RBSE Solutions for Class 11 Physical Geography Chapter 17 जलीय चक्र एवं जलराशियों का वितरण

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Rajasthan Board RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 जलीय चक्र एवं जलराशियों का वितरण

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 पाठ्य पुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
वायुमण्डल में औसत जल की मात्रा है-
(अ) 1 इंच
(ब) 2 इंच
(स) 3 इंच
(द) 4 इंच
उत्तर:
(अ) 1 इंच

प्रश्न 2.
जल की विभिन्न रूपों में सम्पन्न होने वाली चक्रीय अवस्थाएँ कहलाती हैं-
(अ) वाष्पीकरण
(ब) संघनन
(स) जलीय चक्र
(द) वर्षण
उत्तर:
(स) जलीय चक्र

प्रश्न 3.
जलराशियों के स्वभाव में अन्तर स्पष्ट किया जाता है-
(अ) लवणता से
(ब) घनत्व से
(स) तापमान से
(द) गहराई से
उत्तर:
(ब) घनत्व से

प्रश्न 4.
जल का कितना प्रतिशत भाग शुद्ध जल के रूप में मौजूद है?
(अ) 1.6
(ब) 2.6
(स) 3.6
(द) 4.6
उत्तर:
(ब) 2.6

प्रश्न 5.
केन्द्रवर्ती जलराशियाँ किन अक्षांशों के मध्य स्थित हैं?
(अ) 25° से 35
(ब) 35° से 45°
(स) 35° से 42°
(द) 32° से 45°
उत्तर:
(स) 35° से 42°

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 6.
जलराशियों को कितने भागों में विभाजित किया गया है?
उत्तर:
जलराशियों को मुख्यत: चार भागों-महासागर, परावृत समुद्र, महाद्वीपों के किनारे स्थित खाड़ियों व महाद्वीपों पर स्थित सागर व झीलें आदि में विभाजित किया गया है।

प्रश्न 7.
जलीय चक्र की मुख्य प्रक्रिया क्या होती है?
उत्तर:
जल का वाष्प में परावर्तित होकर वायुमण्डल में जमा होना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसी पर मौसम परिवर्तन निर्भर करता है।

प्रश्न 8.
प्रति वर्ष पृथ्वी पर उपलब्ध जल का कितना प्रतिशत जल जलीय चक्र में संचारित होता है?
उत्तर:
प्रति वर्ष पृथ्वी पर उपलब्ध जल का केवल 1 प्रतिशत जल ही जलीय चक्र में संचारित होता है।

प्रश्न 9.
जलीय चक्र की प्रमुख अवस्थाएँ कितनी होती हैं?
उत्तर:
जलीय चक्र की तीन प्रमुख अवस्थाएँ होती हैं- (i) वाष्पीकरण तथा वाष्पोत्सर्जन, (ii) वर्षण, (iii) वायु संचरण।

प्रश्न 10.
केन्द्रीय जलराशियों की अधिकतम गहराई कहाँ पर मिलती है?
उत्तर:
केन्द्रीय जलराशियों की अधिकतम गहराई 900 मीटर सागर में मिलती है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 लघूत्तात्मक प्रश्न

प्रश्न 11.
जलीय चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
जल सागरों, झीलों, नदियों, स्थल भाग, पौधों आदि से वाष्पीकरण एवं वाष्पोत्सर्जन द्वारा वायुमण्डल में पहुँचता है तथा बदलती मौसमी दशाओं के अन्तर्गत संघनन द्वारा बादल बनकर यह जलराशि पुन: वर्षा के रूप में जलमण्डल तथा स्थलमण्डल पर पहुँचती है। अतः जलीय चक्र में जल की जलमण्डल, वायुमण्डल व स्थलमण्डल पर नियमित चक्रीय अवस्था को सम्मिलित किया जाता है। इसमें जल की गति और उसका गैस, तरल और ठोस अवस्था में परिवर्तन सम्मिलित रहता है। जल की विभिन्न रूपों में सम्पन्न होने वाली चक्रीय अवस्थाएँ जलीय चक्र कहलाती हैं।

प्रश्न 12.
जलीय चक्र की प्रमुख अवस्थाएँ बताइये।
उत्तर:
जलीय चक्र की प्रमुख रूप से निम्न तीन अवस्थाएँ मिलती हैं-

  1. वाष्पीकरण व वाष्पोत्सर्जन,
  2. वर्षण,
  3. वायु संचरण।

1. वाष्पीकरण व वाष्पोत्सर्जन – इनके द्वारा जल धरातल से वायुमण्डल में पहुँचता है।
2. वर्षण – इसके द्वारा जल वायुमण्डल से पुनः पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है।
3. वायु संचरण – इसमें पवनें तथा मौसम तंत्र को शामिल किया गया है, जिसके द्वारा वायुमण्डल में जल का एक स्थान से दूसरे स्थान पर पुनः वितरण संभव होता है।

प्रश्न 13.
जलीय चक्र की संरचना में किन कारकों का प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जलीय चक्र में सूर्यातप की स्थिति, वाष्पीकरण की मात्रा, प्रचलित पवनों, नदियों आदि का प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 14.
जलराशियों की संरचना में किन कारकों का प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जलराशियों की संरचना में निम्न कारकों का प्रभाव पड़ता है-

  1. अक्षांशीय दूरी,
  2. वर्षा अथवा हिम से स्वच्छ जल की प्राप्ति,
  3. स्थायी पवनों की दिशा,
  4. जल का डूबना या अपसरण,
  5. समुद्री धारा,
  6. महासागरीय भंवर।

1. अक्षांशीय दूरी – भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर जलराशियाँ गर्म से ठण्डी होती जाती हैं।
2. वर्षा अथवा हिम से स्वच्छ जल की प्राप्ति – वर्षा या हिम से प्राप्त स्वच्छ जल से जलराशियों को स्वभाव बदल जाता है।
3. स्थायी पवनों की दिशा स्थायी पवनों का चलना जलराशियों का नियंत्रक होता है।
4. जल का डूबना या अपसरण – जल में होने वाले परिवर्तनों व अपसरण से भी जलराशियाँ अपने मूल स्वरूप में परिवर्तन करती हैं।
5. समुद्री धारा – समुद्री धाराएँ अपने स्वभाव के अनुसार जलराशियों के स्वभाव को बदल देती हैं।
6. महासागरीय भंवर – सागरीय क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली भंवरों से जलराशियों की गति, स्वभाव व दिशा में भी परिवर्तन होता है।

प्रश्न 15.
केन्द्रवर्ती जलराशियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
शीतकालीन उपोष्ण अभिसरण के क्षेत्रों में 35° से 42° उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों के मध्य उपस्थित जलराशियाँ केन्द्रवर्ती जलराशियाँ कहलाती हैं। ये जलराशियाँ प्रायः भूमध्य रेखा व ध्रुवों के मध्यवर्ती भाग में मिलती हैं। इन जलराशियों में सतह पर तापमान व लवणता की मात्रा ऊँचे अक्षांशों की दिशा में घटती जाती है, किन्तु घनत्व बढ़ता जाता है। इन जलराशियों की मोटाई अधिक नहीं होती है। इनकी अधिकतम गहराई 900 मीटर सारगैसो सागर में मिलती है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 16.
जलीय चक्र एवं जलराशियों को समझाते हुए प्रकृति में जलीय चक्र का महत्त्व बताइये।
उत्तर:
जलीय चक्र – इसे जल चक्र भी कहा जाता है। इसमें जल की गति और उनका गैस, तरल और ठोस अवस्था में परिवर्तन शामिल रहता है। इसकी मुख्य प्रक्रिया संघनन है जिसके द्वारा वर्षा होती है। पृथ्वी पर अथवा भूमिगत जल का संचयन और प्रवाह, वाष्पीकरण और आर्द्रता का वहन सम्मिलित है। अतः जलीय चक्र में जलमण्डल, वायुमण्डल व स्थलमण्डल पर नियमित चक्रीय अवस्था को शामिल किया जाता है। जल की विभिन्न रूपों में सम्पन्न होने वाली चक्रीय अवस्थाएँ जलीय चक्र कहलाती हैं। जलीय चक्र की मुख्यतः तीन अवस्थाएँ होती हैं – वाष्पीकरण व वाष्पोत्सर्जन, वर्षण तथा वायु संचरण। इन तीनों ही अवस्थाओं से होकर जलीय चक्र गुजरता है। जल की इस चक्रीय व्यवस्था को निम्न चित्र के माध्यम से दर्शाया गया है-
RBSE Solutions for Class 11 Physical Geography Chapter 17 जलीय चक्र एवं जलराशियों का वितरण 1

जलराशियाँ – सम्पूर्ण पृथ्वी का क्षेत्रफल 50.995 करोड़ वर्ग किमी है, इसमें से 36,106 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्र पर जलमण्डल और 14.889 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्र पर स्थलमण्डल है। प्रथम श्रेणी के उच्चावचों के रूप में मिलने वाले महासागर जल के विशाल भंडार होते हैं। जिस प्रकार ऋतु विज्ञान में वायु राशियों का अध्ययन महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है, ठीक उसी प्रकार समुद्र विज्ञान में जलराशियों का विशिष्ट स्थान है।

विश्व की जलराशियों के अन्तर्गत विशाल महासागरों (प्रशान्त, अटलांटिक, हिन्द व आर्कटिक) के अतिरिक्त परावृत्त समुद्र; जैसेभूमध्य सागर, लालसागर आदि, महाद्वीपों के किनारे स्थित खाड़ियों और महाद्वीपों पर स्थित सागरों व झीलों को शामिल किया जाता है। विश्व में मिलने वाली इन जलराशियों के क्षेत्रफल व उनके आयतन के वितरण को निम्न तालिका द्वारा दर्शाया गया है-

क्र.सं.जलराशिक्षेत्रफल का प्रतिशतआयतन का प्रतिशत
1.महासागर88.9196.46
2.परावृत समुद्र0.630.03
3.महाद्वीपों के किनारे स्थित खाड़ियाँ2.290.52
4.महाद्वीपों पर स्थित सागर वे झीलें8.172.99

प्रकृति में जलीय चक्र का महत्त्व – जल का वाष्प में परिवर्तित होकर वायुमण्डल में जमा होना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है जिस पर मौसम परिवर्तन निर्भर करता है। अत: पृथ्वी तल पर जलीय चक्र अनेक जैविक क्रियाओं के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि जलीय संचार के बिना जल संतुलन बिगड़ जाएगा, जिसमें जीवन असंभव हो जाएगा। प्रकृति में जलीय चक्र मानव, वनस्पतियों, जलवायु एवं समस्त प्राणिजगत के लिए जीने का आधार है। वायुमण्डल में औसत जल की मात्रा 1 इंच अथवा 2.5 सेमी वर्षा से अधिक नहीं होती।

प्रश्न 17.
जलराशियों को स्पष्ट करते हुए जलराशियों का वितरण कीजिए।
अथवा
विश्व में मिलने वाली प्रमुख सागरीय जलराशियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जलराशियाँ समुद्र विज्ञान में मुख्य स्थान रखती हैं। निश्चित तापमान, लवणता व घनत्व वाली सागरीय दशा प्रायः किसी निश्चित जलराशि के रूप में पहचानी जाती है। जलराशियों में सागरों, परावृत समुद्रों, खाड़ियों व झीलों को शामिल किया जाता है। सागरीय क्षेत्रों में मिलने वाली जलराशियों के वितरण में निम्न जलराशियाँ प्रमुख हैं

  1. अन्टार्कटिका तलीय जलराशि,
  2. उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि,
  3. अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि,
  4. उत्तरी प्रशान्त मध्यवर्ती जलराशि,
  5. केन्द्रवर्ती जलरीश या तथा
  6. भूमध्य रेखीय जलराशि।

इन सभी महासागरीय जलराशियों का वर्णन निम्नानुसार है-

1. अन्टार्कटिका तलीय जलराशि – यह जलराशि अन्टार्कटिका महाद्वीप के निकट हिन्द एवं अन्ध महासागर के दक्षिण में पाई जाती है। इसका विस्तृत रूप बेड़ल सागर में देखा जाता है। महाद्वीपीय स्तर के समीप जल के द्रवणांक के कारण लवणता की मात्रा बढ़ती जाती है। इस भाग के जल की लवणता 34.62%% रहती है तथा तापमान -1.9°C एवं घनत्व 27.89 होता है। हिमांक प्राप्त कर लेने से इस जल का घनत्व बढ़ जाता है तथा वह तली में बैठ जाता है, क्योंकि समीपवर्ती सागर को जल अपेक्षाकृत उष्ण होता है, जिसमें लवणता 34.68%0 तापमान 0.5C तथा घनत्व 27.84 होता है। यह एक विशिष्ट प्रकार का जल है जो तली में फैलकर तथा मिश्रण द्वारा वह एक विशिष्ट जलरशि का रूप धारण कर लेता है।

2. उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि – यह जलराशि लेब्रोडोर सागर तथा आइसलैंड व दक्षिणी ग्रीनलैंड के मध्य पाई जाती है। यहाँ पर उत्तरी एटलांटिक सागरीय प्रवाह का उष्ण एवं लवण युक्त जल पूर्वी ग्रीनलैंड धारा के सम्पर्क में आकर ठण्डा हो जाता है और उसका घनत्व बढ़ जाता है। इस जल का अभिसरण 1,000 मीटर से भी अधिक गहराई में होता है। उस समय इसका घनत्व 27.88 लवणता 34.90%0 तथा तापमान 2.8°C से 3.3°C के मध्य होता है।

3. अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि-यह अन्टार्कटिका झुकाव क्षेत्र के कारण उत्पन्न होता है। इसकी उत्पत्ति अन्टार्कटिका महाद्वीप के चारों ओर है। उत्पत्ति का वास्तविक कारण विदित नहीं हो सका परन्तु इतना अवश्य है कि इसकी लवणता 33.8%o तापमान 2.2°C तथा घनत्व 27.0 सभी स्थानों पर समान होता है तथा तीव्र पछुवा पवनों की पेटी इसका प्रभाव क्षेत्र है।

4. उत्तरी प्रशान्त मध्यवर्ती जलराशि-यह उत्तरी प्रशान्त महासागर में उत्तर-पूर्व की ओर 40° उत्तरी अक्षांश के निकट उत्पन्न होती है। इसके जल में ऑक्सीजन की कमी आँकी गई है। दक्षिणी तथा पश्चिमी दिशा में प्रसार के कारण अध:स्थल पर अन्य प्रकार का जल भी सम्मिलित हो जाता है। यही कारण है कि इस जलराशि का गुण अभिसरित होते हुए भी वैसा नहीं होता।

5. केन्द्रवर्ती जलराशियाँ-ये जलराशियाँ शीतकालीन उपोष्ण अभिसरण के क्षेत्रों में 35 से 42° उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों के मध्य उपस्थित मिलती हैं। इन जलराशियों में सतह पर तापमान व लवणता की मात्रा ऊँचे अक्षांशों की दिशा में घटती जाती है, किन्तु घनत्व बढ़ता जाता है। इन जलराशियों की मोटाई अधिक नहीं होती। इनकी अधिकतम गहराई 900 मीटर सार-गैसो सागर में मिलती है। प्रशान्त, हिन्द तथा अटलांटिक महासागरों में उपस्थित इस जलराशि का तापमान व लवणता का संबंध एक समान नहीं है। इन जलराशियों में तापमान -0.8 से 12PC तथा लवणता की मात्रा 34.89 से 34.92%0 तक होती है।

6. भूमध्यरेखीय जलराशि – यह जलराशि प्रशान्त एवं हिन्द महासागर में भूमध्य रेखा के सहारे स्थित है। अटलांटिक महासागर की विशेष आकृति के कारण यह जलराशि इस सागर में बिल्कुल नहीं पाई जाती। यहाँ पर जल अधिक उष्ण पाया जाता है और जलराशि की मोटाई 100 से 200 मीटर के मध्य होती है। ऋतु परिवर्तन के साथ जल का तापमान व लवणता बदल जाते हैं।

प्रश्न 18.
केन्द्रवती जलराशि एवं भूमध्यरेखीय जलराशियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वायुमण्डल में व्याप्त वायुराशियों की भांति जलमण्डल में भी अनेक जलराशियाँ मिलती हैं जिनका वर्गीकरण भूगोलवेत्ताओं द्वारा तापमान और लवणता को आधार मानकर किया गया है। यद्यपि यह आवश्यक नहीं है। कि किसी एक जलराशि में तापमान और लवणता समान हों। ताप लवणता आरेख द्वारा जलराशियों के स्वभाव को व्यक्त करना अपेक्षित माना जाता है।

केन्द्रवर्ती जलराशि – जलराशि शीतकालीन उपोष्ण अभिसरण के क्षेत्रों में 35 से 42° अक्षांशों के मध्य दोनों गोलार्थों में उत्पन्न होती है। उन्हें केन्द्रवर्ती जलराशि कहते है।

भूमध्यरेखीय जलराशि – यह जल राशि भूमध्य रेखा के सहारे हिन्द महासागर एवं प्रशान्त महासागर उत्पन्न होती है। अटलाण्टिक महासागर के भूमध्य रेखीय भागों में इस जलराशियों का अभाव मिलता है।

केन्द्रवर्ती जलराशि तथा भूमध्यरेखीय जलराशि में निम्न अन्तर पाया जाता है-

केन्द्रवर्ती जलराशिभूमध्य रेखीय जलराशि
1. यह अभिसरित जल द्वारा उत्पन्न जलराशि है।1. यह अधः स्थलीय जल के मिश्रण द्वारा उत्पन्न जल राशि है।
2. यह जलराशि या दोनों गोलार्द्ध में 35° से 42° अक्षांशों के मध्य पाई जाती है।2. यह जलराशियाँ हिन्द एवं प्रशान्त महासागर में भूमभ्ध्य रेखीय क्षेत्रों में पाई जाती है।
3. यह जलराशि हिन्द, प्रशान्त व अटलाण्टिक तीनों बड़े महासागरों में मिलती है।3. यह जलराशि अटलाण्टिक महासागर की विशेष आकृति के कारण उसमें नहीं पाई जाती।
4. इन जलराशियों में सतह पर तापमान और लवणता ऊँचे अक्षाशों की ओर घटती जाती है।4. भूमध्य रेखीय जलराशि में तापमान और लवणता में परिवर्ततन ऋतु परिवर्तन के साथ होता है।
5. केन्दवर्ती जलराशियों में तापमान -0.8 सेग्रे, से -1.2 सेग्रे. तथा लवणता की मात्रा 34.89 से 34.92 प्रति हजार ग्राम के लगभग प्राप्त होती है।5. विषुवत रेखीय जलराशियों में तापमान का औसत 32 सेग्रे. तथ लवणता का औसत 35 प्रति हजार ग्राम के लगभग होता है।
6. इन जलराशियों की औसत मोटाई 200-300 मीटर के लगभग प्राप्त होती है। अधिकतम गहराई सारगैसों सागर में 900 मीटर मिलती हैं।6. इन जलराशियों की मोटाई 100 से 200 मीटर के मध्य होती है।
7. केन्द्रवर्ती जलराशियाँ निकटवर्ती अधखुले सागरों के सम्पर्क में आती है। जिनके गुणों में काफी भिन्नता मिलती है।7. भूमध्यरेखीय जल राशियों का सम्पर्क निकटवर्ती अधखुले सागरों से बहुत कम होता है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोतर

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
जल की अवस्था होती है-
(अ) गैसीय
(ब) तरल
(स) ठोस
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 2.
जल का कम संचय कहाँ पाया जाता है?
(अ) वायुमण्डल में
(ब) महासागरों में
(स) हिम टोपियों में
(द) शैलों में
उत्तर:
(अ) वायुमण्डल में

प्रश्न 3.
किस प्रक्रिया द्वारा वायुमण्डल में मौजूद जल पुनः पृथ्वी सतह पर पहुँचता है?
(अ) वाष्पीकरण
(ब) वर्षण
(स) वायु संचरण
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) वायु संचरण

प्रश्न 4.
महासागरों में जलराशियों के आयतन का कितना प्रतिशत भाग मिलता है?
(अ) 88.91 प्रतिशत
(ब) 8.17 प्रतिशत
(स) 96.46 प्रतिशत
(द) 2.29 प्रतिशत
उत्तर:
(स) 96.46 प्रतिशत

प्रश्न 5.
जलमण्डल का विस्तार मिलता है-
(अ) 50.99 करोड़ वर्ग किमी
(ब) 36.10 करोड़ वर्ग किमी
(स) 14.88 करोड़ वर्ग किमी
(द) 19.50 करोड़ वर्ग किमी
उत्तर:
(ब) 36.10 करोड़ वर्ग किमी

प्रश्न 6.
स्थलमण्डल व जलमण्डल के विस्तार के बारे में सर्वप्रथम किसने बताया था?
(अ) वेगनर ने
(ब) चैम्बरलिन
(स) डॉ. लोंग ने
(द) डेविस ने
उत्तर:
(स) डॉ. लोंग ने

प्रश्न 7. नवीन खोजों के आधार पर जल व थल का अनुपात है-
(अ) 60 : 40
(ब) 50 : 50
(स) 0.8 : 29.2
(द) 29.5 : 70.5
उत्तर:
(स) 0.8 : 29.2

प्रश्न 8.
अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि मिलती है-
(अ) लेब्रोडोर सागर व आइसलैण्ड के मध्य
(ब) अण्टार्कटिका महाद्वीपों के चारों ओर
स) भूमध्य रेखा के सहारे
(द) 40° उत्तरी अक्षांश के पास
उत्तर:
(ब) अण्टार्कटिका महाद्वीपों के चारों ओर

प्रश्न 9.
भूमध्य रेखीय जलराशि किस महासागर में नहीं मिलती है?
(अ) प्रशान्त महासागर
(ब) अटलांटिक महासागर
(स) हिन्द महासागरे
(द) उपरोक्त सभी में
उत्तर:
(ब) अटलांटिक महासागर

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-

स्तम्भ अ
 (जलराशि)
स्तम्भ ब
(जलराशियों के क्षेत्रफल का प्रतिशत)
(i) महासागर(अ) 0.63
(ii) परावृत समुद्र(ब) 2.29
(iii) महाद्वीपों के किनारे स्थित खाड़ियाँ(स) 8.17
(iv) महाद्वीपों पर स्थित सागर व झीलें(द) 88.91

उत्तर:
(i) द (ii) अ (iii) ब (iv) स

(ख)

स्तम्भ अ
(महासागरीय जलराशि का नाम)
स्तम्भ ब (लवणता)
(i) अन्टार्कटिका तलीय जलराशि(अ) 34.9 %
(ii) उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि(ब) 34.68 %
(iii) अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि(स) 34.90 %
(iv) केन्द्रवर्ती जलराशि(द) 33.8 %

उत्तर:
(i) ब (ii) स (iii) द (iv) अ ।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संघनन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
धरातल पर मिलने वाले जल व सागरीय जल का सूर्यातप की प्रक्रिया से वाष्पीकरण के कारण क्षोभमण्डल में ताप के कम होने से जमना संघनन कहलाता है।

प्रश्न 2.
जल संचरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जिस प्रकार हवा एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवाहित होती है। इसी प्रकार जल का एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति करना जल संचरण कहलाता है।

प्रश्न 3.
जल चक्र में नदियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण क्यों होती है?
उत्तर:
जल चक्र में नदियों की भूमिका इसलिए महत्त्वपूर्ण होती है, क्योंकि नदियों के द्वारा ही जल स्थल से महासागरों व सागरों की ओर जाता है।

प्रश्न 4.
जलवाष्प को गति कौन प्रदान करता है?
उत्तर:
महासागरों से स्थल की ओर चलने वाली पवन जलवाष्प को गति प्रदान करती है।

प्रश्न 5.
वाष्पीकरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एक ऐसी प्रक्रिया जिसके द्वारा कोई पदार्थ तरल से वाष्प अवस्था में परिवर्तित होता है। इस प्रक्रिया में सूर्यातप की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रश्न 6.
वर्षण से क्या आशय है?
उत्तर:
संघनन की प्रक्रिया के पश्चात पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण जल का तरल, ठोस रूप में पृथ्वी पर गिरना वर्षण कहलाता है।

प्रश्न 7.
धरातलीय जल से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पृथ्वी तल के ऊपरी भाग पर नदियों, नहरों, झीलों, तालाबों, सागरों आदि के रूप में संचित मिलने वाले जल को धरातलीय जल कहते हैं।

प्रश्न 8.
जलराशियों के क्षेत्रफल प्रतिशत व आयतन प्रतिशत मानों को बताइये।
उत्तर:
जलराशियों के क्षेत्रफल प्रतिशत व आयतन प्रतिशत महासागरों का 88.91% व 96.46 परावृत्त समुद्रों का 0.63% व 0.03%, महाद्वीपों के किनारे स्थित खाड़ियों का 2.29% व 0.52% तथा महाद्वीपों पर स्थित सागर व झीलों का 8.17% व 2.99% मिलता है।

प्रश्न 9.
डॉ. लोंग व वेगनर ने स्थल व जल का प्रतिशत क्रमशः कितना बताया है?
उत्तर:
डॉ. लोंग के अनुसार स्थल व जल का प्रतिशत क्रमश: 26 व 74 प्रतिशत तथा वेगनर के अनुसार जल व स्थल का प्रतिशत क्रमशः 71.7 व 28.3 है।

प्रश्न 10.
जल व स्थल किस प्रकार एक-दूसरे के विपरीत हैं?
उत्तर:
जल व स्थलों की विपरीत स्थिति में प्रशान्त महासागर के विपरीत अफ्रीका, हिन्द महासागर के विपरीत अमेरिका महाद्वीप व आर्कटिक महासागर के विपरीत अन्टार्कटिका महाद्वीप के रूप में स्थलीय भाग मिलता है।

प्रश्न 11.
महासागरों व महाद्वीपों के आधार पर किस प्रकार भिन्नता मिलती है?
उत्तर:
महासागरों का आधार दक्षिणी गोलार्द्ध में तथा शीर्ष उत्तर में है, जबकि महाद्वीपों का आधार उत्तर में और शीर्ष दक्षिण की ओर है।

प्रश्न 12.
जलराशियों के संचलन में अक्षांशीय आधार में भिन्नता कैसे मिलती है?
उत्तर:
मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में क्षैतिजिक दिशा के विपरीत लम्बवत् दिशा में प्रवाहित जलराशियाँ विस्तृत क्षेत्रों में चलती हैं तथा ध्रुवीय क्षेत्रों में लम्बवत् दिशा की अपेक्षा क्षैतिजिक रूप से जलराशियाँ चला करती हैं।

प्रश्न 13.
जैलराशियों का सीमांकन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
विभिन्न जलराशियों के स्वभाव का ज्ञान तथा उनका सीमांकन तापमान और लवणता का निरीक्षण करके किया जाता है।

प्रश्न 14.
विषुवत रेखा के पास धाराओं की गति तीव्र क्यों मिलती है?
उत्तर:
विषुवत रेखा के निकट मध्य अक्षांशों में सागर की सतह पर अधिक तापमान, कम लवणता एवं कम घनत्व की परत होती है जिससे धाराओं की गति तीव्र मिलती है।

प्रश्न 15.
जलराशियों को किन आधारों पर वर्गीकृत किया गया है?
उत्तर:
अधिकांश विद्वानों ने तापमान और लवणता के आधार पर जलराशियों का वर्गीकरण किया है।

प्रश्न 16.
महासागरों में मिलने वाली प्रमुख जलराशियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
महासागरों में मिलने वाली प्रमुख जलराशियों में अन्टार्कटिका तटीय जलराशि, उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि, अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि, उत्तरी प्रशान्त मध्यवर्ती जलराशि, केन्द्रवर्ती जलराशि व भूमध्यरेखीय जलराशि को शामिल किया गया है।

प्रश्न 17.
अन्टार्कटिका तटीय जलराशि कहाँ मिलती है?
उत्तर:
यह जलराशि अन्टार्कटिका महाद्वीप के निकट हिन्द एवं अन्ध महासागर के दक्षिण में पाई जाती है। इसका विस्तृत रूप बेड़ल सागर में देखा जाता है।

प्रश्न 18.
उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि कहाँ मिलती है?
उत्तर:
यह जलराशि लेब्रोडोर सागर तथा आइसलैंड व दक्षिणी ग्रीनलैंड के मध्य पाई जाती है।

प्रश्न 19.
अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि कहाँ व क्यों उत्पन्न होती है?
उत्तर:
अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि की उत्पत्ति अन्टार्कटिका महाद्वीप के चारों ओर होती है। यह जलराशि अन्टार्कटिका झुकाव क्षेत्र के कारण उत्पन्न होती है।

प्रश्न 20.
उत्तरी प्रशान्त मध्यवर्ती जलराशि कहाँ उत्पन्न होती है?
उत्तर:
यह जलराशि उत्तरी प्रशान्त महासागर में उत्तर-पूर्व की ओर 40° उत्तरी अक्षांश के निकट उत्पन्न होती है।

प्रश्न 21.
केन्द्रवर्ती जलराशियाँ कहाँ मिलती हैं?
उत्तर:
ये जलराशियाँ शीतकालीन उपोष्ण अभिसरण के क्षेत्रों में 35°से 42° उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों के मध्य उपस्थित मिलती हैं।

प्रश्न 22.
भूमध्यरेखीय जलराशि कहाँ स्थित मिलती है?
उत्तर:
भूमध्यरेखीय जलराशि प्रशान्त एवं हिन्द महासागर में भूमध्य रेखा के सहारे स्थित है। अटलांटिक महासागर की विशेष आकृति के कारण यह जलराशि इस महासागर में बिल्कुल नहीं मिलती है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type I

प्रश्न 1.
जलराशि जलमण्डल व स्थलमण्डल पर पुनः कैसे पहुँचती है?
उत्तर:
धरातल पर जल का संचयन या स्थिति मुख्यत: सागरों, झीलों, नदियों में मिलती है। इस जल पर सूर्यातप का प्रभाव पड़ने से वाष्पीकरण होता है। इसे वाष्पीकरण एवं वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया से धरातलीय जल वायुमण्डल में पहुँचता है। वायुमण्डल में तापमान के घटने तथा बदलती मौसमी दशाओं के कारण संघनन की प्रक्रिया होती है। इस संघनने की प्रक्रिया से बादल बनते हैं और इन बादलों से वर्षा होने के परिणाम स्वरूप जलराशि पुनः जलमण्डल व स्थलमण्डल पर पहुँचती है।

प्रश्न 2.
जलीय चक्र में जल के परिसंचरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जल चक्र में जल का परिसंचरण विभिन्न परिमण्डलों में भी स्वतंत्र रूप से होता है। इसमें वायुमण्डल में वायु का ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज परिसंचरण एक स्थान से दूसरे स्थान पर नमी का स्थानान्तरण, जलमण्डल में सागरीय धाराओं द्वारा जल संचलन तथा स्थलमण्डल से नदियों एवं हिमनदों द्वारा जल सागरों की ओर जाता है। इसी प्रकार मृदा से वाष्पीकृत एवं पौधों द्वारा वाष्पोत्सर्जित स्थल से अन्त: स्पन्दन द्वारा भूमि में पहुँचता है। प्रतिवर्ष पृथ्वी पर उपलब्ध जल का 1 प्रतिशत जल ही जलीय चक्र में संचारित होता है। जल-चक्र में सहभागी जल का बड़ा भाग ही शुद्ध जल है।

प्रश्न 3.
ग्लोब को ध्यान से देखने पर जल व थल के वितरण में कौन-सी विशेषता दृष्टिगोचर होती है?
उत्तर:
ग्लोब को ध्यान से देखने पर जल और स्थल के वितरण में निम्न दो विशेषताएँ स्पष्ट दृष्टिगोचर होती हैं-

  1. जल और स्थल भाग एक – दूसरे के विपरीत स्थित हैं; जैसे – प्रशान्त महासागर के विपरीत अफ्रीका का स्थल भाग, हिन्द महासागर के विपरीत अमेरिका का स्थल भाग और आर्कटिक महासागर के विपरीत अन्टार्कटिका का स्थल भाग स्थित है।
  2. महाद्वीपों और महासागरों का आकार लगभग त्रिभुजाकार है। महासागरों का आधार दक्षिण गोलार्द्ध में तथा शीर्ष उत्तर में है, वहीं महाद्वीपों का आधार उत्तर में तथा शीर्ष दक्षिण की ओर है।

प्रश्न 4.
विश्व की जलराशियों के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
विश्व में मिलने वाली जलराशियों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विश्व में मिलने वाली जलराशियाँ विविधता को दर्शाती हैं। विश्व की जलराशियों के अन्तर्गत विशाल महासागरों (प्रशान्त महासागर, अटलांटिक महासागर, हिन्द व आर्कटिक महासागर) के अतिरिक्त परावृत्त समुद्रों; जैसे-भूमध्यसागर, लाल सागर आदि, महाद्वीपों के किनारे स्थित खाड़ियों; जैसे-कैस्पियन सागर, मृत सागर, अमेरिका की वृहत झीलों, बैकाल, बाल्खस आदि शामिल हैं। इन सभी जलराशियों के स्वरूप में क्षेत्रफल एवं आयतन सम्बन्धी विविधताएँ देखने को मिलती हैं।

प्रश्न 5.
अन्टार्कटिका तलीय जलराशि को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
यह जलराशि अन्टार्कटिका महाद्वीप के निकट हिन्द एवं अन्ध महासागर के दक्षिण में मिलती है। इसका विस्तार रूप वेड़ल सागर में देखा जाता है। महाद्वीपीय स्तर के समीप जल के द्रवणांक के कारण लवणता की मात्रा बढ़ती जाती है। इस भाग में जल की लवणता 34.62%% रहती है. तथा तापमान -1.9°C एवं घनत्व 27.89 होता है। हिमांक प्राप्त कर लेने से इस जल का घनत्व बढ़ जाता है तथा वह तली में बैठ जाता है। क्योंकि समीपवर्ती सागर का जल अपेक्षाकृत उष्ण होता है। जिसमें लवणता 34.68%0 , तापमान 0.5°C तथा घनत्व 27.84 होता है। यह एक विशिष्ट प्रकार का जल है जो तली में फैलकर तथा मिश्रण द्वारा एक विशिष्ट जलराशि का रूप धारण कर लेता है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 17 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type II

प्रश्न 1.
जल-चक्र की क्रियाविधि को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
जल-चक्र का स्वरूप स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जल का वाष्प में परिवर्तित होकर वायुमण्डल में जमा होना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है जिस पर मौसम परिवर्तन निर्भर करता है। पृथ्वी पर संचालित होने वाले जल चक्र के मध्ये अनेक ऐसे अभिकरण होते हैं जो जलं की गतिशीलता को प्रभावित करते हैं। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा के कारण महासागरों का जलवाष्प का रूप धारण कर वायुमण्डल में प्रवेश करता है। महासागरों से स्थल की ओर चलने वाली पवन इस जलवाष्प को गति देती है तथा उनको एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर स्थानान्तरित करती है। इससे जलवाष्प का संघनन होकर धरातल पर वर्षा होती है तथा वर्षा से प्राप्त जल नदी-नालों के रूप में धरातल पर बहुता हुआ अन्त में सागरों में पहुँचता है। इस प्रकार वर्षा से प्राप्त इस जल का कुछ भाग वनस्पतियों द्वारा वाष्पोत्सर्जन होने से कम हो जाता है तथा कुछ जल नदियों, झीलों, तालाबों आदि से वाष्पीकरण द्वारा पुनः वायुमण्डल में पहुँच जाता है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी तल पर मिलने वाले जल व थल के वितरण को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
विभिन्न विद्वानों ने जल व थल के वितरण को किस प्रकार वर्णित किया है?
उत्तर:
सम्पूर्ण पृथ्वी का क्षेत्रफल 50.995 करोड़ वर्ग किमी है जिसमें से 36.106 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्रफल पर जलमण्डल और 14.889 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्रफल पर स्थलमण्डल विस्तृत है। जलमण्डल और स्थलमण्डल के विस्तार के सम्बन्ध में सर्वप्रथम डॉ. लोंग ने सन् 1742 में पृथ्वी पर स्थल और जल का अनुपात 1: 2.81 अर्थात् 26 प्रतिशत और 74 प्रतिशत बताया जबकि वेगनर ने स्थल का विस्तार सम्पूर्ण पृथ्वी के 28.3 प्रतिशत और जल का विस्तार 71.7 प्रतिशत माना। वैज्ञानिकों द्वारा नवीन यंत्रों की सहायता से ध्रुवीय क्षेत्रों में किये गये अन्वेषणों के आधार पर स्थल और जल का अनुपात 1:2.43 अर्थात् 29.2 प्रतिशत और 70.8 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इन अन्वेषणों से यह ज्ञात हुआ है कि समस्त जलमण्डल को 43 प्रतिशत जल उत्तरी गोलार्द्ध और 57 प्रतिशत जल दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित है।

प्रश्न 3.
यदि हम पृथ्वी पर दो काल्पनिक गोलार्दो की रचना करें तो किस प्रकार की स्थिति दृष्टिगत होगी?
उत्तर:
स्थल और जल के वितरण को अधिक स्पष्ट करने के लिए यदि हम पृथ्वी पर दो काल्पनिक गोलाद्ध की रचना करें तो निम्न स्थिति दृष्टिगत होगी-

  1. स्थलमण्डल को दर्शाने के लिए यदि फ्रांस के तट पर लॉयर नदी के मुहाने को केन्द्र तथा इस केन्द्र से सिंगापुर तक की दूरी को अर्द्धव्यास मानते हुए एक काल्पनिक गोलार्द्ध की रचना करें, तो इस गोलार्द्ध के 47.3 प्रतिशत भाग पर स्थल और 52.7 प्रतिशत भाग पर जल का विस्तार मिलेगा।
  2. जलमण्डल को दर्शाने के लिए यदि न्यूजीलैण्ड के दक्षिणी पूर्वी भाग को केन्द्र और इस केन्द्र से सुमात्रा के उत्तरी-पूर्वी तट तक अर्द्धव्यास लेते हुए एक काल्पनिक गोलार्द्ध की रचना करें तो इस गोलार्द्ध के 90.5 प्रतिशत भाग पर जल और केवल 9.5 प्रतिशत भाग पर स्थल का विस्तार मिलेगा।

प्रश्न 4.
जलराशियों का वितरण किस प्रकार विविधताओं को दर्शाता है? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
महासागरीय आधार पर जलराशियों का स्वरूप कैसे मिलता है?
उत्तर:
अधिकांश विद्वानों द्वारा तापमान और लवणता को ही आधार मानकर जलराशियों का वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है। एक जलराशि में यह आवश्यक है कि उसके अधिक से अधिक भाग में तापमान और लवणता की समानता पाई जाये। विभिन्न सागरीय क्षेत्रों में एक समान तापक्रम लवणता एवं घनत्व वाली जलराशियाँ प्रवाहित होती हैं। परन्तु प्रशान्त महासागर एवं एटलांटिक महासागर की जलराशियों में काफी विभिन्नता रहती है। एटलांटिक महासागर में भूमध्यरेखीय जलराशि नहीं मिलती है। उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी भागों में भूमध्यरेखीय प्रशान्त जलराशि का विस्तार अधिक मात्रा में रहता है। दक्षिणी प्रशान्त महासागर में शीतकाल में दो उच्च वायु भार क्षेत्रों की उपस्थिति रहती है। इसी प्रकार उत्तरी प्रशान्त महासागर एवं उत्तरी एटलांटिक महासागर की केन्द्रीय जलराशि में काफी अन्तर है।

प्रश्न 5.
उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि एवं अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशि एवं अन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि में निम्न अन्तर मिलते हैं-

क्र.सं.अन्तर का आधारउत्तरी अटलांटिक तटीय जलराशिअन्टार्कटिका मध्यवर्ती जलराशि
1.उत्पत्ति/स्थितियह जलराशि लेब्रोडोर सागर तथा आइसलैण्ड व दक्षिणी ग्रीनलैण्ड के मध्य पाई जाती है।इसकी उत्पत्ति अन्टार्कटिका महाद्वीप के चारों ओर होती है। यह अन्टार्कटिका झुकाव क्षेत्र के कारण उत्पन्न होती है।
2.लवणताइस जलराशि की लवणता 34.90%0 ग्राम मिलती है।इसकी लवणता 33.8%0 ग्राम मिलती है।
3.घनत्वइस जलराशि का घनत्व 27.88 मिलता है।इसका घनत्व 27.0 मिलता है।
4.तापमानयह जलराशि 2.8°C से 3.3°C के मध्य ताप दर्शाती है।इस जलराशि का तापमान 2.2°C मिलता है।
5.प्रभावइस जलराशि पर अभिसरण का प्रभाव पड़ता है।यह जलराशि पछुआ पवनों की पेटी से प्रभावित होती है।

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