RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 15 डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम

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Rajasthan Board RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समंक (Data) है
(अ) सूचना
(ब) तथ्यों का संकलन
(स) अ तथा ब दोनों ।
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(ब)

प्रश्न 2.
सूचना है
(अ) समंकों का सार्थक रूप ।
(ब) समंकों का मूल (Textual)
(स) समंक
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(अ)

प्रश्न 3.
प्रोसेस (Process) की गई सूचनाओं का परिणाम है
(अ) आगत (Input)
(ब) निर्गत (Output)
(स) (अ) व (ब) दोनों
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर-
(ब)

प्रश्न 4.
निम्न में क्वेरी तैयार करने की विधि है
(अ) SQL विधि
(ब) JHL विधि
(स) RST विधि
(द) DBH विधि।
उत्तर-
(अ)

प्रश्न 5.
DBMS का पूरा नाम है
(अ) डाटाबेस मार्कअप सिस्टम
(ब) डाटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम
(स) डाटाबेस मैनेजमेन्ट सेक्शन
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(ब)

प्रश्न 6.
डाटाबेस की हानियाँ हैं
(अ) डेटा का पुनरावर्तन
(ब) डेटा की असंगति होना
(स) डेटा प्राप्त करने में कठिनाई
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर-
(द)

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखांकन की दृष्टि से डेटा प्रोसेसिंग साइकल को समझाइए।
उत्तर:
डेटा प्रक्रम चक्र (Data Processing Cycle) कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रक्रिया में एक खाते के लेन-देन के डेटा को पहचानना, संचय करना और उसे पुनः प्राप्त करना शामिल है। इसके लिए जरूरत है एक ऐसी प्रक्रिया को जो प्रमाणकों की डेटा सम्बन्धी विषयवस्तु का भण्डारण इस तरह से करे कि आवश्यकतानुसार उसे पुनः प्राप्त किया जा सके। इसको लेखांकन के लिए उपयुक्त डेटा बेस का प्रारूप तैयार कर प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार के डेटा बेस में आन्तरिक रूप से जुड़ी डेटा सूची, जो इस प्रकार से व्यवस्थित होती है कि डेटों के सामंजस्य व अखण्डता को सुनिश्चित किया जा सके। डेटा बेस प्रारूप की गतिशीलता को समझने से पहले डेटा संसाधन चक्र को लेखांकन के सन्दर्भ में समझाना चाहिए। लेखांकन डेटा वे डेटा हैं जो स्रोत प्रपत्रों से निकाले जाते हैं तथा जिसकी सहायता से प्रमाणक तैयार किए जाते हैं। यह डेटा एक निश्चित प्रक्रिया के माध्यम से प्रयुक्त किये जाते हैं। इस प्रक्रिया के क्रम को डेटा प्रक्रम चक्र कहते हैं। इसमें आँकड़ों का संग्रहण, वर्गीकरण, सम्बन्ध तथा गणना इस प्रकार से सम्बन्धित होती है, जिससे तुरन्त निर्णय लेने में अथवा किसी भी प्रकार की सूचना लेने में आसानी रहती है। वित्तीय कथन में सूचना विभिन्न स्तरों से रूपान्तरित होकर अन्तिम क्रम में प्रस्तुत होती है। ये स्तर निम्न प्रकार हैं

(i) तथ्यों के स्रोत (Sources Document) – लेखांकन के लिए सर्वप्रथम प्रमाणकों को तैयार किया जाता है जिससे कि लेखांकन प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से हो सके। इन्हें ही तथ्यों के स्रोत (Source Document) भी कहते हैं। इन प्रमाणकों में लेखांकन से सम्बन्धित सभी सूचनाएँ उपलब्ध होती हैं।

(ii) आँकड़ों को प्रविष्ट करना (Entry of Data) – प्रमाणकों में उपलब्ध लेखांकन आँकड़ों को कम्प्यूटर के भण्डारण युक्ति (Storage Device) में प्रविष्ट करेंगे। डेटा प्रविष्टि प्रपत्र इस प्रकार प्रारूपित किया जाता है कि वह भौतिक प्रमाणक के समान हो । डेटा प्रारूप को तैयार करने के लिए प्रक्रिया सामग्री का उपयोग किया जाता है जो कि कम्प्यूटर के मॉनीटर पर दिखाई पड़ता है तथा उसे देखकर डेटा को प्रविष्ट किया जाता है।

(iii) आँकड़ों का भण्डार (Storage of Data) – आँकड़ों का भण्डारण करने के लिए सर्वप्रथम एक ऐसी संरचना की आवश्यकता होती है जिसमें खाते की प्रकृति का संकेताक्षर, खाते का नाम तथा खाते के वर्ग का संकेताक्षर लिखना पड़ता है। आँकड़ों का भण्डारण आँकड़ा संचय का ही भाग होता है। आँकड़ों के भण्डारण का प्रारूप इस प्रकार है

कोड का प्रयोगनामखाता वर्ग
   

चित्र–आँकड़ों के भण्डारण का प्रारूप

प्रश्न 2.
लेखांकन डेटा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
लेखांकन डेटा वे डेटा हैं जो स्रोत प्रपत्रों से निकाले जाते हैं तथा जिसकी सहायता से प्रमाणक तैयार किये जाते हैं। यह डेटा एक निश्चित प्रक्रिया के माध्यम से प्रयुक्त किये जाते हैं। इस प्रक्रिया के क्रम को डेटा प्रक्रम चक्र कहते हैं। इसमें आँकड़ों का संग्रहण, वर्गीकरण, सम्बन्ध तथा गणना इस प्रकार से सम्बन्धित होती है जिससे तुरन्त निर्णय लेने में अथवा किसी भी प्रकार की सूचना लेने में आसानी रहती है।

प्रश्न 3.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट प्रणाली को विस्तारपूर्वक समझाइए।
उत्तर-
डेटाबेस मैनेजमेन्ट प्रणाली (Database Management System)-यह सूचना प्रणाली विभिन्न प्रकार के डेटा के माध्यम से प्रबन्धन के निर्णयों हेतु सूचनाएँ प्रदान करती है। इन सभी डेटा को व्यवस्थित कर उन्हें आवश्यकतानुसार सूचनाओं में परिवर्तित करने का कार्य डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम के माध्यम से किया जाता है। यह प्रणाली सह-सम्बन्धित आँकड़ों को उपयोग करने के लिए बनाए गए प्रोग्राम्स का एक समूह है। इसका उद्देश्य सॉफटवेयर के माध्यम से डेटा को एकत्र कर आवश्यकतानुसार उसके प्रबन्धन के कार्य को करना है। यह एकत्रित किए गए डेटा को निश्चित सूचनाओं में भी परिवर्तित करता है। इसका प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है; जैसे रेलवे आरक्षण, बस आरक्षण, परीक्षा नियन्त्रण, स्कन्ध, पेरोल भण्डारण, कर्मचारियों के वेतन, उपस्थिति आदि।

डेटाबेस मैनेजमेन्ट प्रणाली प्रमुख रूप से तीन क्रियाओं को नियन्त्रित करती है –

  • डेटा बेस इंजन (Data Engine) – यह डेटा प्रदान करता है एवं उसमें आवश्यकतानुसार संशोधन करता है। डेटा को पूर्णरूप से नियन्त्रण करने का कार्य, डेटाबेस इंजन पर निर्भर करता है।
  • डेटा (Data) – ये सूचनाओं के स्रोत हैं।
  • डेटा बेस स्कीम (Data Scheme) – यह सम्पूर्ण प्रक्रिया की संरचना को चलाता है।

इस प्रकार यह एक केन्द्रीयकृत सूचना प्रणाली है, जिसमें कई प्रकार के आँकड़ों को उपयोगकर्ता अपनी सुविधानुसार विभिन्न प्रकार के निर्णयों में इसका प्रयोग कम्प्यूटर के माध्यम से करते हैं।

प्रश्न 4.
उदाहरण सहित निम्नलिखित शब्दों को समझाइये।
(a) एंटीटी
(b) एट्रीब्यूट
(c) रिलेशन।
उत्तर-
(a) एंटीटी (Entity) – एंटीटी ER मॉडल के वस्तु विशेष पर आधारित वास्तविक परिस्थितियों की संरचना होती है तथा उसके गुणों को एट्रीब्यूट कहते हैं। हर एट्रीब्यूट के परिभाषित संग्रहीतमान को डोमेन कहते हैं। जब कभी एक एंटीटी प्रकार (जैसे प्रमाणक) का एक गुण (जैसे देय खाता) एक दूसरे एंटीटी प्रकार (जैसे खाते) के मध्य इन एंटीटी कोई भी वस्तु जिसका स्वतन्त्र अस्तित्व होता है वह एंटीटी कहलाती है। जैसे कि एक वस्तु भौतिक अस्तित्व के साथ जैसे – कार, घर या एक अभौतिक अस्तित्व लेकिन लेखांकन वास्तविकता के सन्दर्भ पाँच एंटीटी होते हैं, जैसे-लेखा, कर्मचारी,खातों के प्रकार तथा सहायक दस्तावेज । लेखांकन डेटा को एंटीटी द्वारा तैयार किया जाता है। उदाहरण-एक कॉलेज के डेटा बेस में छात्र एक एंटीटी है और उसके एट्रीब्यूट हैं-उसका नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, कक्षा इत्यादि

(b) एट्रीब्यूट (Attribute) – यह किसी भी व्यक्तित्व का वह गुण है जो कि उस एंटीटी के बारे में विस्तृत करता है, जैसे कि ऊँचाई, वजन और जन्म तिथि में सभी गुण व्यक्ति पर लागू होते हैं और लेखांकन की स्थिति में लेखा कोड व नाम आदि कीजानकारी होती है। प्रत्येक गुण के लिए एक एंटीटी होता है जिसका अपना मूल्य होता है जो कि डेटा के रूप में डेटाबेस में एकत्र रहता है। किसी भी एंटीटी के अनेक प्रकार के लक्षण होते हैं जो निम्न प्रकार से हैं

गुण के प्रकार (Types of Attributes)-

  • साधारण गुण – साधारण गुणों को विभाजित नहीं किया जा सकता है। जैसे एक मशीन द्वारा एक वर्ष में उत्पादन की गई इकाइयाँ, साधारण गुण है।
  • (मिश्रित गुण – यह गुण कुछ छोटे-छोटे उपभागों में विभाजित होते हैं। यह गुण अपने मूल अर्थ को प्रकट करते हैं। जैसे स्थायी सम्पत्तियाँ एक मिश्रित गुण है, इसमें कई प्रकार की स्थायी सम्पत्तियाँ हो सकती हैं।
  • एकल मूल्य गुण – ऐसा गुण जिसका एक इकाई के लिए ही मान होता है, वह एकल मूल्य कहलाता है। जैसे किसी कम्पनी का किसी एक वर्ष का शुद्ध लाभ एक मूल्य गुण है।
  • बहुमूल्य गुण – ऐसे गुण जिनका एक इकाई के लिए एक से अधिक मान होते हैं, बहुमूल्य गुण कहलाते हैं। जैसे एक कम्पनी में कार्यरत कर्मचारी की योग्यताएँ बहुमूल्य गुण है।
  • संचित बनाम प्राप्ति गुण – इसमें दो या दो से अधिक गुण एक-दूसरे से इस प्रकार से सम्बन्धित होते हैं कि एक गुण मुख्य गुण तथा दूसरा आश्रित गुण बन जाता है।

(c) रिलेशन (Relation) – वस्तु विशेष के परस्पर तर्कसंगत संगति को सम्बन्ध (Relation) कहते हैं। सम्बन्धों का एंटीटी के साथ अनेक रूपों में चित्रण किया जा सकता है। वस्तु विशेष के आपस में तर्कसंगत संगति को सम्बन्ध कहते हैं। यह सम्बन्ध दो एंटीटी के मध्य हो सकता है । इसके अतिरिक्त दो या दो से अधिक एंटीटी प्रकारों के सम्बन्ध यह प्रदर्शित करते हैं कि सम्बद्ध एंटीटी के मध्य आपसी सम्बन्ध है। दो एंटीटी के मध्य सम्बन्धों का चित्रण. अनेक प्रकार से सम्भव है। जैसा-नीचे दर्शाया गया है
RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 15 डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम
उपर्युक्त चित्र में 1 का तात्पर्य (एक) से है एवं * का तात्पर्य (Many) से है।

प्रश्न 5.
एंटीटी रिलेशनशिप मॉडल को समझाइए।
उत्तर-
एंटीटी सम्बन्ध मॉडल (Entity Relationship Model)-एंटीटी सम्बन्ध मॉडल, इंटीटी मॉडल एंटीटी एवं उसके गुणों पर आधारित होता है। इंटीटी एक वस्तु व्यक्ति विशेष पर आधारित है। उदाहरण के लिए; एक हॉस्पीटल के डेटाबेस में एक मरीज एंटीटी (एंटीटी) है और उसके गुण (attribute) हैं, उसका नाम, जन्म तिथि,पिता का नाम, हॉस्पीटल में भर्ती होने की तिथि, रोग का नाम आदि । ER मॉडल आधारित होता है
• एंटीटी (एंटीटी) और उसके गुण (एट्रीब्यूट)
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• एंटीटी के आपसी सम्बन्ध ।
चित्र-ER मॉडल

प्रश्न 6.
डेटाबेस से आप क्या समझते हैं ? पुरानी फाइल हैंडलिंग सिस्टम से इसकी तुलना कीजिए।
उत्तर-
डेटाबेस (Data Base) – एक संग्रहित किए हुए आँकड़ों का एक समूह है जो एक-दूसरे से आपस में सम्बन्धित होते हैं, जिनके द्वारा निश्चित सूचनाओं का निर्माण किया जाता है। उदाहरण के लिए; एक स्कूल के सभी विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा में अर्जित किए गये अंक एक डेटाबेस हैं। इन आँकड़ों के माध्यम से हम प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले कुल विद्यार्थियों की गणना कर सकते हैं। इसी प्रकार किसी एक कक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों की गणना भी की जा सकती है।
तुलना

डेटाबेस
(Database)
फाइल हैंडलिंग सिस्टम
(File Handling System)
1. यह large system में use होता है, जैसे-Oracle.1. यह Small System में use होता है, जैसे-c+++
2. ये एक Simple Structures होता है।2. यह एक Complex Structure होता है।
3. इसकी डिजाइनिंग (designing) बहुत आसान होती है।3. इसकी डिजाइनिंग (Complex) होती है।
4. डेटाबेस बहुत ज्यादा सुरक्षित (Secure) नहीं होते हैं।4. ये बहुत ज्यादा सुरक्षित (Secure) होते हैं।

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डेटा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
डेटा (Data)-डेटा किसी भी प्रकार की सूचना हो सकती है जिसका प्रयोग कम्प्यूटर के माध्यम से एक सूचीबद्ध तरीके से काम में लिया जाता है। इस प्रकार के डेटा एक-दूसरे से सम्बन्धित होते हैं, जैसे नाम, रोल नं, पता, शहर, जिला आदि एक प्रकार का डेटा है। एक व्यावसायिक संस्था में क्रय-विक्रय, लाभ-हानि, व्यय आदि एक प्रकार का डेटा है, जो एक-दूसरे से सम्बन्धित है। फोन । बुक में उपलब्ध नम्बर, बैंक के खाते, फैक्ट्री में कार्य करने वाले मजदूरों के नाम एवं किताबों की सूची आदि कुछ डेटा के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
डेटा प्रोसेसिंग क्या होती है ?
उत्तर-
डेटा प्रोसेसिंग (Data Processing)-यूजर इंटरफेस के द्वारा कम्प्यूटर को दी गई जानकारी के आधार पर उपयोगकर्ता आउटपुट निकालना चाहता है। पहले से प्रोग्राम की गई सूचनाओं के आधार पर सिस्टम आउटपुट निकालता है। इस पूरी प्रक्रिया को डेटा प्रोसेसिंग कहते हैं।

प्रश्न 3.
स्ट्रक्चर्ड क्वेरी सेंगुएज (SQL) क्या होती है?
उत्तर-
स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लेंगुएज (Structured Query Language)-जब डाटाबेस में किसी डेटा को हटाना (delete), जोड़ना (Add), बदलाव (Change) करना हो तो क्वेरी के माध्यम से किया जाता है । क्वेरी का उपयोग कर डेटाबेस से सम्बन्धित किसी भी प्रकार के विशेष प्रश्नों का उत्तर प्राप्त किया जा सकता है। डेटाबेस टेबल को देखकर, उसमें से आवश्यकतानुसार डेटा को सीधे निकालना सम्भव नहीं होता है। क्वेरी के द्वारा डेटा को फिल्टर किया जा सकता है, उनकी गणना की जा सकती है एवं उनका संक्षिप्तीकरण किया जा सकता है। क्वेरी के माध्यम से डेटा प्रबन्धन के कार्यों को स्वचालित (Automatic) किया जा सकता है। डेटा में किसी भी प्रकार के बदलाव के पहले, डेटा को रिव्यू किया जा सकता है। वह कार्य स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लेंगुएज के माध्यम से किया जाता है,जो एम.एस. एक्सस की एक कार्य प्रणाली है। व्यापारिक डेटाबेस की सफलता का प्रमुख कारण उसकी sOL भाषा है। इसके कारण SQL को सम्बन्धित डेटाबेस का मानक माना गया है। इसके फलस्वरूप, उपयोगकर्ता को डेटाबेस के अनुप्रयोग हेतु एक डेटा बेस में दूसरे डेटाबेस तक जाने की बहुत कम चिन्ता करनी होती है। उपयोगकर्ता को SQL के प्रयोग का दूसरा लाभ एक डेटाबेस के अनुप्रयोग के प्रारूप में कथन (Statement) लिख सकते हैं, इन डेटों को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। ये डेटा दो या दो से अधिक सम्बन्ध (DBMS) को बिना बदले उस डेटाबेस की उपभाषा (SQL) जो कि एक विशेष SQL के मानक द्वारा दोनों DBMS को सहायता करता है।

SQL नाम के लिये भाषा प्रश्नोत्तरी की संरचना, जिसका SEQUEL (Structured English Query Language) के नाम से जाना जाता है। आई. बी. एम, अनुसन्धान केन्द्र पर एक इंटरफेस के प्रायोगिक डेटाबेस सम्बन्ध प्रणाली, जिसे SYSTEM-R के द्वारा जाना जाता है, के प्रारूप को तैयार कर उसे लागू किया गया।

उपयोगकर्ता द्वारा आवश्यक सूचना को डेटाबेस से क्रमबद्ध आदेशों द्वारा प्राप्त कराने वाली भाषा को स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंगुएज कहते हैं। इसके द्वारा आसानी से डेटाबेस में से एक कमाण्ड के माध्यम से सूचना प्राप्त,डिलीट या एड की जा सकती है, तथा इस लैंगुएज की सहायता से ऐसे उपयोगकर्ता जो कम्प्यूटर का उपयोग नहीं करना जानते हैं वह भी आसानी से सूचना प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
ई. आर, मॉडल क्या होता है ?
उतर-
एंटीटी सम्बन्ध मॉडल (Entity Relationship Model)-एंटीटी सम्बन्ध मॉडल, एंटीटी मॉडलं एंटीटी एवं उसके गुणों पर आधारित होता है। एंटीटी एक वस्तु व्यक्ति विशेष पर आधारित है। उदाहरण के लिए, एक हॉस्पीटल के डेटाबेस में एक मरीज एंटीटी (एंटीटी) है और उसके गुण (attribute) हैं, उसका नाम, जन्मतिथि, पिता का नाम, हॉस्पीटल में भर्ती होने की तिथि, रोग का नाम, आदि । ER मॉडल आधारित होता है।
एंटीटी (एंटीटी) और उसके गुण (एट्रीब्यूट) ।
एंटीटी के आपसी सम्बन्ध । यह विस्तृत रूप से नीचे बतलाये गये हैं।
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(i) एंटीटी (Entity) – एंटीटी ER मॉडल के वस्तु विशेष पर आधारित वास्तविक परिस्थितियों की संरचना होती है तथा उसके गुणों को एट्रीब्यूट कहते हैं। हर एट्रीब्यूट के पारिभाषित संग्रहीत मान को डोमेन कहते हैं । जब कभी एक एंटीटी प्रकार (जैसे प्रमाणक) का एक गुण (जैसे देय खाता) एक-दूसरे एंटीटी प्रकार (जैसे खाते) के मध्य इन एंटीटी कोई भी वस्तु जिसका स्वतन्त्र अस्तित्व होता है। वह एंटीटी कहलाती है। जैसे कि एक वस्तु भौतिक अस्तित्व के साथ जैसे—कार, घर या एक अभौतिक अस्तित्व लेकिन लेखांकन वास्तविकता के सन्दर्भ पाँच के एंटीटी होते हैं; जैसे—लेखा, कर्मचारी, खातों के प्रकार तथा सहायक दस्तावेज । लेखांकन डेटा को एंटीटी द्वारा तैयार किया है। उदाहरण—एक कॉलेज के डेटाबेस में छात्र एक एंटीटी है और उसके एट्रीब्यूट हैं-उसका नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, कक्षा इत्यादि ।

(ii) सम्बन्ध (Relation) – वस्तु विशेष के परस्पर तर्कसंगत संगति को संबंध कहते हैं। संबंधों का एंटीटी के साथ अनेक रूपों में चित्रण किया जा सकता है। वस्तु विशेष के आपस में तर्कसंगत संगति को संबंध कहते हैं। यह संबंध दो एंटीटी के मध्य हो सकता है। इसके अतिरिक्त दो या दो से अधिक ईन्टीटी प्रकारों के संबंध यह प्रदर्शित करते हैं कि संबद्ध ईन्टीटी के मध्य आपसी संबंध है। दो एंटीटी के मध्य संबंधों को चित्रण अनेक प्रकार से संभव है। जैसा नीचे दर्शाया गया है
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चित्र-दो एंटीटी के बीच रिलेशनशिप के प्रकार
उपर्युक्त चित्र में 1 का तात्पर्य (एक) से है एवं * का तात्पर्य (Many) से है।

(iii) एंटीटी सम्बन्ध (Entity Relationship) – मॉडल की अवधारणा का प्रयोग सबसे ज्यादा डेटाबेस अनुप्रयोगों में होता है। एंटीटी सम्बन्ध मॉडल के प्रमुख अंगों एंटीटी, विशेषता, पहचानकर्ता तथा सम्बन्धों का प्रयोग वास्तविकता के लिए किया है । डेटाबेस : का प्रारूप, इस मॉडल के संकेतों के द्वारा समझ सकते हैं। निम्नलिखित संकेतों का प्रयोग विभिन्न प्रकार के ईन्टीटी, लक्षण, पहचान तथा सम्बन्धों को व्यक्त करने में होता है
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प्रश्न 5.
सम्बन्ध से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
सम्बन्थ (Relation)-वस्तु विशेष के परस्पर तर्कसंगत संगति को सम्बन्ध कहते हैं । सम्बन्धों का एंटीटी के साथ अनेक रूपों में चित्रण किया जा सकता है । वस्तु विशेष के आपस में तर्कसंगत संगति को सम्बन्ध कहते हैं। यह सम्बन्ध दो एंटीटी के मध्य हो

सकता है। इसके अतिरिक्त दो या दो से अधिक एंटीटी प्रकारों के सम्बन्ध यह प्रदर्शित करते हैं कि सम्बद्ध एंटीटी के मध्य आपसी सम्बन्ध हैं। दो एंटीटी के मध्य सम्बन्धों का चित्रण अनेक प्रकार से सम्भव है। जैसा नीचे दर्शाया गया है
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उपर्युक्त चित्र में 1 का तात्पर्य (एक) से है, एवं * का तात्पर्य (Many) से है।

प्रश्न 6.
सूचना किसे कहते हैं ?
उत्तर-
सूचना (Information) डेटा का प्रक्रियांकन (Process) करने पर प्राप्त परिणामों के आधार पर यदि कोई निर्णय लिया जा सके तो इन्हें सूचना कहते हैं। यदि इन परिणामों के आधार पर कोई निर्णय नहीं हो सकते हैं तो उन्हें दुबारा (Process) करते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी जब तक सूचना लायक परिणाम न मिले

प्रश्न 7.
क्वेरी किसे कहते हैं ?
उत्तर-
क्वेरी स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंगुएज (SQL) के क्वेरी कथनों के साथ अथवा इसके बिना उपयोगकर्ता को इंटरफेस की सहायता से सारी को परिभाषित, डाटा भंडारण और डाटा तथा सूचना की पुनः प्राप्ति करते हैं। एक डेटाबेस के अन्दर एक से अधिक टेबल्स होती हैं। इन टेबल्स के मध्य रिलेशनशिप create करके क्वेरी के माध्यम से सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम (DBMS) का प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर-
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम एकत्रित किये गये डेटा को निश्चित सूचनाओं में परिवर्तित करता है। इसका प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे- रेलवे आरक्षण, बस आरक्षण, परीक्षा नियन्त्रण, स्कन्ध, पेरोल, भण्डारण, कर्मचारियों से सम्बन्धित वेतन, उपस्थिति आदि ।

प्रश्न 2.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम में प्रशासक का क्या कार्य होता है ?
उत्तर-
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम (DBMS) को संचालित करने का उत्तरदायित्व प्रशासक का होता है । ये प्रोफाइल का निर्माण करते हैं जिनका उपयोग विभिन्न उपयोगकर्ता करते हैं।

प्रश्न 3.
डेटा मॉडल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
डेटा मॉडल (Data Model) – डेटा एक तथ्यों का संकलन है। यह डेटा उपयोगकर्ताओं को उनके उपयोग के अनुसार सूचना प्रदान करता है। डेटा मॉडल, डी. बी. एम. एस. (DBMS) के तर्कसंगत संरचना को परिभाषित करता है। एक सिस्टम के अन्दर डेटाबेस यह परिभाषित करता है कि डेटा आपस में किस प्रकार से जुड़ा है।

प्रश्न 4.
कमजोर एंटीटी की परिभाषा बताइए।
उत्तर-
कभी-कभी दो या दो से अधिक ऐसे गुण एक साथ मिलकर इस तरह से विभिन्न मूल्यों की रचना करते हैं। कुछ एंटीटी एक से अधिक गुण वाले हो सकते हैं। वह एंटीटी प्रकार जिसका कोई भी मुख्य गुण नहीं होता है उसे कमजोर एंटीटी कहते हैं।

प्रश्न 5.
प्रसामान्यक प्रक्रिया का प्रयोग कब किया जाता है ?
उत्तर-
प्रसामान्यक (Normalization) डेटा के संचय प्रारूप में दोहरे अनुपयोगी एवं अशुद्ध डेटा को हटाने के लिए सामान्यक प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 6.
तथ्यों के स्रोत से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लेखांकन के लिए सर्वप्रथम प्रमाणकों को तैयार किया जाता है जिससे कि लेखांकन प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से हो सके। इन्हें ही तथ्यों के स्रोत (Source Document) भी कहते हैं।

प्रश्न 7.
SQL (एस. क्यू. एल.) का प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर-
SQL, डेटा मेनिपुलेशन का कार्य करता है और क्वेरी को प्रदर्शित करता है ।

प्रश्न 8.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
डेटा मैनेजमेन्ट सिस्टम तीन प्रकार के होते हैं

  • हायरार्चीकल (Hierarchical)
  • नेटवर्क (Network)
  • रिलेशनल (Relational)

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट प्रणाली प्रमुख रूप से किन क्रियाओं को नियन्त्रित करता है ?
उत्तर-
डेटाबेस मैनेजमेन्ट प्रणाली प्रमुख रूप से तीन क्रियाओं को नियन्त्रित करता है

  • डेटाबेस इंजन (Database engine) यह डेटा प्रदान करता है एवं उसमें आवश्यकतानुसार संशोधन करता है। डेटा को पूर्णरूप से नियन्त्रण करने का कार्य, डेटाबेस इंजन पर निर्भर करता है।
  • डेटा (Data)-ये सूचनाओं के स्रोत हैं।
  • डेटाबेस स्कीम (Database Scheme)—यह सम्पूर्ण प्रक्रिया की संरचना को चलाता है।

इस प्रकार यह एक केन्द्रीयकृत सूचना प्रणाली है जिसमें कई प्रकार के आँकड़ों को उपयोगकर्ता अपनी सुविधानुसार विभिन्न प्रकार के निर्णयों में इसका प्रयोग कम्प्यूटर के माध्यम से करते हैं।

प्रश्न 2.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम के प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर-
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम के कार्य (Functions of DBMS)-

  1. डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम का प्रमुख कार्य विभिन्न प्रकार के आँकड़ों की जानकारी को उपयुक्त माध्यम से संग्रहण कर पुनः प्राप्त (access) करने का तरीका प्रदान करता है। जैसे एक स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की जानकारियों को निम्न प्रकार से सम्बन्धित किया जा सकता है। विद्यार्थी का नाम, अनुक्रमांक, पता, पिता का नाम, कक्षा, वर्ग, जन्म-तिथि आदि ।
  2. यह प्रणाली किसी संस्था की बड़ी सूचनाओं को समूह में विकसित कर इन सभी सूचनाओं को सुनियोजित तरीके से प्रबन्ध करती है।
  3. अपने उपयोगकर्ता के लिए डेटा का निर्माण, उसमें बदलाव (edit) एवं उसमें सुधार की सुविधा प्रदान करती है।
  4. यह एक समवर्ती प्रणाली है, जो एक ही समय पर अलग-अलग उपयोगकर्ताओं को एक ही डेटाबेस पर कार्य करने की सुलभता प्रदान करता है। इस प्रकार से डी. बी. एम. एस. मल्टीयूजर वातावरण को प्रेरित करता है।
  5. यह डेटा की सुरक्षा की दृष्टि से इसके वास्तविक उपयोगकर्ता को ही डेटा के प्रयोग करने की अनुमति प्रदान करता है। इस सुविधा के अनुसार उपयोगकर्ता अपने ही विभाग के डेटा पर कार्य कर पाता है जिससे दूसरे विभागों की सूचनाओं की सुरक्षा बनी रहती है।
  6. यह डेटा में सामंजस्य स्थापित करता है एवं अनावश्यक डेटा को कम करता है जिससे डेटा विस्तृत हो जाते हैं। इस विस्तृत डेटा से निर्णय लेने में आसानी रहती है।
  7. डी. बी. एम. एस. अपने उपयोगकर्ता को विविध व्यूज (Views) उपलब्ध करता है। जैसे सेल्स (Sales) विभाग के उपयोगकर्ता को स्क्रीन अलग दिखाई देगी एवं लेखा शाखा के उपयोगकर्ता को अलग। इसके अनुसार एक ही डेटाबेस के माध्यम से उपयोगानुसार डेटा को काम में लिया जा सकता है ।

प्रश्न 3.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम के लाभ बताइए।
उत्तर-
डी. बी. एम. एस. के लाभ (Advantages of DBMS)-

  • डी.बी. एम. एस. आँकड़ों में सामंजस्य (Coordination) स्थापित करता है एवं अनावश्यक आँकड़ों को कम करता है। इनसे निर्णय लेने में स्पष्टता रहती है।
  • डी. बी. एम.एस. कुछ विशेष तकनीकों के उपयोग द्वारा डेटा को संग्रहित कर उसको उपयोगकर्ता को ऐक्सस करता है। यह जटिल डेटा का सरलीकरण एवं उसे विस्तृत भी करता है।
  • विविध उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार डेटा पर कार्य करने की सुलभता प्रदान करता है।
  • डी. बी. एम. एस. डेटा को संग्रहित कर विभिन्न प्रयोगों के लिए पुनः प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है ।
  • डेटा को डी. बी. एम. एस. के माध्यम से आदान-प्रदान होता है । डी. बी. एम. एस. डेटा की प्रामाणिकता एवं स्थिरता को लागू करता है। जिससे डेटा की विश्वसनीयता बढ़ती है।
  • यह कम से कम समय में डेटा का विश्लेषण करता है जिससे तुरन्त निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
  • डी. बी. एम. एस. का उपयोग एक ये ज्यादा उपयोगकर्ता कर सकते हैं। एक ही डेटाबेस में एक संस्था के क्रय एवं विक्रय विभाग एक ही समय में इस डेटा का उपयोग कर सकते हैं। उत्पादन विभाग का डेटा इस पर निर्भर करता है कि किसी वित्तीय वर्ष में कितनी बिक्री की जायेगी।
  • डी. बी. एम. एस. प्रयुक्त होने वाले सम्पूर्ण डेटा को इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रदान की जाती है । इसे उपयोग करने के लिए एक निश्चित पासवर्ड दिया जाता है। उपयोगकर्ता एक-दूसरे डिपार्टमेन्ट की सूचनाओं को बिना अनुमति के उपयोग नहीं कर सकता ।। विभिन्न विभागों द्वारा DBMS अलग-अलग स्तर पर डेटा को सुरक्षा के प्रदान करता है। अनाधिकृत व्यक्ति सूचनाओं का उपयोग नहीं कर पाता है।

प्रश्न 4.
गुण (Attribute) की परिभाषा दीजिए व इसके प्रकार भी बताइए।
उत्तर-
गुण (Attribute)- यह किसी भी व्यक्तित्व का वह गुण है जो कि उस एंटीटी के बारे में विस्तृत करता है जैसे कि ऊँचाई, वजन और जन्म तिथि में सभी गुण व्यक्ति पर लागू होते हैं और लेखांकन की स्थिति में लेखा कोड व नाम आदि की जानकारी होती है। प्रत्येक गुण के लिए एक एंटीटी होता है जिसका अपना मूल्य होता है जो कि डेटा के रूप में डेटाबेस में एकत्र रहता है। किसी भी एंटीटी के अनेक प्रकार के लक्षण होते हैं जो निम्न प्रकार से हैगुण के प्रकार

(Types of Attributes)
(a) साधारण गुण-साधारण गुणों को विभाजित नहीं किया जा सकता है। जैसे एक मशीन द्वारा एक वर्ष में उत्पादन की गई इकाइयाँ साधारण गुण है।
(b) मिश्रित गुण-यह गुण कुछ छोटे-छोटे उपभागों में विभाजित होते हैं। यह गुण अपने मूल अर्थ को प्रकट करते हैं। जैसे स्थायी सम्पत्तियाँ एक मिश्रित गुण है, इसमें कई प्रकार की स्थायी सम्पत्तियाँ हो सकती हैं।
(c) एकल मूल्य गुण-ऐसा गुण जिसका एक इकाई के लिए ही मान होता है, वह एकल मूल्य कहलाता है। जैसे किसी कम्पनी का किसी एक वर्ष का शुद्ध लाभ एक मूल्य गुण है।
(d) बहुमूल्य गुण-ऐसे गुण जिसका एक इकाई के लिए एक से अधिक मान होते हैं, बहुमूल्य गुण कहलाते हैं । जैसे एक कम्पनी में कार्यरत कर्मचारी की योग्यताएँ बहुमूल्य गुण है।
(e) संचित बनाम प्राप्ति गुण इसमें दो या दो से अधिक गुण एक-दूसरे से इस प्रकार से सम्बन्धित होते हैं कि एक गुण मुख्य गुण तथा दूसरा आश्रित गुण बन जाता है। ..

प्रश्न 5.
डाटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम (DBMS) से होने वाली हानि के विषय में बताइये।
उतर-
डी. बी. एम. एस. से हानि (Disadvantages of DBMS) – डीबीएमएस से होने वाली हानियों को निम्न बिन्दुओं में बताया जा सकता है

  • अधिक लागत (High Cost) – डी. बी. एम. एस. कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग पर आधारित है। इस प्रोग्राम को बनाने में लागत उत्पन्न होती है। यह लागत सामान्य लागत के अतिरिक्त होती है। यदि एक संस्था इस प्रणाली को लागू करना चाहती है, तो उसे इसके प्रतिष्ठापन (installation) एवं रख-रखाव पर खर्चा वहन करना होता है। हर संस्था के लिए यह लागत वहन करना मुश्किल होता है।
  • कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता (Need of Skilled Employees) – डी. बी. एम. एस. पर कार्य करने के लिए एवं इसका संचालन करने के लिए पेशेवर एवं दक्ष कार्मिकों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को डी. बी. एम. एस. पर कार्य करने के लिए प्रशिक्षण की अनिवार्यता रहती है।
  • जटिलता (Complex) – डी. बी. एम. एस. का मुख्य आधार डेटाबेस है, जो डेटा का संग्रहण, भण्डारण एवं परिचालन करता है। कभी-कभी ऐसे आँकड़ों का भी संग्रहण किया जाता है, जिसकी आवश्यकता नहीं होती है। जिसमें विभिन्न प्रकार के उपयोगकर्ताओं को डेटा उपयोग करने में परेशानी हो सकती है।

प्रश्न 6.
एम. एस. एक्सेस (MS Excess) के प्रमुख तत्वों के विषय में बताइए।
उत्तर-
डी. बी. एम. एस. के तत्व (Elements of MS Excess)-डीबीएमएस के अग्रे तत्व हैं–

  • टेबल – यह डेटाबेस के प्रारूप को डाटा सारणी में बदलने का कार्य करता है। इनमें उनसे सम्बन्धित फील्ड का नाम, डाटा, प्रकार एवं उनकी विशेषताएँ होती हैं।
  • क्वेरी स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंगुएज (SQL) के क्वेरी कथनों के साथ अथवा इसके बिना उपयोगकर्ता इंटरफेस की सहायता से सारणी को परिभाषित, डाटा भण्डारण और डाटा तथा सूचना की पुनः प्राप्ति करते हैं।
  • प्रपत्र इसके द्वारा यूजर इंटरफेस का निर्माण किया जाता है। यह उपयोगकर्ता को बैक एण्ड डेटाबेस के उपयोग करने में सहायक होते हैं।
  • प्रतिवेदन-इस अभिलक्ष्य वर्ग द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रतिवेदनों को तैयार किया जाता है। इनका सूचना स्रोत सारणी क्वेरी या इन दोनों पर ही आधारित होता है। ऐसे प्रतिवेदनों को एक्सेस में अन्तिम उपयोगकर्ता की आवश्यकतानुसार बनाया जाता है।
  • पृष्ठ-इस अभिलक्ष्य वर्ग द्वारा डाटा अभिगत पृष्ठों को बनाने के लिए जिसे इन्टरनेट के प्रयोग द्वारा किसी भी संगठन की वेबसाइट पर उपयोग के लिए भेजा जा सकता है अथवा ई-मेल द्वारा कुछ उपयोगकर्ताओं के नेटवर्क पर भी भेजा जा सकता है।
  • मेक्रो प्रोग्राम्स मेक्रो प्रोग्राम्स में अलग निर्देशों का प्रयोग करने वाले छोटे कार्यों की सूची होती है। ये कार्यों के एक यूनिट के रूप में होते हैं।
  • प्रतिरूपक ये किसी भी एप्लीकेशन के लिये मुख्य आधार होते हैं और प्रारूप इनकी सहायता से (प्रोग्रामिंग) निर्देशों के समूह को तैयार कर सकता है। एक्सेस के माध्यम से ऐसे ही प्रतिरूपकों को तैयार किया जाता है।

प्रश्न 7.
एस. एस. एक्सेस की प्रमुख क्षमताएँ बताइए।
उत्तर-
एम. एस. एक्सेस की क्षमताएँ (Efficiencies of MS Excess) -एक्सेस में विशेष उपयोगिताएँ होती हैं जिसके कारण किसी भी प्रकार के संगठन में यह लागू किया जा सकता है। इसके प्रमुख कार्य निम्न प्रकार से हैं

  • व्यवस्थित भण्डारण करना।
  • डाटा के मध्य जटिल सम्बन्धों का प्रतिनिधित्व करना।
  • डाटाबेस तक अनाधिकृत उपयोगकर्ताओं की पहुँच पर रोक लगाता है।
  • स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लेंगुएज डाटा के साथ अथवा बिना इसके शीघ्र पुनः प्राप्ति की अनुमति देता है।
  • एक से ज्यादा उपयोगकर्ताओं के मध्य इंटरफेस बनाना ।
  • डेटा शेयर करता है।
  • डाटा और सूचना के बहुदर्शकों को बढ़ावा देता है।

प्रश्न 8.
एम. एस. एक्सेस के विभिन्न डेटा प्रकार के विषय में बताइए।
उत्तर-
एम. एस. एक्सेस के डेटा प्रकार का विवरण निम्नलिखित है –
टेक्स्ट (Text) – यह अनेक वर्गों, शब्दों या संख्याओं के लिये प्रयोग किया जाता है जिन्हें अंकगणितीय कॉलम में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

मेमो (Memo) – इसका प्रयोग कमेन्टस को भण्डारित करने के लिये होता है, वर्ण को समायोजित कर सकता है । लेकिन इस डाटा प्रकार के क्षेत्रों से डाटा अभिलेख की छंटनी या संशोधित का भण्डारण नहीं हो सकता है।

संख्या (Number) – असे संख्या के भण्डारण के लिये प्रयोग में लाया जाता है ये पूर्ण संख्या (- 32768 से 32767) बड़ी पूर्ण संख्याएँ (- 2, 147, 483, 648 से 2, 147, 883, 647) बाहर (0-255) एकल (दशमलव तक के मान की कुछ सीमा तक का भण्डारण), डबल (दशमलव वाली बड़ी संख्याओं को ठीक प्रकार से भण्डारित करने के लिये किया जाता है।

तिथि/समय (Date Time) – इसका प्रयोग तिथि, समय अथवा दोनों के समूह का भण्डारण करने के लिये किया जाता है। .

मुद्रा (Money) – इसका प्रयोग डॉलर, रुपया और अन्य देशों की मुद्राओं की संख्या के रूप में भण्डारित करने के लिये किया जाता है।

स्वतः संख्या – यह संख्यात्मक डाटा होता है जिसे एक्सेस द्वारा स्वतः ही प्रविष्ट कर दिया जाता है। इसका उस स्थिति में विशेष महत्व होता है जबकि सारणी में विभिन्न क्षेत्र अथवा संयुक्त क्षेत्रों के समुच्चय विशिष्टं रूप से नहीं होते हैं।

हाइपरलिंक – यह इन्टरनेट के माध्यम से डेटा को भेजने का कार्य करता है।

प्रश्न 9.
स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंगुएज (Standard Query Language) पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंगुएज (Structured Query Language)-जब डेटाबेस में किसी डेटा को हटाना (delete), जोड़ना (Add), बदलाव (Change) करना हो तो क्वेरी के माध्यम से किया जाता है । क्वेरी का उपयोग कर डेटाबेस से सम्बन्धित किसी भी प्रकार के विशेष प्रश्नों का उत्तर प्राप्त किया जा सकता है। डेटाबेस टेबल को देखकर उसमें से आवश्यकतानुसार डेटा को सीधे निकालना सम्भव नहीं होता है। क्वेरी के द्वारा डेटा को फिल्टर किया जा सकता है, उसकी गणना की जा सकती है एवं उसका । संक्षिप्तीकरण किया जा सकता है। क्वेरी के माध्यम से डेटा प्रबन्धन के कार्यों को स्वचालित (Automatic) किया जा सकता है। डेटा में किसी भी प्रकार के बदलाव के पहले डेटा को रिव्यू किया जा सकता है । यह कार्य स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लेंगुएज के माध्यम से किया जाता है, जो एम.एस. एक्सस की एक कार्य प्रणाली है। व्यापारिक डेटाबेस की सफलता का प्रमुख कारण उसकी SQL भाषा है। इसके कारण SQL को सम्बन्ध डेटाबेस का मानक माना गया है। इसके फलस्वरूप, उपयोगकर्ता को डेटाबेस के अनुप्रयोग हेतु एक डेटाबेस में दूसरे डेटाबेस तक जाने की बहुत कम चिन्ता करनी होती है। उपयोगकर्ता को SQL के प्रयोग का दूसरा लाभ एक डेटाबेस के अनुप्रयोग के प्रारूप में कथन (Statement) लिख सकते हैं, इन डेटों को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। ये डेटा दो या दो से अधिक सम्बन्ध (DBMS) को बिना बदले उस डेटाबेस की उपभाषा (SQL) जो कि एक विशेष SQL के मानक द्वारा दोनों DBMS को सहायता करता है।

SQL नाम के लिये भाषा प्रश्नोत्तरी की संरचना, जिसको SEQUEL (Structural English Query Language) के नाम से जाना जाता है। आई. बी. एम. अनुसन्धान केन्द्र पर एक इंटरफेस के प्रायोगिक डेटाबेस सम्बन्ध प्रणाली, जिसे SYSTEM-R के द्वारा जाना जाता है, के प्रारूप को तैयार कर उसे लागू किया गया।

उपयोगकर्ता द्वारा आवश्यक सूचना को डेटाबेस में से क्रमबद्ध आदेशों द्वारा प्राप्त कराने वाली भाषा को स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंगुएज कहते हैं। इसके द्वारा आसानी से डेटाबेस में से एक कमाण्ड के माध्यम से सूचना प्राप्त डिलीट या एड की जा सकती है तथा इस लैंगुएज की सहायता से ऐसा उपयोगकर्ता जो कम्प्यूटर का उपयोग नहीं करना जाता है वह भी आसानी से सूचना प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 10.
एस. क्यू. एल. (SQL) के कार्य बताइए।
उत्तर-
SQL (एस. क्यू. एल.) के कार्य-

  • डेटा मेनिपुलेशन के कार्य करता है।
  • क्वेरी को प्रदर्शित करता है।
  • रिकार्डस को इनसर्ट करता है।
  • रिकार्डस को डिलिट कर सकता है।
  • रिकार्डस को अपडेट कर सकता है।

प्रश्न 11.
SQL में SELECT FROM WHERE का प्रयोग समझाइए।
उत्तर-
SELECT – विशिष्ट) इसका प्रयोग विशेष डेटा या सूचना से अपेक्षित प्रश्नों के उत्तर के लिये किया जाता है।
FROM – इसका प्रयोग एक विशेष डेटा स्रोत से प्रश्नों के उत्तर के लिये किया जाता है । प्रयोग की गयी प्रश्नोत्तरी डेटा सारणी में भी हो सकती है।
WHERE – इसका अर्थ विशेष परिस्थिति से होता है जिसका कि प्रयोग SELECT में अपेक्षित सूचनाओं के डेटा से चुनने में किया जाता है।

RBSE Class 12 Accountancy Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम (DBMS) के प्रमुख तत्वों के विषय को बताइए।
उत्तर-
डेटाबेस मैनेजमेण्ट सिस्टम (DBMS)
डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम के प्रमुख तत्वों को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है

1. डेटाबेस (Data Base) – एक संग्रहित किए हुए आँकड़ों का एक समूह है जो एक-दूसरे से आपस में सम्बन्धित होते हैं, जिनके द्वारा निश्चित सूचनाओं का निर्माण किया जाता है। उदाहरण के लिए; एक स्कूल के सभी विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा में अर्जित किए गए अंक एक डेटाबेस हैं । इन आँकड़ों के माध्यम से हम प्रथम श्रेणी,द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले कुल विद्यार्थियों की गणना कर सकते हैं। इसी प्रकार किसी एक कक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों की गणना भी की जा सकती है। उपर्युक्त डेटा में विद्यार्थियों की कक्ष में उपस्थिति आदि की गणना भी की जा सकती है। डेटाबेस के माध्यम से डी. बी. एम. एस. प्रोसेसिंग सिस्टम अग्र कार्य करता है

  • समंकों का संग्रहण (Data Collection)
  • समंकों का सम्पादन (Data Editing)
  • समंकों का परिचालन (Data Manipulation)
  • समंकों का भण्डारण (Data Storage)
  • समंकों की समीक्षा (Data Analysis) ।
  • प्रक्षेपण (Output)।,

2. प्रशासक (Administrator) – DBMS को संचालित करने का उत्तरदायित्व प्रशासक का होता है। ये प्रोफाइल का निर्माण करते हैं, जिनका उपयोग विभिन्न उपयोगकर्ता करते हैं। उदाहरण के लिए, जिसे किसी स्कूल के विद्यार्थियों को डेटा का उपयोग, विद्यार्थी, अध्यापक एवं स्कूल प्रशासन द्वारा किया जा सकता है इसके लिए डी. बी. एम. एस. प्रशासक तीन प्रकार के अलग-अलग प्रोफाइल बना सकता है। विद्यार्थी का प्रोफाइल, अध्यापकों का प्रोफाइल, स्कूल प्रशासन का प्रोफाइल/डेटा की सुरक्षा की दृष्टि से यह निश्चित किया जाता है कि कौन-सा डेटा किस उपयोग में लाने की छूट दी जाए। जैसे एक विद्यार्थी उसकी कक्षा में कुल उपस्थिति देख सकता है एवं वह किसी दूसरे विद्यार्थी की भी उपस्थिति देख सकता है। किन्तु वह किसी अन्य विद्यार्थी के अंक नहीं देख सकता ।

3. डेटा (Data) – डेटा किसी भी प्रकार की सूचना हो सकती है, जिसका प्रयोग कम्प्यूटर के माध्यम से एक सूचीबद्ध तरीके से काम में लिया जाता है। इस प्रकार के डेटा एक-दूसरे से सम्बन्धित होते हैं, जैसे नाम, रोल नं., पता, शहर, जिला आदि एक प्रकार का डेटा है । एक व्यावसायिक संस्था में क्रय-विक्रय, लाभ-हानि, व्यय आदि एक प्रकार का डेटा है, जो एक-दूसरे से सम्बन्धित है। फोन बुक में उपलब्ध नम्बर, बैंक के खाते, फैक्ट्री में कार्य करने वाले मजदूरों के नाम एवं किताबों की सूची आदि कुछ डेटा के उदाहरण हैं।

4. सॉफ्टवेयर (Software) – किसी न किसी प्रकार की सूचनाओं डेटा का प्रबन्धन सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है। यह सॉफ्टवेयर डेटा को स्टोर करना, प्रोसेस करना, सॉफ्टवेयर मेन्युक्ल बनाने आदि का कार्य करता है। उदाहरण के लिए–एम. एस. एक्सेस, एम. एस. एक्सल ।

5. यूजर इन्टरफेस (User Interface) – उपयोगकर्ता से सम्बन्ध स्थापित करने वाले स्क्रीन्स को तैयार करना, जिसको उपयोगकर्स, देखेगा, जिससे यूजर सम्बन्ध स्थापित करेगा और अपने कुछ आँकड़ों को इनपुट करेगा या कुछ आउटपुट देखना चाहेगा । जैसे पुस्तकालय के लिए कोई सॉफ्टवेयर बनाना है। इस सिस्टम को यूज करने वाले उपयोगकर्ता, पुस्तकालय विद्यार्थी आदि को जो स्क्रीन दिखेगी, जिस पर वह काम करेगा, उसे हमें यूजर इंटरफेस कहते हैं। उस सम्बन्ध के माध्यम से प्रशासक को यह ज्ञात होगा कि वह क्या-क्या काम कर सकता है, जैसे—उसे डेटा कहाँ फिट करना है, कहाँ क्लिक करना है, पिछली स्क्रीन पर कैसे आना है आदि।।

6. डेटा प्रोसेसिंग (Data Processing) – यूजर इंटरफेस के द्वारा कम्प्यूटर को दी गई जानकारी के आधार पर उपयोगकर्ता आउटपुट निकालना चाहता है। पहले से प्रोग्राम की गई सूचनाओं के आधार पर सिस्टम आउटपुट निकालता है। इस पूरी प्रक्रिया को डेटा प्रोसेसिंग कहते हैं। यह डेटा मेनिपुलेशन की प्रक्रिया है।

7. फाइल हैंडलिंग प्रोग्राम्स (File Handling Programmes) – इसके माध्यम से हम डेटा को संग्रहण करके रखते हैं। नई फाइल हूँढ़ना, फाइल बनाना एवं फाइल को मैनेज करने का कार्य इस प्रोग्राम के माध्यम से किया जाता है। यह डेटा के स्टोर करने की एक प्रक्रिया है। स्टोरेज में हमारी एप्लीकेशन से सम्बन्धित सारा डेटा रखा हुआ होता है। यहीं से आवश्यकतानुसार आँकड़ों को लिया जाता है ।।

प्रश्न 2.
डेटाबेस की संरचना में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख तत्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
डेटाबेस की संरचना डेटाबेस की संरचना को तैयार करने में प्रयुक्त किये जाने वाले प्रमुख तत्व निम्न प्रकार हैं
1. वास्तविकता (Reality) – साधारणतया संस्था के कार्यकलापों के अनुसार डेटा की एक संरचना तैयार की जाती है जिसमें सभी तरह के कार्यों से सम्बन्धित आँकड़ों का समावेश सुनिश्चित हो जाये । उदाहरण के लिए; लेखांकन एक कार्य है, जिससे सम्बन्धित डेटा लिए जायेंगे।

2. समंक (Data) – मूल आँकड़े, तथ्य तथा सांख्यिकी आँकड़े जिनके आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सके उसे समंक कहते हैं। ये विभिन्न विभागों से एकत्र किये जाते हैं।

3. समंक आधार (Data Base) – कम्प्यूटर में समंक संग्रहित (Store) करने के लिए सबसे छोटी इकाई एक अक्षर (जैसे 1, 2, 3, 4, A, B, C, D, क,ख,ग,अ) होती है और अक्षरों के समूह से डेटा आइटम बनते हैं, जैसे Name, Address आदि । डेटा आइटम्स के समूह को रिकॉर्ड (Record) कहते हैं। जैसे विद्यार्थियों के रिकार्ड में रोल नम्बर,नाम, विषय आदि । रिकार्डों के समय को डेटा फाइल (Data file) कहते हैं तथा डेटा फाइलों के समूहों को समंक आधार कहा जाता है।

4. सूचना (Information) – डेटा का प्रक्रियांकन (Process) करने पर प्राप्त परिणामों के आधार पर यदि कोई निर्णय लिया जा सके तो इसे सूचना कहते हैं। यदि इन परिणामों के आधार पर कोई निर्णय नहीं हो सकते तो उन्हें दुबारा (Process) करते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी जब तक सूचना लायक परिणाम न मिले ।।

5. समंक आधारित प्रवन्य प्रणाली (Database Management System) – यह एक सॉफ्टवेयर है जो डेटाबेस को काम में लेते हुए उपयोगकर्ता द्वारा माँगी गई सभी क्वेरीज के परिणाम ज्ञात करने में सहायक है। डेटाबेस में डेटा को संग्रहित करना, उनकी | संरचना तैयार करना, आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन करना, अनावश्यक डेटा को हटाना, इच्छित परिणामों के लिए प्रोसेस करना तथा आवश्यकता अनुसार डेटा को क्रम में व्यवस्थित करना आदि कार्य करने में समंक आधारित प्रबन्ध प्रणाली सहायक होती है।

6. डेटा मॉडल (Data Model) – डेटा एक तथ्यों का संकलन है । यह डेटा उपयोगकर्ताओं को उनके उपयोग के अनुसार सूचना : प्रदान करता है। डेटा मॉडल डी. बी. एम. एस. की तर्कसंगत संरचना को परिभाषित करता है। एक सिस्टम के अन्दर डेटाबेस यह परिभाषित करता है कि डेटा आपस में किस प्रकार से जुड़ा है।

7. एंटीटी सम्बन्ध मॉडलं (Entity Relationship Model) – एंटीटी सम्बन्ध मॉडल, एंटीटी मॉडल एंटीटी एवं उसके गुणों पर आधारित होता है। एंटीटी एकवस्तु व्यक्ति विशेष पर आधारित है। उदाहरण के लिए, एक हॉस्पीटल के डेटाबेस में एक मरीज एंटीटी । (एंटीटी) है और उसके गुण (attribute) हैं,उसका नाम, जन्मतिथि,पिता का नाम, हॉस्पीटल में भर्ती होने की तिथि, रोग का नाम आदि । ER मॉडल आधारित होता है।

  • एंटीटी (एंटीटी) और उसके गुण (एट्रीब्यूट)
  • एंटीटी के आपसी सम्बन्ध ।।
    RBSE Solutions for Class 12 Accountancy Chapter 15 डेटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम

(i) एंटीटी (Entity) – एंटीटी ER मॉडल के वस्तु विशेष पर आधारित वास्तविक परिस्थितियों की संरचना होती है तथा उसके गुणों को एट्रीब्यूट कहते हैं। हर एट्रीब्यूट के पारिभाषित संग्रहीत मान को डोमेन कहते हैं। जब कभी एक एंटीटी प्रकार (जैसे प्रमाणक) का एक गुण (जैसे देय खाता) एक-दूसरे एंटीटी प्रकार (जैसे खाते) के मध्य एकं एंटीटी कोई भी वस्तु जिसका स्वतन्त्र अस्तित्व होता है। वह एंटीटी कहलाती है। जैसे कि एक वस्तु भौतिक अस्तित्व के साथ जैसे कार, घर या एक अभौतिक अस्तित्व लेकिन लेखांकन वास्तविकता के सन्दर्भ पाँच के एंटीटी होते हैं; जैसे—लेखा, कर्मचारी,खातों के प्रकार तथा सहायक दस्तावेज । लेखांकन डेटा को एंटीटी । द्वारा तैयार किया जाता है। उदाहरण—एक कॉलेज के डेटाबेस में छात्र एक एंटीटी है और उसके एट्रीब्यूट हैं-उसका नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, लिंग, कक्षा इत्यादि।

(ii) सम्बन्थ (Relation) – वस्तु विशेष के परस्पर तर्कसंगत संगति को सम्बन्धं कहते हैं। सम्बन्धों का एंटीटी के साथ अनेक रूपों में चित्रण किया जा सकता है । वस्तु विशेष के आपस में तर्कसंगत संगति को सम्बन्ध कहते हैं। यह सम्बन्ध दो एंटीटी के मध्य हो सकता है। इसके अतिरिक्त दो या दो से अधिक एंटीटी प्रकारों के सम्बन्ध यह प्रदर्शित करते हैं कि सम्बन्ध एंटीटी के मध्य आपसी सम्बन्ध है । दो एंटीटी के मध्य सम्बन्धों का चित्रणं अनेक प्रकार से सम्भव है।

प्रश्न 3.
लेखांकन के लिये डेटाबेस के प्रारूप का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लेखांकन के लिये डेटाबेस का प्रारूप (Structure of Accounting Database)
कम्प्यूटरीकृत एवं कम्प्यूटर पर आधारित लेखांकन सूचना प्रणाली में डेटा के भण्डारण के लिए स्पष्ट डेटा संरचनाओं की आवश्यकता लेखा के लिए किया जाता है। जैसा कि स्पष्ट कर चुके हैं,डेटाबेस का प्रयोग लेखा सम्बन्धी डेटा के भण्डारण के लिए किया जाता है। डेटाबेस (लेखांकन के लिए) के प्रारूप की प्रक्रिया की शुरूआत वासतविकता से (लेखांकन की वास्तविकता) होती है जो डेटा प्रारूप की अवधारणा तत्वों के रूप में व्यक्त की जाती है।

(i) वास्तविकता (Reality) – यह वास्तविक रूप से सांसारिक स्थिति के कुछ पहलुओं को प्रदर्शित करती है जिसके लिये डेटाबेस का प्रारूप तैयार किया जाता है। लेखांकन के सन्दर्भ में, यह लेखांकन की वास्तविकता ही है, जिसे सम्पूर्ण वर्णन सहित व्यक्त किया जाता है। एक संस्था के वास्तविक लेन-देन को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है एक संस्था के लेखांकन लेन-देन को प्रमाणक के द्वारा दस्तावेजित किया जाता है।

  • प्रत्येक प्रमाणक की एक क्रम संख्या होती है जो कि ‘01′ से प्रारम्भ होती है, साथ ही यह संकेत करती है कि वह लेखांकन काल का प्रथम प्रमाणक है। आदान-प्रदान को दस्तावेजित करने के लिए मात्र एक साधारण प्रमाणक का प्रयोग किया जाता है।
  • प्रत्येक प्रमाणक पर लेन-देन की तिथि, खाता संख्या, कोड के साथ आय-व्यय दोनों प्रकार की प्रविष्टियों का प्रयोग किया जाता है।
  • प्रत्येक प्रमाणक लेखांकन लेन-देन की राशि व प्रकथन को प्रदर्शित करता है।
  • सहायक दस्तावेज, जैसे—बिल, प्राप्ति, संविदा आदि भी लेखांकन प्रमाणक के साथ संलग्न किये जाते हैं।
  • प्रत्येक लेखांकन एक निश्चित कर्मचारी द्वारा तैयार किया जाता है और दूसरे कर्मचारी द्वारा अधिकृत किया जाता है।
  • प्रत्येक लेखांकन एक लेख प्रकार में वर्गीकृत होता है–व्यय, आय, परिसम्पत्तियाँ और देनदारियाँ ।

(ii) एंटीटी सम्बन्ध प्रारूप (Entity Relationship) – यह औपचारिक रूप से सचित्र प्रस्तुतीकरण सहित ब्लू प्रिन्ट है, जिसमें वास्तविकता के वर्णन को प्रस्तुत करने के लिए एंटीटी सम्बन्ध मॉडल का प्रयोग किया है। प्रमाणकों व खातों का सम्बन्ध होता है। उदाहरणार्थ, प्रमाणक व खाता एक-दूसरे से दो प्रकार से जुड़े हुए हैं—प्रमाणक में लाभ खाता व जमा खाता दोनों होते हैं। मॉडल में ये सन्दर्भ गुणों के बजाय सुस्पष्ट सम्बन्धों से निरूपित होते हैं।

(iii) सम्बन्थपरक डेटा मॉडल (Relational Data Model) – यह मॉडल डेटाबेस के संम्बन्धों को समूह के रूप में दर्शाता है। जिसके द्वारा एंटीटी सम्बन्ध के प्रारूप को अन्तर पारस्परिक डेटा सारणियों में बदलाव करके डेटा की क्रमबद्धता एवं विश्वसनीयता को सुनिश्चित करता है। जब कभी एक एंटीटी प्रकार (जैसे प्रमाणक) के एक गुण (जैसे पूँजी खाता) एवं एक-दूसरे एंटीटी प्रकार (जैसे खाते) के मध्य सम्बन्ध होता है तो उन्हें सम्बन्ध समूह कहते हैं। दो या दो से अधिक एंटीटी प्रकारों के सम्बन्ध यह प्रदर्शित करते हैं कि सम्बन्ध तत्वों के मध्य आपसी सम्बन्ध है। जैसे प्रमाणक वे खाता एक-दूसरे से दो प्रकार से जुड़े हुए हैं—प्रमाणक में लाभ खाता व पूँजी खाता दोनों होते हैं।

(iv) प्रसामान्यक (Normalization) – डेटा के संचय प्रारूप में दोहरे, अनुपयोगी एवं अशुद्ध डेटा को हटाने के लिए प्रसामान्यक प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है।

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