RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

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Rajasthan Board RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
चिट्टे के समता एवं दायित्वों के भाग की कुल राशि में सम्मिलित होती है
(Total amount of equity and liabilities part of the Balance Sheet includes the following)
(अ) अधिकृत पूँजी (authorized capital)
(ब) निर्गमित पूँजी (issued capital)
(स) प्रार्थित पूँजी (subscribed capital)
(द) चुकता पूँजी (paid up capital)

प्रश्न 2.
अंशों के निर्गमन पर प्राप्त प्रीमियम को दर्शाया जाता है
(Premium received on issue of shares is shown on)
(अ) चिट्टे के समता एवं दायित्व भाग पर (Equity & Liabilities part of the balance sheet)
(ब) चिट्टे के सम्पत्ति भाग पर (Assets part of the balance sheet)
(स) लाभ-हानि विवरण के आय भाग पर (Income part of the statement of profit & loss)
(द) लाभ-हानि विवरण के व्यय भाग पर (Expenses part of the statement of profit & loss)

प्रश्न 3.
समता अंशधारी होते हैं
(Equity shareholders are)
(अ) कम्पनी के ग्राहक (Customers of the company)
(ब) कम्पनी के अधिकारी (Officers of the company)
(स) कम्पनी के लेनदार (Creditors of the company)
(द) कम्पनी के स्वामी (Owners of the company)

प्रश्न 4.
अंशों के निर्गमन पर प्रीमियम का उपयोग नहीं किया जा सकता
(Premium on issue of shares cannot be used for)
(अ) सदस्यों को बोनस अंश निर्गमित करने के लिए (For issuing bonus shares to members)
(ब) सदस्यों को लाभांश बांटने के लिए (For paying dividend to members)
(स) प्रारम्भिक व्ययों के अपलेखन के लिए (For writing off preliminary expenses)
(द) ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा अपलेखन के लिए (For writing off discount on issue of debentures)

प्रश्न 5.
सारणी एफ के अनुसार कम्पनी अग्रिम मांग पर ब्याज दे सकती है
(As per table F a company can pay interest on calls-in-advance at)
(अ) 8%
(ब) 10%
(स) 12%
(द) 14%.

प्रश्न 6.
न मांगी गई पूँजी का वह भाग जिसे कम्पनी के समापन पर ही माँगा जा सकता है, कहलाता है
(The part of uncalled capital which can be called up only when the company being wound up is called)
(अ) निर्गमित पूँजी (Issued capital)
(ब) संचित पूँजी (Reserve capital)
(स) पूँजी संचय (Capital reserve)
(द) अनिर्गमित पूँजी (Unissued capital)

प्रश्न 7.
ऋणपत्रधारी होते हैं
(Debenture holders are)
(अ) कम्पनी के स्वामी (Owners of the company)
(ब) कम्पनी के ग्राहक (Customers of the company)
(स) कम्पनी के ऋणदाता (Loan providers of the company)
(द) इनमें से कोई नहीं (None of these)

प्रश्न 8.
ऋणपत्रधारी प्राप्त करते हैं (Debenture holders receive)
(अ) लाभ (Profit)
(ब) लाभांश (Dividend)
(स) किराया (Rent)
(द) ब्याज (Interest)

प्रश्न 9.
ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा या हानि, जो चिट्टे की तिथि से 12 माह पश्चात् या संचालन चक्र की अवधि के पश्चात् अपलिखित होगा दर्शाया जाता है
(Discount or loss on issue of debentures to be written off after 12 months from the date of balance sheet or after the period of operating cycle is shown as)
(अ) अन्य गैर चालू सम्पत्तियाँ (Other non-current assets)
(ब) अन्य गैर चालू दायित्व (Other non-current liabilities)
(स) अन्य चालू सम्पत्तियाँ (Other current assets)
(द) अन्ये चालू दायित्व (Other current liabilities)

प्रश्न 10.
ऐसे ऋणपत्र जो समता अंशों में परिवर्तित किये जा सकते हैं, कहलाते हैं
(The debentures which can be converted into equity shares are called)
(अ) शोधनीय ऋणपत्र (Redeemable debentures)
(ब) पंजीकृत ऋणपत्र (Registered debentures)
(स) वाहक ऋणपत्र (Bearer debentures)
(द) परिवर्तनीय ऋणपत्र (Convertible debentures)

प्रश्न 11.
ऋणपत्रों के समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमन की स्थिति में, यदि प्रविष्टि की जाती है तो किस खाते को नामे किया जाएगा
(In the case of issue of debentures as collateral security, if entry is pass which account will be debited)
(अ) ऋण खाती (Loan account)
(ब) ऋणपत्र खाता (Debenture account)
(स) ऋणपत्र उचन्त खाता (Debenture suspense account)
(द) बैंक खाता (Bank account)

उत्तर-
1. (द),
2. (अ),
3. (द),
4. (ब),
5. (स),
6. (ब),
7. (स),
8. (द),
9. (अ),
10. (द),
11. (स)

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कम्पनी को परिभाषित कीजिये।
उत्तर-
कम्पनी विधान द्वारा निर्मित कृत्रिम व्यक्ति है जिसका अपने सदस्यों से पृथक् अस्तित्व एवं अविच्छिन्न उत्तराधिकार होता है जो अपना कार्य सार्वमुद्रा द्वारा करती है।

प्रश्न 2.
एक व्यक्ति वाली कम्पनी क्या है ?
उत्तर-
एक व्यक्ति वाली कम्पनी से आशय उसे कम्पनी से है जिसमें एक ही व्यक्ति सदस्य के रूप में होता है।

प्रश्न 3.
अंश से क्या आशय है ?
उत्तर-
एक कम्पनी की अंश पूँजी निर्धारित मूल्य वाली छोटी-छोटी इकाइयों में विभक्त होती है प्रत्येक इकाई को अंश कहते

प्रश्न 4.
अंशों के दो प्रकारों के नाम बताइये ।
उत्तर-

  • समता अंश
  • पूर्वाधिकार अंश ।

प्रश्न 5.
पंजीकृत पूँजी को अर्थ बताइये ।
उत्तर-
पंजीकृत पूँजी से आशय ऐसी पूँजी से है जो कम्पनी के पार्षद सीमानियम द्वारा अधिकृत पूँजी की अधिकतम राशि है।

प्रश्न 6.
निर्गमित पूँजी से क्या आशय है ?
उत्तर-
निर्गमित पूँजी से आशय ऐसी पूँजी से है जिसे कम्पनी द्वारा समय-समय पर अभिदान के लिये निर्गमित किया जाता है। यो कम्पनी द्वारा जनता को नकद धन या अन्य किसी प्रतिफल के बदले निर्गमित किये गये अंशों के कुल अंकित मूल्य को निर्गमित पूँजी कहते हैं।

प्रश्न 7.
अभिदत्त पूँजी से क्या आशय है ?
उत्तर-
अभिदत या प्रार्थित पूँजी से आशय पूँजी के उस भाग से है जो समय-समय पर कम्पनी के सदस्यों द्वारा प्रार्थित की गई। हो । प्रार्थित या अभिदत्त पूँजी निर्गमित पूँजी का एक भाग है जिसके लिये अभिदान किया जा चुका है।

प्रश्न 8.
अधि अभिदान से क्या आशय है ?
उत्तर-
जब एक कम्पनी को प्रस्तावित अंशों की तुलना में अधिक अंश खरीदने के लिये आवेदन पत्र प्राप्त हो जाते हैं तो इसे अधि अभिदान कहते हैं।

प्रश्न 9.
परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंश से क्या आशय है ? ।
उत्तर-
ऐसे पूर्वाधिकार अंश जिनके धारकों को यह अधिकार प्रदान किया जाता है कि वो एक निश्चित तिथि तक अपने अंशों को समता अंशों में परिवर्तित करा सकते हैं उन्हें परिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश कहते हैं ।

प्रश्न 10.
अंश आबंटन से क्या आशय है ?
उत्तर-
अंश आबंटन से आशय अंशों का आवेदकों के मध्य बँटवारा करने से है । एक आवेदक अंश आबंटन के उपरान्त ही अंशधारी बनता है।

प्रश्न 11.
अंशों के यथानुपात बंटन से क्या आशय है ?
उत्तर-
कम्पनी द्वारा जितने अंशों के लिए प्रार्थना पत्र आमंत्रित किये हैं और यदि आवेदन अंशों की संख्या से अधिक प्राप्त हो जाते हैं तो उन अंशों को आवेदन पत्रों के अनुपात में बाँटना यथानुपात बंटन कहलाता है।

प्रश्न 12.
अंशों के प्रीमियम पर निर्गमन से क्या आशय है ?
उत्तर-
जब अंशों को उनके अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर निर्गमित किया जाता है तो उसे अंशों के प्रीमियम पर निर्गमन कहते

प्रश्न 13.
कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत क्या कम्पनी अपने अंशों को बट्टे पर निर्गमित कर सकती है ?
उतर-
नहीं, कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत कोई भी कम्पनी अपने अंशों को बट्टे पर निर्गमित नहीं कर सकती ।

प्रश्न 14.
बकायो माँग का अर्थ बताइये।
उत्तर-
जब कोई अंशधारी कम्पनी द्वारा माँगी गयी अंश पूँजी के किसी भाग को चुका नहीं पाता तो उसे बकाया मांग (Calls in Arrears) कहते हैं।

प्रश्न 15.
ऋणपत्र का अर्थ बताइये ।।
उतर-
ऋणपत्र से आशय एक कम्पनी द्वारा लिये गये ऋण के बदले दी गई अभिस्वीकृति से है। ऋणपत्र कम्पनी की सार्वमुद्रा के अन्तर्गत निर्गमित किया जाता है।

प्रश्न 16.
बांड क्या है ?
उत्तर-
बंधपत्र (Bond) की बनावट एवं विषय सामग्री ऋणपत्र के समान होती है । परम्परागत रूप से इनका निर्गमन सरकार द्वारा किया जाता था।

प्रश्न 17.
सुरक्षित ऋणपत्र से क्या आशय है ?
उत्तर-
चे ऋणपत्र जो कम्पनी की सम्पत्तियों पर स्थायी या चल प्रभार से सुरक्षित होते हैं। कम्पनी द्वारा इन ऋणपत्रों का भुगतान न पाने की दशा में वे इन सम्पत्तियों को बेचकर अपने ऋण का भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 18.
अपरिवर्तनीय ऋणपत्रों से क्या आशय है ?
उत्तर-
वे ऋणपत्र जिनका परिवर्तन अंश या अन्य प्रतिभूतियों में नहीं किया जा सकता हो अपरिवर्तनीय ऋणपत्र कहलाते हैं।

प्रश्न 19.
अंश एवं ऋणपत्र में क्या अन्तर है ?
उत्तर
अंश कम्पनी की पूँजी का हिस्सा होते हैं जबकि ऋणपत्र, ऋण की स्वीकृति होते हैं।

प्रश्न 20.
समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन से क्या आशय है ?
उत्तर-
समपार्विक या सहायक प्रतिभूति से आशय उस अतिरिक्त प्रतिभूति से है जो ऋणदाता को मुख्य प्रतिभूति के अतिरिक्त दी जाती है।

प्रश्न 21.
ऋणपत्रों पर ब्याज की प्रकृति क्या है ?
उत्तर-
आयगत व्यय प्रकृति है।

प्रश्न 22.
ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि से क्या आशय है ?
उत्तर-
जब ऋणपत्रों को बड़े पर निर्गमित किया गया हो तथा शोधन प्रीमियम पर किया जाये तो इसे ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि कहते हैं।

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कम्पनी की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर-

  • विधान द्वारा निर्मित कृत्रिम व्यक्ति
  • पृथक् वैधानिक अस्तित्व
  • सीमित दायित्व
  • सार्वमुद्रा
  • समामेलित संस्था,
  • हस्तान्तरण योग्य अंश ।

प्रश्न 2.
निजी कम्पनी क्या है ?
उत्तर-
निजी कम्पनी से आशय ऐसी कम्पनी से है जो अपने अंशों के हस्तान्तरण पर प्रतिबन्ध लगाती है तथा अपने सदस्यों की संख्या 200 तक सीमित रखती है। ऐसी कम्पनी को अपने नाम के अन्त में Private Limited शब्द लगाना अनिवार्य होता है।

प्रश्न 3.
अंशों द्वारा सीमित कम्पनी से आपको क्या आशय है ?
उत्तर-
जिस कम्पनी के सदस्यों का दायित्व उसके पार्षद सीमानियम द्वारा उनके द्वारा धारित अंशों पर अदत्त राशि की सीमा तके ही सीमित होता है उसे अंशों द्वारा सीमित कम्पनी कहते हैं।

प्रश्न 4.
समता अंश या पूर्वाधिकार अंश में क्या अन्तर है?
उत्तर-
पूर्वाधिकार अंशों को समता अंशों से पहले लाभांश प्राप्त करने का तथा कम्पनी के समापन की दशा में पहले पूँजी वापस प्राप्त करने का अधिकार होता है । समता अंशों को बाद में ।

प्रश्न 5.
अधिमान अंशों के तीन प्रकारों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर-

  • संचयी पूर्वाधिकार अंश ।
  • असंचयी पूर्वाधिकार अंश ।
  • परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंश

प्रश्न 6.
संचित पूँजी से क्या आशय है ?
उत्तर-
संचित पूँजी से आशय न मांगी गयी पूँजी के उस भाग से है जिसे एक विशेष प्रस्ताव पास करके भविष्य में समापन के समय ही माँगने के लिए सुरक्षित कर दिया जाता है।

प्रश्न 7.
प्रतिभूति प्रीमियम खाते के उपभोग से सम्बन्धित धारा 52 के प्रावधान बताइये।
उत्तर-

  • सदस्यों को पूर्ण प्रदत्त बोनस अंश निर्गमित करने के लिये ।
  • कम्पनी के प्रारम्भिक व्ययों को अपलिखित करने के लिये।
  • अपने अंशों को क्रय करने के लिये ।
  • कम्पनी के किसी भी शोधनीय पूर्वाधिकार अंश व ऋणपत्रों के शोधन पर देय प्रीमियम का प्रबन्ध करने के लिये।
  • अंश व ऋणपत्र के निर्गमन व्यय या दिये गये कमीशन या ऋणपत्रों पर दिये गये बट्टे को अपलिखित करने के लिये ।

प्रश्न 8.
न्यूनतम अभिदान से आप क्या समझते हैं ?
उतर-
धारा 39 (1) के अनुसार, कम्पनी द्वारा अपनी प्रतिभूतियों का आबंटन तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि प्रविवरण में वर्णित न्यूनतम राशि के लिये अभिदान प्राप्त न हो । सेबी (SEBI) के निर्देशानुसार जब तक सम्पूर्ण निर्गमन के कम से कम 90% के बराबर अभिदान प्राप्त न हो जाय तब तक कम्पनी आबंटन नहीं कर सकती है अतः यही न्यूनतम अभिदान कहलाता है।

प्रश्न 9.
स्वेट समता अंशों से क्या आशय है।
उत्तर-
स्वेट समता अंशों से आशय ऐसे समता अंशों से है जो किसी कम्पनी द्वारा अपने संचालकों या कर्मचारियों को बट्टे पर या रोकड़ के अतिरिक्त अन्य प्रतिफल के लिये जारी किये जाते हैं।

प्रश्न 10.
कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना का अर्थ लिखिये।
उतर-
इस योजना के अन्तर्गत कम्पनियों के द्वारा अपने संचालकों, अधिकारियों, कर्मचारियों को अपने समता अंश प्रचलित बाजार मूल्य से कम मूल्य पर खरीदने का अधिकार दिया जाता है। ये व्यक्ति अपनी इच्छानुसार इन प्रस्तावित अंशों को खरीद सकते हैं।

प्रश्न 11.
एस्क्रो खाते को समझाइये।
उत्तर-
एस्क्रो शब्द से आशय एक अनुबन्ध के तहत किसी विनिर्दिष्ट शर्त के पूरा हो जाने तक गारन्टी के रूप में तृतीय पक्षकार के पास जमा की गयी नकदी या प्रतिभूतियों से है।
कम्पनी अपने अंशों का क्रय योजना के तहत अंश वापस खरीद रही है तो उसे किसी बैंक में एस्क्रो खाता खोलना होता है।

प्रश्न 12.
ऋणपत्र कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
ऋणपत्रों के प्रकार

  • सुरक्षा के आधार पर (A) सुरक्षित (B) असुरक्षित ऋणपत्र ।
  • शोधन के आधार पर (A) शोधनीय (B) अशोधनीय ऋणपत्र ।
  • पंजीयन के आधार पर (A) पंजीकृत (B) वाहक ऋणपत्र ।
  • पुनर्भुगतान के आधार पर (A) प्रथम (B) द्वितीयक ऋण पत्र ।
  • ब्याज की दर के आधार पर (A) निश्चित (B) शून्य ब्याज दर वाले ।
  • परिवर्तनशीलता के आधार पर (A) परिवर्तनीय ऋणपत्र (B) अपरिवर्तनीय ऋणपत्र ।

प्रश्न 13.
अंश व ऋणपत्र में चार अन्तर बताइये।
उत्तर-
अंश व ऋणपत्रों में अन्तर-

अन्तर का आधारे अंश ऋणपत्र
1. स्वामित्वअंशों के धारक कम्पनी के स्वामी होते हैं।ऋणपत्रों के धारक ऋणदाता कहलाते हैं।
2. हिस्साअंश कम्पनी की पूँजी का हिस्सा है।ऋणपत्र ऋण की स्वीकृति है ।
3. सुरक्षाअंश सुरक्षित नहीं होते हैं।ऋणपत्र कम्पनी को सम्पत्ति पर प्रभार द्वारा सुरक्षित हो सकते हैं।
4. मताधिकारअंशधारी को साधारण सभा में उपस्थित होने एवं मतदान करने का अधिकार होता है।इनको नहीं ।

प्रश्न 14.
समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन का अर्थ एवं लेखांकन व्यवहार समझाइये।
उत्तर-
समपाश्विक प्रतिभूति से आशय उस अतिरिक्त प्रतिभूति से है जो ऋणदाता को मुख्य प्रतिभूति के अतिरिक्त दी जाती है । ऋण की अतिरिक्त जमानत के रूप में जब किसी कम्पनी द्वारा बैंक को अपने ऋणपत्र भी निर्गमित किये गये हों तो ऋणपत्र समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमन कहलाते हैं।
इनका लेखांकन निम्न दो में से किसी एक तरीके से किया जा सकता है –

  1. इसमें निर्गमन पर कोई प्रविष्टि नहीं की जाती । चिड़े में कम्पनी द्वारा लिये गये ऋण को समता एवं दायित्व भाग में (Non current Liab) शीर्षक के उपशीर्षक (Long Term Borrowings) के अन्तर्गत Bank Loan के नीचे समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्र निर्गमन को दर्शा देते हैं।
  2. इस विधि में समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्र निर्गमन पर निम्न लेखा प्रविष्टि की जाती है
    (a) ऋणपत्र निर्गमन पर Debenture Suspense A/c Dr.
    To Debenture A/C
    जब तक ऋण का भुगतान नहीं किया जाता है तब तक चिड़े में Debenture A/c को समता एवं दायित्व वाले भाग में Non Current Liab के उप शीर्षक Long Term Borrowing के अन्तर्गत दिखाया जाता है तथा Debenture Suspense A/c को इन ऋणपत्रों में से घटाकर दर्शाया जाता है।

प्रश्न 15.
तरुण लि. ने Rs 4,00,000 का भवन और Rs 2,60,000 का संयत्र एवं मशीनरी हरी से ख़रीदी । क्रय मूल्य का भुगतान Rs 100 वाले 8% ऋणपत्रों का 10% प्रीमियम पर निर्गमन द्वारा किया गया आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये।
उत्तर-

  1. Building A/C Dr. 4,00,000
    Plant & Mach. A/c Dr. 2,60,000
    To Hari 6,60,000
    (Being Building & Plant & Machinery Purchased from Hari)
  2. Hari’s A/c Dr. 6,60,000
    To 8% Debenture A/c 6,00,000
    To Security Premium A/c 60,000
    (Being 6,000 8% debenture of Rs 100 each issued to Hari at a premium of 10%)

प्रश्न 16.
अभिनव लिमिटेड ने Rs 100 झाडे 2000, 99, ऋणपत्र 4% बट्टे पर निर्गमित किये जिनका शोधन 5% प्रीमियम पर होगा। अभिनव लिमिटेड की पुस्तकों में ऋणपत्र निर्गमन के समय की जाने वाली जर्मन प्रविधियाँ दीजिये।
उत्तर-

  1. Bank A/c Dr. 1,92,000
    To Debenture Application A/C 1,92,000
    (Being application money received from 2000 debenture @ Rs 96 each)
  2. Debenture Application A/c Dr. 1,92,07
    Discount on Issue of Deb. A/c Dr. 8,000
    Loss on Issue of Debenture A/C Dr. 10,000
    To 9% Debenture 2,00,000
    To Premium on Redemption of Debenture A/c 10,000
    (Being 9% debenture issue at discount and provided for Premium payable on Redemption)

प्रश्न 17.
बकाया ऋणपत्र एवं ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि को चिट्टे में किन शीर्षकों के अन्तर्गत दर्शाया जायेगा।
उत्तर-
बकाया ऋणपत्रों को चिट्टे में समता एवं दायित्व वाले भाग में Non Current Liab. के उपशीर्षक Long Term Borrowing के अन्तर्गत दिखाया जाता है।

ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि (Loss On Issue of Debentures) का वह भाग जो चिट्टे की तिथि से अगले 12 माह के पश्चात् अपलिखित होना है उसे ‘संपत्ति’ भाग में ‘Non-Current Assets’ शीर्षक के उपशीर्षक ‘(Other Non-Current Assets’ के अन्तर्गत दर्शाया जाता है तथा ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि (Loss on issue of Debentures) का वह भाग जो चिट्टे की तिथि से 12 माह के अन्दर अपलिखित होना हो उसे Current Assets’ शीर्षक के उपशीर्षक ‘(Other Current Aeets’ के अन्तर्गत दर्शायी जाता है ।

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कम्पनी से आप क्या समझते हैं ? इसकी आवश्यक विशेषताएँ एवं कम्पनी के विभिन्न प्रकारों को बताइये।
उत्तर-
कम्पनी का अर्थ (Meaning of Company)
कम्पनी एक वैधानिक, अदृश्य एवं कृत्रिम व्यक्ति है जिसका समामेलन कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत होता है, जिसकी स्थापना एक विशेष उद्देश्य से की जाती है, सदस्यों का दायित्व साधारणत: सीमित होता है, कम्पनी का अस्तित्व सदस्यों से पृथक् होता है तथा इसकी एक सार्वमुद्रा होती है।

कम्पनी की विशेषताएँ (Characteristics of Company)
कम्पनी की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं

  • कम्पनी एक वैधानिक कृत्रिम व्यक्ति होती है।
  • इसका सदस्यों से पृथक् वैधानिक अस्तित्व होता है ।
  • कम्पनी का अस्तित्व स्थायी होता है,सदस्यों का आवागमन बना रहता है,इससे कम्पनी के अस्तित्व पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
  • सदस्यों का दायित्व अंश पूँजी अथवा ली गई गारण्टी तक सीमित रहता है।
  • कम्पनी के सदस्य अपने अंशों का हस्तान्तरण स्वतन्त्रतापूर्वक कर सकते हैं।
  • कम्पनी का प्रबन्ध, अंशधारियों द्वारा चुने गए संचालकों द्वारा होता है।
  • कम्पनी की एक सार्वमुद्रा होती है, जिस पर कम्पनी का नाम अंकित रहता है। जिस प्रलेख पर कम्पनी की सार्वमुद्रा लगा दी जाती है वही प्रलेख सर्वमान्य होता है।
  • कम्पनी का उद्देश्य साधारणतया लाभ कमाने का होता है ।।

कम्पनियों के प्रकार (Kinds of companies)
कम्पनियाँ तीन प्रकार की होती हैं-

  1. एक व्यक्ति वाली कम्पनी;
  2. निजी कम्पनी और
  3. सार्वजनिक कम्पनी ।

(1) एक शक्ति वाली कंम्पनी (One Person Company)-
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(62) के अनुसार, एक व्यक्ति वाली कम्पनी से आशय उस कम्पनी से है जिसमें एक ही व्यक्ति सदस्य के रूप में हो। इस प्रकार की कम्पनी का समामेलन निजी कम्पनी के रूप में होता है।

(2) निजी कम्पनी (Private Company)-
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(68) के अनुसार, निजी कम्पनी से आशय ऐसी कम्पनी से है जिसकी न्यूनतम पूँजी रु 1 लाख या अधिक, जो निर्धारित की जाये, होती है, जो अपने अन्तर्नियमों द्वारा :
(अ) अंशों के हस्तान्तरण अधिकार पर प्रतिबन्ध लगाती है;
(ब) एक व्यक्ति वाली कम्पनी को छोड़कर, सदस्यों की संख्या 200 तक सीमित करती है। (वर्तमान वे भूतपूर्व कर्मचारी सदस्यों को छोड़कर); तथा
(स) अपनी किसी भी प्रतिभूति के क्रय हेतु जनता को आमंत्रित करने पर रोक लगाती है।
एक निजी कम्पनी में न्यूनतम सदस्य संख्या–2 होती है। निजी कम्पनी को अपने नाम के अन्त में ‘Private Limited’ लिखना होता है।

(3) सार्वजनिक कम्पनी (Public Company)-
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(71) के अनुसार, सार्वजनिक कम्पनी से आशय ऐसी कम्पनी से है जो कि
(अ) एक जिनी कम्पनी नहीं है;
(ब) जिसकी न्यूनतम पूँजी Rs 5 लाख होती है;
(स) कम्पनी के निर्माण हेतु Rs 7 या अधिक सदस्य होने चाहिए; तथा
(द) एक निजी कम्पनी जो सार्वजनकि कम्पनी की सहायक कम्पनी हो तो वह भी सार्वजनिक कम्पनी मानी (Deemed Public Company) जायेगी । सार्वजनिक कम्पनी में अधिकतम सदस्य संख्या पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है। सार्वजनिक कम्पनी को अपने नाम के अंत में ‘Limited’ लिखना होता है।

कम्पनियों के प्रकार (Types of Companies)
कम्पनियाँ तीन प्रकार की हो सकती हैं

  1. अंशों द्वारा सीमित कम्पनी;
  2. गारन्टी द्वारा सीमित कम्पनी;
  3. असीमित कम्पनी ।।

(1) अंशों द्वारा सीमित कप्पनी (Company Limited by Shares)
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(22) के अनुसार, एक कम्पनी के सदस्यों का दायित्व,उसके पार्षद सीमानियम द्वारा,उनके द्वारा धारित अंशों पर अदत्त राशि की सीमा तक ही सीमित रहता है तो वह अंशों द्वारा सीमित कम्पनी कहलाती है।

(2) गारन्टी द्वारा सीमित कम्पनी (Company Limited by Guarantee)
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(21) के अनुसार, ऐसी कम्पनी जिसके सदस्यों का दायित्व उसके सीमानियम में निर्धारित उस राशि तक सीमित रहता है, जो वे कम्पनी के समापन के समय कम्पनी की सम्पत्तियों के लिए अंशदान करने का वचन देते हैं।

(3) असीमित कम्पनी (Unlimited Company)
कम्पनी अधिनियम की धारा 2(92) के अनुसार, एक कम्पनी जिसके सदस्यों के दायित्व की कोई सीमा निर्धारित नहीं होती, असीमित कम्पनी कहलाती है। अर्थात् ऐसी कम्पनी के सदस्यों का दायित्व असीमित होता है।

प्रश्न 2.
समता अंश व पूर्वाधिकार अंशों में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
पूर्वाधिकार अंशों एवं समता अंशों में अन्तर (Difference between Preference Shares and Equity Shares)

अन्तर का आधार
(Basis of Diff.) 
पूर्वाधिकार अंश
(Preference Shares) 
समता अंश
(Equity Share)
1. लाभांश की प्राथमिकतालाभांश समता अंशों के पूर्व प्राप्त करने का अधिकार होता है।पूर्वाधिकार अंशों पर लाभांश देने के बाद ही लाभांश प्राप्त होता है।
2. लाभांश की दरप्रायः लाभांश की दर पूर्व-निश्चित रहती है।समता अंशों पर लाभांश की दर निश्चित नहीं रहती ।
3. मताधिकारप्रत्येक प्रस्ताव पर मताधिकार प्राप्त नहीं होता।प्रत्येक प्रस्ताव पर मताधिकार प्राप्त होता है।
4. निर्गमन की अनिवार्यताइन अंशों का निर्गमन अनिवार्य नहीं होता।इन अंशों का निर्गमन अनिवार्य होता है।
5. स्वामीपूर्वाधिकार अंशधारी कम्पनी के वास्तविक स्वामी नहीं होते।समता अंशधारी कम्पनी के वास्तविक स्वामी माने जाते हैं।
6. आय की निश्चितताआय निश्चित एवं नियमित रहती है।आय अनिश्चित एवं अनियमित रहती है।
7. प्रबन्ध संचालन में भाग लेने का अधिकारकम्पनी के प्रबन्ध संचालन में भाग लेने का अधिकार नहीं होता।अंशधारियों द्वारा अपने में से चुने हुए प्रबन्धक एवं संचालक कम्पनी को चलाते हैं।
8. पूँजी वापसीकम्पनी के समापन की अवस्था में पूर्वाधिकार अंशों पर पूँजी वापसी का प्रथम अधिकार होता है।पूँजी पूर्वाधिकार अंशों के पश्चात् वापस की जाती है।
9. शोधनीयये अंश शोधनीय हो सकते हैं ।ये अंश शोधनीय नहीं होते ।
10. जोखिमइने पर जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।इन पर जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है।
11. बकाया लाभांशसंचयी पूर्वाधिकार अंशधारियों को बकाया लाभांश का भविष्य के लाभों में से भुगतान किया जाता है।यदि किसी वर्ष लाभांश घोषित नहीं किया गया हो तो समता अंशधारियों को बकाया लाभांश का भुगतान भविष्य में नहीं होगा।
12. परिवर्तनीयतायदि निर्गमन की शर्तों में वर्णित हो तो पूर्वाधिकार अंशों को समता अंशों में परिवर्तित किया जा सकता है।समता अंश अपरिवर्तनीय होते हैं।

प्रश्न 3.
अंश पूँजी के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
अंश पूँजी के प्रकार (Types of Share Capital)
अंश पूँजी के प्रमुख रूप से निम्नलिखित प्रकार होते हैं –
1. अधिकृत पूँजी (Authorized Capital)-
कम्पनी के पार्षद सीमानियम के पूँजी वाक्य में जिस पूँजी का उल्लेख होता हैं। उसे अधिकृत या पंजीकृत पूँजी कहते हैं। कोई भी कम्पनी इस सीमा से अधिक अंशों का निर्गमन नहीं कर सकती है। यह पूँजी विभिन्न प्रकार के तथा विभिन्न मूल्यों के अंशों में विभाजित कर दी जाती है ।।

2. निर्गमित पूँजी (Issued Capital)-
अधिकृत पूँजी के उस हिस्से को निर्गमित पूँजी कहा जाता है जिसे जनता द्वारा क्रय किये जाने के लिए कम्पनी प्रस्तुत करती है। उदाहरणस्वरूप, एक कम्पनी की अधिकृत पूँजी Rs 20 लाख है जिसमें से कम्पनी ने जनता को Rs 05 लाख के अंश क्रय करने हेतु निर्गमित किये हैं। अतः कम्पनी की निर्गमित पूँजी Rs 05 लाख होगी ।

3. प्रार्थित पूँजी (Subscribed Capital)-
निर्गमित पूँजी का वह भाग जिसे जनता क्रय कर लेती है उसे प्रार्थित पूँजी कहते हैं ।

4. याचित पूँजी (Called up Capital)-
जब कम्पनी अंशों पर जनता से पूरी राशि एक साथ न माँगकर किस्तों में माँगती है तब अंशों पर जितनी राशि की याचना करती है, उसे याचित पूँजी कहते हैं एवं शेष याचना को अयाचित पूँजी कहते हैं।

5. चुकता पूँजी (Paid up Capital)-
याचित पूँजी का वह भाग जो अंशधारियों द्वारा भुगतान कर दिया जाता है ‘चुकता पूँजी कहलाता है और जो रकम बकाया रह जाती है उसे बकाया राशि (Calls in arrears) कहा जाता है।

6. संचित पूँजी अथवा आरक्षित पूँजी (Reserve Capital)-
कम्पनी अधिनियम के अनुसार, एक सीमित दायित्व वाली कम्पनी एक विशेष प्रस्ताव द्वारा पूँजी को कुछ भाग संचित पूँजी के रूप में रख सकती है। संचित पूँजी की माँग कम्पनी अपने जीवनकाल में कभी नहीं कर सकती है इसका प्रयोग कम्पनी के विघटन के समय ही किया जा सकता है। इसकी व्यवस्था ऋणदाताओं की सुरक्षा के लिए की जाती है। अधिकतर वित्त कम्पनियाँ (जैसे बैंकिंग तथा बीमा कम्पनियाँ) इस प्रकार की पूँजी का प्रबन्ध करती हैं।

प्रश्न 4.
पूर्वाधिकार अंश से क्या आशय है ? पूर्वाधिकार अंशों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पूर्वाधिकार अंश वे अंश होते हैं जिन्हें निम्न दो पूर्वाधिकार प्राप्त होते हैं

  • लाभांश प्राप्त करने का पूर्व अधिकार जो कि समता अंशधारियों को लाभांश भुगतान से पूर्व निश्चित राशि या निश्चित दर से परिकलित कर चुकाया जायेगा।
  • कम्पनी के समापन के समय समता अंशधारियों से पूर्व पूँजी वापस प्राप्त करने का पूर्वाधिकार।

पूर्वाधिकार अंशों के प्रकार (Types of Preference Shares)
कुछ विशेष अधिकारों के आधार पर पूर्वाधिकार अंश निम्न प्रकार के हो सकते हैं-

(1) असंचयी पूर्वाधिकार अंश (Non-Cumulative Preference Shares)-
असंचयी पूर्वाधिकार अंश वे पूर्वाधिकार अंश होते हैं जिनके धारकों को बकाया लाभांश को भविष्य में प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता है, अर्थात् यदि कोई कम्पनी अपने पूर्वाधिकार अंशों पर लाभ न होने या अपर्याप्त लाभ होने के कारण किसी वर्ष को लाभांश देने में असमर्थ रही हो तो इन पूर्वाधिकार अंशों के धारकों को भविष्य में ऐसे लाभांश को प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता है ।।

(2) संचयी पूर्वाधिकार अंश (Cumulative Preference Shares)-
संचयी पूर्वाधिकार अंश वे पूर्वाधिकार अंश होते हैं जिनके धारकों को समता अंशधारियों को लाभांश भुगतान से पूर्व अपने बकाया लाभांश को प्राप्त करने का अधिकार होता है।

(3) अवशिष्टभागी पूर्वाधिकार अंश (Participating Preference Shares)-
यदि कम्पनी के अन्तर्नियमों में इस प्रकार की व्यवस्था हो कि समता अंशधारियों को लाभांश भुगतान करने के पश्चात् शेष बचे लाभों में से पूर्वाधिकार अंशों के धारकों को भी हिस्सा प्राप्त करने का अधकार हो तो उन्हें अवशिष्टभागी पूर्वाधिकार अंश कहते हैं।

(4) अनावशिष्टभागी पूर्वाधिकार अंश (Non-Participating Preference Shares)-
ऐसे पूर्वाधिकार अंश जिनके धारकों को समता अंशधारियों को लाभांश भुगतान करने के पश्चात् शेष बचे लाभों में से हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता है, अनावशिष्टभागी पूर्वाधिकार अंश कहते हैं।

(5) परिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश (Convertible Preference Shares)-
ऐसे पूर्वाधिकार अंश जिनके धारकों को यह अधिकार प्रदान किया जाता है कि वे एक निश्चित तिथि तक अपने अंशों को समता अंशों में परिवर्तन करा सकते हैं, परिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश कहलाते हैं।

(6) अपरिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश (Non-Convertible Preference Shares)-
अपरिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश ऐसे पूर्वाधिकार अंश होते हैं जिनके धारकों को, अपने अंशों को समता अंशों में परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं होता है।

(7) शोधनीय पूर्वाधिकार अंश (Redeemable Preference Shares)-
पूर्वाधिकार अंश जिनका शोधन (भुगतान), कम्पनी द्वारा एक निश्चित तिथि को या उससे पूर्व किया जा सकता है शोधनीय पूर्वाधिकार अंश कहलाते हैं।

(8) अशोधनीय पूर्वाधिकार अंश (Irredeemable Preference Shares)-
अशोधनीय पूर्वाधिकार अंश जिनका शोधन कम्पनी के समापन के समय ही किया जा सकता है, अशोधनीय पूर्वाधिकार अंश कहलाते हैं । कम्पनी अधिनियम, 2013 अशोधनीय पूर्वाधिकार अंश निर्गमन की अनुमति प्रदान नहीं करता है ।

प्रश्न 5.
ऋणपत्र से क्या आशय है ? ऋणपत्रों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ऋणपत्र का अर्थ (Meaning of Debenture)-
कम्पनी की सार्वमुद्रा से जारी किया गया वह प्रलेख जो सम्बन्धित कम्पनी द्वारा ऋण लेने के प्रमाण के रूप में प्रदान किया जाता है,ऋणपत्र कहलाता है। ऋणपत्रों पर एक निश्चित दर से ब्याज दिया जाता है।

ऋणपत्र की परिभाषा (Definition of Debenture)-
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (30) के अनुसार, “ऋणपत्र के अन्तर्गत ऋणपत्र, स्कन्ध, बॉण्ड तथा कम्पनी की अन्य प्रतिभूतियों को सम्मिलित किया जाता है चाहे वे कम्पनी की सम्पत्तियों पर प्रभार हों या न हों ।”

साधारणतः ऋणपत्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-
1. साधारण या नग्न ऋणपत्र (Ordinary Or Naked Debentures)-
इन्हें बन्धकरहित ऋणपत्र भी कहते हैं इनके धारकों को ब्याज वे ऋण के भुगतान के लिए किसी भी प्रकार की प्रतिभूति नहीं दी जाती है ।

2. बन्धकसहित ऋणपत्र (Secured or Mortgaged Debentures)-
इस प्रकार के ऋणपत्रों में ऋणपत्रधारियों को ब्याज एवं ऋण के भुगतान के लिए कम्पनी सम्पत्ति को बन्धक कर देती है। यदि कम्पनी ब्याज या ऋण का भुगतान करने में असमर्थ रहती है तब बन्धक की हुई सम्पत्ति पर ऋणपत्रधारियों का अधिकार हो जाता है।

3. वाहक ऋणपत्र (Bearer Debentures)-
इस प्रकार के ऋणपत्रों का हस्तान्तरण सुपुर्दगी मात्र से हो जाता है। इसका लेखा कम्पनी की पुस्तकों में करने की आवश्यकता नहीं है।

4. रजिस्टर्ड ऋणपत्र (Registered Debentures)-
ऐसे ऋणपत्र जिनका लेखा, कम्पनी के रजिस्टर में किया जाता है उन्हें रजिस्टर्ड ऋणपत्र कहते हैं। इनका हस्तान्तरण भी निश्चित विधि से ही होता है तथा ब्याज एवं ऋण का भुगतान भी केवल रजिस्टर्ड ऋणपत्रधारियों को ही किया जाता है ।।

5. शोध्य-ऋणपत्र (Redeemable Debentures)-
शोध्य-ऋणपत्रों का आशय ऐसे ऋणपत्रों से होता है जिनका भुगतान कम्पनी को अपने जीवनकाल में अवश्य करना पड़ता है।

6. स्थायी ऋणपत्र (Perpetual Debentures)-
ऐसे ऋणपत्र जिनका भुगतान कम्पनी को अपने जीवन काल में नहीं करना पड़ता है उन्हें स्थायी या अशोध्य ऋणपत्र कहते हैं। इनका भुगतान कम्पनी अपने समापन पर ही करती है।

7. परिवर्तनशील ऋणपत्र (Convertible Debentures)-
जब कम्पनी द्वारा ऋणपत्रधारियों को अपने ऋणपत्रों को अंश या स्कन्ध में बदलने का विकल्प दिया जाता है तब ऐसे ऋणपत्रों को परिवर्तनशील ऋणपत्र कहते हैं।

8. अपरिवर्तनशील ऋणपत्र (Non-convertible Debentures)-
वे ऋणपत्र जिनका अन्य किसी भी प्रकार की प्रतिभूति में परिवर्तन नहीं किया जाता है वे अपरिवर्तनशील ऋणपत्र कहलाते हैं।

9. निश्चित ब्याज दर वाले ऋणपत्र (Fixed Interest Rate Debentures)-
ऐसे ऋणपत्र जिन पर ब्याज की दर निश्चित होती है वे निश्चित ब्याज दर वाले ऋणपत्र कहलाते हैं।

10. शून्य ब्याज दर वाले ऋणपत्र (Zero Interest Rate Debentures)-
वे ऋणपत्र जिन पर कम्पनी कोई ब्याज नहीं देती है। उन्हें शून्य ब्याज दर वाले ऋणपत्र कहा जाता है ।

11. प्रथम ऋणपत्र (First Debentures)-
वे ऋणपत्र जिनका भुगतान अन्य ऋणपत्रों से पहले किया जाता है वे प्रथम ऋणपत्र कहलाते हैं।

12. द्वितीय ऋणपत्र (Second Debenture)-
वे ऋणपत्र जिनका भुगतान प्रथम ऋणपत्रों का भुगतान होने के बाद किया जाता है उन्हें द्वितीय ऋणपत्र कहते हैं।

प्रश्न 6.
अंश एवं ऋणपत्र में अन्तर लिखिये।।
उत्तर-
अंश व ऋणपत्र में अन्तर (Distinction between Share and Debentures)

आधार का आधारअंशऋणपत्र
1. स्वामीअंशधारी कम्पनी का स्वामी होता है।ऋणपत्रधारी कम्पनी का लेनदार होता है।
2. धारकअंश का धारक अंशधारी कहलाता है।ऋणपत्र का धारक ऋणपत्रधारी कहलाता है।
3. प्रतिफलअंश का प्रतिफल लाभांश कहलाता है ।ऋणपत्र का प्रतिफल ब्याज कहलाता है।
4. प्रबन्ध में हिस्साअंश का धारक कम्पनी के प्रबन्ध में भाग ले सकता है।ऋणपत्र का धारक कम्पनी के प्रबन्ध में भाग नहीं ले सकता है।
5. भुगतानअंश की धनराशि का (पूर्वाधिकार अंशों को छोड़कर) भुगतान समापन पर किया जाता है।इसका भुगतान कम्पनी को एक निश्चित समय के बाद अपने जीवनकाल में करना पड़ता है।
6. धनराशिइसकी धनराशि कम्पनी में पूँजी की तरह रहती है।इसकी धनराशि कम्पनी में ऋण की तरह रहती है।
7. निश्चित आयअंशधारी को लाभ तभी प्रदान किया जाता है। जबकि कम्पनी को लाभ हो ।कम्पनी को हानि होने पर भी ऋणपत्रों पर नियत समय पर निश्चित दर से ब्याज का भुगतान किया जाता है।
8. बट्टे पर निर्गमनअंशों को बड़े पर निर्गमन नहीं किया जा सकता है।ऋणपत्रों का बट्टे पर निर्गमन किया जा सकता है।
9. मतदान अधिकारअंशधारी कम्पनी की सभा में मतदान करते हैं।ऋणपत्रधारियों को मतदान का अधिकार नहीं होता है।
10. हरणयाचनाओं का भुगतान न करने पर अंशों का हरण किया जा सकता है।ऋणपत्रधारी द्वारा याचना का भुगतान न करने पर ऋणपत्रों का हरण नहीं किया जा सकता है।
11. दायित्वकम्पनी के समापन के समय अंशधारी का दायित्व उनके द्वारा धारित अंशों के न भुगतान किये गये भाग तक रहता है।कम्पनी के समापन के समय ऋणपत्रधारी पर किसी प्रकार का दायित्व नहीं रहता है।
12. समापन आधिक्य पर अधिकारसभी दायित्वों को चुकाने के पश्चात् शेष बचे आधिक्य पर अंशधारियों का अधिकार होता है।ऋणपत्रधारियों का समापन के बाद शेष बचे आधिक्य पर कोई अधिकार नहीं होता है।

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
सोना लि. ने मोना लि. से Rs 10,00,000 की मशीन एवं Rs 5,00,000 का फर्नीचर खरीदा। सोना लि. ने 40% राशि का चेक से एवं शेष राशि के लिए Rs 10 वाले समता अंश 20% प्रीमियम पर जारी कर भुगतान किया। उक्त व्यवहारों को दर्ज करने के लिये सोना लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।

Sona Ltd. purchased machinery of Rs 10,00,000 and furniture of Rs 5,00,000 from Mona Ltd. Sona Ltd. paid 40% of the amount by the cheque and for the balance amount by issue equity shares of Rs 10 each at a premium of 20%. Pass necessary journal entries to record the above transactions in the books of Sona Ltd.
उत्तर:
Journal of Sonaram
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 2.
जैन लि. ने Rs 6,00,000 की मशीन कमल से खरीदी। 50% भुगतान चेक द्वारा किया गया तथा शेष राशि के लिए कम्पनी ने समता अंश Rs 10 वाले 20% प्रीमियम पर निर्गमित किये। उपर्युक्त व्यवहारों की जैन लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये।

Jain Lid. purchased a machine of Rs 6,00,000 from Kamal. 50% of the payment was made by cheque and for the remaining the company issued equity shares of Rs 10 each at a premium of 20%. Give necessary journal entries in the books of Jain Ltd. for the above transactions.
उत्तर:
Journal of Jain Limited
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 3.
कोहिनूर लि. की अधिकृत पूँजी Rs 10,00,000 थी जो कि Rs 100 वाले Rs 10000 समता अंशों में विभक्त है । इन अंशों में से 8000 समता अंश जनता को निर्गमित किये गए। समस्त अंकित मूल्य आवेदन पर देय था। जनता के द्वारा सभी अंशों के लिये अभिदान किया गया एवं समस्त धनराशि चुका दी। कोहिनूर लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।

The authorized capital of Kohinoor Ltd. was Rs 10,00,000 which is divided into Rs 10000 equity shares of Rs 100 each. Out of these shares 8000 equity shares were issued to the public. The full nominal value is payable on application. All the shares were subscribed by the public and total amount was paid for. Give necessary journal entries in the books of Kohinoor Ltd.
उत्तर:
Journal of Kohinoor Limited
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 4.
राखी लि. का पंजीयन Rs 20,00,000 की अधिकृत पूँजी जोर Rs 100 वाले 12000 समता अंशों एवं Rs 100 वाले Rs 8000, 8% पूर्वाधिकार अंशों में विभाजित थी, से हुआ । कम्पनी ने 5000 समता अंश एवं 2000 पूर्वाधिकार अंश जनता को निम्न शर्तों पर प्रस्तावित किये।

Rakhi Ltd. was registered with an authorized capital of Rs 20,00,000 divided into 12,000 equity shares of Rs 100 each and 8000, 8% preference shares of Rs 100 each. 5000 equity shares and 2000 preference shares were offered to public on the following terms-
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन
सभी अंशों के लिए आवेदन किया गया एवं बंटन किया गया । समस्त देय राशियाँ समय पर प्राप्त हो गई । राखी लि.की पुस्तकों में उक्त व्यवहारों को दर्ज करने के लिये आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा अंश पूँजी को चिट्टे में प्रदर्शित कीजिये।

All the shares were applied for and allotted. All money was duly received. Give necessary journal entries to record the above transactions in the books of Rakhi Ltd. and show the share capital in the balance sheet.
उत्तर:
Journal of Rakhi Limited
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 5.
गजेन्द्र लि. ने Rs 10 वाले 3000 समता अंश अभिदान के लिए जनता को प्रस्तावित किये। प्रति अंश राशि इस प्रकार देय थी-आवेदन पर Rs 3. बंटन पर Rs 4 तथा शेष आवश्यकता पड़ने पर। 50,000 अंशों के लिए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। 10,000 अंशों के आवेदकों को कोई अंश बंटित नहीं किये, उनकी आवेदन राशि लौटा दी गई। शेष आवेदकों को अंशों का यथानुपात बंटन किया गया। आबंटन राशि समय पर प्राप्त हो गई। उक्त व्यवहारों की जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा चिट्ठा तैयार कीजिये।

Gajendra Ltd. offered for subscription 30000 equity shares of Rs 10 each to public. Per share amount was payable as follows-on application Rs 3, on allotment Rs 4 and balance as and when required. Applications were received for 50000 shares. No share was allotted to the applicants of 10000 shares, their application money was refunded. Shares were allotted to remaining applicants on pro-rata basis, allotment money was received in due time. Give journal entries for above transactions and prepare the balance sheet.
उत्तर:
Journal of Gajendra Limited
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 6.
ललिता लि. की स्थापनार Rs 10,00,000 की अधिकृत पूँजी से की गई है जो कि Rs 10 वाले Rs 1,00,000 समता अंशों में विभाजित थी । कम्पनी ने जनता में 75,000 समता अंश Rs 11 प्रति अंश के हिसाब से निर्गमित किये, जो इस प्रकार देय हैं-आवेदन पर Rs 3, बंटन पर Rs 4 (प्रीमियम सहित) , शेष प्रथम एवं अन्तिम माँग पर । जनता से 70,000 अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। निम्न के अतिरिक्त सभी धनराशियाँ समय पर प्राप्त हो गईं । रमेश जिसके पास 1,000 अंश थे, बंटन तथा प्रथम माँग राशियाँ नहीं दी। सुरेश जिसके पास 2,000 अंश थे, प्रथम मांग राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहा। उक्त व्यवहारों को कम्पनी की जर्नल एवं रोकड़ बही में दर्ज कीजिये तथा चिट्ठा तैयार करिये

Lalita Ltd. was established with an authorized capital of Rs 10,00,000 divided into 1,00,000 equity shares of Rs 10 each. Company issued 75,000 shares to the public at Rs 11 per share, which was payable as follows- Rs 3 on application, Rs 4 (including premium) on allotment and balance on first & final call. Applications were received for 70,000 shares from public, All the amount were received in time except the following-Ramesh who holds 1,000 shres, failed to pay the allotment & first and final call money. Suresh holds 2,000 shares, failed to pay first and final call money. Record the above transactions in the cash book and journal of the company and prepare balance sheet.
उत्तर:
Journal of Lalita Limited
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प्रश्न 7.
माधव लि. ने Rs 10 वाले 60,000 अंश जनता को निर्गमित किये, जो इस प्रकार देय थे-आवेदन पर Rs 2, (1 अप्रैल 2016 को देय) , आबंटन पर Rs 3 (1 जून, 2016 को देय) , प्रथम माँग पर Rs 2.50 (1 सितम्बर, 2016 को देय) , द्वितीय एवं अन्तिम माँग Rs 2.50 (1 फरवरी, 2017 को देय) , 10,0000 अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए तथा बंटन निम्न प्रकार किया गया-50,000 अंशों के आवेदकों को पूर्ण, 45000 अंशों के आवेदकों को 10,000 अंश तथा 5000 अंशों के आवेदकों को शून्य अंश बंटित किये। आवेदन पर प्राप्त अतिरिक्त राशि का उपयोग आबंटन तथा मांग राशियों पर किया गया। अग्रिम पर ब्याज सारणी-क के अनुसार चुकाया गया। उपरोक्त व्यवहारों को दर्ज करने के लिए जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये, यह मानते हुए कि सभी राशियाँ समय पर प्राप्त हो गयीं।

Madhav Ltd. issued 60,000 shares of Rs 10 each to the public, which were payable as follows-on application Rs 2 (payable on 1st April, 2016) on allotment Rs 3 (payable on 1st June, 2016), on first call Rs 2.5 (payable on 1st September, 2016), and on second & final call Rs 2.5 (payable on 1st February, 2017). Application were received for 1,00,000 shares & allotment was made as under. To applicants for 50,000 Shares Full; to applicants for 45,000 shares. 10,000 shares and to applicants for 5,000 shares nil. Excess money received on application was utilized towards allotment and subsequent calls. Interest on calls in advance was paid as per table F. Give journal entries to record the above transactions, assuming all amounts due were received in time.
उत्तर:
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प्रश्न 8.
हिन्दुस्तान लि. ने Rs 10 वाले 50,000 समता अंश Rs 2 प्रति अंश प्रीमियम पर जनता को निर्गमित किये, जो इस प्रकार देय थे
आवेदन एवं बंटन पर Rs 5 प्रति अंश (प्रीमियम सहित)
प्रथम माँग पर। Rs 3.50
द्वितीय एवं अन्तिम माँग पर Rs 3.50
85,000 अंशों के लिए प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुए। 10,000 अंशों के आवेदकों को मना कर दिया गया एवं उनकी आवेदन राशि लौटा दी गई। शेष आवेदकों को यथानुपात अंश बंटित किये गये। आवेदन एवं बंटन पर प्राप्त आधिक्य राशि का प्रयोग प्रथम माँग राशि के समायोजन में किया गया । 150 अंशों पर प्रथम माँग राशि प्राप्त नहीं हुयी । 400 अंशों पर द्वितीय एवं अन्तिम माँग राशि प्राप्त नहीं हुई।

हिन्दुस्तान लि. की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा चिड़े में अंश पूँजी को प्रदर्शित कीजिये ।
Hindustan Ltd. issued 50,000 equity shares of Rs 10 each at Rs 2 per share premium, to the public, which were payable as follows
On application and allotment Rs 5 per share (including premium)
On first call Rs 3.5 per share
On second and final call Rs 3.50 per share
Application were received for 85,000 shares. Applicants for 10,000 shares were refused and application money there on were returned. Shares were allotted to remaining applicants on pro rata basis. Allotment money was adjusted on the sums due on first call. First call was not received on 150 shares. Second and Final call money was not received on 400 shares. Give journal entries in the books of Hindustan Ltd. and show the share capital in the balance sheet.
उत्तर:
Journal of Hindustan Limited
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प्रश्न 9.
राजेश लि. ने 30,000 समता अंश Rs 10 वाले Rs 30 प्रति अंश प्रीमियम पर निर्गमित करने हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किये। राशि इस प्रकार देय थी-आवेदन पर Rs 10 प्रति अंश (Rs 8 प्रीमियम सहित) , आबंटन पर Rs 12 प्रति अंश (Rs 9 प्रीमियम सहित) , प्रथम एवं अन्तिम माँग पर, शेष राशि। 28,000 अंशों के लिए आवेदन पत्र प्राप्त हुए। सभी माँगें मान ली गईं एवं तदनुसार प्राप्त हो गईं सिवाय हरी द्वारा धारित 3,000 अंशों के, जो कि बंटन एवं माँग राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहा और ओम द्वारा धारित 2,000 अंशों के, जो कि माँग राशि चुकाने में असमर्थ रहा । राजेश लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए तथा उक्त पदों को चिट्टे में प्रदर्शित कीजिए।

Rajesh Ltd. invited applications for issuing 30,000 Equity Shares of Rs 10 each at a premium of Rs 30 per share. The amount was payable as follows on Application Rs 10 per share (including Rs 8 premium); on Allotment Rs 12 per share (including Rs 9 premium); on First and Final call-Balance. Applications for 28,000 shares were received. All the calls were made and were duly received except on 3,000 shares held by Hari who failed to pay allotment and first and final call money and on 2,000 shares held by Om who did not pay the first and final call. Give necessary journal entries in the books of Rajesh ltd. and show the items in the Balance Sheet.
उत्तर:
Journal of Rajesh Limited
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प्रश्न 10.
मॉडर्न लि. ने Rs 10 वाले 10,000 समता अंशों को Rs 11 प्रति अंश की दर पर जनता में प्रस्तावित किया। राशि इस प्रकार देय थी-आवेदन पर Rs 3, आबंटन पर Rs 4(प्रीमियम सहित) तथा प्रथम एवं अन्तिम माँग पर Rs 4, 12,000 अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए तथा संचालकों ने आनुपातिक बंटन किया। राकेश जिसने 240 अंशों के लिए आवेदन किया था, ने बंटन राशि के साथ ही माँग राशि का भुगतान कर दिया। सुकेश जिसे 100 अंश बंटित किये थे, ने बंटन राशि का भुगतान माँग राशि के साथ किया । आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।

Modern Ltd. offered to public 10,000 equity shares of Rs 10 each at Rs 11 per share. Amount was payable as follows-on Application Rs 3; on Allotment Rs 4 (including premium) and on first and final call Rs 4. Applications were received for 12,000 shares and directors allotted on pro rata basis. Rakesh, who applied for 240 shares paid call money along with allotment money. Sukesh to whom 100 shares were allotted paid allotment money along with call money. Give necessary journal entries.
उत्तर:
Journal of Modern Limited
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प्रश्न 11.
अग्रसेन लि. ने Rs 10 वाले 20,000 समता अंश जनता को आवेदन हेतु प्रस्तुत किये जिनका भुगतान निम्न प्रकार देय था-आवेदन पत्र पर Rs 3, आबंटन पर Rs 4 तथा प्रथम एवं अन्तिम माँग पर Rs 3। 41,000 अंशों के लिए आवेदन पत्र प्राप्त हुए, आबंटन निम्नानुसार किया गया-3,000 अंशों के आवेदकों को कोई आबंटन नहीं तथा 10,000 अंशों के आवेदकों को शत-प्रतिशत 12,000 अंशों के आवेदकों को 50 प्रतिशत तथा 16,000 अंशों के आवेदकों को 25 प्रतिशत। आवेदन पर प्राप्त आधिक्य राशि का उपयोग बंटन तथा माँग राशि के समायोजन में किया गया। जिन आवेदकों को कोई अंश आबंटित नहीं किये गये उनकी आवेदन राशि लौटा दी गयी। सभी राशियाँ निर्धारित समय पर वसूल हो गयीं । कम्पनी की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियों दीजिए।

Agrasen Ltd. offered 20,000 equity shares of Rs 10 each to public for application, on these payment was payable as follows-Rs 3 on Application, Rs 4 on Allotment and Rs 3 on first and final call. Applications were received for 41,000 shares and allotment was made as follows-Applicants of 30,00 shares were allotted non shares. Applicants of 10,000 shares were allotted 100 percent shares, applicants of 12,000 shares were allotted 50 percent shares and Applicants of 16,000 shares were allotted 25 percent shares. Excess money received on application was adjusted on allotment and call money. The applicants to whom no shares were allotted, applicant money was refunded, all money was received in time. Give journal entries in the books of company.
उत्तर:
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प्रश्न 12.
एक कम्पनी ने प्रत्येक Rs 100 वाले 25,000 समता अंश जनता को निर्गमित किये। अंशों पर राशियाँ इस प्रकार देय थीं—
(क) प्रार्थना पत्र पर Rs 30,
(ख) बंटन पर Rs 50 (Rs 10 प्रीमियम सहित) ,
(ग) प्रथम एवं अन्तिम माँग पर Rs 30,60,000 अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए।
10,000 अंशों के प्रार्थियों को कोई बंटन नहीं किया गया और उनकी आवेदन राशि लौटा दी गयी। शेष प्रार्थियों को यथानुपात बंटन किया गया। गणेश ने, जिसको 250 अंशों का बंटन किया गया था, प्रथम एवं अन्तिम माँग राशि नहीं चुकायी । अन्य सभी अंशधारियों ने समय पर भुगतान कर दिया। उपर्युक्त व्यवहारों की कम्पनी की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।

A company issued 25,000 Equity Shares of Rs 100 each to public. Amount on shares were payable as follows—
(a) Rs 30 on Application
(b) Rs 50 (including premium) on Allotment
(c) Rs 30 on first and final call. Applications were received for 60,000 shares.
No shares was allotted to the applicants of 10,000 shares and their application money was refunded. Remaining applicants were made prorata allotment. Ganesh, to whom 250 shares were allotted failed to pay first and final call money, other shareholders has paid with in time. Give journal entries for above transactions in the books of the company.
उत्तर:
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प्रश्न 13.
यतेन्द्र लि. नेर 100 वाले 6,000 11% ऋणपत्र जनता में निर्गमित किये। सम्पूर्ण राशि 1 जुलाई 2016 को आवेदन पर देय थी। कम्पनी को 8,000 ऋणपत्रों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। संचालकों ने 31 जुलाई, 2016 को यथानुपात बंटन किया तथा आधिक्य आवेदन राशि लौटा दी । कम्पनी की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए, यदि ऋणपत्रों का निर्गमन

  1. सम मूल्य पर
  2. 5% प्रीमियम पर
  3. 4% बट्टे पर किया जाये।

Yatendra Ltd. issued 6,000, 11% Debentures of Rs 100 each to the public. Whole of the amount was payable on application on 1st July 2016. The company received applications for 8,000 debentures. The directors made pro-rata allotment on 31st July, money. Give necessary journal entries in the books of the company. If debentures are issued

  1. at par
  2. at 5% premium
  3. at 4% discount.

उत्तर:
(i) यदि ऋणपत्रों का निर्गमन सम मूल्य पर हो
Journal of Yatendra Limited
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(ii) यदि ऋणपत्रों का 5% प्रीमियम पर निर्गमन हुआ हो –
Journal
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(iii) यदि ऋणपत्रों का 4% पर निर्गमन हुआ हो
Journal Entry
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प्रश्न 14.
तन्मय लि. ने Rs 100 वाले 2,000, 9% ऋणपत्र 20% प्रीमियम पर निर्गमित किये जिन पर राशि इस प्रकार देय थी। आवेदन पर Rs 40, बंटन पर Rs 45 (प्रीमियम सहित) तथा शेष राशि प्रथम एवं अन्तिम माँग पर। 4,000 ऋणपत्रों के लिए आवेदन पत्र प्राप्त हुए। 1,000 ऋणपत्रों के आवेदकों को बंटन से मना कर दिया गया तथा शेष आवेदकों में 2,000 ऋणपत्रों का यथानुपात बंटन किया गया। आधिक्य आवेदन राशि बंटने पर समायोजित की गई। समस्त देय राशियाँ समय पर प्राप्त हो गईं। आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये।

Tanmay Ltd. issued 2,000, 9% debentures of Rs 100 each at 20% premium, payable as follows : Rs 40 on application, Rs 45 (including premium) on allotment and balance on first and final call. Applications were received for 4,000 debentures. Applicants for 1,000 debentures were refused to allot debentures and 2,000 debentures were allotted among remaining applicants. Excess application money was adjusted on allotment. All the amount was received in time. Give necessary journal entries.
उत्तर:
Journal of Tanmay
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प्रश्न 15.
राजेन्द्र लि. ने Rs 100 वाले 15,000 12% ऋणपत्र 5% बट्टे पर निर्गमित किये, जिन पर राशि इस प्रकार देय थी-आवेदन पर 30%, बंटन पर 35% तथा शेष प्रथम एवं अन्तिम मांग पर । समस्त ऋणपत्रों के लिए आवेदन प्राप्त हुए तथा बंटन किया गया। समस्त राशियाँ समय पर प्राप्त हो गयीं, सिवाय 500 ऋणपत्रों के एक धारक के जिसने प्रथम एवं अन्तिम माँग का भुगतान नहीं किया । कम्पनी की जर्नल व रोकड़ बही में प्रविष्टियाँ दीजिये।

Rajendra Ltd. Issued 15,000 12% debentures of Rs 100 each at a discount of 5%, payable as follows: 30% on application, 35% an allotment and balance on first and final call. Applications were received for whole of the debentures and debentures were allotted. All the amount was received in time except one debenture holder who hold 500 debentures did not pay the first & final call. Give entries in journal and cash book of the company.
उत्तर:
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प्रश्न 16.
विष्णु लि. ने विपिन से Rs 12,00,000 की सम्पत्ति एवं Rs 1,92,000 के दायित्वों के साथ चालू व्यापार खरीदा। क्रय प्रतिफल का भुगतान Rs 100 वाले 7% ऋणपत्र निर्गमित कर किया गया। विष्णु लि. की पुस्तकों में व्यापार क्रय व ऋणपत्रों के निर्गमन की प्रविष्टिय दीजिये, यदि ऋणपत्रों का निर्गमन
(अ) सममूल्य पर
(ब) 5% प्रीमियम पर
(स) 4% बट्टे पर किया गया हो।

Vishnu Ltd. purchased the business of Vipin with the assets of Rs 12,00,000 and liabilities of Rs 1,92,000. Purchase consideration was paid by issuing 7% debentures of Rs 100 each. Give journal entries in the books of Vishnu Ltd. for purchase of business and issue of debentures, if debentures are issued
(A) at par
(B) at 5% premium
(C) at 4% discount.
उत्तर:
Journal of Vishnu Limited
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(A) यदि ऋणपत्रों का निर्गमन सममूल्य पर हों
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(B) यदि ऋणपत्रों का निर्गमन 5% प्रीमियम पर हो
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन

(C) यदि ऋणपत्रों का निर्गमन 4% बट्टे पर किया जावे
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प्रश्न 17.
गजेन्द्र लि. ने बैंक ऑफ इण्डिया से Rs 5,00,000 का ऋण लिया तथा समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में Rs 6,00,000 के 7% ऋणपत्र बैंक के पास रखे। गजेन्द्र लि, की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा चिट्ठा बनाइये । यदि

  1. समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमित ऋणपत्रों की प्रविष्टि नहीं की जाती है।
  2. यदि ऋणपत्र निर्गमन पर प्रविष्टि की जाती है।

Gajendra Ltd. took a loan of Rs 5,00,000 from Bank of India and put 7% Debentures of Rs 6,00,000 to the bank as collateral security. Give journal entries in the books of Gajendra Ltd. and draw balance sheet. If

  1. no entry was made
  2. entry was passed for issue of debentures as collateral security.

उत्तर:
(i) यदि ऋणपत्र निर्गमित की प्रविष्टि नहीं की जाती है।
Journal Entries
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(ii) यदि ऋणपत्र निर्गमन पर प्रविष्टि की जाती है।
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प्रश्न 18.
सतीश लि. ने Rs 6,00,000 के ऋणपत्रों का निर्गमन निम्न प्रकार किया–

  1. Rs 3,00,000 के 8% ऋणपत्रों को 20% प्रीमियम पर नकद के लिये।
  2. अर्नव लि. से Rs 1,25,000 का कम्यूटर खरीदा, प्रतिफल स्वरूप उसको Rs 1,50,000 अंकित मूल्य के 8% ऋणपत्र निर्गमित किये।
  3. बैंक से Rs 1,00,000 का ऋण लिया। बैंक के पास समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में।

Rs 1,50,000 के 8% ऋणपत्र जमा कराये । सतीश लि. की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये एवं चिट्ठा तैयार कीजिये।
Satish Ltd. issued 8% debentures of Rs 6,00,000 as follows :

  1. 8% Debentures of Rs 3,00,000 at 25% premium for cash.
  2. a computer of Rs 1,25,000 purchased from Arnav Ltd., for the consideration of it, issued 8% debentures with a nominal value of Rs 1,50,000.
  3. taken a loan of Rs 1,00,000 from bank-deposited to the bank 8% debentures of Rs 1,50,000 as collateral security.

Give journal entries in the books of Satish Ltd. and prepare balance sheet.
उत्तर:
Journal of Satish
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प्रश्न 19.
निम्नलिखित परिस्थितियों में ऋणपत्रों के निर्गमन की आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये

  1. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 1000, 12% ऋणपत्र सम मूल्य पर निर्गमित किये जो सममूल्य पर शोध्य हैं।
  2. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 2000, 8% ऋणपत्र पर 10% बट्टे पर निर्गमित किये जो सममूल्य पर शोध्य हैं।
  3. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 5000, 7% ऋणपत्र 5% प्रीमियम पर निर्गमित किये जो सम मूल्य पर शोध्य हैं।
  4. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 3000, 6% ऋणपत्र सम मूल्य पर निर्गमित किये जो 5% प्रीमियम पर शोध्य हैं।
  5. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 4000, 8% ऋणपत्र 2% बट्टे पर निर्गमित किये जो 6% प्रीमियम पर शोध्य हैं।
  6. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 5000, 7% ऋणपत्र 5% प्रीमियम पर निर्गमित किये जो कि 6% प्रीमियम पर शोध्य हैं।

Give necessary journal entries for issue of debentures in the following cases

  1. A company issued 1000, 12% debentures of Rs 100 each at par, redeemable at par.
  2. A company issued 2000, 8% debentures of Rs 100 each at discount of 10%, redeemable at par.
  3. A Company issued 5000, 7% debentures of Rs 100 each at a premium of 5%, redeemable at par.
  4. A company issued 3000, 6% debentures of Rs 100 each at par, redeemable at 5% premium.
  5. A company issued 4000, 8% debentures of Rs 100 each at a discount of 2%, redeemable at 6% premium.
  6. A company issued 5000, 7% debentures of Rs 100 each at a discount of 5%, redeemable at 6% premium.

उत्तर:
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प्रश्न 20.
राकेश लि. ने 1 अप्रैल, 2016 को Rs 8,00,000 के 12% ऋणपत्र जनता को प्रस्तावित किये प्रत्येक Rs 100 वाला, सम्पूर्ण भुगतान आवेदन पर 01 मई 2016 को या इससे पूर्व देय था। निर्गमन की शर्तों के अनुसार ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर प्रतिवर्ष 30 सितम्बर व 31 मार्च को 10% आयकर काटकर किया जायेगा । जनता से 8,000 ऋणपत्रों के लिए प्रस्ताव आये । कम्पनी ने 01 जून 2016 को बंटन किया । कम्पनी की पुस्तकों में वर्ष 2016-17 में ब्याज के भुगतान एवं लाभ-हानि विवरण में अन्तरण की प्रविष्टियाँ दीजिये।

Rakesh Ltd. offered to public 12% debentures of Rs 8,00,000, Rs 100 each. Whole amount was payable on application on or before 1st May 2016. As per term of issue debentures interest was payable half yearly basis on 30th September and 31st March each year, after deducting income tax at the rate of 10%. Public offered to purchase 8,000 debentures. Company made allotment of debentures on 01st June 2016. Give journal entries in the books of the company for payment of debentures interest for the year 2016-17 and transferred it to Statement of Profit & Loss A/c.
उत्तर:
Journal of Rakesh Ltd.
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प्रश्न 21.
जी लि. ने 1 अप्रैल, 2015 को Rs 100 वाले 5000 12% ऋणपत्र 4% बट्टे पर निर्गमित किये। ऋणपत्रों का शोधन Rs 1,00,000 की वार्षिक किस्तों में 31 मार्च, 2017 से प्रारम्भ किया गया। प्रतिवर्ष अपलिखित की जाने वाली बट्टे की राशि की गणना कीजिये और कम्पनी की पुस्तकों में बट्टा खाता बनाइये।

Z Ltd. issued 5000, 12% debentures of Rs 100 each at a discount of 4% on 01st April, 2015. The debentures were repayable by annual drawing of Rs 1,00,000 starting on 31st March, 2017. Calculate the amount of discount to be written off each year and also prepare discount on debentures account in the books of the company.
उत्तर:
Statement of Showing Amount of Discount to be written off
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Discount of Issue of Debenture A/c
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