RBSE Solutions for Class 12 Pratical Geography Chapter 2 आंकड़ों का एकत्रीकरण एवं विश्लेषण

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Rajasthan Board RBSE Class 12 Pratical Geography Chapter 2 आंकड़ों का एकत्रीकरण एवं विश्लेषण

RBSE Class 12 Pratical Geography Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आँकड़ों से क्या आशय है?
उत्तर:
पूर्व निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति हेतु सुव्यवस्थित ढंग से संग्रह कर गणितीय रूप में प्रदर्शित संख्याओं को हम आंकड़े कहते हैं अथवा यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करने वाली संख्याओं को आँकड़े कहा जाता है।

प्रश्न 2.
प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़े-ऐसे आँकड़े जो अनुसंधानकर्ता व्यक्ति/संस्था द्वारा प्रथम बार संगृहीत किये जाते हैं, प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं। ऐसे आँकड़े जो पहले से प्रकाशित अथवा अप्रकाशित रूप में विद्यमान नहीं होते अपितु सर्वेक्षण के विभिन्न माध्यमों द्वारा पहली बार प्राप्त किये जाते हैं, प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं। ये आँकड़े व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली के माध्यम से प्राप्त किय जाते हैं।

प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़ों की प्राप्ति की विधियाँ बताइये।
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़ों की प्राप्ति की विधियों में व्यक्तिगत प्रेक्षण, गहन साक्षात्कार, प्रश्नावली, समूह वार्तालाप, अनुसूची, क्षेत्रीय सर्वेक्षण आदि शामिल हैं।

प्रश्न 4.
द्वितीयक आँकड़ों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़े-ऐसे आँकड़े जिनका संग्रहण अनुसंधानकर्ता या संस्था स्वयं न करके प्रकाशित या अप्रकाशित स्रोतों यथा सरकारी, गैर-सरकारी प्रशासन, निजी प्रशासन, पत्र-पत्रिकाओं, निजी अभिलेख के माध्यम से प्राप्त करता/करती है, द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं। द्वितीयक आँकड़े प्रकाशित या अप्रकाशित स्रोत से प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 5.
द्वितीयक आँकड़ों की प्राप्ति के स्रोत बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों की प्राप्ति के स्रोतों में प्रकशित एवं अप्रकाशित स्रोतों को शामिल किया जाता है। प्रकाशित स्रोतों में राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय अथवा स्थानीय स्तर पर प्रकशित होने वाले सांख्यिकीय प्रतिवेदन, सारांश व पुस्तकें शामिल हैं, जबकि अप्रकाशित स्रोतों में सरकारी व निजी अभिलेख शामिल किये जाते हैं।

प्रश्न 6.
द्वितीयक आँकड़ों के प्रकाशित स्रोत बताइये।
उत्तर:
द्वितीयक आंकड़ों के प्रकाशित स्रोतों में राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर प्रकाशित होने वाले सांख्यिकीय प्रतिवेदन, सारांश वे पुस्तकें शामिल होती हैं –

1. अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन:
संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में कार्यरत विभिन्न संस्थाएँ; जैसे-खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), अन्तर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय (ILO), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), सयुंक्त राष्ट्र संघ जनसंख्या गतिविधि (UNFPA), विभिन्न देशों से प्राप्त आँकड़ों को समय-समय पर प्रकाशित करती हैं। दी यू. एन. स्टेटिस्टीकल इयर बुक (The U.N. Statistical Year Book) इसी का एक उदाहरण है।

2. राष्ट्रीय प्रकाशन:
केन्द्र व राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों द्वारा प्रकाशित प्रतिवेदन, बुलेटिन इसके अन्तर्गत आते।

3. स्थानीय प्रकाशन:
महानगरों के नगर निगम, नगरों की नगर परिषद्, नगर पालिकाओं, जिला परिषद् एवं इसी । प्रकार के अन्य स्थानीय निकायों द्वारा प्रकाशित प्रतिवेदन, बुलेटिन इसके अन्तगर्त आते हैं।

4. निजी प्रकाशन:
अनुसंधानकर्ता/संस्थाएँ अनेक बार अपने द्वारा एकत्रित प्राथमिक आँकड़ों को शोध प्रबन्ध/पुस्तक/शोधपत्र के रूप में प्रकाशित कर देते हैं, यही आँकड़े अन्य अनुसंधानकर्ताओं द्वारा उपयोग करने पर . द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं।

प्रश्न 7.
द्वितीयक आँकड़ों के अप्रकाशित स्रोत बताइये।
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों के अप्रकाशित स्रोतों के अन्तर्गत सरकारी व निजी अभिलेख, अप्रकाशित शोध प्रबन्ध आते हैं –

1. सरकारी अभिलेख:
केन्द्र व राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों द्वारा प्रकाशित आँकड़े अभिलेख के रूप में भी उपलब्ध होते हैं।

2. निजी अभिलेख:
विभिन्न कम्पनियों, व्यापार संघों एवं व्यापारियों के निजी उपयोग के लेखे इसके अन्तर्गत आते हैं।

प्रश्न 8.
खण्डित श्रेणी क्या है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
खण्डित श्रेणी:
खण्डित श्रेणी में मूल्य विभिन्न खण्डों में प्रस्तुत किये जाते हैं अर्थात् यदि किन्हीं आँकड़ों में पुनरावृत्ति हो रही हैं तो बार-बार लिखने के स्थान पर एक ही बार लिख दिया जाता है, साथ ही समंक जितनी बार आता है। उसे आवृत्ति के रूप में लिख दिया जाता है इसे ही खण्डित श्रेणी कहते हैं। उदाहरणार्थ एक कक्षा में 8 अंक लाने वाले 15 विद्यार्थी हैं तो मूल रूप में 8 एवं आवृत्ति के रूप में 15 लिख दिया जाता है।

प्रश्न 9.
सतत श्रेणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
सतत् (अखण्डित ) श्रेणी विभिन्न पदों के चर मूल्यों में एक निरन्तरता मिले, ऐसी श्रेणी को सतत् श्रेणी कहा जाता है, इन चर मूल्यों को वर्गों में रखते हैं। वर्ग में सम्मिलित इकाइयों की संख्या को आवृत्ति के रूप में लिख देते हैं। उदाहरण के लिये –

प्राप्तांकविद्यार्थी
10 – 2015
20 – 308

यहाँ प्राप्तांक वर्ग है और विद्यार्थियों की संख्या आवृत्ति।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित सारणी से माध्यिका ज्ञात कीजिये –

प्राप्तांकपरीक्षार्थियों की संख्या
0 – 1016
10 – 2060
20 – 3080
30 – 4024
40 – 5020

हल:
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100 वें पद की संचयी आवृत्ति 156 है। अत: माध्यिका वर्ग 20-30 होगा। माध्यिका मूल्य निर्धारित करने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग करेंगे –
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित सारणी में दिये गये मूल्यों के आधार पर समान्तर माध्य ज्ञात करिये।

संचित क्षेत्र (हेक्टेयर)आवृत्ति
5 – 1015
10 – 1525
15 – 2030
20 – 2535
25 – 3028
30 – 3520
35 – 4017

हल:
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प्रश्न 12.
निम्न समंकों के लिये मानक विचलन ज्ञात कीजिये –
3, 5, 8, 12, 16, 13, 18, 4, 21, 10
हल:
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प्रश्न 13.
निम्न आँकड़ों के लिये मानक विचलन ज्ञात कीजिये –

वर्गआवृत्ति
10 – 2009
20 – 3012
30 – 4014
40 – 5018
50 – 6016
60 – 7012
70 – 8008

हल:
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प्रश्न 14.
एक विद्यार्थी के सात प्रश्न पत्रों के प्राप्तांक 42, 48, 53, 62, 67, 70, 76 हैं तो उनका समान्तर माध्य प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विधि से ज्ञात कीजिये।
हल:
समान्तर माध्य की गणना प्रत्यक्ष विधि द्वारा –
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लघु रीति द्वारा माध्य की गणना –
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प्रश्न 15.
निम्न आँकड़ों से माध्यिका ज्ञात कीजिये –
7, 25, 52, 14, 1, 19, 39, 27, 9, 47, 66
हल:
माध्यिका ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम आँकड़ों को आरोही से अवरोही या अवरोही से आरोही क्रम में व्यवस्थित करेंगे आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर –
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पद 6 पद का मूल्य 25 है। अत: माध्यिका 25 होगी।

प्रश्न 16.
निम्न आँकड़ों के लिये बहुलक ज्ञात कीजिये –

प्राप्तांकविद्यार्थी संख्या
10 – 207
20 – 3012
30 – 4019
40 – 5014
50 – 608

हल:
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उपर्युक्त सारणी से स्पष्ट हो जाता है कि (30-40) वर्ग में अधिकतम मिलान रेखाएँ 5 हैं। अत: इसी वर्गान्तर को बहुलक वर्गान्तर माना जायेगा।
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प्रश्न 17.
निम्न श्रेणियों में स्पियरमैन की कोटि अंतर विधि से सह-सम्बन्ध ज्ञात कीजिये –

X श्रेणीY श्रेणी
1580
1675
1760
1840
1930
2015

हल:
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कोटि सह-सम्बन्ध गुणांक:
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यहाँ पूर्ण ऋणात्मक सह-सम्बन्ध है = – 11 – 2

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