RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 6 औद्योगिक परिदृश्य

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BoardRBSE
TextbookSIERT, Rajasthan
ClassClass 8
SubjectSocial Science
ChapterChapter 6
Chapter Nameऔद्योगिक परिदृश्य
Number of Questions Solved46
CategoryRBSE Solutions

Rajasthan Board RBSE Class 8 Social Science Chapter 6 औद्योगिक परिदृश्य

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प को चुनिए-
(A) निम्नलिखित में से कौनसा उद्योग खनिज आधारित है
(क) सूती वस्त्र उद्योग
(ख) सीमेन्ट उद्योग
(ग) चमड़ा उद्योग
(घ) शक्कर उद्योग
उत्तर:
(ख) सीमेन्ट उद्योग

(B) किस उद्योग को मौसमी उद्योग कहा जाता है
(क) आभूषण उद्योग
(ख) ग्रेनाइट उद्योग
(ग) शक्कर उद्योग
(घ) डेयरी उद्योग
उत्तर:
(ग) शक्कर उद्योग

प्रश्न 2.
सुमेलित कीजिएकच्चा माल उद्योग
1. गन्ना सूती वस्त्र उद्योग
2. चूना पत्थर हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड
3. तांबा खांडसारी उद्योग
4. सरसों सीमेन्ट उद्योग
5. कपास कच्ची घाणी उद्योग
उत्तर:
1. गन्ना–खांडसारी उद्योग
2. चूना पत्थर-सीमेन्ट उद्योग
3. तांबा-हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड
4. सरसों कच्ची घाणी उद्योग
5. कपास-सूती वस्त्र उद्योग

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. कुटीर एवं लघु उद्योगों के विकास के लिए निगम प्रयासरत है।
2. राजस्थान में पहला सीमेन्ट कारखाना………. जिले के …………में खोला गया था।
3. जोधपुर की….खादी प्रसिद्ध है।
4. जयपुर में………. सोने चाँदी के आभूषणों एवं रत्नों के लिए एक विश्वविख्यात केन्द्र है।
उत्तर:
1. राजस्थान लघु उद्योग
2. बूंदी, लाखेरी
3. मेरिनो
4. जौहरी बाजार

प्रश्न 4.
आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
आकार के आधार पर उद्योगों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है

  1. कुटीर या घरेलु उद्योग – ये छोटे पैमाने के उद्योग हैं। जो अपने परिवार के सदस्यों की सहायता से अपने घर में चलाए जाते हैं जैसे-टोकरी बुनाई, मुर्गीपालन आदि।
  2. लघु उद्योग – इसमें 10 से 100 श्रमिक किसी छोटे कारखाने में उत्पादन कार्य करते हैं जैसे-माचिस उद्योग, ईंट उद्योग आदि।
  3. वृहत् उद्योग – इसमें अधिक पूँजी का निवेश, उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी और श्रमिकों की संख्या अधिक होती है, जैसे-सूती वस्त्र उद्योग, सीमेन्ट उद्योग आदि।।

प्रश्न 5.
राजस्थान की वस्त्र नगरी किसे कहा जाता है? और क्यों ?
उत्तर:
राजस्थान की ‘वस्त्र नगरी’ एवं ‘राजस्थान कीमेनचेस्टर’ भीलवाड़ा को कहा जाता है क्योंकि राजस्थान की सर्वाधिक वस्त्र निर्माण इकाइयाँ भीलवाड़ा में कार्यरत हैं।

प्रश्न 6.
मेक इन इण्डिया कार्यक्रम क्यों चलाया गया है?
अथवा
मेक इन इण्डिया कार्यक्रम क्या है? समझाइये।
अथवा
‘मेक इन इण्डिया’ शब्द का अर्थ बताते हुए यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा क्यों चलाया गया? समझाइये।
उत्तर:
मेक इन इण्डिया का शाब्दिक अर्थ है-भारत में बनाओ। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत सरकार यह चाहती है कि हमारे जीवन में काम आने वाली सभी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं का निर्माण भारत में ही हो। इसका लाभ यह होगा कि देश में बनी वस्तु की कीमत कम होगी तथा वस्तुओं का निर्यात कर राजकीय आय में वृद्धि भी की जा सकती

प्रश्न 7.
उद्योग को कितने प्रकार में विभाजित किया जा सकता है? उनके उदाहरणों की सूची बनाइए।
उत्तर:
उद्योगों का वर्गीकरण-उद्योगों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है-

(क) कच्चे माल के उपयोग के आधार पर उद्योंग – इस आधार पर उद्योगों को निम्न चार भागों में विभाजित किया जा सर्व

  1. कृषि आधारित उद्योग – ये वे उद्योग हैं जो कच्चे माल के रूप में वनस्पति और जन्तु आधारित उत्पादों का उपयोग करते हैं, जैसे-खाद्य संसाधन, डेयरी उत्पाद, सूती वस्त्र, चमड़ा उद्योग, शक्कर आदि।
  2. खनिज आधारित उद्योग – ये वे उद्योग हैं जो खनिज अयस्कों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं, जैसेलौह इस्पात उद्योग, आभूषण आदि।
  3. समुद्र आधारित उद्योग – इन उद्योगों में सागरों और महासागरों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है, जैसे-मत्स्य तेल निर्माण उद्योग आदि।
  4. वन आधारित उद्योग – ये वनों से प्राप्त उत्पाद का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं, जैसे-लुग्दी एवं कागज उद्योग, औषधि आदि।

(ख) स्वामित्व के आधार पर उद्योग – इस आधार पर उद्योगों को निम्न चार भागों में विभाजित किया जाता है-

  1. निजी क्षेत्र के उद्योग – इनका संचालन और स्वामित्व या तो एक व्यक्ति द्वारा या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है, जैसे- रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड।
  2. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग – इनका स्वामित्व व संचालन सरकार द्वारा होता है, जैसे हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड।
  3. संयुक्त क्षेत्र के उद्योग – इनका संचालन और स्वामित्व राज्यों और व्यक्ति समूहों द्वारा होता है, जैसे-मारुति उद्योग लिमिटेड।
  4. सहकारी क्षेत्र के उद्योग – इनका संचालन और स्वामित्व कच्चे माल के उत्पादकों या पूर्तिकारों, कामगारों अथवा दोनों द्वारा होता है, जैसे-सरस डेयरी सहकारी उपक्रम।

(ग) आकार के आधार पर वर्गीकरण – उद्योगों के आकार का तात्पर्य निवेश की गई पूँजी, नियोजित लोगों की संख्या और उत्पादन की मात्रा से है। इस आधार पर उद्योगों को निम्न तीन भागों में बाँटा जा सकता है|

  1. कुटीर या घरेलू उद्योग – ये छोटे पैमाने के उद्योग हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों की सहायता से अपने घर पर चलाए जाते हैं, जैसे-मुर्गीपालन, टोकरी बुनाई आदि।
  2. लघु उद्योग – इनमें 10 से 100 श्रमिक किसी छोटे कारखाने में उत्पादन करते हैं। इनमें मशीनें छोटे पैमाने की होती हैं, जैसे-माचिस उद्योग, बीड़ी उद्योग आदि।
  3. वृहत् आकार के उद्योग – इनमें अधिक पूँजी का निवेश, उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी और श्रमिकों की संख्या अधिक होती है, जैसे-सूती वस्त्र उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, लौहइस्पात उद्योग आदि।

प्रश्न 8.
कुटीर उद्योग किसे कहते हैं? इनके कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कुटीर उद्योग – कुटीर या घरेलु उद्योग छोटे पैमाने के उद्योग हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों की सहायता से अपने घर पर चलाए जाते हैं, जिनमें शिल्पकारों के द्वारा उत्पादों का निर्माण हाथ से किया जाता है। राजस्थान के प्रमुख कुटीर उद्योग निम्न प्रकार हैं-

  1. हथकरघा उद्योग
  2. खादी एवं ग्रामोद्योग
  3. येकरी बुनाई
  4. मिट्टी के बर्तन बनाना
  5. लिफाफे व रस्सी बनाना
  6. मुर्गीपालन
  7. स्वेटर बुनना
  8. वस्त्र निर्माण
  9. रंगाई, छपाई, बंधेज उद्योग
  10. मधुमक्खी पालन
  11. अगरबत्ती निर्माण
  12. चर्म उद्योग
  13. गुड़ व खांडसारी का निर्माण आदि।

प्रश्न 9.
राजस्थान के वृहद् उद्योगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वृहद् उद्योग – इन उद्योगों में अधिक पूँजी का निवेश, उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी और श्रमिकों की संख्या अधिक होती है। राजस्थान के प्रमुख वृहद् उद्योग निम्नलिखित हैं-

1. सूती वस्त्र उद्योग – यह राजस्थान का सबसे पहला व प्राचीन उद्योग है। इसकी पहली मिल ब्यावर में सन् 1889 ई. में स्थापित हुई। राजस्थान बंधेज, छपाई तथा गोटा किनारी में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यह कार्य यहाँ प्राचीन एवं परम्परागत है। राजस्थान का वस्त्र निर्माण में प्रमुख स्थान है। भीलवाड़ा को राजस्थान की ‘वस्त्र नगरी’ एवं राजस्थान का ‘मेनचेस्टर’ भी कहा जाता है। सिले-सिलाये वस्त्र की दृष्टि से जयपुर एवं जोधपुर प्रमुख हैं वस्त्रों की रंगाई, छपाई तथा बंधेज कार्य हेतु जोधपुर, बगरू, जयपुर, सांगानेर, सुजानगढ़, कालाडेरा, लाडनूं, चूरू, बीकानेर, रतनगढ़, नागौर प्रमुख केन्द्र हैं।

2. सीमेण्ट उद्योग – भारत में सर्वप्रथम 1904 में मद्रास (चेन्नई) में समुद्री सीपियों से सीमेन्ट बनाने का प्रयास किया गया। राजस्थान में पहला सीमेन्ट कारखाना 1915 में बूंदी जिले के लाखेरी में खोला गया सीमेन्ट उत्पादन के लिए चूना पत्थर एवं जिप्सम प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है परन्तु कोयला राज्य के बाहर से मंगाया जाता है। कच्चे माल की उपलब्धि के कारण चित्तौड़गढ़ जिला सीमेन्ट उत्पादन में प्रमुख स्थान रखता है। इसके अतिरिक्त नागौर, कोटा, सवाईमाधोपुर, उदयपुर, जैसलमेर, अजमेर, बांसवाड़ा आदि जिलों में भी सीमेन्ट इकाइयाँ कार्यरत हैं। राज्य में प्रमुख सीमेन्ट केन्द्र निम्बाहेड़ा, गोटन, मोडक, ब्यावर, पिण्डवाड़ा, आबूरोड, नीमकाथाना, कोटपूतली आदि हैं।

3. शक्कर उद्योग – यह एक मौसमी उद्योग है, जिसका कच्चा माल गन्ना है। यह उद्योग मुख्यतः गन्ना उत्पादक क्षेत्र में ही स्थापित किया जाता है। राजस्थान की पहली शुगर मिल 1932 में चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर में निजी क्षेत्र में स्थापित की गयी थी, जो वर्तमान में बंद है। बूंदी जिले के केशोरायपाटन स्थित शक्कर मिल भी वर्तमान में बन्द है। एक शक्कर मिल श्रीगंगानगर में स्थित है।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कृषि आधारित उद्योग है-
(अ) आभूषण उद्योग
(ब) चमड़ा उद्योग
(स) शक्कर उद्योग
(द) सीमेण्ट उद्योग
उत्तर:
(स) शक्कर उद्योग

प्रश्न 2.
निम्न में से द्वितीयक व्यवसाय है-
(अ) खनन
(ब) उद्योग
(स) परिवहन
(द) व्यापार
उत्तर:
(ब) उद्योग

प्रश्न 3.
जिन उद्योगों का स्वामित्व एवं संचालन सरकार द्वारा किया जाता है, उन्हें कहा जाता है-
(अ) निजी उद्योग
(ब) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग
(स) सार्वजनिक उद्योग
(द) सहकारी क्षेत्र का उद्योग
उत्तर:
(स) सार्वजनिक उद्योग

प्रश्न 4.
राजस्थान का सबसे प्राचीन उद्योग कौनसा है?
(अ) सीमेन्ट उद्योग
(ब) सूती वस्त्र उद्योग
(स) शक्कर उद्योग
(द) मार्बल उद्योग
उत्तर:
(ब) सूती वस्त्र उद्योग

प्रश्न 5.
आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड उदाहरण है-
(अ) सहकारी क्षेत्र के उद्योग का
(ब) निजी क्षेत्र के उद्योग का
(स) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग को
(द) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग का।
उत्तर:
(अ) सहकारी क्षेत्र के उद्योग का

प्रश्न 6.
‘मेक इन इण्डिया’ वाक्यांश से अभिप्राय है-
(अ) नेपाल में बनाओ
(ब) बर्मा में बनाओ।
(स) अमेरिका में बनाओ
(द) भारत में बनाओ
उत्तर:
(द) भारत में बनाओ

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
1. शक्कर उद्योग एक कृषि आधारित………..उद्योग है। जिसका कच्चा माल………..है। (मौसमी/स्थायी; ज्वार/गन्ना)
2. पर्यटन, व्यापार व संचार आदि को…..व्यवसाय ६ कहा जाता है। (द्वितीयक/तृतीयक)
3. …………..के उद्योगों का स्वामित्व और संचालन राज्यों और व्यक्ति समूहों द्वारा होता है। (निजी क्षेत्र/संयुक्त क्षेत्र)
4. ……….. कार्यक्रम लूमरहित बुनकरों को सहायता प्रदान करता है। (एकीकृत ग्रामीण विकास/मनरेगा)
5. ……… को ‘सूती वस्त्रों की राजधानी’ कहा जाता है। (मुम्बई/नागपुर)
उत्तर:
1. मौसमी, गन्ना
2. तृतीयक
3. संयुक्त क्षेत्र
4. एकीकृत ग्रामीण विकास
5. मुम्बई

निम्न वाक्यों में से सत्य/असत्य कथन छाँटिए
1.सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व और संचालन सरकार द्वारा होता है।
2. सूती वस्त्र उद्योग कृषि आधारित उद्योग है।
3. ऊनी खादी में बीकानेर की मेरिनो खादी प्रसिद्ध है।
4. सीमेन्ट उद्योग के लिए चूना पत्थर, जिप्सम एवं कोयला प्रमुख कच्चा माल है।
5. राजस्थान की पहली शक्कर मिल 1932 ई. में चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर में सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित हुई।
उत्तर:
1. सत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य
5. असत्य

निम्न को सुमेलित कीजिए-

(अ)(ब)
1. मिट्टी के बर्तनजैसलमेर
2. मत्स्य तेल निर्माणजालौर
3. बरडी खादीकुटीर उद्योग
4. ग्रेनाइट उद्योगसमुद्र आधारित उद्योग
5. बगरू (जयपुर)वस्त्रों की रंगाई छपाई

उत्तर:
1. मिट्टी के बर्तन – कुटीर उद्योग
2. मत्स्य तेल निर्माण – समुद्र आधारित उद्योग
3. बरडी खादी – जैसलमेर
4. ग्रेनाइट उद्योग – जालौर
5. बगरू (जयपुर) – वस्त्रों की रंगाई-छपाई

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके आस-पास के क्षेत्र में संचालित किन्हीं 2 कुटीर उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • मुर्गीपालन
  • रस्सी बनाना

प्रश्न 2.
आपके जिले में संचालित किन्हीं दो लघु उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • ईंट उद्योग
  • रंगाई-छपाई उद्योग

प्रश्न 3.
आपके राज्य में संचालित किन्हीं दो वृहत् उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • सूती वस्त्र उद्योग
  • सीमेंट उद्योग

प्रश्न 4.
उद्योग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उद्योग वे आर्थिक क्रियाएँ हैं, जो वस्तुओं के उत्पादन और सेवाओं की व्यवस्था से सम्बन्धित हैं।

प्रश्न 5.
प्राथमिक व्यवसाय में शामिल गतिविधियों के नाम दीजिये।
उत्तर:
प्राथमिक व्यवसाय में शामिल गतिविधियाँ हैंआखेट, भोजन संग्रहण, पशुपालन, कृषि, खनन आदि।

प्रश्न 6.
द्वितीयक व्यवसायों के कोई दो उदाहरण बतलाइये।
उत्तर:

  • कपास से कपड़ा बनाना
  • लोहे से उपकरण बनाना

प्रश्न 7.
किन्हीं दो वन आधारित उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • लुग्दी व कागज उद्योग
  • फर्नीचर उद्योग

प्रश्न 8.
सार्वजनिक क्षेत्र के किन्हीं दो उद्योगों के नाम लिखो।
उत्तर:

  • हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड
  • हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड।

प्रश्न 9.
उद्योगों के आकार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
उद्योगों के आकार का तात्पर्य निवेश की गई पूँजी, नियोजित लोगों की संख्या और उत्पादन की मात्रा से है।

प्रश्न 10.
लघु व कुटीर उद्योगों की दो समस्याएँ लिखिए।
उत्तर:

  • वित्तीय साधनों की कमी
  • सीमित बाजार

प्रश्न 11.
राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग की पहली मिल कहाँ स्थापित की गयी थी?
उत्तर:
राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग की पहली मिल अजमेर जिले के ब्यावर में 1889 में स्थापित की गयी थी।

प्रश्न 12.
राजस्थान में रासायनिक उद्योगों का सर्वाधिक विकास किन जिलों में हुआ है?
उत्तर:
राज्य में प्रमुख रासायनिक उद्योग डीडवाना, कोटा, अलवर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ में स्थापित हैं।

प्रश्न 13.
राजस्थान में पहली शुगर मिल कहाँ व कब स्थापित की गई थी?
उत्तर:
राज्य में पहली शुगर मिल 1932 में चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर में निजी क्षेत्र में स्थापित की गई थी।

प्रश्न 14.
बन्धेज क्या है?
उत्तर:
बन्धेज वस्त्र रंगाई का एक प्रकार है।

प्रश्न 15.
कौशल विकास योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
ऐसी शिक्षा देना ताकि युवक शिक्षा ग्रहण कर तुरन्त स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त कर सकें।

प्रश्न 16.
हथकरघा उद्योग के विकास हेतु चलाई किन्हीं दो योजनाओं के नाम बताइए।
उत्तर:

  • एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम
  • ट्राइसम योजना

प्रश्न 17.
किसी एक उद्योग का नाम बताइए जिसके राजस्थान में विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं।
उत्तर:
राजस्थान में सीमेन्ट उद्योग के विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं।

प्रश्न 18.
आकार के आधार पर उद्योगों के वर्गीकरण का चार्ट बनाइये।
अथवा
उद्योगों का आकार के आधार पर वर्गीकरण चार्ट बनाकर दर्शाइए।
उत्तर:
आकार के आधार पर उद्योग
RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 6 औद्योगिक परिदृश्य 1

प्रश्न 19.
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण चार्ट बनाकर दर्शाइए।
उत्तर:
स्वामित्व के आधार पर उद्योग
RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 6 औद्योगिक परिदृश्य 2

प्रश्न 20.
चार्ट बनाकर कच्चे माल के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण दर्शाइए।
उत्तर:
कच्चे माल के आधार पर उद्योग
RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 6 औद्योगिक परिदृश्य 3

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राज्य में कुटीर एवं लघु उद्योगों के विकास की सम्भावनाओं पर अपने विचार संक्षेप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
राज्य में कुटीर एवं लघु उद्योगों की अपार सम्भावनाएँ हैं। राज्य में कई परम्परागत उद्योग चले आ रहे हैं यहाँ के कई उत्पाद विश्व प्रसिद्ध हैं जिनके निर्यात की अपार सम्भावनाएँ हैं। यहाँ कच्चा माल एवं कारीगर पर्याप्त हैं। यहाँ का आभूषण उद्योग, हथकरघा, सूती वस्त्र उद्योग, चर्म | उद्योग, पत्थर उद्योग, मूर्ति उद्योग आदि सम्भावना से भरा | हुआ है। राज्य में कुटीर एवं लघु उद्योगों की समस्याओं को दूर कर सरकार के सहयोग से इन उद्योगों का विकास एवं विस्तार किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
क्या आप समझते हैं कौशल विकास योजनाओं का रोजगार सृजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य युवकों एवं विद्यार्थियों को इस प्रकार की शिक्षा प्रदान करना है कि युवकों को अपनी शिक्षा ग्रहण कर लेने के तुरन्त बाद ही स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त हो सके। साथ ही इन योजनाओं में कौशल विकास के साथ ही इलेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रिकल, खाद्य प्रसंस्करण आदि जैसे व्यवसायों से सम्बन्धित ऐसे विशिष्ट कौशल जो इलेक्ट्रिकल, खाद्य प्रसंस्करण आदि जैसे व्यवसायों से सम्बन्धित ऐसे विशिष्ट कौशल जो प्रशिक्षणार्थियों को अपना स्वयं का उद्यम प्रारम्भ करने एवं रोजगार प्राप्त करने में सक्षम बनाने पर अधिक ध्यान दिया गया है। अतः निश्चित रूप से इन योजनाओं को रोजगार सृजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रश्न 3.
आर्थिक क्रियाओं से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वे समस्त क्रियाकलाप जिन्हें मानव अपने और अपने परिवार के भरण-पोषण और जीवनयापन हेतु करता है और उनसे उसे धन की प्राप्ति होती है, सामान्यतः आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं। ये सामान्यतः तीन प्रकार की होती हैं- प्राथमिक क्रियाएँ या व्यवसाय (कृषि, खनन आदि), द्वितीयक क्रियाएँ या व्यवसाय (विनिर्माण) एवं तृतीयक क्रियायें या व्यवसाय (पर्यटन, व्यापार आदि)।

प्रश्न 4.
द्वितीयक व्यवसाय को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्वितीयक व्यवसायों में कच्चे माल को परिष्कृत कर विभिन्न वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। इस प्रक्रिया में कच्चे माल की कीमत में वृद्धि होती है। कपास से कपड़ा बनाना, गेहूँ से आटा बनाना, लोहे से उपकरण बनाना, लकड़ी से खिलौने बनाना आदि द्वितीयक व्यवसाय ही हैं।

प्रश्न 5.
राजस्थान में लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास के प्रयत्न को समझाइये।
उत्तर:
राजस्थान में लघु व कुटीर उद्योगों के विकास के लिए राजस्थान लघु उद्योग निगम’ संस्था प्रयासरत है। यह निगम रियायती दरों पर ऋण, तकनीकी सहायता व विपणन की सुविधाएँ प्रदान करता है। इन उद्योगों से राज्य के कई लोगों को रोजगार प्राप्त होता है। जेल के अन्दर भी कैदियों को प्रशिक्षण देकर दरी, गलीचे, निवार, कम्बल आदि वस्तुएँ। बनाने में लगाया जाता है।

प्रश्न 6.
राज्य में लघु व कुटीर उद्योगों के विकास में आने वाली समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में वर्तमान समय में यांत्रिक प्रतिस्पर्धा के कारण लघु व कुटीर उद्योगों में कमी आई है। सामान्यतः राज्य में लघु व कुटीर उद्योगों के विकास में आने वाली प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं-

  1. वित्तीय साधनों की कमी
  2. कच्चे माल की कमी
  3. सीमित बाजार
  4. उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता
  5. ऊर्जा की कमी
  6. अवशिष्ट पदार्थों के उपयोग की सीमित संभावना
  7. अनुसंधान और आधुनिक प्रौद्योगिकी की जानकारी का |अभाव आदि।

प्रश्न 7.
हथकरघा उद्योग के विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
केन्द्र सरकार द्वारा हथकरघा उद्योग के विकास के लिए अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम द्वारा बुनकरों को सहायता प्रदान की जाती है। गृहविहीन बुनकरों को इन्दिरा आवास योजना में मकान एवं अन्य योजनाओं में बुनकरों को प्रशिक्षण दिया जाता है। राज्य सरकार द्वारा बिक्री कर में छूट, बिक्री केन्द्र की स्थापना, कार्यशील पूँजी हेतु ब्याज का अनुदान, यातायात अनुदान के रूप में भी बुनकरों को सहायता दी जाती है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राजस्थान के कुटीर एवं लघु उद्योगों का विस्तृत वर्णन दीजिये। उत्तर-राजस्थान के कुटीर एवं लघु उद्योग-राजस्थान के प्रमुख कुटीर एवं लघु उद्योग निम्न प्रकार हैं
1. हथकरघा उद्योग – कुटीर एवं लघु उद्योग के रूप में हथकरघा उद्योग बहुत कम पूँजी के विनियोग पर भी रोजगार प्रदान करता है। ऊनी शाल, कोटा की डोरिया साड़ियाँ, दरियाँ, खेस, निवार आदि का निर्माण हथकरघा से किया जाता है। सूत, ऊन और रेशम के धागों की उपयोगिता निरन्तर बढ़ने से यह उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गया है।

2. खादी एवं ग्रामोद्योग – खादी गाँवों में अंशकालीन और पूर्ण समय के लिए रोजगार प्रदान करती है। सूती, ऊनी और रेशम के धागों से विभिन्न प्रकार के वस्त्र, दरियाँ, कम्बल, चद्दर, शॉल आदि बनाए जाते हैं। ऊनी खादी में जैसलमेर की बरडी, बीकानेर के कम्बल, जैसलमेर और जोधपुर की मेरिनो खादी प्रसिद्ध हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग संस्थाओं के संचालन में सूती, ऊनी और रेशमी धागों से बनी वस्तुओं के अलावा मधुमक्खी पालन, अगरबत्ती निर्माण, चर्म उद्योग के अन्तर्गत जूते, चप्पल, पर्स, थैले आदि वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।

3. तेल घाणी उद्योग – सरसों की अधिक पैदावार वाले जिलों जैसे अलवर, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, जयपुर आदि जिलों में तेल घाणी उद्योग अधिक हैं। यहाँ सरसों तेल की खल, तेल से सम्बन्धित लघु एवं कुटीर उद्योगों की बहुतायत है। अजमेर जिले में मूंगफली के तेल की खल से संम्बन्धित लघु इकाइयाँ कार्यरत हैं। कोटा, बूंदी, बारां व पाली जिलों में तिल्ली की खल एवं तेल से सम्बन्धित औद्योगिक इकाइयाँ कार्यरत हैं।

4. कृषि उपजों से सम्बन्धित उद्योग – चना, मूंग, उड़द, चवले आदि की दाल से सम्बन्धित उद्योग राजस्थान के विभिन्न जिलों में पाए जाते हैं। कोटा, बूंदी, भीलवाड़ा और उदयपुर जिलों में गन्ने के रस से गुड़ और खांडसारी का निर्माण किया जाता है।

5. सजावटी पत्थर उद्योग – पत्थरों की कटाई, पॉलिश, सोपस्टोन की पिसाई से सम्बन्धित औद्योगिक इकाइयाँ लघु व कुटीर उद्योगों के रूप में कार्य कर रही हैं। संगमरमर एवं ग्रेनाइट पत्थरों का निर्यात खाड़ी देशों तथा यूरोपीय देशों में किया जाता है।

6. आभूषण एवं बर्तन उद्योग – राजस्थान में हाथीदाँत और पीतल के आभूषण बनाए जाते हैं। जयपुर सोने-चाँदी के आभूषणों का केन्द्र है। लाखों लोगों को इससे रोजगार उपलब्ध है। विभिन्न प्रकार के रत्नों की कटाई, घिसाई और पॉलिश एक प्रमुख कुटीर उद्योग बन चुका है। चाँदी से बनी विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ जैसे पायजेब, चेन, अंगूठी, बिछिया आदि प्रदेश के विभिन्न नगरों एवं कस्बों में बनाई जाती हैं। पीतल और तांबे के बर्तन राजस्थान के कई जिलों में बनाये जाते हैं।

7. अन्य उद्योग – छोटी मशीनें और उनसे सम्बन्धित उपकरण, लोहे के बोल्ट, कील, पेच आदि बनाने की लघु इकाइयाँ भी राज्य में कार्यरत हैं। इसी तरह कम्प्यूटर द्वारा प्रिन्टिंग, निमंत्रण-पत्र व ग्रीटिंग कार्ड आदि तैयार किए जाते हैं। इनके अलावा इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रोनिक्स से सम्बन्धित उद्योग भी कुटीर व लघु इकाइयों के रूप में राजस्थान में कार्य कर रहे हैं।

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Remark:

हम उम्मीद रखते है कि यह RBSE Class 8 Social Science chapter 6 Solutions in Hindi आपकी स्टडी में उपयोगी साबित हुए होंगे | अगर आप लोगो को इससे रिलेटेड कोई भी किसी भी प्रकार का डॉउट हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूंछ सकते है |

यदि इन solutions से आपको हेल्प मिली हो तो आप इन्हे अपने Classmates & Friends के साथ शेयर कर सकते है और HindiLearning.in को सोशल मीडिया में शेयर कर सकते है, जिससे हमारा मोटिवेशन बढ़ेगा और हम आप लोगो के लिए ऐसे ही और मैटेरियल अपलोड कर पाएंगे |

आपके भविष्य के लिए शुभकामनाएं!!

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