर को हल्का बनाने के लिए शरीर परों (feathers) से ढका होता है (जिनके बीच में हवा भरी होने के कारण शरीर हल्का हो जाता है)।

निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
आवास के आधार पर पादपों का वर्गीकरण कर प्रत्येक आवास के पादपों में पाये जाने वाले अनुकूलन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आवासों में भिन्नता का आधार वहाँ उपलब्ध जल की मात्रा में तापमान होता है। अर्थात् जल व तापमान (water and temperature) के आधार पर विभिन्न आवास भिन्न-भिन्न रूप ले लेते हैं। पादपों को तापमान, जल की उपलब्धता व आवश्यकता के आधार पर अग्र प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है

  • जलौभिद् या जलीय पौधे (Hydrophytes)।
  • मरुद्भ द् या मरुभूमि या शुष्क थान के पौधे (Xerophytes)।
  • समोभिद् या जल की अनुकूलतम उपलब्धता वाले पौधे (Mesophytes)।
  • शीतोभिद् या कम ताप में पाये जाने वाले पौधे (Cryophyte)।
  • लवणमृदोभिद् या अधिक लवण सान्द्रता के पौधे (Halosphytes)।

विभिन्न प्रकार के पादपों के अनुकूलन
1. जलोभिद् (Hydrophytes)

  • मूल तन्त्र अल्पविकसित या कुछ में अनुपस्थित जल का अवशोषण पादप सतह द्वारा होता है।
  • इन पादपों में विशिष्ट प्रकार का मृदूतक पाया जाता है। जिसे एरेनकाइमा (Aerenchyma) कहते हैं। इसमें उत्प्लावकता (buoyancy) बढ़ाने के लिए वायु प्रकोष्ठ (air chambers) पाये जाते हैं।
  • यान्त्रिक ऊतक अल्प-विकसित होता है। मूलरोम अनुपस्थित होते हैं।
  • पत्तियाँ निमग्न (Submerged) पादपों में कटी-फटी व तैरने वालों में चौड़ी होती हैं।
  • पतियत पर मोम का सुरक्षात्मक आवरण पाया जाता है।
  • कछ पौधों जैसे सिघाड़ा में स्वांगीकारी जड़ें (assimilatory roots) व कुछ में उत्प्लावी जड़ें (floating roots) पायी जाती हैं, जैसे जूसिया में।
  • जल परागण, जल द्वारा बीज का प्रकोर्णन अन्य विशेषताएँ हैं।

2. मरुभिद् (Xerophytes),

  • मूल तन्त्र सुविकसित व अधिक गहरा होता है।
  • वाष्पोत्सर्जन को कम करने के लिए पत्तियाँ या तो झेटी होती हैं या काँटों (Spirnes) में परिवर्तित हो जाती हैं। कुछ में पत्तियाँ अनुपस्थित होती हैं या शीघ्र गिर जाती हैं।
  • पत्तियों पर रोम अथवा क्यूटिकिल (cuticle) की मोटी पर्त पायी जाती है। पर्णरन्ध्र गर्ती (Sunken stormata) होते हैं। ताकि वाष्पोत्सर्जन कम हो।
  • कुछ मरुभि में तना हुरा व माँसल (Succulent) होता है व जल का संचय करता है।
  • नागफनी (Opuntia) में जड़े वर्षा के पानी की प्रत्येक बूंद को अवशोषित करने के लिए भूमि की सतह के ठीक नीचे फैली रहती हैं।

3. लवणमृदोभिद्(Halophytes) लवणयुक्त मृदा व दलदली भूमि में उगने वाले पादप लवणमृदोभिद् (llalophytes) कहलाते हैं। समुद्र की दलदली भूमि में उगने वाली वनस्पति मैंग्रोव (Mangrove) वनस्पति कहलाती है।

  • इनमें श्वसन मूल या न्यूमेटोफोर (pneumatophore) पायी जाती है जो ऑक्सीजन की कमी को पूरा करती है।
  • इनमें बीज का अंकुरण फल के अन्दर ही (जब फल पेड़ पर लगा हो) हो जाता है इसे जरायुजी अंकुरण (viviparous germination) कहते हैं।
  • इनमें दलदली भूमि में तने को गिरने से बचने के लिए स्तम्भ मूल (Stilt roots) पायी जाती हैं।

4. YIGIT (Cryophytes)

  • यह इब्रेटे आकार के पादप, जैसे-लाइकेन, मॉस, शाक बर्फ पिघलने पर उगते हैं और अल्प अवधि में अपना जीवन पूरा कर लेते हैं।
  • बर्फ के पिघलने पर पुष्पन के समय केवल पुष्प बर्फ से बाहर निकले रहते हैं।
  • शरीर की कोशिकाएँ कम ताप सहने को अनुकूलित होती

5. संमोभिद् (Mesophytes) यह सामान्य ताप व अनुकूलन जल की उपलब्धता में पाये जाने वाले पादप हैं, जैसे-सरसों, गुलाब, आम आदि। जड़ पर मूल गोप (root cap) पाया जाता है। पत्तियाँ सामान्य होती हैं। पत्तियों की दोनों सतहों पर रन्ध्र पाये जाते हैं।

प्रश्न 2.
द्विनाम पद्धति के अनुसार जीवों के नामकरण के नियम लिखिए।
उत्तर:
द्विनाम पद्धति (Binomial Systerm of Mornenclature) -नामकरण को द्विनाम पद्धति के निम्न प्रमुख नियम हैं

  1. प्रत्येक जीव (जन्तु, पादप, जीवाणु) का वैज्ञानिक नाम दो भागों से मिलकर बना होता हैं। पहला नाम या भाग जीव के वंश नाम (Generic: name) का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरा भाग जीव का प्रजाति नाम (Specific narme) होता है। जैसे बाघ (tiger) का जन्तु वैज्ञानिक नाम पेंथरा टाइग्निस (Purn/hra irrls) हैं। इसमें पैंथरा बाप के वंश का नाम तथा टाइग्निस उसकी प्रजाति का नाम हैं। शेर (Lion) का वैज्ञानिक नाम पैंथरा लिओ (Paniheru leo) है। स्पष्ट है वाघ व शेर का वंश (genus) एक ही है।
  2. वंश का नाम हमेशा अंग्रेजी के बड़े अक्षर (Capital letter) से प्रारम्भ किया जाता है। प्रजाति का नाम छोटे अक्षर (Small letter) से शुरू होता है, जैसे- आम का नाम Mangifera indica
  3. अंग्रेजी में इनको तिरछे अक्षरों (italics) में टाइप किया जाता है। हाथ से लिखने पर इनके नीचे लहरदार लाइन बना दी जाती है।
  4. जिस वैज्ञानिक ने उस जीव का नामकरण किया हो उसके नाम का पहला अक्षर नाम के बाद कैपीटल में लिखा जाता है। जैसे मनुष्य का वैज्ञानिक नाम लीनियस ने दिया है। तो मनुष्य का नाम निम्न प्रकार लिखा जायेगा। होमो सेपियन्स (Homo sapiens L.)

प्रश्न 3.
जलीय आवास व मरुस्थलीय आवास में पाये जाने वाले जन्तुओं की विशेषताएँ व उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

(A) जलीय आवास (Aquatic Habitat) वाले जन्तुओं की विशेषताएँ-जलीय आवास अनवणीय जल (fresh Water) व लवणीय जल (rriarine water) दोनों प्रकार का हो सकता है। अत: इस प्रकार के जन्तु ओं में अलग-अलग प्रकार की विशेषताएँ पायी जाती हैं। कुछ विशेषताएँ सभी प्रकार के जलीय जन्तुओं में समान होती हैं, जैसे-

  • शरीर का आकार धारखित (Stream lined) होना ताकि जल के कम अवरोध का सामना हो व तैरने में आसानी हो।
  • शरीर पर शल्क अथवा मोमीय पदार्थ (Waxy Substance) की उपस्थिति जिससे शरीर के अन्दर की ओर अथवा शरीर से बाहर की ओर जल की गति को रोका जा
  • तैरने के लिए फिन (fins), फ्लिपर (lipper), जालदार पैर (Webbed feet) व पूँछ की उपस्थिति।
  • श्वसने के लिए गलफड़े (pills) की उपस्थिति ताकि जल में घुलित ऑक्सीजन का प्रयोग किया जा सके।
  • तैरने में बाधक गर्दन की अनुपस्थिति। समुद्री जल में पाये जाने वाले जीवों में शरीर से अतिरिक्त लवणों को निकालने के लिए लवण उत्सर्जक ग्रन्थियाँ (salt excretory glands) पायी जाती हैं। अलवणीय जल की मछलियों में उत्प्लावकता बढ़ाने के लिए शरीर में वायु से भरा स्विम ब्लैडर (Swim bladder) पाया जाता है। मेंढक जैसे उभयचरों में त्वचीय व फुफ्फुसीय श्वसन होता है।

उदाहरण-मछली, मेंढक, समुद्री कछुआ आदि।

(B) मरुस्थलीय आवास (Xeric Habitat) वाले जन्तुओं की विशेषताएँ-मरुस्थलीय अर्थात् शुष्क क्षेत्रों में पाये जाने वाले जन्तुओं को जल के संरक्षण हेतु अनुकूलित होना पड़ता हैं। मरुक्षेत्र पर तापमान बहुत अधिक या बहुत कम हो सकता है। इन जन्तुओं में निम्न अनुकूलन पाये जाते हैं

  • जल के संरक्षण के लिए ये अत्यधिक सान्द्र व गाढ़े मूत्र व मल का उत्सर्जन करते हैं।
  • शरीर पर स्वेद ग्रन्थियाँ (Sweat glands) या तो-अनुपस्थित होती हैं या अल्प-विकसित होती हैं।
  • कंगारू चूहा खाद्य पदार्थों से ही जल की प्राप्ति करता है तथा शरीर में इसी को उपापचय क्रियाओं से जलवाष्प प्राप्त करता है।
  • ऊँट अपने कूबड़ में जमी वसा के ऑक्सीकरण से जल की अनुप्लब्धता के दिनों में जल प्राप्त करता है। (ऊँट के शरीर में जल का भण्डारण नहीं होता)
  • ऊँट एक बार में बहुत अधिक पानी पी लेता है।
  • कुछ जन्तुओं जैसे मोलाक की त्वचा में पानी प्राप्त करने के लिए आर्द्रताग्राहीं ग्रन्थियाँ होती हैं।
  • ऊँट में भूमि की गर्मी से बचने के लिए 7 लम्बे व रेत में चलने के लिए गद्दीदार व नीचे से चपटे होते हैं। नासाछिद्र रेत कणों से बचने हेतु छोटे होते हैं।

उदाहरण-ऊँट, कंगारू चूहा, मौलाक आदि।

प्रश्न 4.
आवृतबीजी व अनावृतबीजी पादपों में पाये जाने वाली विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(A) आवृतबीजी (Angiosperms) पादपों की विशेषताएँ-

  • आवृतबीजी पादपों को पुष्पीय पादप (flowering plants) भी कहा जाता है। इन पौधों में बीज, फल अर्थात् परिपक्व अण्डाशय के अन्दर बन्द रहते हैं। दूसरे शब्दों में इनके बीजों का विकास अण्डाशय के अन्दर होता है। अण्डाशय ही बाद में फल बन जाता है।
  • इन पादपों में भोजन संचय बीजपत्र (cotyledon) या भ्रूणपोष में होता है।
  • ये एकबीजपत्री या द्विबीजपत्री दो प्रमुख प्रकार के होते
  • द्विनिषेचन (Double fertilization) इन पौधों की विशेषता
  • अनावृतबीजियों के विपरीत इनमें शाक (herbs), लताएँ (climber), धुप (shrubs) व वृक्ष (tree) सभी जीवन रूप पाये जाते हैं।
  • जाइलम में सुविकसित वाहिकाएँ (Trackhea) पायी जाती हैं। फ्लोएम में फ्लोएम पैरेनकाइमा भी उपस्थित होता है।
  • पुष्प रंगीन व सुगन्धित हो सकते हैं अत: कौट परागण सामान्य है।

(B) अनावृतबीजी (Gymnosperms) पौधों की विशेषताएँ-

  • बीजाण्ड नग्न (naked) या अनावृत होते हैं। अर्थात् बीजाण्ड अण्डाशय से ढके हुए नहीं होते। पुष्य की अनुपस्थिति के कारण बीजाण्ड निषेचन से पूर्व तथा बाद | में भी अनावृत ही रहते हैं।
  • यह केवल वृक्ष व झाड़ी (shrubs) के रूप में पाये जाते हैं। शाक व लताओं का अभाव होता है।
  • भ्रूणपोष निषेचन से पहले ही बनता है, निषेचन के पश्चात् शेष नहीं रहता। अतः भोजन बीजपत्र में ही संचित रहता है।
  • द्विनिषेचन नहीं पाया जाता।
  • जाइलम में वाहिकाएँ अनुपस्थित होती हैं।
  • अनेक अनावृतबीजी, कवकमूल का निर्माण करते हैं।
  • परागण केवल वायु परागण प्रकार का होता है।
  • पुष्य के स्थान पर नर व मादा शंकु (cones) पाये जाते हैं।

प्रश्न 5.
टिप्पणी लिखिए

(a) मॅग्रोव वनस्पति
(b) जल स्थल चर
(c) लवण उत्सर्जक ग्रन्थियाँ
(d) लाइकेन
(e) सजीव प्रजक अंकुरण
(f) स्तम्भ मूल।

उत्तर:
(a) मैंग्रोव वनस्पति (Mangrove Vegetation)-समुद्र के किनारे की दलदल व लवणों की प्रचुरता वाली भूमि में उगने वाले पादप मॅग्रोव पादप कहलाते हैं। इस प्रकार के पादप निम्नलिखित परिस्थितियों से जूझने के लिए अनुकूलित होते हैं1 भूमि में ऑक्सीजन की कमी। 1 भूमि में लवणों, जैसे- सोडियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड व मैग्नीशियम सल्फेट की अधिकता। 1 ज्वारीय जल से पादपों की यान्त्रिक सुरक्षा। 9 बीजों का अंकुरण व भूमि में नवोभिदों का जमाव।

(b) जल स्थल चर (Amphibious Organisms)-
जल की अधिकता वाले स्थलों पर पाये जाने वाले जीव जलस्थल चर कहलाते हैं। मेंढक जैसे एम्फीबिया वर्ग के जीव भूमि पर रहने के लिए अनुकूलित होते हैं लेकिन इनमें निषेचन के लिए बाह्य जल आवश्यक होता है। इनमें निषेचन बाह्य व जल माध्यम में ही सम्पन्न होता है। इस प्रकार के जन्तुओं में श्वसन त्वचा से, मुख गुहा से, फेफड़ों से तथा लार्वा अवस्था में गलफड़ों द्वारा भी सम्पन्न होता है।

(c) लवण उत्सर्जक ग्रन्थियाँ (Salt Excretory glands)-
जलीय जन्तुओं जैसे मछलियों में लवण उत्सर्जक ग्रन्थियाँ पायी जाती है। शरीर के उपापचय को सही बनाये रखने के लिए शरीर का परासरण दाब (Osmotic Pressure) सही बनाये रखना आवश्यक होता है।

(d) लाइकेन (Lichen)-
लाइकेन एक फंगस व एक शैवाल (alpe) के सहजीवी संयोजन से बने विशिष्ट जीव हैं। लाइकेन तीन प्रकार के होते हैंक्रस्टोज लाइकेन- जो पहाड़ों या पेड़ की छाल पर कागज की तरह चिपके पाये जाते हैं। फूटीकोज लाइकेन-छोटी झाड़ीनुमा होते हैं। फोलिओज लाइकेन-जो पत्ती सदृश्य दिखाई पड़ते हैं। लाइकेन में नीलहरित शैवाल या हरित शैवाल स्वपोषी होने के कारण कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण करता है। जिसको फंगस साझीदार द्वारा भी साझा किया जाता हैं। फंगस, भूमि से जल व लवणों का अवशोषण करता हैं। फंगस शैवाल को सुरक्षा भी प्रदान करता है।

(e) सजीव प्रजक अंकुरण (Viviparous Gerimination)-
मैंग्रोव पादपों में बीजों का अंकुरण उनके फल में स्थित होने पर जब फल पौधों पर लगे हों, ही हो जाता है। यही अंकुरण जरायुजी अंकुरण (Viviparous (Germination) कहलाता है। इस प्रकार अंकुरित बीज नवोभिद के रूप में पेड़ से डार्ट के रूप में सीधा दलदली भूमि पर गिरता है। इससे उसे भूमि में सही रूप में जम जाने में मदद मिलती हैं, जैसे-राइजोफोरा में।

(f) स्तम्भ मूल (Root)-
स्तम्भ को यान्त्रिक सहारा (mecharlical support) देने के लिए निकली जड़े स्तम्भ मूल कहलाती हैं। ये स्तम्भ से अनेक स्थानों पर निकल कर जमीन में धंस जाती हैं जिससे दलदली भूमि में, या सीधा न होने पर भी स्तम्भ गिरता नहीं है। मैंग्रोव पौधों में इस प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं जो उन्हें दलदल व वारीय लहरों में गिरने से बचाती हैं, जैसे-एबीसीनिया में। यह जड़ का यान्त्रिक सहारा (mechanical support) देने हेतु अनुकूलन है।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्गीकरण की कुल या फैमिली से छोटी श्रेणी (Category)
(अ) गण (Order)
(ब) वर्ग (Class)
(स) फाइलम (Phylum)
(द) वंश (Genus)

प्रश्न 2.
माइकोप्लाज्मी को पाँच जगत वर्गीकरण पद्धति में किस जगत में वर्गीकृत किया गया है
(अ) मोनेरा
(ब) प्रौटिस्टा
(स) फजाई
(द) एनीमेलिया।

प्रश्न 3.
डायटम जैसे एककोशिकीय जीव किस जगत में वर्गीकृत किए गए हैं –
(अ) प्रोटिस्टा
(ब) मोनेरा
(स) प्लांटी
(द) फंजाई।

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन-सा एक संवहनी क्रिप्टोगैम पादप हैं
(अ) मशरूम
(ब) फ्यूनेरिया
(स) सिलेजिनेला
(द) साइकस।

प्रश्न 5.
लैंगिक जनन हेतु बाह्य जल पर निर्भर रहने वाले पौधे
(अ) एकबीजपत्री
(ब) द्विबीजपत्री
(स) अनावृतबीजी
(द) ब्रायोफाइटा।

प्रश्न 6.
गैमा द्वारा अलैंगिक जनन होता है
(अ) शैवालों में
(ब) अनावृतबीजियों में
(स) ब्रायोफाइटा में.
(द) आवृतबीजियों में।

प्रश्न 7.
किस संघ के जन्तुओं में कूटगुहा (Pseudocoel) पायी जाती है –
(अ) निडेरिया
(ब) प्लेटीहेल्मिथीज
(स) एस्केल्मिथीज
(द) एनीलिङा।

प्रश्न 8.
तारा मछली किस संघ का जन्तु है –
(अ) मोलस्का
(ब) इकाइनोडर्मेटा
(स) आर्थोपोडा
(द) कॉईंटा।

प्रश्न 9.
किस वर्ग के जन्तुओं में हृदय द्विकोष्ठकी (two chanhered) होता है
(अ) मत्स्य
(च) एम्फीबिया
(स) रैप्टीलिया
(द) एबीज

प्रश्न 10.
चमगादड़ किस वर्ग का जन्तु हैं –
(अ) पक्षी या एबीज
(ब) रेप्टीलिया
(स) स्तनधारी
(द) एम्फीबिया।

प्रश्न 11.
स्वांगीकारी जड़ें पायी जाती हैं
(अ) नागफनी व थोर में
(ब) कमल में
(स) आक में
(द) सिंघाड़ा में।
उत्तर

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

2.
(i) → (e),
(ii) → (c),
(iii) → (a),
(iv) → (b),
(v) → (f),
(vi) → (d)

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किस जगत के जीवों की कोशिका में काइटिन की बनीं कोशिका भित्ति पायी जाती है ?
उत्तर:
जगत फजाई के जीवों में।

प्रश्न 2.
फजाई के लैंगिक जनन में बनने वाले दो प्रकार के बीजाणुओं का नाम लिखिए।
उत्तर:

  • ऐस्कोबीजाणु (Ascospore)
  • बेसीडियो बीजाणु (Basidiospore)।

प्रश्न 3.
थैलस शब्द को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ऐसा पादप शरीर जिसे जड़, तना व पत्तियों में भिन्नत नहीं किया जा सकता, थैलस (thallus) कहलाता है, जैसेशैवालों में।

प्रश्न 4,
ब्रायोफाइटा वर्ग के पादपों को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
ब्रायोफाइटा समूह के सदस्यों में उभयचर जन्तुओं को भाँति निषेचन के लिए बाह्य जल की आवश्यकता होती है। इसीलिए इन्हें पादप जगत के उभयचर कहा जाता है।

प्रश्न 5.
क्रिप्टोगैम्स किन्हें कहते हैं ?
उत्तर:
ऐसे पादप जिनमें जनन अंग छिपे हुए (hidden) व अस्पष्ट होते हैं, क्रिप्टोगैम्स कहलाते हैं। प्रश्न 6. चीड़ व देवदार के पादपों को आप पादपों के किस समूह में रखेंगे ? उत्तर-अनावृतबीजी (Gymnosperms) में।

प्रश्न 7.
संघ पोरीफेरा के दो प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर:

  • पूरे शरीर पर छिद्रों (Ostia) की उपस्थिति
  • स्पंजगुहा (Spongocoel) व कंटक (Spicules) की उपस्थिति।

प्रश्न 8.
पाँच जगत वर्गीकरण के आधार पर जगत एनीमेलिया के जीवों की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
यूकरियोटिक, बहुकोशिकीय, विषमपोषी, प्राणिसम (holozoic) जीव

प्रश्न 9.
निडेरिया संघ को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है ?
उत्तर:
संध सीलेण्ट्रेटा (Coelenterata)

प्रश्न 10.
चपटे कृमि जैसे टेपवर्म व लिवर फ्लूक किस संघ का प्रतिनिधित्व करते हैं ?
उत्तर:
प्लेटीहैल्मिथीज़ (Platyhelminthes) का।

प्रश्न 11.
संघ एनीलिड़ा के दो जन्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • केचुआ,
  • जोंक।

प्रश्न 12.
पक्षी वर्ग व स्तनधारी वर्ग के जन्तुओं की कोई दो प्रमुख समानताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • दोनों वर्ग के जन्तुओं में “हृदय चार कोष्ठीय (Four chambered heart) होता है।
  • दोनों समतापी (Homeothermic) होते हैं।

प्रश्न 13.
किस आवास के पौधों में मूलतन्त्र अनुपस्थित या अल्प विकसित होता है ?
उत्तर:
जलोभिदों या जलीय आवास के पौधों में।

प्रश्न 14.
किस प्रकार के पौधों के अंगों में वायु प्रकोष्ठ (air chambers) पाये जाते हैं ?
उत्तर:
जलीय पादप या जलोभिदों में।

प्रश्न 15.
मरुस्थलीय जन्तुओं के ऐसे दो अनुकूलन लिखिए जो उसकी जल संरक्षण में मदद करते हैं।
उत्तर:

  • अत्यन्त सान्द्र मल-मूत्र का उत्सर्जन्
  • शरीर में स्वेद ग्रन्थियों का अभाव या अल्पविकसित होना।

प्रश्न 16,
ICBN का पूर्ण नाम लिखिए।
उत्तर:
इण्टरनेशनल कोड ऑफ बोटेनिकल नामेनक्लेचर

प्रश्न 17.
किन्हीं दो जीवों के जन्तु वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर:
आम- मैंगीफेरा इंडिका (Mangifera indica) मनुष्य-होमो सैपियंस (Hormo sapiens)।

प्रश्न 18,
पृथ्वी पर जैव विविधता समृद्ध क्षेत्र कौन से हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी पर भूमध्यरेखा के दोनों ओर के क्षेत्र अर्थात् कर्क रेखा व मकर रेखा के बीच के क्षेत्र जैव विविधता में समृद्ध हैं। इन्हें वृहद् जैवविविधता क्षेत्र (Mega diversity region) कहा जाता हैं।

प्रश्न 19.
उस संघ का नाम लिखिए जिसके जन्तुओं में देश कोशिकाएँ पायी जाती हैं।
उत्तर:
निरिया या सीलेष्ट्रेटा।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पोरीफेरा व निडेरिया संघ के जीवों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 3

प्रश्न 2.
आर्थोपोडा संघ जन्तु जगत का सबसे बड़ा संघ है। इसके जन्तुओं की सफलता के कुछ कारण लिखिए।
उत्तर:
शरीर से जल की हानि रोकने के लिए शरीर काइटिन के बने बाह्य कंकाल से घिरा रहता है। इस कारण यह जन्तु पृथ्वी के सभी प्रकार के स्थलीय पर्यावरण में फैल गये। इनसे पहले के जीव केवल जलीय वातावरण में पाये जाते हैं। काइटिन, हल्का व कड़ा होता हैं। इन जीवों में पंखों का विकास इसी पदार्थ के कारण हो सका। कीट वर्ग के कुछ आर्थोपोड उड़ने में सक्षम होते हैं।

प्रश्न 3.
जीवों के वैज्ञानिक नामों का क्या महत्व हैं ?
उत्तर:
जीवों की किसी भी प्रजाति का नाम अलग-अलग भाषाओं और अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न होता है। उदाहरण के लिए; प्याज अंग्रेजी में ओनियन (Onion), तमिल में वेगायम व कन्नड़ में इरूली है। किसी भी प्रजाति का एक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य नाम होने पर इसकी विश्व में किसी भी क्षेत्र में सटीक पहचान की जा सकती हैं। इसीलिए विश्व के सभी ज्ञात जीवधारियों को एक-एक सर्वमान्य वैज्ञानिक नाम दिया जाता है।

प्रश्न 4.
जगत मोनेरा के प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर:
जगत मोनेरा के प्रमुख लक्षण-

  • सभी जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं अर्थात् संगठित केन्द्रक व झिल्लीयुक्त कोशिकांगों का अभाव होता है।
  • पोषण के आधार पर वह स्वपोषी या विषमपोषी हो सकते हैं।
  • जनन प्राय: अलैंगिक संलयन (fission) द्वारा होता है। वास्तविक लैंगिक जनन नहीं पाया जाता।

उदाहरण-जीवाणु व नील हरित शैवाल या सायनोबैक्टीरिया।

प्रश्न 5.
मोनेरा जगत के किसी जीव का चित्र बनाइए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 4

प्रश्न 6.
आवृतबीजी व अनावृतबीजियों में चार अन्तर बताइये।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 5

प्रश्न 7.
यूग्लीना व पैरामीशियम के सरल चित्र बनाइए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 6
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 7
प्रश्न 8.
किसी एक शैवाल व एक ब्रायोफाइट का चित्र बनाए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 8
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 9
प्रश्न 9,
संघ लेटीहल्पिथीज, एस्केलिंमधीज व एनेलिडा की तुलना कीजिए।
उत्तर:
प्लेटीहैल्मिथीज, एस्केहेल्मिंथीज व एनेलिडा की तुलना
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 10
प्रश्न 10.
उभयचर व रेप्टीलिया वर्ग में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उभयचर व रेष्टीलिया वर्ग में अन्तर
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 11
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 12
निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आपकी पुस्तक में दिये पृष्ठधारी जन्तुओं के विभिन्न वर्गों की निम्न आधार पर तुलना कीजिए-हदय में कोष्ठों की संख्या, समतापी या असमतापी, अप्रजक या सजीव प्रजक, बा कंकाल, श्वसन अंग, निषेचन प्रकार।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 13
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 14
प्रश्न 2,
अपृष्ठवंशी व पृष्ठवंशी जन्तुओं में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अपृष्ठवंशी व पृष्ठवंशी जन्तुओं में अन्तर
RBSE Solutions for Class 9 Science Chapter 7 जैव विविधता 15

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