RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

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Rajasthan Board RBSE Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 अभ्यासार्थ प्रश्न

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थशास्त्र की धन प्रधान परिभाषा किसके द्वारा दी गई –
(अ) एडम स्मिथ
(ब) अल्फ्रेड मार्शल
(स) पाल ए सेम्युलसन
(द) कुत्सोयानिस

प्रश्न 2.
‘वार्ताः’ शब्द का प्रयोग किया गया है –
(अ) कृषि के लिए।
(ब) पशुपालन के लिए
(स) वाणिज्य के लिए.
(द) उपर्युक्त सभी के लिए

प्रश्न 3.
व्यष्टि-अर्थशास्त्र का सम्बन्ध है –
(अ) उत्पादन-साधनों की कीमतों से
(ब) सेवाओं की कीमतों से
(स) वस्तुओं की कीमतों से
(द) उपर्युक्त सभी से

प्रश्न 4.
समष्टि-अर्थशास्त्र का सम्बन्ध है –
(अ) राष्ट्रीय-आय, आर्थिक-वृद्धि व विकास से
(ब) सामान्य कीमत व रोजगार के स्तर से
(स) बचत व विनियोग के स्तर से।
(द) उपर्युक्त सभी से

प्रश्न 5.
मुख्य आर्थिक समस्या नहीं है –
(अ) क्या उत्पादन करें
(ब) कैसे उत्पादन करें
(स) किसको उत्पादन का वितरण करें।
(द) निर्धन कैसे बनें

उत्तरमाला:

  1. (अ).
  2. (द)
  3. (द)
  4. (द)
  5. (द)

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थशास्त्र का सम्बन्ध किससे है?
उत्तर:
अर्थशास्त्र व्यक्ति या देशों की अर्थव्यवस्था के व्यवहार के आर्थिक पक्ष के अध्ययन से सम्बन्धित है।

प्रश्न 2.
व्यष्टि-अर्थशास्त्र क्या है?
उत्तर:
ज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत व्यक्तिगत इकाइयों का आर्थिक विश्लेषण किया जाता है, व्यष्टि अर्थशास्त्र कहलाता है।

प्रश्न 3.
समष्टि-अर्थशास्त्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
ज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत समस्त अर्थव्यवस्था का आर्थिक विश्लेषण किया जाता है, समष्टि अर्थशास्त्र कहलाता है।

प्रश्न 4.
अर्थव्यवस्था को कौन-कौन से क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर:
अर्थव्यवस्था को सामान्यत: तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है-

  • प्राथमिक क्षेत्र – (कृषि व पशुपालन)
  • द्वितीय क्षेत्र – (निर्माण व विनिर्माण)
  • तृतीय क्षेत्र–(सेवा क्षेत्र)

प्रश्न 5.
पूंजीवादी अर्थवस्था में निर्णय किस आधार पर लिया जाता है?
उत्तर:
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में निर्णय कीमत, लाभ तथा न्यूनतम लागत के आधार पर किया जाता है।

प्रश्न 6.
समाजवादी अर्थव्यवस्था में निर्णय किस आधार पर लिया जाता है?
उत्तर:
समाजवादी अर्थव्यवस्था में निर्णय सामाजिक-आर्थिक कल्याण के आधार पर लिया जाता है।

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यष्टि-अर्थशास्त्र के अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र बताइए।
उत्तर:
व्यष्टि-अर्थशास्त्र के अन्तर्गत वस्तुओं तथा सेवाओं के सन्दर्भ में आर्थिक इकाइयाँ; जैसे-व्यक्ति, उद्योगों, मजदूरी, फर्मों आदि के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। जिसके प्रमुख उपकरण मांग वे पूर्ति हैं। जिसमें उपभोग, उत्पादन, विनिमय, वितरण, आर्थिक कल्याण आदि सम्मिलित है।

प्रश्न 2.
समष्टि-अर्थशास्त्र के अध्ययन के मुख्य क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं; जैसे – कुल आय-व्यय, कुल बचत व विनियोग आदि का अध्ययन किया जाता है। जिसके मुख्य उपकरण अर्थव्यवस्था की कुल मांग व कुल पूर्ति हैं। जिसमें राष्ट्रीय आय, रोजगार, सामान्य कीमत स्तर, आर्थिक विकास सम्मिलित है।

प्रश्न 3.
व्यष्टि-अर्थशास्त्र के प्रकार का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वस्तु की कीमत को परिवर्तनशील तथा अन्य कारकों को स्थिर मानकर किया जाने वाला व्यक्तिगत इकाई का अध्ययन आर्थिक व्यष्टिगत अध्ययन कहलाता है। लेकिन जब सभी कारक परिवर्तनशील होते हैं तो ऐसा अध्ययन कुल व्यष्टिगत अध्ययन कहलाता है।

व्यष्टिगत अर्थशास्त्रीय अध्ययन जब कीमत इत्यादि आर्थिक चरों को स्थिर मानकर होता है तो उसे व्यष्टिगत स्थैतिक अध्ययन कहते हैं। इसी प्रकार जब दो स्थिर अवस्थाओं की तुलना करते हैं तो उसे व्यष्टिगत तुलनात्मक अध्ययन कहते हैं। तथा आर्थिक चरों को निरन्तर गतिशील अवस्था में मानकर किया गया अध्ययन प्रावैगिक अध्ययन कहलाता है।

प्रश्न 4.
उत्पादन संभावना वक्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह वक्र जो यह बताता है कि एक देश उपलब्ध श्रेष्ठतम तकनीकी व अपने सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए वस्तुओं के वैकल्पिक संयोगों के द्वारा जिन्हें वह उत्पादित कर सकता है, उत्पादन-संभावना वक्र या वस्तु रूपान्तरण वक्र कहलाता है।

प्रश्न 5.
अवसर लागत किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक वस्तु की कुछ अधिक मात्रा उत्पादित करने के बदले दूसरी वस्तु की कुछ मात्रा को छोड़ना पड़ता है, इसी को वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने की अवसर लागत कहते हैं।

प्रश्न 6.
अर्थशास्त्र की निगमन और आगमन विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
निगमन विधि – इस विधि में हम सामान्य सत्य के आधार पर किसी विशिष्ट सत्य का पता लगाते हैं अर्थात् इसमें सामान्य से विशेष तथा परिकल्पना से तथ्यों की ओर अध्ययन किया जाता है। इसे तर्कविधि भी कहते हैं।

आगमन विधि – इस विधि में वास्तविक जगत की घटनाओं से सम्बन्धित तथ्यों के संकलन, वर्गीकरण व विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाले जाते हैं। अर्थात् इसमें आर्थिक विश्लेषण के सामान्य नियमों को किसी एक विशेष व्यक्तिगत इकाई के आर्थिक व्यवहार में खोजा जाता है। इसे ऐतिहासिक विधि भी कहते हैं।

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सीमितता व चयन के सम्बन्ध को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
सीमितता से आशय उत्पत्ति के साधनों भूमि, श्रम, पूंजी आदि की कुल पूर्ति उनकी कुल मांग से कम होना है। हमारे पास साधन सीमित मात्रा में ही उपलब्ध होते हैं जबकि हमारे लक्ष्य एवं उद्देश्य अनन्त हैं और निरन्तर बढ़ते रहते हैं। आवश्यकताओं की असीमितता के कारण एक मूलभूत समस्या यह उत्पन्न होती है कि हम किन आवश्यकताओं की सन्तुष्टि को प्राथमिकता दें अर्थात् किन आवश्यकताओं की सन्तुष्टि पहले करें और किनकी बाद में? साधनों की सीमितता और आवश्यकताओं की असीमितता के कारण जो समस्या होती है वही आर्थिक समस्या या चयन की समस्या कहलाती है। यह चुनाव की समस्या ही अर्थव्यवस्था की मूलभूत समस्या है। अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियायें; जैसे–उत्पादन, विनिमय, उपभोग आदि के समय आवश्यकताओं के असीमित होने तथा उनकी पूर्ति के लिए संसाधन सीमित होने के कारण चयन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। सीमितता और चयन के सम्बन्ध को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है –

1. किसी देश में समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनेक वस्तुओं तथा मूलभूत सुविधाओं का उत्पादन करना आवश्यक होता है लेकिन साधन सीमित होते हैं। इसलिए इन साधनों से समाज की असीमित आवश्यकताओं को पूरा करना सम्भव नहीं हो पाता है अत: चुनाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है कि किन वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाये।

2. किसी वस्तु का उत्पादन अनेक तरीके से किया जा सकता है; जैसे – केवल मानवीय श्रम द्वारा, मानवीय श्रम व मशीनो द्वारा, केवल अत्याधुनिक मशीनों एवं साधनों के द्वारा, केवल प्रचलित एवं प्राचीन साधनों द्वारा आदि। लेकिन यह देश में उपलब्ध साधनों की सीमितता पर निर्भर करती है अर्थात् उपलब्ध संसाधनों की प्रचुरता व उनकी लागत पर निर्भर है कि उत्पादन किस तरीके से किया जाए।

3. उत्पादन की क्रिया में उत्पादन के साधन भूमि, श्रम, प्रबन्ध और उद्यम भाग लेते हैं। प्रत्येक साधने को राष्ट्रीय आय का कितना भाग मिलना चाहिए यह साधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। सरकारें इस सम्बन्ध में ऐसी नीति अपनाती है, जिसके द्वारा अधिकतम सामाजिक कल्याण हो सके। धन का केन्द्रीयकरण कुछ ही हाथों में सीमित न हो जाय, एकाधिकारी ‘प्रवृत्तियां न पनप उठे।

4. उत्पादन किस स्थान पर किया जाये, चुनाव की समस्या का महत्त्वपूर्ण पक्ष होता है क्योंकि साधनों की उपलब्धता सभी स्थानों पर एक समान नहीं होती है यदि उत्पादन का स्थान उचित नहीं है अथवा किसी ऐसे स्थान पर है जहां साधन आसानी से उपलब्ध नहीं है तो वहाँ उत्पादन लागत आवश्यक रूप से बढ़ जायेगी और साधन आसानी से उपलब्ध है तो उत्पादन लागत निश्चित रूप से कम रहेगी।

प्रश्न 2.
किसी अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं का उल्लेख करते हुए इनकी उत्पत्ति के कारण का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:

अर्थव्यवस्था की प्रमुख केन्द्रीय समस्याएँ

असीमित मानवीय आवश्यकताएँ, साधनों की सीमितता एवं साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होने के कारण अर्थव्यवस्थ में निम्नलिखित आर्थिक समस्यााएँ उत्पन्न हो जाती हैं –

(i) उत्पादन किन वस्तुओं का किया जाए और कितनी मात्रा में-अर्थव्यवस्था में प्रथम समस्या यह उत्पन्न होती है कि केन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए तथा कितनी मात्रा में किया जाए। जिससे कि अधिकतम सन्तुष्टि के स्तर को प्राप्त किया जा सके। उत्पादन की जाने वाली वस्तुएँ कई प्रकार की हो सकती हैं; जैसे – उपभोक्ता वस्तुएँ, उत्पादक वस्तुएँ, सार्वजनिक वस्तुएँ, निजी वस्तुएँ आदि। इनमें से किस प्रकार की वस्तु का उत्पादन किया जाएं यही प्रमुख समस्या होती है।

(ii) उत्पादन कैसे किया जाए-अर्थव्यवस्था में उत्पादन करने हेतु कई तकनीकें प्रचलित होती हैं; जैसे-श्रम प्रधान तकनीक, पूँजी प्रधान तकनीक आदि। इन तकनीकों में उत्पादन हेतु कौन-सी तकनीक उपयुक्त रहेगी यह निश्चित करना एक प्रमुख समस्या होती है।

(iii) उत्पादन किसके लिए किया जाए-अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग किसके द्वारा किया जायेगा तथा कितनी मात्रा में किया जायेगा यह भी एक प्रमुख समस्या होती है। अन्यायपूर्ण वितरण व्यवस्था को बदल कर न्यायपूर्ण ढंग से वस्तुओं का वितरण करने का कार्य सरकार द्वारा किया जाता है। सरकार इसके लिए कर प्रणाली एवं व्यय प्रणाली का सहारा लेकर धन एकत्रित करती है तथा निर्धन वर्ग के कल्याण हेतु उसे व्यय करती है।
आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण – आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित है –
1. असीमित मानवीय आवश्यकताएँ – मानव की आवश्यकताएँ असीमित होती हैं यदि एक आवश्यकता की पूर्ति कर दी जाय तो दूसरी आवश्यकता उत्पन्न हो जाती है। लेकिन इन आवश्यकताओं की तीव्रता भिन्न-भिन्न होती है। इसलिए पहले किस आवश्यकता को पूर्ण किया जाए यह समस्या उत्पन्न होती है।

2. साधनों की सीमितता – मनुष्य की असीमित आवश्यकताओं की सन्तुष्टि हेतु सीमित साधन ही उपलब्ध हैं। इन सीमित साधनों से सभी आवश्यकताओं को पूर्ण रूप से सन्तुष्ट नहीं किया जा सकता है। अत: यह समस्या उत्पन्न हो जाती है। कि इन सीमित साधनों का प्रयोग किस प्रकार हो जिससे कि अधिकतम आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।

3. साधनों का वैकल्पिक प्रयोग – जो साधन हमें सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं उनके भी वैकल्पिक प्रयोग होते हैं; जैसे—यदि हम श्रम की बात करें तो एक श्रमिक मेज भी बना सकता है और कुर्सी भी बना सकता है। लेकिन यहाँ निश्चित करना पड़ेगा कि आवश्यकता किस चीज की अधिक है मेज की या कुर्सी की। इस तरह श्रमिक का वैकल्पिक प्रयोग होना भी चयन की समस्या को जन्म देता है।

प्रश्न 3.
मुख्य आर्थिक समस्याओं को उत्पादन-सम्भावना वक्र व अवसर लागत की अवधारणा की सहायता से विस्तारपूर्वक समझाइए।
उत्तर:
मुख्य आर्थिक समस्याएँ-निम्नलिखित तीन मुख्य आर्थिक समस्याएँ हैं –

  1. क्या उत्पादन करें?
  2. कैसे उत्पादन करें?
  3. किसके लिए उत्पादन करें?

प्रत्येक व्यक्ति मुख्य आर्थिक समस्याओं का पता लगाकर उनके समाधान खोजता है। इनके समाधान खोजने के लिए उत्पादन सम्भावना वक्र एवं अवसर लागत की अवधारणाओं को समझना आवश्यक है अत: इनका विस्तार से वर्णन निम्न प्रकार हैं –

उत्पादन सम्भावना वक्र की अवधाणा – डोमिनिक सेलवेटोर के अनुसार, “वह वक्र जो यह बताता है कि एक देश उपलब्ध श्रेष्ठतम तकनीक व अपने सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए वस्तुओं के वैकल्पिक संयोगों के द्वारा जिन्हें वह उत्पादित कर सकता है; उत्पादन सम्भावक वक्र या वस्तु रूपान्तरण वक्र कहलाता है। अत: उत्पादन सम्भावना वक्र मूल बिन्दु की ओर नतोदर होता है। एक उत्पादन सम्भावक वक्र की रचना दो वस्तुओं के असंख्य किन्तु वैकल्पिक संयोग को जोड़ने से होती है। अर्थात् उत्पादन सम्भावना वक्र पर स्थित एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर जाने पर दो वस्तुओं में से एक वस्तु की मात्रा में कमी व दूसरी वस्तु की मात्रा में वृद्धि होती है। अत: हम कह सकते हैं कि उत्पादन सम्भावना वक्र यह बताता है कि एक वस्तु का अधिक उत्पादन करने के लिए दूसरी वस्तु का उत्पादन घटाना पड़ता है अर्थात् एक वस्तु को दूसरी वस्तु में बदला जा सकता है।

उत्पादन सम्भावना वक्र एवं मुख्य आर्थिक समस्याएँ – उत्पादन सम्भावना वक्र मुख्य आर्थिक समस्याओं में से क्या उत्पादन करें? तथा कैसे उत्पादन करें? की समस्याओं का समाधान कुशलतापूर्वक करती है लेकिन उत्पादन सम्भावना वक्र यह बताने में असफल है कि उत्पादन किसके लिए करना है?

अवसर लागत की अवधारणा – सामान्यतया एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों की पूर्ति उनकी माँग की तुलना में कम होती है इसलिए जब एक वस्तु के उत्पादन में वृद्धि की जाती है या नई वस्तु का उत्पादन किया जाता है तो अन्य वस्तुओं की उन मात्राओं का त्याग करना पड़ता है, जिनमें इन साधनों का प्रयोग किया जाता हैं। मान लीजिए एक किसान खेत में गेहूँ और सरसों पैदा करता है तो गेहूं का उत्पादन करने के लिए सरसों के उत्पादन का त्याग करना पड़ता है। सरसों की कीमत जिसका त्याग किसान द्वारा किया जाता है वह गेहूँ की अवसर लागत कहलाती है। अतः हम कह सकते हैं कि किसी वस्तु की अवसर लागत उन त्यागे गये वैकल्पिक पदार्थों को मूल्य होती है जिन्हें इस उत्पादित वस्तु के उत्पादन में लगाये गये साधनों द्वारा उत्पन्न किया जाता है। लेकिन अवसर लागत के सम्बन्ध में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक त्यागे गये विकल्प की लागत अवसर लागत नहीं होती है बल्कि त्यागे गये विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ विकल्प की लागत अवसर लागत कहलाती है।
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय
इस उत्पादन सम्भावना वक्र (Production Possibility Curve) द्वारा यह स्पष्ट हो जाता है कि जैसे-जैसे गेहूं की अधिक मात्रा उत्पादित करने के लिए सरसों के उत्पादन को त्यागा जायेगा तो वह सरसों के उत्पादन की त्यागी गयी कीमत गेहूँ की अवसर लागत कहलायेगी।

उत्पादन सम्भावना वक्र का ढ़ाल रूपान्तरण की सीमान्त दर अथवा सीमान्त अवसर लागत कहलाती है उत्पादन सम्भावना वक्र कां ढ़ाल बढ़ता हुआ होता है जो यह प्रदर्शित करता है कि यदि एक देश x वस्तु की अधिक मात्रा का उत्पादन करना चाहता है तो उसे y वस्तु की बढ़ती हुई मात्रा का त्याग करना होगा।

प्रश्न 4.
व्यष्टि एवं समाष्टि-अर्थशास्त्र में अन्तर का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्यष्टि तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर
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प्रश्न 5.
आर्थिक-विश्लेषण की प्रमुख मान्यताओं का विस्तृत वर्णन कीजिए?
उत्तर:
मान्यताएँ–मान्यताएँ कुछ ऐसी मूलभूत व आवश्यक बातें, दशाएँ या शतें होती हैं जिनका पूरा होना किसी नियम व सिद्धान्त के लिए आवश्यक होता है। हम जानते हैं कि प्रत्येक सिद्धान्त के पीछे कुछ ऐसी प्रस्थापनाएँ और परिस्थितियाँ | होती हैं जिन्हें दिया हुआ मान लिया जाता है। इन्ही को उस सिद्धान्त के आधार तत्व अथवा मान्यताएँ कहते हैं।

आर्थिक विश्लेषण की मान्यताएँ – आर्थिक विश्लेषण करते समय कई बातों, दशाओं या शर्तों को मान्य कर लिया जाता है। विभिन्न आर्थिक नियमों व सिद्धान्तों के खरा उतरने या पूर्णतः सत्य सिद्ध होने के लिए कुछ विशेष बातों, दशाओं या शर्तों की मान्यताओं को पूरा किया जाना आवश्यक होता है। आर्थिक विश्लेषण करने के लिए मुख्य मान्यताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. अन्य बातें समान रहे अर्थात् नियम या सिद्धान्त तभी लागू होगा जबकि जिससे वह सम्बन्धित है उसके अतिरिक्त अन्य , बातें समान रहें यदि अन्य बातों में भी परिवर्तन होता है तो वह नियम या सिद्धान्त लागू नहीं होगा।
  2. आर्थिक इकाई की विवेकशीलता अर्थात् यह माना जाता है कि कोई भी आर्थिक इकाई विशेष नियम के आधार पर पूर्ण विवेकशीलता से निर्णय लेगी।
  3. आर्थिक मानव अर्थात् आर्थिक विश्लेषण करते समय यह माना जाता है कि जिस मानव के बारे में बात की जाती है वह कोई सन्यासी प्रवृत्ति का नहीं होगा अर्थात् वह सामान्य मानव होगा जो धन कमाता व खर्च करता है।
  4. साम्य या सन्तुलन की आर्थिक दशा अर्थात् कोई भी नियम या सिद्धान्त साम्य की प्रारम्भिक दशा को देखकर ही लागू होगा।
  5. विशेष सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक संस्थाओं से सम्बन्ध अर्थात् आर्थिक विश्लेषण के नियम/सिद्धान्त अलग-अलग सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक संस्थाओं के लिए अलग-अलग हो सकते हैं अत: ये नियम कुछ विशेष संस्थाओं पर ही लागू होगें, सभी पर एक समान रूप से लागू नहीं हो सकते हैं।
  6. जीव विज्ञान वे भूगोल से सम्बन्ध अर्थात् आर्थिक विश्लेषण में प्राकृतिक मानव के आर्थिक प्रयासों का ही विश्लेषण किया जाता है न कि किसी मूर्ति या तस्वीर का। इसी प्रकार आर्थिक विश्लेषण के सिद्धान्त विशेष भौगोलिक परिस्थिति में ही लागू होगें क्योंकि एक स्थान पर आवश्यक वस्तु दूसरे स्थान पर अनावश्यक हो सकती है।

प्रश्न 6.
विस्तारपूर्वक समझाइए कि अर्थशास्त्र विज्ञान व कला दोनों है।
उत्तर:
अर्थशास्त्र एक विज्ञान है

अर्थशास्त्र में इस धारणा को मानने वाले अर्थशास्त्री निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत हैं –

अर्थशास्त्र विज्ञान है क्योंकि यह भी ज्ञान का क्रमबद्ध अध्ययन है तथा इसमें भी ऐसे सामान्य सिद्धान्त हैं जो कारण एवं परिणाम के परस्पर सम्बन्धों का विश्लेषण करते हैं; जैसे – मांग का नियम यह बताता है कि अन्य बातों के समान रहने पर कीमत में कमी होने से मांग में वृद्धि तथा कीमत में वृद्धि होने पर मांग में कमी हो जाती है। यहाँ कीमत में वृद्धि या कमी कारण है तथा मांग में वृद्धि या कमी परिणाम। इसी तरह उपयोगिता ह्रास नियम आदि अनेक ऐसे नियम एवं सिद्धान्त हैं जो कारण एवं परिणाम के सम्बन्धों को स्पष्ट करते हुए सार्वभौम सत्यों का प्रतिपादन करते हैं।

अर्थशास्त्र की अध्ययन-पद्धति तथ्यपरक व तर्क, आश्रित दोनों ही प्रकार की हो सकती है। निगमन विधि के अन्तर्गत आर्थिक अध्ययन तर्क के आधार पर किया जाता है। तथ्यपरक आर्थिक अध्ययन के लिए तथ्यों (आंकड़ों) के आधार पर विश्लेषण करते हुए निष्कर्ष निकालते हैं। इस प्रकार से अर्थशास्त्र की प्रकृति को विज्ञान के रूप में माना जाता है।

अर्थशास्त्र एक कला है

अर्थशास्त्र को कला के रूप में स्वीकार करते हुए अर्थशास्त्री निम्न तर्क प्रस्तुत करते हैं –

नियमों का क्रमबद्ध ज्ञान विज्ञान कहलाता है, जबकि उन्हीं नियमों को क्रमबद्ध रूप से व्यवहार में प्रयोग को कला कहा जाता है। अर्थशास्त्र केवल कारण और परिणाम का सम्बन्ध ही स्थापित नहीं करता बल्कि इस सम्बन्ध की सार्थकता एवं उससे जुड़ी समस्याओं का निदान भी देता है। समस्या के निदान को नियमबद्ध करना अर्थशास्त्र को एक कला के रूप में मान्यता देता है। अर्थव्यवस्था में ‘क्या होना चाहिए’ की प्राप्ति ‘क्या है’ ‘या क्या होता हैं के आधार पर करते हैं। एक विशेष कार्य जैसे गरीबी दूर करना, की सर्वोत्तम या श्रेष्ठतम तरीके से प्राप्ति कला है। अर्थात् अर्थशास्त्र के नियमों व विधियों का उपयोग करते हुए गरीबी को कम करना अर्थशास्त्र के कला होने को स्पष्ट करता है। दैनिक जीवन की चुनाव-सम्बन्धी समस्याओं के सर्वोत्तम हल, अर्थशास्त्र के नियमों व विधियों का उपयोग करते हुए करते हैं। अर्थशास्त्र के नियमों व विधियों द्वारा सन्तुष्टि अधिकतम करना, उत्पादन अधिकतम करना, बेरोजगारी हटाना, लाभ अधिकतम करना अर्थशास्त्र के कला होने के उदाहरण हैं। वर्तमान समय में अर्थशास्त्र के व्यावहारिक स्वरूप का विश्लेषण अर्थशास्त्र को कला मानकर करना अधिक व्यावहारिक दिखाई पड़ता है। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है। कि अर्थशास्त्र विज्ञान व कला दोनों है।

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व में अर्थशास्त्र का जनक माना जाता है –
(अ) एडम स्मिथ
(ब) अल्फ्रेड मार्शल
(स) लॉर्ड लियोनिल रोबिन्स
(द) प्रो. जे. के. मेहता

प्रश्न 2.
अर्थशास्त्री अल्फ्रेड मार्शल ने अर्थशास्त्र को माना है –
(अ) धन का अध्ययन
(ब) आर्थिक कल्याण का अध्ययन
(स) असीमित आवश्यकताओं व सीमित साधनों का अध्ययन
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 3.
सबसे पहले ‘माइक्रो’ शब्द का प्रयोग किया –
(अ) मार्शल ने
(ब) वोल्डिंग ने
(स) कीन्स ने
(द) रेग्नर फ्रिश ने

प्रश्न 4.
रेग्नर फ्रिश ने सर्वप्रथम व्यष्टि-अर्थशास्त्र तथा समष्टि-अर्थशास्त्र शब्द का प्रयोग किया –
(अ) सन् 1776 में
(ब) सन् 1933 में
(स) सन् 1777 में
(द) सन् 1934 में

प्रश्न 5.
व्यष्टि अर्थशास्त्र में अध्ययन किया जाता है –
(अ) एक उपभोक्ता का
(ब) एक उत्पादक का
(स) एक फर्म का
(द) उपरोक्त सभी का

प्रश्न 6.
समष्टि आर्थिक विश्लेषण से सम्बन्धित नहीं है –
(अ) राष्ट्रीय आय
(ब) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
(स) मौद्रिक नीति
(द) कीमत सिद्धान्त

प्रश्न 7.
दी जनरल थ्योरी पुस्तक के लेखक है –
(अ) जॉन मिनार्ड कीन्स
(ब) एडम स्मिथ
(स) मार्शल
(द) रेग्नर फ्रिश

प्रश्न 8.
अर्थशास्त्र विज्ञान है क्योंकि यह
(अ) कारण एवं परिणाम के बीच सम्बन्ध स्थापित करता है।
(ब) सार्वभौम नियमों का प्रतिपादन करता है।
(स) वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग करता है।
(द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
चयन की समस्या उत्पन्न होती है।
(अ) सीमित साधनों के कारण
(ब) असीमित आवश्यकताओं के कारण
(स) अ तथा ब दोनों के कारण
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 10.
मिश्रित आर्थिक प्रणाली की विशेषता है –
(अ) साधनों पर निजी स्वामित्व
(स) साधनों पर निजी एवं सरकार का स्वामित्व
(ब) साधनों पर समाज का स्वामित्व
(द) इनमें से कोई नहीं

उत्तरमाला:

  1. (अ)
  2. (ब)
  3. (द)
  4. (ब)
  5. (द)
  6. (द)
  7. (अ)
  8. (द)
  9. (स)
  10. (स)

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आदिमानव का जीवन यापन किस पर आधारित था?
उत्तर:
आखेटन पर।

प्रश्न 2.
“कृषिपालन, पालयः वाणिज्यम च वार्ताः” में वार्ताः शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर:
आर्थिक क्रियाओं के लिए।

प्रश्न 3.
अर्थशास्त्र से सम्बन्धित भारत के दो विचारकों के नाम बताइए।
उत्तर:

  • दयानन्द सरस्वती
  • दादाभाई नौरोजी।

प्रश्न 4.
An Enquiry in to the Nature and causes of the wealth of Nations” पुस्तक के लेखक कौन हैं?
उत्तर:
एडम स्मिथ।

प्रश्न 5.
अर्थशास्त्र को ‘धन’ का अध्ययन किसने परिभाषित किया है?
उत्तर:
एडम स्मिथ ने।

प्रश्न 6.
लॉर्ड लियोनिल रोबिन्स ने अर्थशास्त्र को किस रूप में परिभाषित किया है?
उत्तर:
लॉर्ड लियोनिल रोबिन्स ने अर्थशास्त्र को असीमित आवश्यकताओं व सीमित साधनों से सम्बन्धित अध्ययन बताया है।

प्रश्न 7.
अर्थशास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जिसमें मनुष्यों की आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किए जाने वाले आर्थिक प्रयत्नों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 8.
व्यष्टि अर्थशास्त्र का एक महत्त्व बताइए।
उत्तर:
व्यक्तिगत इकाइयों की समस्या का विश्लेषण करने में सहायक।

प्रश्न 9.
व्यष्टि अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु के अन्तर्गत किस प्रकार की इकाइयों का अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत इकाइयों (एक उपभोक्ता, एक उत्पादक व एक फर्म) का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 10.
Micro शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के किस शब्द से हुई है?
उत्तर:
Mikros

प्रश्न 11.
व्यष्टि-अर्थशास्त्र को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
कीमत सिद्धान्त।

प्रश्न 12.
व्यष्टिगत स्थैतिक अध्ययन किसे कहते हैं?
उत्तर:
व्यष्टिगत-अर्थशास्त्रीय अध्ययन जब कीमत इत्यादि आर्थिक चरों को स्थिर मानकर होता है तो उसे व्यष्टिगत-स्थैतिक अध्ययन कहते हैं।

प्रश्न 13.
व्यष्टिगत-तुलनात्मक अध्ययन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब दो स्थिर अवस्थाओं की तुलना करते हैं तो उसे व्यष्टिगत-तुलनात्मक अध्ययन कहते हैं।

प्रश्न 14.
व्यष्टिगत-प्रावैगिक अध्ययन से क्या आशय है?
उत्तर:
आर्थिक चरों को निरन्तर गतिशील अवस्था में मानकर किया गया अध्ययन व्यष्टिगत प्रावैगिक अध्ययन कहलाता है।

प्रश्न 15.
समष्टि अर्थशास्त्र का कोई एक महत्त्व बताइए।
उत्तर:
आर्थिक नियोजन तथा नीतियों के निर्माण में सहायक।

प्रश्न 16.
समष्टि अर्थशास्त्र की विषय सामग्री में किन तत्वों का अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र की विषय सामग्री में सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर कुल उपयोग, कुल विनिमय एवं कुल राष्ट्रीय आय आदि का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 17.
समष्टि अर्थशास्त्र में निर्णयकर्ता कौन होता है?
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत निर्णयकर्ता बाजार, राष्ट्रीय आय, कुल रोजगार, कुल निवेश, कुल बचत आदि होते हैं।

प्रश्न 18.
समष्टि अर्थशास्त्र को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
उत्तर:
समग्र-आय व रोजगार सिद्धान्त।

प्रश्न19.
समष्टि अर्थशास्त्र से सम्बन्धित पुस्तक ‘दी जनरल थ्योरी’ कब प्रकाशित हुई थी?
उत्तर:
सन 1936 में।

प्रश्न 20.
The General theory of Employment, Interest and Money पुस्तक के लेखक कौन हैं?
उत्तर:
जॉन मिनार्ड कीन्स (John mynard keynes)

प्रश्न 21.
सर्वप्रथम व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समट-अर्थशास्त्र का प्रयोग किसने किया था?
उत्तर:
रेग्नर फ्रिश ने।

प्रश्न 22.
व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र में कोई एक अन्तर बताइये।
उत्तर:
व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन किया जाता है जबकि समष्टि अर्थशास्त्र में सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 23.
सर्वप्रथम आर्थिक-स्थैतिक व आर्थिक-प्रावैगिक शब्दों का प्रयोग कब और किसने किया?
उत्तर:
रेग्नर फ्रिश ने सन 1928 में।

प्रश्न 24.
आर्थिक अध्ययन कितने प्रकार की प्रकृति के होते हैं?
उत्तर:

आर्थिक अध्ययन दो प्रकार की प्रवृत्ति के होते हैं –

  • अर्थशास्त्र विज्ञान के रूप में,
  • अर्थशास्त्र कला के रूप में।

प्रश्न 25.
आर्थिक समस्या अथवा चयन की समस्या से क्या आशय है?
उत्तर:
असीमित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सीमित संसाधन उपलब्ध होने के कारण चयन की समस्या अथवा आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है।

प्रश्न 26.
साधनों की सीमितता से क्या आशय है?
अथवा
सीमितता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
साधनों की सीमितता से आशय यह है कि उत्पत्ति के साधनों; जैसे-भूमि, श्रम, पूँजी, ऊर्जा की कुल पूर्ति उनकी कुल मांग से कम है।

प्रश्न 27.
आर्थिक समस्या के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
चयन की समस्या के दो कारणों को बताइये।
उत्तर:

  • आर्थिक संसाधनों का सीमित होना।
  • मानवीय आवश्यकताओं का असीमित होना।

प्रश्न 28.
मुख्य आर्थिक समस्याओं के समाधान खोजने के लिए किन-किन अवधारणाओं को जानना आवश्यक होता है?
उत्तर:
सम्भावना-वक्र, अवसर लागत एवं सीमान्त अवसर की अवधारणाओं को जानना आवश्यक होता है।

प्रश्न 29.
उत्पादन सम्भावना वक्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र दो वस्तुओं के उन सभी संयोगों को प्रदर्शित करता है जिनका उत्पादन अर्थव्यवस्था के संसाधनों को पूर्ण रूप से प्रयोग करके किया जा सकता है।

प्रश्न 30.
संसाधनों में कमी हो जाने पर उत्पादन सम्भावना वक्र में क्या परिवर्तन आयेगा?
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र बायीं ओर खिसक जायेगा।

प्रश्न 31.
बेरोजगारी बढ़ने पर उत्पादन सम्भावना वक्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र बायीं ओर खिसक जायेगा।

प्रश्न 32.
अधिक श्रम एवं पूँजी के उपयोग का उत्पादन संभावना वक्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र दायीं ओर खिसक जायेगा।

प्रश्न 33.
अवसर लागत किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी वस्तु की एक इकाई की अवसर लागत दूसरी वस्तु की छोड़ी गयी अथवा त्यागी गयी मात्रा के बराबर होती है।

प्रश्न 34.
सीमान्त अवसर लागत किसे कहा जाता है?
उत्तर:
एक अतिरिक्त मात्रा का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु के उत्पादन में कमी की जाती है। दूसरी वस्तु के उत्पादन में की गई कमी की मात्रा प्रथम वस्तु की सीमान्त अवसर लागत कहलाती है।

प्रश्न 35.
“क्या उत्पादन किया जाय” की समस्या क्या है?
उत्तर:
यह किसी वस्तु अथवा सेवा का कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाय, से सम्बन्धित समस्या है।

प्रश्न 36.
“कैसे उत्पादन किया जाय” इस समस्या से क्या आशय है?
उत्तर:
यह उत्पादन की तकनीकी श्रम प्रधान हो या पूंजी प्रधान, से सम्बन्धित समस्या है।

प्रश्न 37.
“किसके लिए उत्पादन किया जाय” की समस्या क्या है?
उत्तर:
यह उत्पादित वस्तु अथवा सेवा का वितरण किन लोगों के मध्य तथा कितनी मात्रा में किया जाय, से सम्बन्धित है।

प्रश्न 38.
कृषि व पशुपालन अर्थव्यवस्था के किस क्षेत्र से सम्बन्धित है?
उत्तर:
प्राथमिक क्षेत्र।

प्रश्न 39.
अर्थव्यवस्था के मुख्य रूप से कितने प्रकार होते हैं? नाम बताइये।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं –

  1. पूंजीवादी
  2. समाजवादी
  3. मिश्रित।

प्रश्न 40.
मिश्रित अर्थव्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर:
वह अर्थव्यवस्था जिसमें निजी एवं सार्वजनिक उद्यम दोनों एक साथ कार्य करते हैं।

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-I)

प्रश्न 1.
“कृषिपालन, पाठयः वाणिज्यमच वार्ताः” में वार्ताः शब्द का प्रयोग किन आर्थिक क्रियाओं के लिए किया गया है?
उत्तर:
बृहस्पति, शुक्र व कौटिल्य इत्यादि द्वारा कृषि, पशुपालन, दुग्धपालन एवं वाणिज्य से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं के लिए वार्ता:’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 2.
अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गयी अर्थशास्त्र की परिभाषायें किन-किन विषयों पर आधारित हैं?
उत्तर:
अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई अलग-अलग परिभाषाएँ प्रमुखतः

  1. धन-प्रधान
  2. कल्याण प्रधान
  3. सीमितता प्रधान
  4. विकास प्रधान
  5. आवश्यकता विहीनता की स्थिति पर आधारित है।

प्रश्न 3.
प्रो. जे.के मेहता ने अर्थशास्त्र को किस रूप में परिभाषित किया है?
उत्तर:
प्रो. जे. के. मेहता ने ‘अर्थशास्त्र को एक व्यक्ति में ‘आवश्यकताओं की विहीनता की स्थिति प्राप्त करने में मदद करने वाला अध्ययन बताया है। प्रो. मेहता के विचार महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित रहे हैं।

प्रश्न 4.
जॉन नेविल्ले कीन्स ने अर्थशास्त्र’ की विषय-वस्तु में किन-किन तत्वों का समावेश किया है?
उत्तर:
जॉन नेविल्ले कीन्स’ने अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु में अर्थशास्त्र की प्रकृति, अन्य विषयों से सम्बन्ध व आर्थिक-नियमों की कमियों का समावेश किया है।

प्रश्न 5.
व्यष्टि अर्थशास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
एन. ग्रेगॉरी मेन्कीव के अनुसार-“व्यष्टि अर्थशास्त्र वह अध्ययन है कि कैसे परिवार व व्यावसायिक फर्मे निर्णय लेते हैं तथा वे विशेष बाजारों में आपस में अन्त:क्रिया करते हैं।’

प्रश्न 6.
व्यष्टि अर्थशास्त्र से सम्बन्धित दो उदाहरण बताइये।
उत्तर:

  • वस्तु एवं संसाधन की कीमत का निर्धारण करना।
  • किसी वस्तु एवं संसाधन की मांग व पूर्ति का निर्धारण करना।

प्रश्न 7.
व्यष्टि अर्थशास्त्र के कोई दो महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  • व्यक्तिगत इकाइयों की समस्या के विश्लेषण में सहायक।
  • वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य निर्धारण में सहायक।

प्रश्न 8.
व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत उपभोग के सिद्धान्त में किसका अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
व्यष्टि-अर्थशास्त्र के अन्तर्गत उपभोग सिद्धान्त में सीमान्त उपयोगिता हास नियम, सम सीमान्त उपयोगिता हास नियम, उपभोक्ता की बचत, मांग का नियम, मांग की लोच आदि का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 9.
व्यष्टि अर्थशास्त्र में अध्ययन किए जाने वाले किसी एक सिद्धान्त के विषय में बताइए।
उत्तर:
वस्तु कीमत सिद्धान्त–अर्थव्यवस्था में व्याप्त विभिन्न बाजार व्यवस्थाओं में फर्मों द्वारा वस्तुओं के मूल्य निर्धारण तथा लाभों को अधिकतम करने के सिद्धान्तों का अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र में किया जाता है।

प्रश्न 10.
सूक्ष्म अथवा व्यष्टि अर्थशास्त्र की दो विशेषताएं बताइए।
उत्तर:

  • सूक्ष्म अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत तथा विशिष्ट ईकाइयों का अध्ययन किया जाता है।
  • इसके अन्तर्गत अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित छोटे-छोटे चरों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 11.
समष्टि अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु से सम्बन्धित कोई चार बिन्दु लिखिए।
उत्तर:

  1. आय व रोजगार के सिद्धान्त,
  2. सामान्य मूल्य स्तर पर सिद्धान्त।
  3. व्यापार चक्रों के सिद्धान्त,
  4. मुद्रा व बैकिंग के सिद्धान्त।

प्रश्न 12.
समष्टि अर्थशास्त्र के कोई दो महत्व बताइए।
उत्तर:

  1. समिष्ट आर्थिक विश्लेषण पूरी अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक होता है।
  2. यह आर्थिक नियोजन तथा नीतियों के निर्माण में सहायता प्रदान करता है।

प्रश्न 13.
व्यष्टि तथा समष्टि अर्थशास्त्र को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
व्यष्टि अर्थशास्त्र – यह ज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन किया जाता है;
जैसे – व्यक्तिगत विश्लेषण।।
समष्टि अर्थशास्त्र – इसका तात्पर्य अर्थव्यवस्था के बड़े समूह से जुड़ा होता है,
जैसे-राष्ट्रीय आय का विश्लेषण।

प्रश्न 14.
आंशिक आर्थिक विश्लेषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब आर्थिक-विश्लेषण किसी एक कारक को ध्यान में रखकर किया जाता है तब वह आंशिक आर्थिक विश्लेषण” कहलाता है। जैसे – वस्तु की मांग का अध्ययन उसी वस्तु की कीमत को ध्यान में रखते हुए करना।

प्रश्न 15.
सामान्य आर्थिक विश्लेषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब वस्तु की मांग का अध्ययन उस वस्तु की कीमत के साथ-साथ अन्य कारकों के आधार पर भी किया जाता है तो इसे ‘सामान्य अध्ययन’ कहा जाता है। जैसे – उपभोक्ता की आमदनी इत्यादि के आधार पर किए जाने वाले अध्ययन।

प्रश्न 16.
साधनों की सीमितता से उत्पन्न आर्थिक समस्या के प्रमुख कारण बताए।
उत्तर:
साधनों की सीमितता से उत्पन्न आर्थिक समस्या के प्रमुख कारण निम्न हैं –

  1. भिन्न-भिन्न प्राथमिकताओं वाली असीमित ओवश्यकताएँ।
  2. सीमित किन्तु वैकल्पिक उपयोगों वाले साधन।
  3. आवश्यकताओं व साधनों के बीच समन्वय (तालमेल)।

प्रश्न 17.
आर्थिक समस्या क्या है? यह क्यों उत्पन्न होती है?
उत्तर:
सामान्यतः मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित होती हैं, जबकि साधन सीमित होते हैं। इन सीमित साधनों से वह अपनी सभी आवश्यकताओं को पूरी नहीं कर सकता है। इस कारण आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है।

प्रश्न 18.
उत्पादन संभावना वक्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  1. उत्पादन-संभावना वक्र मूलबिन्दु की ओर नतोदर (Concave to the origin) होता है।
  2. एक उत्पादन-संभावना-वक्र दो वस्तुओं के असंख्य किन्तु वैकल्पिक संयोग को जोड़ने से बनता है।
  3. उत्पादन-संभावना-वक्र पर स्थिति एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर जाने पर दो वस्तुओं के संयोगों में बदलाव होता है।

प्रश्न 19.
उत्पादन संभावना वक्र का एक रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

प्रश्न 20.
उत्पादन सम्भावना वक्र पर x,y एवं z बिन्दु क्या दर्शते हैं ?
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय
उत्पादन सम्भावना वक्र पर दिए गए बिन्दु यह प्रदर्शित करते हैं कि साधनों का कुशलतापूर्वक प्रयोग हो रहा है।

प्रश्न 21.
साधनों के अकुशल प्रयोग को दिखने वाली उत्पादन सम्भावना वक्र बनाइए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

प्रश्न 22.
साधनों की वृद्धि को प्रदर्शित करते हुए उत्पादन सम्भावना वक्र बनायें।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

प्रश्न 23.
एक उत्पादन सम्भावना वक्र बनायें जो स्थिर सीमान्त अवसर लागत को प्रदर्शित करता हो।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

प्रश्न 24.
अर्थव्यवस्था की कोई दो केन्द्रीय समस्याएं लिखिए।
उत्तर:

  • किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाये और कितनी मात्रा में।
  • किसके लिए वस्तुओं का उत्पादन किया जाये।।

प्रश्न 25.
पॉल क्रुगमेन व रोबिन वेल्स ने अर्थशास्त्र व अर्थव्यवस्था को किस प्रकार स्पष्ट किया है?
उत्तर:
“एक समाज की उत्पादक-क्रियाओं के लिए समन्वये का एक तन्त्र अर्थव्यवस्था है। अर्थशास्त्र वह सामाजिक-विज्ञान है। जो वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन, वितरण व उपभोग का अध्ययन करता है।”

प्रश्न 26.
अर्थव्यवस्था को सामान्यतः कितने भागों में वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर:
अर्थव्यवस्था को सामान्यत: प्राथमिक-क्षेत्र (कृषि व पशुपाल्ने), द्वितीय-क्षेत्र (निर्माण के विनिर्माण) तथा तृतीय-क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) के रूप में तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रश्न 27.
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में ‘‘क्या उत्पादन करें” समस्या की समाधान किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर:
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में “क्या उत्पादन करें समस्या का समाधान कीमत व लाभ के अनुसार किया जा सकता है।

प्रश्न 28.
“किसको वितरण करें” समस्या का समाधान समाजवादी अर्थव्यवस्था में किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
समाजवादी अर्थव्यवस्था में “किसको वितरण करें” समस्या का समाधान अधिकतम कल्याण के अनुसार किया जा सकता है।

प्रश्न 29.
“कैसे उत्पादन करें” समस्या का समाधान समाजवादी अर्थव्यवस्था में किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
समाजवादी अर्थव्यवस्था में कैसे उत्पादन करें” समस्या का समाधान समाज के अनुकूल तकनीकी के आधार पर किया जा सकता है।

प्रश्न 30.
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर:
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वह व्यवस्था है, जिसमें उत्पादन के साधनों पर व्यक्तियों का निजी अधिकार होता है, जिनका प्रयोग व्यक्ति स्व-लाभ अर्जित करने के लिए करता है।

प्रश्न 31.
समाजवादी अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं?
उत्तर:
समाजवादी अर्थव्यवस्था ऐसी अर्थव्यवस्था है, जिसमें उत्पत्ति के साधनों पर सरकार का स्वामित्व होता है, जिनका प्रयोग सरकार सार्वजनिक लाभ के कार्यों में करती है।

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-II)

प्रश्न 1.
अर्थशास्त्र से सम्बन्धित भारतीय विचारकों के नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
स्वामी दयानन्द सरस्वती, दादाभाई नौरोजी, महादेव गोविन्द रानाडे, गोपाल कृष्ण गोखले, रमेश चन्द्र दत्त, एम. एन. रॉय प्रमुख हैं। बाद के भारत के विचारकों में महात्मागांधी, जवाहरलाल नेहरू, राम मनोहर लोहिया, प्रो. जे. के. मेहता, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय एवं अमर्त्य सेन प्रमुख हैं।

प्रश्न 2.
अर्थशास्त्र क्या है?
उत्तर:
अर्थशास्त्र चयन तथा धन का विज्ञान है। यह व्यक्तिगत सामाजिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सीमितता के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं के बारे में बताता है। इसमें मनुष्यों की आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किए जाने वाले आर्थिक प्रयत्नों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 3.
एना कुत्सोयानिस (A. Koutsoyannis) ने अर्थशास्त्र को किस प्रकार परिभाषित किया है?
उत्तर:
एना कुत्सोयानिस (A. Koutsoyannis) के अनुसार-“आर्थिक सिद्धान्त का उद्देश्य एक व्यक्तिगत इकाई (एक उपभोक्ता, एक उत्पादक व एक फर्म या सरकारी-एजेन्सी) के आर्थिक-व्यवहार तथा उसका एक-दूसरे पर प्रभाव का वर्णन करने वाले मॉडल बनाना है, जिससे एक क्षेत्र, देश या सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था बनती है।”

प्रश्न 4.
व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र की शाब्दिक उत्पत्ति कैसे हुई?
उत्तर:
सर्वप्रथम सन् 1933 में रेग्नर फ्रिश (Ragner Frisch) ने व्यष्टि-अर्थशास्त्र (Micro-Economics) तथा समष्टि-अर्थशास्त्र (Macro-Economics) का प्रयोग किया। Micro तथा Macro अंग्रेजी भाषा के शब्द हैं जिनकी उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द Mikros तथा Makros से हुई है। Micro तथा Macro का अर्थ क्रमशः ‘सूक्ष्म’ व ‘व्यापक है।

प्रश्न 5.
व्यष्टि अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु बताइए।
उत्तर:
व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत उन समस्त सिद्धान्तों तथा नियमों का अध्ययन किया जाता है, जो व्यक्तिगत इकाइयों पर आधारित होते हैं। व्यष्टि अर्थशास्त्र की विषयवस्तु में निम्नलिखित सिद्धान्तों को सम्मिलित किया जाता है –

  1. उपभोग के सिद्धान्त
  2. उत्पादन के सिद्धान्त
  3. वस्तु कीमत के सिद्धान्त
  4. साधन कीमत सिद्धान्त।

प्रश्न 6.
व्यष्टि अर्थशास्त्र की कोई तीन उपयोगिताओं के विषय में बताइए।
उत्तर:

  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों से सम्बन्धित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है।
  2. यह वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमत निर्धारण करने में सहायता प्रदान करता है।
  3. व्यष्टि अर्थशास्त्र बाजार में पूर्वानुमान लगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 7.
गार्डनर एक्ले (Gardner Ackley) द्वारा समष्टि अर्थशास्त्र को किस प्रकार परिभाषित किया है?
उत्तर:
गार्डनर एक्ले (Gardner Ackley) के शब्दों में, “समष्टि-अर्थशास्त्र आर्थिक विषयों पर व्यापक रूप से विचार करता है। समष्टि-अर्थशास्त्र का सम्बन्ध आर्थिक जीवन के पूरे विस्तार की सभी विमाओं (दिशाओं) से होता है। यह (समष्टि अर्थशास्त्र) व्यक्तिगत अंगों का कार्य क़ी विमाओं (दिशाओं) के बजाय, आर्थिक अनुभव के हाथी के सम्पूर्ण आकार, आकृति व कार्य करने के अवलोकन करता है। इस रूपक को बदलने पर, यह उस पूरे वन की विशेषताओं का अध्ययन, उसे बनाने वाले पेड़ों से स्वतन्त्र होकर करता है।”

प्रश्न 8.
समष्टि अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु को बताइए।
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र में पूरी अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित व्यक्तिगत इकाइयों के समूहों (एक देश के) का आर्थिक अध्ययन किया जाता है। इसके अन्तर्गत निम्न सिद्धान्तों अथवा क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है –

  1. आय व रोजगार का सिद्धान्त
  2. व्यापार चक्रों को सिद्धान्त
  3. सामान्य मूल्य स्तर सिद्धान्त
  4. आर्थिक विकास तथा नियोजन का सिद्धान्त
  5. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं विदेशी विनिमय सम्बन्धी सिद्धान्त आदि।

प्रश्न 9.
समष्टि अर्थशास्त्र की कोई तीन उपयोगिताएँ बताइए।
उत्तर:

  1. समष्टि आर्थिक विश्लेषण द्वारा अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझा जा सकता है।
  2. आर्थिक नियोजन में समष्टि अर्थशास्त्र महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. यह आर्थिक नीतियों के निर्धारण की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 10.
“व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र एक-दूसरे के पूरक हैं।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यष्टि तथा समष्टि अर्थशास्त्र एक-दूसरे के पूरक हैं क्योंकि किसी फर्म द्वारा कच्चा माल या मशीन आदि खरीदते समय उसकी कीमत सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था में उसकी मांग पर निर्भर करती है। इसके अलावा अर्थशास्त्र की सामान्य प्रकृति का ज्ञान प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत इकाइयों के व्यवहार को प्रभावित करने वाले सिद्धान्तों का ज्ञान भी जरूरी है।

प्रश्न 11.
व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र में कोई दो अन्तर बताइए।
उत्तर:

  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र में हम विशिष्ट छोटी आर्थिक इकाइयों का अध्ययन करते हैं जबकि समष्टि अर्थशास्त्र में समस्त अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित समग्र योगों व औसतों का अध्ययन करते हैं।
  2. व्यष्टि अर्थशास्त्र वैयक्तिक समस्याओं के समाधान व नियमों एवं नीतियों के विषय में जानकारी देता है जबकि समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की समस्याओं के समाधान व नीतियों के विषय में जानकारी देता है।

प्रश्न 12.
“व्यष्टि अर्थशास्त्र, समष्टि अर्थशास्त्र पर निर्भर है।” इस कथन को दो उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. एक व्यक्तिगत फर्म या उद्योग द्वारा उत्पत्ति के साधनों की जो कीमत दी जाती है वह पूरी अर्थव्यवस्था में उन साधनों की मांग पर निर्भर करती है।
  2. एक फर्म या उद्योग द्वारा कितना माल बाजार में बेचा जाएगा यह समाज की क्रय शक्ति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 13.
समय-तत्व के आधार पर आर्थिक-विश्लेषण की विधियों को समझाइए।
उत्तर:
आर्थिक-विश्लेषण समय के एक विशेष बिन्दु के सम्बन्ध में होने पर स्थैतिक-विश्लेषण कहलाता है। आर्थिक-विश्लेषण समय के दो बिन्दुओं से सम्बन्धित स्थितियों की तुलना करने पर उसे तुलनात्मक-विश्लेषण कहते हैं। इसी प्रकार समय के प्रत्येक बिन्दु की दिनांक के अनुसार होने वाले परिवर्तन का आर्थिक-विश्लेषण प्रावैगिक-विश्लेषण कहलाता है।

प्रश्न 14.
आर्थिक विश्लेषण की निगमन और आगमन विधि में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:

  1. निगमन विधि में सामान्य से विशेष तथा परिकल्पना से तथ्यों की ओर अध्ययन किया जाता है जबकि आगमन विधि के अन्तर्गत विशेष से सामान्य की ओर अध्ययन किया जाता है।
  2. निगमन विधि तर्क-आधारित तथा आगमन विधि आँकड़ो/समंकी व सांख्यिकी की विधि पर आधारित होती है।

प्रश्न 15.
“अर्थशास्त्र की प्रकृति को विज्ञान के रूप में माना जाता है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अर्थशास्त्र विज्ञान है क्योंकि यह भी ज्ञान का क्रमबद्ध अध्ययन है तथा इसमें भी ऐसे सामान्य सिद्धान्त हैं जो कारण एवं परिणाम के परस्पर सम्बन्ध का विश्लेषण करते हैं जैसे–मांग का नियम यह बताता है कि अन्य बातें समान रहने पर कीमत में कमी होने से मांग में वृद्धि तथा कीमत में वृद्धि होने पर मांग घट जाती है। यहाँ कीमत में वृद्धि या कमी कारण है। तथा मांग में वृद्धि या कमी परिणाम है।

प्रश्न 16.
“अर्थशास्त्र एक कला है।” उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं का विश्लेषण एवं उनका निदान कला द्वारा की सम्भव होता है। अर्थशास्त्र के नियमों व विधियों का उपयोग करते हुए गरीबी को कम करना अर्थशास्त्र के कला होने को स्पष्ट करता है। दैनिक जीवन की चुनाव सम्बन्धी समस्याओं के सर्वोत्तम हल, अर्थव्यवस्था के नियमों व विधियों का उपयोग करते हुए करते हैं। अर्थशास्त्र के नियमों व विधियों द्वारा सन्तुष्टि अधिकतम करना, लाभ अधिकतम करना, आर्थिक वृद्धि व विकास करना अर्थशास्त्र के कला होने के उदाहरण हैं।

प्रश्न 17.
आर्थिक विश्लेषण के लिए कौन-कौन सी मुख्य मान्यतायें ली जाती है?
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण के लिए निम्नलिखित मुख्य मान्यतायें ली जाती हैं-

  1. अन्य बातें समान रहें।
  2. आर्थिक इकाई की विवेकशीलता।
  3. आर्थिक मानव।
  4. साम्य या सन्तुलन की आरंभिक दशा।
  5. विशेष सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक संस्थाओं से सम्बन्ध।
  6. जीव विज्ञान व भूगोल से सम्बन्ध।

प्रश्न 18.
उत्पादन सम्भावना वक्र की धारणा को एक चित्र के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र दो वस्तुओं के ऐसे विभिन्न संयोगों को प्रदर्शित करता है जिन्हें उपलब्ध संसाधनों की सहायता से अर्थव्यवस्था में उत्पादित किया जा सकता है।
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय
उपर्युक्त तालिका में दी गयी वस्तुओं ट्रैक्टर व कार की उत्पादन सम्भावनाओं के आधार पर हमें AE उत्पादन सम्भावना वक्र प्राप्त हुआ।

प्रश्न 19.
उत्पादन सम्भावना वक्र नतोदर क्यों होता है? समझाइए।
उत्तर:
एक वस्तु की अतिरिक्त इकाई के उत्पादन हेतु अन्य वस्तु की त्यागी जाने वाली इकाइयों की मात्रा बढ़ती जाती है अर्थात् सीमांत लागत बढ़ती जाती है। इसके कारण ही उत्पादन सम्भावना वक्र मूल बिन्दु की ओर नतोदर होता है।

प्रश्न 20.
उत्पादन सम्भावना वक्र की आधारभूत मान्यताएँ क्या हैं?
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र की प्रमुख आधारभूत मान्यताएँ –

  1. उत्पादन संसाधनों की मात्रा सीमित है उन्हें घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता।
  2. उत्पादन की तकनीक में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता, अतः वह स्थिर है।
  3. अर्थव्यवस्था में दो वस्तुओं या सेवाओं के संयोग का उत्पादन किया जाता है।

प्रश्न 21.
उत्पादन सम्भावना वक्र की आकृति की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
इसकी दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. उत्पादने सम्भावना वक्र नीचे की ओर ढालू होता है क्योंकि एक वस्तु की अधिक मात्रा किसी दूसरी वस्तु की मात्रा को कम करके ही प्राप्त की जा सकती है।
  2. उत्पादन सम्भावना वक्र की आकृति सीमांत अवसर लागत में वृद्धि होने के कारण मूल बिन्दु की ओर अवनतोदर होती है।

प्रश्न 22.
क्या उत्पादन सम्भावना वक्र एक सरल रेखा हो सकती है?
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र एक सरल रेखा हो सकती है लेकिन व्यवहार में साधारणत: ऐसा नहीं होता है क्योंकि वास्तविकता में सीमान्त विस्थापन दर स्थिर नहीं होती है। अत: उत्पादन सम्भावना वक्र अवनतोदर वक्र के रूप में ही बनता है।

प्रश्न 23.
सीमांत अवसर लागत को चित्र की मदद से समझाइए।
उत्तर:
किसी एक वस्तु की सीमांत अवसर लागत किसी अन्य वस्तु की त्यागी हुई मात्रा के बराबर होती है। रेखाचित्र स्पष्ट करता है कि हमें चावल के उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के लिए गेहूं के उत्पादन की मात्रा को कम करना पड़ेगा।
RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का परिचय

प्रश्न 24.
सीमान्त अवसर लागत में वृद्धि के क्या कारण होते हैं?
उत्तर:
जैसे ही उत्पादन के साधन का प्रयोग अधिक इकाइयों के उत्पादन हेतु किया जाता है वैसे ही उत्पादन करने वाले साधन की उत्पादकता घटती जाती है। अत: हमें एक वस्तु की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने हेतु दूसरी वस्तु की अधिकाधिक इकाई त्यागनी पड़ती है।

प्रश्न 25.
आर्थिक समस्या से क्या आशय है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक समस्या से आशय अर्थव्यवस्था में आने वाली उन समस्याओं से है जो उत्पादन एवं वितरण से सम्बन्धित होती हैं। प्रमुख रूप से ये समस्याएँ असीमित मानवीय आवश्यकताओं एवं संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण उत्पन्न होती हैं। जिससे चयन की समस्या उत्पन्न होती है, यही आर्थिक समस्या कहलाती है।

प्रश्न 26.
“क्या उत्पादन किया जाए” की समस्या समझाइए।
उत्तर:
असीमित आवश्यकता एवं सीमित संसाधनों के कारणं पहली समस्या यह होती है कि उत्पादन किस वस्तु या सेवा का किया जाये जिससे अधिकतम सन्तुष्टि मिल सके। इसके लिए यह जानना जरूरी है कि उत्पादन उपभोक्ता वस्तुओं का किया जाय या पूंजीगत वस्तुओं का तथा किस अनुपात में उत्पादन हो।

प्रश्न 27.
“कैसे उत्पादन किया जाए” की समस्या को समझाइये?
अथवा
“उत्पादन कैसे करें” की समस्या की व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
यह अर्थव्यवस्था की दूसरी प्रमुख समस्या है। इसका सम्बन्ध-वस्तु या सेवा के उत्पादन हेतु तकनीकी के चयन से है। एक अर्थव्यवस्था को यह चयन करना पड़ता है कि उसके लिये श्रम प्रधान तकनीकी उचित रहेगी या पूंजी प्रधान तकनीकी

प्रश्न 28.
अर्थव्यवस्था का क्या अर्थ है? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था का अर्थ किसी देश के उस सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक संगठन, ढाँचा, संरचना या बनावट से होता है. जिसमें लोग वैधानिक तरीकों से आर्थिक क्रियायें कर जीवन यापन करते हैं। अर्थव्यवस्था के मुख्य तीन प्रकार होते हैं –

  1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था।
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था।
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था।

RBSE Class 12 Economics Chapter 1 निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आर्थिक विश्लेषण की विभिन्न विधियों को समझाइये?
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण करने की भिन्न-भिन्न विधियाँ होती हैं जो भिन्न-भिन्न आधार, उद्देश्य व अन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर काम में ली जाती हैं जिनका विवरण निम्न प्रकार है –

(A) निर्भरता के आधार आर्थिक विश्लेषण

  1. आंशिक विश्लेषण (Partial analysis)-जब आर्थिक विश्लेषण किसी एक कारक को ध्यान में रखकर किया जाता है। तब वह आंशिक विश्लेषण कहलाता है; जैसे-वस्तु की मॉग को उसी वस्तु की कीमत को ध्यान में रखते हुए करना।
  2. सामान्य विश्लेषण (General analysis)-वस्तु की मॉग का अध्ययन उस वस्तु की कीमत के साथ-साथ अन्य कारकों के आधार पर किया जाने वाला अध्ययन सामान्य विश्लेषण कहा जाता है। जैसे—उपभोक्ता की आमदनी आदि के आधार पर किये जाने वाले विश्लेषण।

(B) समय तत्व के आधार पर आर्थिक विश्लेषण

  1. स्थैतिक विश्लेषण (Static analysis) – आर्थिक विश्लेषण समय के एक विशेष बिन्दु के सम्बन्ध में होने पर स्थैतिक विश्लेषण कहलाता है।
  2. तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative analysis) – जब समय के दो बिन्दुओं से सम्बन्धित स्थितियों की तुलना की जाती है तो उसे तुलनात्मक विश्लेषण कहते हैं।
  3. प्रावैगिक विश्लेषण (Dynomic Analysis) – समय के प्रत्येक बिन्दु की दिनांक के अनुसार होने वाले परिवर्तन को प्रावैगिक विश्लेषण कहते हैं।

(C) उपकरण व दिशा के आधार पर आर्थिक विश्लेषण

  1. निगमन विधि (Deductive method) – इस विधि के अनतर्गत किसी एक विशेष इकाई के आर्थिक विश्लेषण तर्क विधि के आधार पर करते हैं। निगमन विधि को काल्पनिक, निराकर तथा तर्कविधि भी कहते हैं। निगमन विधि में सामान्य से विशेष तथा परिकल्पना से तथ्यों की ओर अध्ययन किया जाता है।
  2. आगमन विधि (Inductive method) – वास्तविक जगत की घटनाओं से सम्बन्धित तथ्यों के संकलन, वर्गीकरण व विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाले जाते हैं। आगमन विधि को अनुभव पर आधारित विधि अथवा ऐतिहासिक विधि भी कहते हैं।

प्रश्न 2.
उत्पादन सम्भावना वक्र की अवधारणा को विस्तार से समझाइये?
अथवा
वस्तु रूपान्तरण वक्र किसे कहते हैं? उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर:
उत्पादन सम्भावना वक्र की अवधारणा (Concept of production Possibility Curve) – डोमिनिक सेलवेटोर के अनुसार–“वह वक्र जो यह बताता है कि एक देश उपलब्ध श्रेष्ठतम तकनीकी व अपने सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए वस्तुओं के वैकल्पिक संयोगों के द्वारा जिन्हें वह उत्पादित कर सकता है, उत्पादन सम्भावना वक्र या वस्तु रूपान्तरण वक्र कहलाता है। अन्य शब्दों में एक फर्म को यह निश्चित करना होता है कि उसे विभिन्न पदार्थों की कितनी मात्रायें उत्पादित करनी चाहिये। अब हम उस फर्म की स्थिति पर विचार करेंगे जो केवल दो पदार्थ उत्पादित करती है। इसका कारण यह है कि दो पदार्थों की स्थिति की व्याख्या ‘उत्पादन सम्भावना वक्र की सहायता से की जा सकती है। उत्पादन सम्भावना वक्र का विचार निम्न सारणी की सहायता से समझा जा सकता है –
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यहाँ पर यह मान लिया गया है कि फर्म के पास साधनों की दो मात्रा हैं तथा वह दी हुई तकनीकी के अन्तर्गत कार्य कर रही है। इन मान्यताओं को स्वीकार करते हुए ऊपर दी हुई सारणी X तथा Y वस्तुओं के विभिन्न वैकल्पिक उत्पादन सम्भावनाओं को प्रदर्शित करती है।

यदि फर्म द्वारा उत्पादन के सभी साधन Y वस्तु के उत्पादन में लगाये जाते हैं तो Y वस्तु की 15 इकाईयाँ उत्पादित की जाती हैं इसी प्रकार यदि फर्म सम्पूर्ण साधन X वस्तु को उत्पादित करने के लिये लगाती है तो वह X वस्तु की 5 इकाईयाँ उत्पादित करती है किन्तु ये केवल दो चरम उत्पादन सम्भावनायें हैं। इन दोनों के मध्य अन्य अनेक उत्पादन सम्भावनायें जैसे – B, C, D, E, है। उपरोक्त सारणी से स्पष्ट है कि साधनों की मात्रा दी होने पर एवं फर्म एक वस्तु की अधिक मात्रा का उत्पादन केवल दूसरी वस्तु के उत्पादन में कटौती द्वारा ही कर सकती है।

सारणी की वैकल्पिक उत्पादन सम्भावनाओं को निम्न चित्रे द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है –
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AF वक्र उत्पादन सम्भावना वक्र कहलाता है जो दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोगों को प्रदर्शित करता है जिन्हें फर्म दिये हुए साधनों की मात्रा से उत्पादित कर सकती है। उत्पादन सम्भावना वक्र यह दिखाता है कि साधनों के दिये होने पर, एक वस्तु के उत्पादन में वृद्धि करने पर अन्य वस्तु के उत्पादन में कमी आवश्यक हो जाती है।

प्रश्न 3.
अवसर लागत से क्या आशय है? उत्पादन सम्भावना वक्र के संदर्भ में अवसर लागत की अवधारणा को समझाइए।
अथवा
उत्पादन सम्भावना तालिका की सहायता से अवसर लागत का अर्थ समझाइए। (CBSE, outside Delhi, 2013)
उत्तर:
अवसर लागत से आशय
(Meaning of Opportunity Cost)

सामान्यतया एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों की पूर्ति उनकी माँग की तुलना में कम होती है इसलिए जब एक वस्तु के उत्पादन में वृद्धि की जाती है या नई वस्तु का उत्पादन किया जाता है तो अन्य वस्तुओं की उन मात्राओं का त्याग करना पड़ता है, जिनमें इन साधनों का प्रयोग किया जाता हैं मान लीजिए एक किसान खेत में गेहूँ और सरसों पैदा करता है तो गेहूं का उत्पादन करने के लिए सरसों के उत्पादन का त्याग करना पड़ता है। सरसों की कीमत जिसका त्याग किसान द्वारा किया जाता है वह गेहूँ की अवसर लागत कहलाती है। अत: हम कह सकते हैं कि किसी वस्तु की अवसर लागत उन त्यागे गये वैकल्पिक पदार्थों का मूल्य होती है जिन्हें इस उत्पादित वस्तु के उत्पादन में लगाये गये साधनों द्वारा उत्पन्न किया जाता है। लेकिन अवसर लागत के सम्बन्ध में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक त्यागे गये विकल्प की लागत अवसर लागत नहीं होती है बल्कि त्यागे गये विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ विकल्प की लागत अवसर लागत कहलाती है।
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इस उत्पादन सम्भावना वक्र (Production Possibility Curve) द्वारा यह स्पष्ट हो जाता है कि जैसे-जैसे गेहूं की अधिक मात्रा उत्पादित करने के लिए सरसों के उत्पादन को त्यागा जायेगा तो वह सरसों के उत्पादन की त्यागी गयी कीमत गेहूँ की अवसर लागत कहलायेगी।

प्रश्न 4.
सीमान्त अवसर लागत की अवधारणा क्या है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
सीमान्त अवसर लागत की अवधारणा (Concept of marginal oppeortunity cost)-उत्पादन के लिये संसाधनों को एक वस्तु के उत्पादन से हटाकर दूसरी वस्तु के उत्पादन की ओर मोड़ते हैं। एक वस्तु की एक अतिरिक्त मात्रा का उत्पादन बढ़ाने के लिये दूसरी वस्तु के उत्पादन में कमी करनी पड़ती है। इस प्रकार एक अतिरिक्त मात्रा का उत्पादन बढ़ाने के लिये दूसरी वस्तु के उत्पादन में कमी की जाती है। दूसरी वस्तु के उत्पादन में की गई कमी की मात्रा प्रथम वस्तु की सीमान्त अवसर लागत कहलाती हैं।
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उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि संसाधनों को जब एक वस्तु (x) की एक अतिरिक्त मात्रा का उत्पादन बढ़ाने के लिये दूसरी वस्तु (y) के उत्पादन में कमी करनी पड़ती है। इस प्रकार एक अतिरिक्त मात्रा का उत्पादन बढ़ाने के लिये दूसरी वस्तु (y) के उत्पादन में कमी की जाती है। दूसरी वस्तु (y) के उत्पादन में की गई कमी की मात्रा प्रथम वस्तु (x) की सीमान्त अवसर लागत कहलायेगी।

प्रश्न 5.
मुख्य आर्थिक समस्याओं के समाधान उत्पादन सम्भावना वक्र की अवधारणा से समझाइये?
उत्तर:
मुख्य आर्थिक समस्याओं के समाधान पूँजीवादी, समाजवादी व मिश्रित अर्थव्यवस्था के प्रकारो के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार से किये जा सकते हैं। जो निम्नलिखित हैं-
1. क्या उत्पादन किया जाए? (What to produce.?)-क्या उत्पादन किया जाये की समस्या में दो आयाम होते हैं किन वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाए तथा किस मात्रा में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जाए। भूमि, श्रम, पूँजी आदि विभिन्न साधनों के द्वारा उत्पादित की जाने वाली वस्तुए अलग-अलग प्रकार – की होती हैं और यह समाधान अर्थव्यवस्था के प्रकार पर निर्भर करता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में कीमत व लाभ, समाजवादी अर्थव्यवस्था में सामाजिक आर्थिक कल्याण तथा मिश्रित अर्थव्यवस्था में उचित सन्तुलन को ध्यान में रखकर समाधान किया जाता है। निम्न रेखाचित्र के अनुसार इसको समझ सकते हैं।
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उपरोक्त रेखाचित्र में चावल और गेहूं का उत्पादन करना है। अत: दोनों के उत्पादन की भिन्न-भिन्न मात्रा को समस्त उत्पादन के साधनों द्वारा जैसे-(O-अ) मात्रा में गेहूं या (0-ब) में चावल को उत्पादन सम्भव है। इसी प्रकार वक्र अ-ब पर कोई अन्य मात्रा जैसे स या द का चुनाव करते हुए उत्पादन करना होता है।

2. कैसे उत्पादन किया जाये? (How to produce?) – एक बार वस्तु या सेवा का चयन हो जाने के बाद दूसरी समस्या ‘कैसे उत्पादन उत्पादन सम्भावना वक्र किया जाए’ की होती है। यहाँ कैसे उत्पादन किया जाए से अभिप्राय उत्पादन की तकनीकी से है। उत्पादन में मुख्य रूप से श्रम प्रधान तकनीकी और पूँजी प्रधान (मशीनों) प्रयुक्त होती है। यहाँ श्रम अथवा पूँजी (मशीनों द्वारा) उत्पादन का संगठन व तकनीकी का चुनाव करना हैं होता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में न्यूनतम लागत, समाजवादी अर्थव्यवस्था में समाज अनुकूल तकनीक तथा मिश्रित अर्थव्यवस्था में उपयुक्तता के आधार पर उत्पादन की तकनीकों का समाधान किया जाता. है, इसको नीचे दिये रेखाचित्र के द्वारा समझ सकते हैं।
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उपरोक्त रेखाचित्र में श्रम साधनों को (0 से स) मात्रा द्वारा या (0 से द) मात्रा में पूँजी (मशीनों द्वारा) की भिन्न-भिन्न मात्रा के द्वारा उत्पादन की मात्रा का चुनाव करना होता हैं साधनों की मात्रा का चुनाव वक्र स-पर कोई अन्य मात्रा में से करते हुए उत्पादन का निर्णय करना होता है।

3. किसके लिए उत्पादन किया जाये? (For whom to produce?) – वस्तु या सेवा अथवा उत्पादन के संगठन व तकनीकी के बाद अर्थव्यवस्था में यह समस्या उत्पादन के वितरण से सम्बन्धित होती है। जिसका समाधान पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में है उत्पादन में योगदाता को, समाजवादी अर्थव्यवस्था में कल्याण तथा है। मिश्रित अर्थव्यवस्था में उचित सन्तुलन को ध्यान में रखकर किया है जाता है। माना समाज में दो समूह धनी व निर्धन वर्ग में उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं के वितरण का चुनाव करना हो तो इसको नीचे दिये रेखाचित्र की सहायता से समझ सकते हैं।
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उपरोक्त रेखाचित्र में उत्पादन का (0 से य) मात्रा द्वारा सम्पूर्ण धनी व्यक्ति वितरण निर्धन वर्ग को या (0 से र) मात्रा में उत्पादन का सम्पर्ण वितरण धनी वर्ग को किया जा सकता हैं इसी प्रकार वक्र य-र पर कोई अन्य मात्राओं के संयोगों में से दोनों वर्ग को उत्पादन का सम्पूर्ण वितरण का चुनाव कर सकते हैं।

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