RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 25 राजस्थान में मानव संसाधन

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Rajasthan Board RBSE Class 11 Economics Chapter 25 राजस्थान में मानव संसाधन-विकास

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर  

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या है
(अ) 5.65 करोड़
(ब) 6.85 करोड़
(स) 5.85 करोड़
(द) 6.65 करोड़.
उत्तर:
(ब) 6.85 करोड़

प्रश्न 2.
राज्य में 2001-2011 के दशक में जनसंख्या वृद्धि दर रही है
(अ).28.44
(ब) 28.41
(स) 21.30
(द) 20.40
उत्तर:
(स) 21.30

प्रश्न 3.
राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला है
(अ) जयपुर
(ब) अजमेर
(स) उदयपुर
(द) जैसलमेर
उत्तर:
(अ) जयपुर

प्रश्न 4.
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात क्या है?
(अ) 935
(ब) 928
(स) 920
(द) 925
उत्तर:
(द) 925

प्रश्न 5.
2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला है
(अ) कोटा
(ब) जालौर
(स) झुंझनूं
(द) प्रतापगढ़
उत्तर:
(अ) कोटा

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव संसाधन का अर्थ बताइए।
उत्तर:
ऐसा व्यक्ति जो स्वयं की उत्पत्ति के साथ-साथ अपने देश की उत्पत्ति में सहायक होता है इसी को मानव निर्माण या मानव संसाधन कहते हैं।

प्रश्न 2.
राजस्थान में सर्वाधिक साक्षरता कौन से जिले में है?
उत्तर:
कोटा में।

प्रश्न 3.
राजस्थान की कितनी प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है?
उत्तर:
75.13%

प्रश्न 4.
मानव विकास के कौन-कौन से सूचक है?
उत्तर:
मानव विकास के सूचक इस प्रकार हैं :

  1. शिशु मृत्यु-दर
  2. मातृ मृत्यु-दर
  3. कुल प्रजनन दर
  4. जन्म-दर
  5. कुल जीवन प्रत्याशा
  6. महिला
  7. पुरुष।

प्रश्न 5.
राज्य में अनिवार्य शिक्षा का अधिनियम (RTE Act) कब लागू किया गया है?
उत्तर:
1 अप्रैल, 2010 को।

प्रश्न 6.
सर्वाधिक जनसंख्या किस जिले की है?
उत्तर:
जयपुर।

प्रश्न 7.
2011 के अनुसार सबसे कम जनसंख्या कौन-से जिले की है?
उत्तर:
जैसलमेर।

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राजस्थान में प्राथमिक शिक्षा में क्या-क्या समस्याएँ पायी गई हैं?
उत्तर:
राजस्थान में शिक्षा में मात्रात्मक उद्देश्यों को पूरा करने पर बल दिया जा रहा है लेकिन भौतिक सुविधाओं का अभाव है। गरीबी के कारण आज भी कई बच्चे शिक्षा से वंचित है। राज्य सरकार योजनाएँ चला रही है लेकिन उनका क्रियान्वयन सही तरह से नहीं किया जा रहा है।

प्रश्न 2.
जनसंख्या के व्यावसायिक वितरण को स्पष्ट करो।
उत्तर:
जनसंख्या का आय का वितरण, प्रति व्यक्ति भूमि का अनुपात, पूँजी निर्माण की दर, विनियोग का स्तर आदि के आधार पर वितरण व्यावसायिक वितरण कहलाता है।

प्रश्न 3.
राजस्थान में स्वास्थ्य सूचकों की स्थिति का वर्णन करो।
उत्तर:
राजस्थान में स्वास्थ्य सूचकों की स्थिति राष्ट्रीय स्थिति से अच्छी नहीं रही है। राज्य में जन्म-दर तथा शिशु मृत्यु-दर देश से अधिक है। हालांकि मृत्यु-दर तथा जीवन प्रत्याशा में कोई विभेद नहीं रहा। लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में राज्य के स्वास्थ्य सूचकों की स्थिति अच्छी नहीं है।

प्रश्न 4.
मुख्यमन्त्री निःशुल्क दवा योजना को स्पष्ट करो।
उत्तर:
यह योजना 2 अक्टूबर, 2011 में लागू की गई। इसका उद्देश्य राजकीय चिकित्सालयों में आने वाले सभी अन्तरंग एवं बहिरंग रोगियों को लाभ पहुँचाना तथा रोगियों को अधिकांश दवाई निःशुल्क उपलब्ध करवाना है।

प्रश्न 5.
जनसंख्या वृद्धि दर को प्रभावित करने वाले कारकों की सूची बनाइए।
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि दर को प्रभावित करने वाले कारक अग्रलिखित हैं :

  1. बाल विवाह
  2. गरीबी एवं निम्न जीवन स्तर
  3. शिक्षा का अभाव
  4. आर्थिक पिछड़ापन
  5. उष्ण जलवायु
  6. परिवार नियोजन कार्यक्रम की विफलता
  7. जन्म-दर व मृत्यु-दर में अन्तर
  8. जनसंख्या प्रवास
  9. भाग्यवादिता

प्रश्न 6.
लिंगानुपात किसे कहते हैं? राजस्थान में इसकी स्थिति बताइए।
उत्तर:
प्रति एक हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात 928 रहा तथा भारत में 943 रहा। अत: लिंगानुपात भारत की तुलना में राजस्थान में कम रहा। लेकिन 2001 में यह 921 था जिसमें 7 अंकों की वृद्धि हुई। राजस्थान में सर्वाधिक लिंगानुपात प्रतापगढ़ 994 एवं न्यूनतम धौलपुर में 846 रहा है।

प्रश्न 7.
राजस्थान में साक्षरता नीचे रहने का कारण बताइये।
उत्तर:
राजस्थान में साक्षरता नीची रहने के निम्नलिखित कारण हैं :

  1. पुनर्गठन से पूर्व रियासतों में शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया।
  2. विभिन्न सरकारों ने भी साक्षरता के विकास पर विशेष ध्यान नहीं दिया।
  3. सामाजिक व आर्थिक कारणों ने भी साक्षरता को प्रभावित किया।
  4. राज्य में निर्धनता भी साक्षरता में अवरोधक रही।
  5. राज्य में शिक्षा के संसाधनों, स्कूलों का भी अभाव रहा।

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राजस्थान के जनसंख्या के आकार एवं वृद्धि के कारणों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
राजस्थान के जनसंख्या के आकार एवं वृद्धि के निम्नलिखित कारण हैं

  • बाल विवाह :
    राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कम उम्र में शादी हो जाती है परिणामस्वरूप कम उम्र में ही सन्तान उत्पन्न होना आरम्भ हो जाती थी, जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ी, कानूनी रूप से विवाह योग्य आयु लड़के व लड़कियों की क्रमश: 21 व 18 वर्ष है, परन्तु राजस्थान में अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर हजारों बाल विवाह होते हैं।
  • गरीबी एवं निम्न जीवन स्तर :
    परम्परागत काल से ही राजस्थान आर्थिक रूप से पिछड़ा है। जनसंख्या, शक्ति व साधन दोनों रूप से प्रयोग होती है, इसलिए लोग शक्ति व साधनों के लिए परिवार को बढ़ाना चाहते थे, जिससे जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ी। वर्तमान में गरीब लोग अतिरिक्त संतान को अतिरिक्त आय का स्रोत मानते हैं, गरीबी के कारण ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे बच्चों को आय प्राप्त करने की दृष्टि से काम पर लगा दिया जाता है।
  • शिक्षा का अभाव :
    राजस्थान में साक्षरता का स्तर निम्न रहा है। अशिक्षा के कारण लोग भविष्य के प्रति जागरूक नहीं होते हैं। राजस्थान में पुरुष साक्षरता की तुलना में महिला साक्षरता दयनीय है। जिसके कारण परिवार नियोजनों के साधनों से अनभिज्ञ है, अत: शिक्षा के अभाव के कारण जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ी है।
  • आर्थिक पिछड़ापन :
    आर्थिक विकास होने के साथ-साथ जनसंख्या वृद्धि दर भी कम हो जाती है। राजस्थान आर्थिक विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। इसलिए जनसंख्या की वृद्धि दर अधिक है।
  • उष्ण जलवायु :
    राजस्थान की जलवायु उष्ण होने के कारण मनुष्य परिपक्व जल्दी हो जाते हैं इससे जनसंख्या वृद्धि दर बढ़ने की सम्भावना रहती है।
  • परिवार नियोजन कार्यक्रम की विफलता :
    लोगों में उदासीनता, कर्मचारियों की लापरवाही एवं परिवार नियोजन कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार कम होने से जनसंख्या वृद्धि कम नहीं हो पाती है।
  • जन्म व मृत्यु :
    दर अन्तर-राजस्थान में जन्म-दर व मृत्यु-दर में काफी अन्तर होने के कारण जनसंख्या वृद्धि अधिक रहती है। आर्थिक समीक्षा 2014-15 के अनुसार राजस्थान में जन्म-दर 2012 में प्रति हजार 25.9 व समस्त भारत में 21.6 रही है। इसका मुख्य कारण विवाह की अनिवार्यता और विवाह की आयु कम होता है।
  • जनसंख्या प्रवास :
    योजना काल में भारत के पड़ोसी देश एवं देश के दूसरे राज्यों के लोग पलायन करके राजस्थान में आये।

प्रश्न 2.
राजस्थान की शिक्षा की स्थिति व समस्याओं का वर्णन करते हुए निवारण के उपाय बताओ।
उत्तर:
मानव संसाधन विकास में शिक्षा का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षा मानव के जीवन का सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक उन्नति का आधार होता है। राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं का मूल उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों का विकास कर लोगों को अधिक समृद्ध एवं खुशहाल बनाना है। अत: राज्य सरकार सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर हर सम्भव प्रयास कर रही है। सामाजिक क्षेत्र से सम्बन्धित गतिविधियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, आवास, पेयजल आदि के विकास को विशेष महत्त्व दिया जाता है।

राजस्थान को राज्य के गठन के समय कमजोर शिक्षा प्रणाली विरासत में प्राप्त हुई। तब से ही राज्य सरकार शिक्षा एवं शिक्षा संसाधनों में सुधार के लिए ठोस प्रयास कर रही है। सरकार विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं के माध्यम से सम्पूर्ण साक्षरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु लगातार प्रयासरत है। राजस्थान में 2014-15 तक 41,525 प्राथमिक विद्यालय 37,573 उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं 27,155 प्राथमिक कक्षाओं सहित माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालय चालू हैं। जिनमें 60.75 लाख छात्र नामांकित हैं।

राज्य में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 1 अप्रैल, 2010 से लागू किया गया है। इसमें निजी विद्यालय के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित की गयी हैं?

शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सम्बलन अभियान 2012-13 से प्रारम्भ किया गया तथा विद्यालय में भौतिक संसाधनों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षा को बढ़ाने के लिए राज्य में सम्पूर्ण साक्षरता अभियान, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन साक्षर भारत कार्यक्रम, सतत् शिक्षा कार्यक्रम आदि चलाये जा रहे हैं। राजस्थान में शिक्षा की स्थिति में सुधार आ रहा है तथा सरकार द्वारा इसके लिए योजनाएँ चलायी जा रही हैं, जिससे शिक्षा में वृद्धि हो सके।

प्रश्न 3.
राजस्थान सरकार द्वारा शिक्षा व स्वास्थ्य पर किये गए प्रयासों का वर्णन करो।
उत्तर:
राजस्थान द्वारा शिक्षा पर प्रयास :
राजस्थान में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएँ चलायी जा रही हैं। राजस्थान में 2014-15 तक 41,525 प्राथमिक विद्यालय 37,573 उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं 27,155 प्राथमिक कक्षाओं सहित माध्य/उच्च माध्यमिक विद्यालय चालू हैं। जिनमें 60.75 लाख छात्र नामांकित हैं। 6-14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए ‘सर्व शिक्षा अभियान’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राज्य में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 1 अप्रैल, 2010 से लागू किया गया है। जिसके तहत निजी विद्यालयों में कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित की गयी हैं।

बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 200 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय कार्यरत हैं तथा 10 मेवात बालिका आवासीय विद्यालय संचालित हैं। शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सम्बलन अभियान 2012-13 से प्रारम्भ किया गया तथा विद्यालय के भौतिक संसाधनों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को वर्ष 2017 तक 100% तथा ठहराव दर वर्ष 2020 तक 100% करने के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) योजना चल रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। 66 अंग्रेजी माध्यम के स्वामी विवेकानन्द राजकीय मॉडल स्कूलों की स्थापना की गयी है।।

राजस्थान सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर प्रयास :
राजस्थान सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2014 तक राज्य में ऐलोपैथिक मेडिकल संस्थाओं की कुल संख्या 17,543 थी जिसमें 113 अस्पताल, 194 डिस्पेन्सरियाँ तथा 14,408 उप स्वास्थ्य केन्द्र तथा शेष अन्य सुविधाएँ थीं। राज्य में वर्तमान में 118 आयुर्वेदिक अस्पताल, 3,577 आयुर्वेदिक औषधालय, 3 योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय संचालित हैं। राज्य में 46,669 रोगी शैयाओं की सुविधा थी। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का अन्य राज्य की तुलना में अभाव हैं।

राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु कई योजनाएँ चलायी गई है। मुख्यमन्त्री नि:शुल्क दवा योजना 2 अक्टूबर, 2011 में लागू की गयी है। इसका उद्देश्य, राजकीय चिकित्सालयों में आने वाली सभी अन्तरंग एवं बहिरंग रोगियों को लाभ पहुँचाना तथा रोगियों को नि:शुल्क दवाएँ उपलब्ध कराना है।

मुख्यमन्त्री नि:शुल्क जाँच योजना राजकीय अस्पतालों में सम्पूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने और अन्य जाँच सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए चलाई गई है। इसके अलावा जननी शिशु सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, मुख्यमन्त्री B.P.L. जीवन रक्षा कोष योजना, . जननी एक्सप्रेस, धनवन्तरी 108 टोल फ्री ऐम्बुलेन्स योजना आदि भी राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए चल रही है।

प्रश्न 4.
मानव संसाधनों में मात्रात्मक पहलुओं की स्थिति स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव संसाधनों में मात्रात्मक पहलू :
i. राजस्थान में जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि :
मनुष्य जाति के विकास में बहुत अधिक प्रभावित करने वाला कारक उस देश या राज्य में जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि माना जाता है यदि जनसंख्या की वृद्धि अनियन्त्रित या अधिक होती है तो उस राज्य के योग्य नागरिकों के निर्माण में पिछड़ना पड़ता है अपेक्षित मानव पूँजी निर्माण नहीं होने पर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिससे सामाजिक परिवेश के बिगड़ने के साथ-साथ आर्थिक रूप से पिछड़ना पड़ता है। राज्य की आय का अधिकांश भाग सामाजिक सुरक्षा जैसे गरीबी रेखा, आवास सुविधा, स्वास्थ्य सुविधा पर खर्च हो जाता है और विकास कार्य अवरुद्ध हो जाते हैं। अत: मानव संसाधन में उस राज्य की जनसंख्या के आधार एवं वृद्धि का अध्ययन भी जरूरी हो जाता है।

ii. जनसंख्या घनत्व :
प्रति वर्ग किलोमीटर में निवास करने वाली जनसंख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। जनगणना, 2011 के अनुसार राजस्थान में जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर आंका गया। भारत में जनसंख्या घनत्व 382 रहा। भारत की तुलना में राजस्थान में जनसंख्या घनत्व कम है। 2001 में राजस्थान में यह 165 था।

iii. राजस्थान में शहरी एवं ग्रामीण जनसंख्या :
जनसंख्या को निवास एवं क्रियात्मक विशेषताओं के आधार पर दो भागों, ग्रामीण व शहरी जनसंख्या में बाँटकर अध्ययन किया जाता है। क्योंकि ग्रामीण व शहरी जनसंख्या की संरचना, घनत्व, वितरण, जीवन स्तर, समस्याओं आदि में भारी अन्तर पाया जाता है। शहरी व ग्रामीण जनसंख्या के बीच आसानी से कोई विभाजन रेखा नहीं खींची जा सकती है क्योंकि ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में जनसंख्या का प्रवसन होता रहता है।

iv. लिंगानुपात :
प्रति हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात 928 रहा तथा भारत में 943 रहा। अत: लिंगानुपात भारत की तुलना में राजस्थान में कम रहा लेकिन 2001 में यह 921 था जिसमें 7 अंकों की वृद्धि हुई। भारत में सर्वाधिक लिंगानुपात केरल में 1084 तथा राजस्थान में सर्वाधिक लिंगानुपात प्रतापगढ़ 994 एवं न्यूनतम धौलपुर में 846 रहा है।

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव पूँजी का निर्माण होता है
(अ) शिक्षा में निवेश से
(ब) चिकित्सा में निवेश से
(स) प्रशिक्षण में निवेश से
(द) इन सभी में निवेश से
उत्तर:
(द) इन सभी में निवेश से

प्रश्न 2.
मानव पूँजी क्या है?
(अ) जनसंख्या वृद्धि
(ब) कौशल एवं निहित ज्ञान का स्टॉक
(स) भौतिक पूँजी में वृद्धि
(द) आर्थिक संवृद्धि में वृद्धि
उत्तर:
(ब) कौशल एवं निहित ज्ञान का स्टॉक

प्रश्न 3.
जनसंख्या है
(अ) मानवीय संसाधन
(ब) प्राकृतिक संसाधन
(स) भौतिक संसाधन
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) प्राकृतिक संसाधन

प्रश्न 4.
सन 2011 में भारत की जनसंख्या थी
(अ) 100.7 करोड़
(ब) 121.06 करोड़
(स) 102.7 करोड़
(द) 103.7 करोड़
उत्तर:
(ब) 121.06 करोड़

प्रश्न 5.
सन 2011 में जनसंख्या घनत्व था
(अ) 224
(ब) 324
(स) 382
(द) 524
उत्तर:
(स) 382

प्रश्न 6.
मानवीय संसाधन के कितने पहलू हैं?
(अ) चार
(ब) तीन
(स) दो
(द) पाँच
उत्तर:
(स) दो

प्रश्न 7.
2011 में राजस्थान में सर्वाधिक वृद्धि दर किस जिले में रही?
(अ) बाड़मेर
(ब) बांसवाड़ा
(स) टोंक
(द) जयपुर
उत्तर:
(अ) बाड़मेर

प्रश्न 8.
भारत में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व 2011 में किस राज्य में है?
(अ) बिहार
(ब) बंगाल
(स) दिल्ली
(द) राजस्थान
उत्तर:
(अ) बिहार

प्रश्न 9.
2011 के अनुसार राजस्थान में सबसे कम जनसंख्या किस जिले में है?
(अ) जैसलमेर
(ब) बाड़मेर
(स) बासवाड़ा
(द) चित्तौड़गढ़
उत्तर:
(अ) जैसलमेर

प्रश्न 10.
राज्य में सर्वाधिक साक्षरता किस जिले में है?
(अ) कोटा
(ब) झुंझनूं.
(स) सीकर
(द) जयपुर
उत्तर:
(अ) कोटा

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 अतिलघुउत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की जनसंख्या में दशकीय वृद्धि दर कितनी रही?
उत्तर:
17.7%

प्रश्न 2.
राजस्थान की जनसंख्या में दशकीय वृद्धि दर कितनी रही?
उत्तर:
21.30%

प्रश्न 3.
भारत की तुलना में राजस्थान की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर कितनी अधिक रही?
उत्तर:
4%

प्रश्न 4.
भारत में राजस्थान का जनसंख्या की दृष्टि से कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
आठवां।

प्रश्न 5.
राजस्थान का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत है?
उत्तर:
10.4%

प्रश्न 6.
भारत में सर्वाधिक जनसंख्या किस राज्य में है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश में।

प्रश्न 7.
राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक कब रही?
उत्तर:
1921 में।

प्रश्न 8.
सबसे कम जनसंख्या वृद्धि राजस्थान में किस जिले में रही?
उत्तर:
गंगानगर।

प्रश्न 9.
कानूनी रूप से विवाह योग्य लड़के व लड़की की उम्र कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
21 व 18 वर्ष।

प्रश्न 10.
वर्तमान में गरीब लोग अतिरिक्त सन्तान को किसका स्रोत मानते हैं?
उत्तर:
अतिरिक्त आय का।

प्रश्न 11.
बाड़मेर में जनसंख्या वृद्धि दर कितने प्रतिशत रही?
उत्तर:
32.5%

प्रश्न 12.
राजस्थान में मनुष्य के जल्दी परिपक्व होने का क्या कारण है?
उत्तर:
राजस्थान की उष्ण जलवायु होने के कारण।

प्रश्न 13.
राजस्थान में 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या घनत्व कितना है?
उत्तर:
200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 14.
राजस्थान में 2001 में जनसंख्या घनत्व कितना था?
उत्तर:
165 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 15.
भारत में न्यूनतम जनसंख्या घनत्ल किस राज्य में है?
उत्तर:
अरुणाचल प्रदेश।

प्रश्न 16.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लिंगानुपात कितना है?
उत्तर:
943.

प्रश्न 17.
भारत में सर्वाधिक लिंगानुपात किस राज्य में है?
उत्तर:
केरल (1084)

प्रश्न 18.
राजस्थान में लिंगानुपात में 2001 की तुलना में 2011 में कितनी वृद्धि हुई?
उत्तर:
7 अंकों की वृद्धि (921-928)।

प्रश्न 19.
राजस्थान में न्यूनतम लिंगानुपात किस जले में हैं?
उत्तर:
धौलपुर (846)

प्रश्न 20.
राजस्थान में बाल लिंगानुपात 2011 में कितना रहा?
उत्तर:
888 रह गया।

प्रश्न 21.
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में महिला साक्षरता कितनी रही? ..
उत्तर:
52.10%

प्रश्न 22.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की साक्षरता कितनी रही?
उत्तर:
72.99%

प्रश्न 23.
राजस्थान में पुरुष साक्षरता सर्वाधिक किस जिले में रही?
उत्तर:
झुन्झुनू (86.9%)

प्रश्न 24.
राजस्थान में न्यूनतम महिला साक्षरता किस जिले में रही?
उत्तर:
जालौर (38.5%)

प्रश्न 25.
मानव विकास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विकास से हमारा अभिप्राय अच्छी शिक्षा तथा अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करके व्यक्तियों के विकास करने से है।

प्रश्न 26.
मानव संसाधन विकास प्रक्रिया में शिक्षा की भूमिका संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
ज्ञान तथा कौशल में सुधार हेतु अध्ययन, प्रशिक्षण तथा सीखने की प्रक्रिया शिक्षा के अन्तर्गत ही आती है अत: मानव संसाधन के विकास में इसका महत्त्वपूर्ण साधन है।

प्रश्न 27.
मानव पूँजी निर्माण में आने वाली दो प्रमुख समस्याओं को नामांकित कीजिए।
उत्तर:

  1. जनसंख्या विस्फोट
  2. दयनीय आर्थिक स्थिति।

प्रश्न 28.
मनुष्य जाति के विकास में बहुत अधिक प्रभावित करने वाला कारक कौन सा है?
उत्तर:
मनुष्य जाति के विकास में बहुत अधिक प्रभावित करने वाला कारक उस देश या राज्य में जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि माना जाता है।

प्रश्न 29.
राजस्थान में 1921 में जनसंख्या वृद्धि नकारात्मक क्यों रही?
उत्तर:
क्योंकि उस समय महामारियाँ, बीमारियों व विश्वयुद्ध प्रमुख कारण थे।

प्रश्न 30.
राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि दर को प्रभावित करने वाले चार कारण लिखो।
उत्तर:

  1. बाल विवाह,
  2. गरीबी एवं निम्न जीवन स्तर,
  3. शिक्षा का अभाव,
  4. आर्थिक पिछड़ापन।

प्रश्न 31.
जनसंख्या घनत्व से क्या आशय है?
उत्तर:
प्रति वर्ग किलोमीटर में निवास करने वाली जनसंख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 32.
लिंगानुपात से क्या आशय है?
उत्तर:
प्रति एक हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं।

प्रश्न 33.
बाल लिंगानुपात से क्या आशय है?
उत्तर:
0-6 आयु वर्ग में लिंगानुपात को बाल लिंगानुपात माना जाता है।

प्रश्न 34.
राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं का मूल उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं का मूल उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों का विकास कर, लोगों को अधिक समृद्ध एवं खुशहाल बनाना है।

प्रश्न 35.
राज्य में नीची साक्षरता का कोई एक कारण बताइए।
उत्तर:
राज्य की निर्धनता भी साक्षरता में अवरोधक रही है।

प्रश्न 36.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किसको प्राथमिकता दी गई है?
उत्तर:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा को प्राथमिकता दी गयी है।

प्रश्न 37.
6-14 वर्ष आयु वर्ग के लिए कौन-सा कार्यक्रम चलाया जा रहा है?
उत्तर:
6-14 वर्ष आयु वर्ग के लिए ‘सर्व शिक्षा अभियान’ शिक्षा प्रदान करने के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है?

प्रश्न 38.
शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कौन-सा अभियान प्रारम्भ किया गया है?
उत्तर:
शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सम्बलन अभियान 2012-13 में प्रारम्भ किया गया है।

प्रश्न 39.
भारत तथा राजस्थान में शिशु मृत्यु-दर (SRS-2014) कितनी है?
उत्तर:
शिशु मृत्यु-दर (SRS-2014) भारत में 40 तथा राजस्थान में 47 है।

प्रश्न 40.
राजस्थान में स्वास्थ्य सूचकों की स्थिति कैसी है?
उत्तर:
राजस्थान में स्वास्थ्य सूचकों की स्थिति अच्छी नहीं है। राज्य में जन्म-दर तथा शिशु मृत्यु-दर देश से अधिक है।

प्रश्न 41.
स्वास्थ्य सुविधाओं के अन्तर्गत किन सुविधाओं को शामिल किया जाता है?
उत्तर:
स्वास्थ्य सुविधाओं के अन्तर्गत अस्पतालों, डॉक्टरों की संख्या, पोषण, पेयजल सुविधाओं को शामिल करते हैं।

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानवीय संसाधन का महत्त्व समझाइये।
उत्तर:
विकास का मुख्य आधार जनसंख्या होती है। प्राकृतिक संसाधन निष्क्रिय होते हैं। उनका उचित उपयोग करने के लिए मानवीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। जनसंख्या आर्थिक विकास को भी प्रभावित करती है। वह आर्थिक विकास के विभिन्न सूचकों-जनसंख्या एवं श्रमशक्ति, पूँजी निर्माण की दर, आय का स्तर, प्रति व्यक्ति भूमि का अनुपात, आय का वितरण, जीवन स्तर, विनियोग का स्तर आदि को प्रभावित करती है। जनसंख्या बढ़ने पर श्रम शक्ति भी बढ़ती है जो कई बार आर्थिक विकास के लिए लाभदायक व आवश्यक सिद्ध होती है।

प्रश्न 2.
राजस्थान में जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव बताइए।
उत्तर:
मनुष्य जाति के विकास में बहुत अधिक प्रभावित करने वाला कारक उस देश या राज्य में जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि को माना जाता है यदि जनसंख्या की वृद्धि अनियन्त्रित या अधिक होती है तो उस राज्य के योग्य नागरिकों के निर्माण में पिछड़ना पड़ता है अपेक्षित मानव पूँजी निर्माण नहीं होने पर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिससे सामाजिक परिवेश के बिगड़ने के साथ-साथ आर्थिक रूप से पिछड़ना पड़ता है। राज्य की आय का अधिकांश भाग सामाजिक सुरक्षा; जैसे-गरीबी रेखा, आवास सुविधा, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा पर खर्च हो जाता है और विकास अवरुद्ध हो जाता है।

प्रश्न 3.
राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि दर को प्रभावित करने वाले दो कारण समझाइए।
उत्तर:

  • आर्थिक पिछड़ापन :
    आर्थिक विकास होने के साथ-साथ जनसंख्या वृद्धि दर भी कम हो जाती है। राजस्थान आर्थिक विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। इसलिए जनसंख्या की वृद्धि दर अधिक है।
  • उष्ण जलवायु :
    राजस्थान की जलवायु उष्ण होने के कारण मनुष्य परिपक्व जल्दी हो जाते हैं इससे जनसंख्या वृद्धि दर बढ़ने की सम्भावना रहती है।

प्रश्न 4.
जन्म-दर से क्या आशय है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर:
जन्म-दर को प्रतिवर्ष में जीवित शिशुओं की संख्या में कुल जनसंख्या का भाग देकर इसे 100 से गुणा करके प्रतिशत या 1000 से गुणा करके प्रति हजार ज्ञात करते हैं।
जन्म-दर = (frac{B}{P}) × 1000
B = एक वर्ष में हुए जन्मों की संख्या, P = उस अवधि की जनसंख्या

प्रश्न 5.
बाल-विवाह का जनसंख्या वृद्धि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कम उम्र में ही शादी हो जाती है परिणामस्वरूप कम उम्र में ही सन्तान उत्पन्न होना आरम्भ हो जाती थी। जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ी, कानूनी रूप से विवाह योग्य आयु लड़के व लड़कियों की क्रमशः 21 व 18 वर्ष है, परन्तु राजस्थान में अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर हजारों बाल विवाह होते हैं।

प्रश्न 6.
जनसंख्या घनत्व से क्या आशय है? भारत और राजस्थान में कितना है?
उत्तर:
प्रति वर्ग किलोमीटर में निवास करने वाली जनसंख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। जनगणना, 2011 के अनुसार राजस्थान में जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर आंका गया। भारत में जनसंख्या घनत्व कम है। 2001 में राजस्थान में यह 165 था। सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व बिहार में 1106 तथा न्यूनतम अरुणाचल प्रदेश में 17 है।

प्रश्न 7.
लिंगानुपात से क्या आशय है? इसकी स्थिति देश व राज्य में समझाइये।
उत्तर:
प्रति एक हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात 928 रहा तथा भारत में 943 रहा। अत: लिंगानुपात भारत की तुलना में राजस्थान में कम रहा लेकिन 2001 में यह 921 था जिसमें 7 अंकों की वृद्धि हुई। भारत में सर्वाधिक लिंगानुपात केरल में 1084 तथा राजस्थान में प्रतापगढ़ 994 एवं न्यूनतम धौलपुर में 846 रहा है।

प्रश्न 8.
बाल लिंगानुपात से क्या आशय है? इसकी स्थिति बताइये।
उत्तर:
0-6 आयु वर्ग में लिंगानुपात को बाल लिंगानुपात माना गया। राजस्थान में बाल लिंगानुपात 2011 में घटकर 888 रह गया। जो 2001 में 909 था। जो राजस्थान में चिंता का विषय माना जाता है। राजस्थान का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का 10.4% है तथा वहाँ कुल जनसंख्या का 50% भाग निवास करता है।

प्रश्न 9.
राजस्थान की साक्षरता स्थिति को बताइए।।
उत्तर:
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में कुल साक्षरता 66.10% है जिसमें पुरुष साक्षरता 79.20% तथा महिला साक्षरता 52.10% रही है। जबकि भारत में कुल साक्षरता 72.99% है। अत: राज्य की साक्षरता दर देश की तुलना में कम है। विशेष रूप से महिला साक्षरता बहुत ही नीची है।

प्रश्न 10.
राजस्थान में स्वास्थ्य स्थिति को स्वास्थ्य सूचकों के माध्यम से दर्शाओ।
उत्तर:

क्र.से.स्वास्थ्यसंकेतक
1शिशु मृत्यु-दर (SRS-2014)47
2मातृ मृत्यु अनुपात (SRS-2011-13)244
3कुल प्रजनन दर (SRS-2013)2.8
4शिशु मृत्यु-दर (0-4)13
5जन्म-दर (SRS-2014)25.6
6मृत्यु-दर (SRS-2014)6.5
7कुल जीवन प्रत्याशा (SRS-2006-10)66.5
8पुरुष (SRS-2006-10)64.7
9महिला (SRS-2006-10)68.3

प्रश्न 11.
मुख्यमन्त्री निःशुल्क जाँच योजना पर टिप्पणी लिखो।
उत्तर:
यह योजना राजकीय अस्पतालों में सम्पूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने और अन्य जाँच सुविधाओं नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए चलायी गई है। इसके अलावा जननी शिशु सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय दल बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, मुख्यमन्त्री BPL, जीवन रक्षा कोष योजना, जननी एक्सप्रेस, धनवन्तरी 108 टोल फ्री एम्बुलेंस योजना आदि भी राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए चल रही है।

प्रश्न 12.
राजस्थान में स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याएँ बताइए।
उत्तर:
राज्य में संचालित विभिन्न योजनाओं के उपरान्त राजस्थान के ग्रामीण, दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु जन्म के समय अप्रशिक्षित दाइयों की सेवाएं ली जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों के अभाव के कारण नीम हकीमों का जाल फैला है।

प्रश्न 13.
मानव पूँजी में निवेश आर्थिक संवृद्धि में किस प्रकार सहायक होता है?
उत्तर:
साक्षर और निरक्षर की तुलना में साक्षर हर तरह से पारंगत होता है वह आय अर्जित करने में भी निरक्षर से आगे रहता है। आर्थिक संवृद्धि का अर्थ देश की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि से होता है। निश्चित रूप से साक्षर व्यक्ति का आर्थिक संवृद्धि योगदान निरक्षर व्यक्ति की तुलना में अधिक होगा। स्वस्थ व्यक्ति द्वारा लगातार व्यवधान रहित श्रम कार्य किया जा सकता है। अतः स्वस्थ मानव पूँजी भी आर्थिक संवृद्धि का एक महत्त्वपूर्ण कारक है। इसके अतिरिक्त. कार्य-प्रशिक्षण, सूचना एवं प्रवास पर व्यय भी मानव पूँजी का निर्माण करते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य कार्यों में निवेश से मानव उत्पादकता में वृद्धि होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बल मिलता है। इस प्रकार मानव पूँजी और आर्थिक संवृद्धि में प्रत्यक्ष सम्बन्ध है।

प्रश्न 14.
विश्वभर में औसत शैक्षिक स्तर में सुधार के साथ-साथ विषमताओं में कमी की प्रवृत्ति पाई गई है। टिप्पणी करें।
उत्तर:
मानव पूँजी निर्माण का प्रमुख स्रोत शिक्षा है। यह अच्छे नागरिकों का सृजन करती है। इसके माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास होता है। शिक्षा ही देश के प्राकृतिक एवं मानवीय साधनों के प्रयोग को और बेहतर बनाती है। मानसिक स्तर में सुधार लाती है। शिक्षा द्वारा नई तकनीक को और अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। आय वृद्धि के उद्देश्य से शिक्षा के कारण ही व्यक्ति पलायन का मार्ग अपनाते हैं। इस प्रकार आम नागरिकों की आय में वृद्धि से अमीरों और गरीबों के बीच की दूरी कम होने लगती है। इस प्रकार शिक्षा से विषमताओं में कमी की प्रवृत्ति पाई जाती है। अर्थात् शैक्षिक माध्यम से आर्थिक एवं सामाजिक विषमताओं के अन्तर को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास में शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण करें।
उत्तर:
संवृद्धि के साथ-साथ साधनों का वितरण समान होने पर आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक विकास को एक-दूसरे का पूरक समझा जा सकता है। शिक्षा मानव पूँजी का प्रमुख स्रोत है। साक्षर और निरक्षर में बहुत बड़ा फर्क होता है। साक्षर व्यक्ति निरक्षर व्यक्ति की तुलना में अधिक निपुण, कुशल, पारंगत एवं अधिक आय अर्जित करने में सक्षम होता है। वह आर्थिक संवृद्धि में भी अपना भरपूर योगदान देता है। शिक्षा ग्रहण करने से केवल व्यक्ति ही नहीं बल्कि परिवार, समाज एवं राष्ट्र भी लाभान्वित होता है। शिक्षित श्रम शक्ति की उपलब्धता नई प्रौद्योगिकी को अपनाने में भी सहायक होती है।

प्रश्न 16.
समझाइए कि शिक्षा में निवेश आर्थिक संवृद्धि को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
एक साक्षर व्यक्ति का श्रम कौशल एक निरक्षर व्यक्ति की अपेक्षा कहीं अधिक हो सकता है। व्यक्ति अपने भविष्य के उज्ज्वल सपनों को पूरा करने के उद्देश्य से शिक्षा पर व्यय करके अपनी आय बढ़ाता है। शिक्षा पर व्यय करके न केवल श्रम की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है बल्कि इससे नई प्रौद्योगिकी को अपनाने की भावना को भी बल मिलता है, जिससे तरह-तरह के आविष्कारों नवीन परिवर्तनों को क्रियान्वित करने में सहायता मिलती है। शिक्षित और कुशल श्रमिकों द्वारा भौतिक साधनों का प्रयोग करके अधिक और अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन कर आर्थिक संवृद्धि का सृजन किया जा सकता है। इस प्रकार शिक्षा में निवेश करना आर्थिक संवृद्धि में बढ़ोत्तरी के मार्ग को खोलना है।

प्रश्न 17.
किसी व्यक्ति के लिये कार्य के दौरान प्रशिक्षण क्यों आवश्यक होता है?
उत्तर:
वर्तमान समय में फर्मों द्वारा अपने कर्मचारियों के कार्य स्थल पर कार्य के दौरान कई प्रकार के प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है जो निम्न प्रकार से हैं :

  1. अपनी फर्म के कर्मचारियों को किसी अन्य संस्थान में प्रशिक्षण हेतु भेजा जा सकता है।
  2. फर्मों द्वारा अपने कार्य स्थल पर पहले से प्रशिक्षित निपुण कर्मचारियों के माध्यम से नये कर्मचारियों को कार्य सिखाया जा सकता है।

उक्त दोनों ही विधियों में फर्म द्वारा अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है। साथ ही प्रशिक्षित कर्मचारी निश्चित अवधि तक उक्त फर्म के हितार्थ ही कार्य करेंगे, ऐसा आश्वासन उन कर्मचारियों से ले लिया जाता है। इस प्रकार फर्म उनके प्रशिक्षण पर किये गए व्यय की भरपाई अधिक उत्पादकता से हुए लाभ के रूप में कर पाने में सफल रहती है। प्रशिक्षण से श्रम उत्पादकता एवं गुणवत्ता दोनों में ही निखार आता है। अतः निश्चित रूप से कार्य के दौरान प्रशिक्षण देना अत्यन्त आवश्यक है।

प्रश्न 18.
मानव पूँजी और आर्थिक संवृद्धि के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव पूँजी एवं आर्थिक संवृद्धि के बीच परस्पर सीधा सम्बन्ध है। एक ओर जहाँ उच्च आय, उच्च स्तर पर मानव पूँजी के सृजन का कारण बन सकती है वहीं दूसरी ओर उच्च स्तर पर मानव पूँजी निर्माण से आर्थिक संवृद्धि में सहयोग भी मिलता है।

प्रश्न 19.
भारत में स्त्री शिक्षा के प्रोत्साहन की आवश्यकता पर चर्चा करें।
उत्तर:
भारतवर्ष में आज भी स्त्री साक्षरता दर (64.64%) पुरुष साक्षरता दर (80.89%) से निम्न है। इसलिए आज के दौर में स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से अत्यन्त जरूरी है :

  1. समाज में महिलाओं का सामाजिक स्तर उठाने हेतु।
  2. स्त्रियों को तकनीकी शिक्षा प्रदान करने हेतु।
  3. महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य तथा बच्चों की शिक्षा के लिए।
  4. महिलाओं की आर्थिक स्वतन्त्रता को प्रोत्साहित करने हेतु।

प्रश्न 20.
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सरकार के विविध प्रकार के हस्तक्षेपों के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
शिक्षा एवं स्वास्थ्य आर्थिक संवृद्धि के आधारिक स्तम्भ के मुख्य बिन्दु हैं। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएँ निजी और सार्वजनिक, दोनों क्षेत्रों द्वारा कराई जाती हैं। शिक्षा का उच्चतर स्तर जहाँ कौशल एवं तकनीकी को विकसित करके उत्पादन क्षमता में इजाफा करता है, वहीं स्वस्थ, प्रदूषण रहित, स्वच्छ एवं पौष्टिक जीवन श्रम की उत्पादकता में वृद्धि करके राष्ट्रीय आय को बढ़ाता है। हम जानते हैं कि एक स्वस्थ एवं साक्षर व्यक्ति एक अस्वस्थ एवं निरक्षर व्यक्ति की तुलना में अधिक कुशलतापूर्वक कार्य कर सकता है।

इसी तरह से एक अच्छा प्रबन्धन अति दुर्लभ राष्ट्रीय संसाधनों के अधिक अच्छे ढंग से उपयोग को सम्भव बना सकता है तथा राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने में सार्थक सिद्ध हो सकता है। क्योंकि शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर निवेश मानव पूँजी के अच्छे स्रोत हैं और देश की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। इसलिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार का नियंत्रण बना रहना चाहिए, जिससे कि निजी क्षेत्र के सेवाप्रदाता समाज का शोषण न कर सकें।

निजी क्षेत्र लाभ आधारित होता है। निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली वाली शैक्षिक एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ अधिक महँगी हो जाती हैं जो समाज के सामान्य वर्ग की पहुँच से परे होती हैं। इन सुविधाओं के विस्तार हेतु सरकारी हस्तक्षेप अत्यन्त आवश्यक है। इस सम्बन्ध में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं :

  1. निजी क्षेत्रों की एकाधिकार की प्रवृत्ति पर प्रतिबन्ध।
  2. निजी क्षेत्र द्वारा शोषण पर रोकथाम।
  3. सामाजिक एवं आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा सम्बन्धी सुविधाएँ उपलब्ध कराना। .
  4. गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराना।
  5. विभिन्न प्रकार की संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए उपाय करना।
  6. सन्तुलित एवं पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

प्रश्न 21.
शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारी मात्रा में निवेश तथा उच्च स्तर के खर्च किये जाते हैं। निजी निवेशकों से इसकी कोई आशा नहीं की जा सकती क्योंकि वे अपनी पूँजी का निवेश करने के बदले ऊँचा लाभ भी पाना चाहेंगे और भारत जैसे विकासशील देश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर लोग ऊँची कीमत वहन ही नहीं कर सकते। सरकार द्वारा शिक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है इनके महत्त्व को देखते हुए इनके खर्चे सरकार उठाती है। अत: स्वभाविक है कि जो देखभाल करेगा तथा जिम्मेदारी उठायेगा वही हस्तक्षेप करने का अधिकार भी रखेगा।

प्रश्न 22.
भारत में प्राथमिक शिक्षा सम्बन्धी विरोधाभासी सच्चाई क्या है?
उत्तर:
शिक्षा की किसी एक विशेष श्रेणी के सकल नामांकन का सामान्य अनुमान लगाने हेतु नामांकित विद्यार्थियों की कुल संख्या तथा सम्बन्धित आयु समूह के व्यक्तियों की कुल संख्या का अनुपात मालूम किया जाता है।
जैसे-भारत के सन्दर्भ में
RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 25 राजस्थान में मानव संसाधन-विकास 1


विरोधाभासी सच्चाई यह है कि 1951 में सकल नामांकन अनुपात 43% था जो वर्तमान में 100% से भी अधिक है। सोचने वाली बात यह है कि अनुपात का.100% होना कैसे सम्भव है, जबकि ऐसा ही है। कारण यह है कि हमारे देश में 6-11 वर्ष तक के आयु समूह से ऊपर की आयु के विद्यार्थी भी प्राथमिक शिक्षा में प्रवेश पाते हैं।

प्रश्न 23.
माध्यमिक शिक्षा में सीमित सफलता के क्षेत्र बताइए।
उत्तर:
14 से 18 वर्ष तक की आयु समूह के विद्यार्थियों का क्रमश: माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक (IX, X, XI, XII) स्तर में नामांकन सन्तोषजनक नहीं है। 1951 में यह मात्र 5% था जो वर्तमान में 20% तक पहुँच गया है किन्तु फिर भी इसमें अभी सुधार की आवश्यकता है। व्यावसायिक शिक्षा में भी कोई सन्तोषजनक सुधार नहीं दिखाई दिया। लगभग 25% उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा देने का प्रावधान था किन्तु विषम परिस्थितियों में यह उपलब्धि केवल 5% तक सीमित होकर रह गई।

प्रश्न 24.
स्पष्ट कीजिए कि क्या उच्च शिक्षा में चिन्ता बरकरार है?
उत्तर:
उच्च शिक्षा के अन्तर्गत सामान्य, तकनीकी, चिकित्सीय, प्रबन्धकीय तथा व्यावसायिक आदि सभी शिक्षाएँ सम्मिलित होती हैं। यद्यपि समय के साथ इसमें बदलाव आता गया, इसमें वृद्धि होती गई किन्तु फिर भी चूँकि इसका क्षेत्र व्यापक है इसलिये इसमें कुछ बाधाएँ, रुकावटें अथवा चिन्ताएँ भी बनी रहीं। इसके कुछ प्रमुख कारण अग्र प्रकार हैं :

  1. विस्तार क्षेत्र सामान्य शिक्षा तक ही सिमट कर रह गया। कुल नामांकन 80% सामान्य शिक्षा में तथा शेष 20% व्यावसायिक क्षेत्र में हुआ। इस कारण युवा पीढ़ी स्वरोजगार की सम्भावना से वंचित होकर रह गई।
  2. नौकरी के इच्छुक उच्च अभ्यर्थियों की पूर्ति और माँग के बीच की दूरियाँ बढ़ती जा रही थीं। जिससे चारों तरफ बेरोजगारी ही बेरोजगारी थी। सरकार की आरक्षण नीति द्वारा विभिन्न वर्गों को यह संदेश मिल रहा था कि सरकार माँग के अनुरूप लोगों को रोजगार दिलाने में असमर्थ रही है।

प्रश्न 25.
प्रौढ़ एवं महिला शिक्षा अभियान पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
उत्तर:
निरक्षरता निवारण हेतु प्रौढ़ शिक्षा अभियान पर जोर दिया गया। इस सम्बन्ध में 1988 में ‘नेशनल लिटरेसी मिशन’ नामक समिति बनाई गई जिसके माध्यम से देश के 15 से 35 वर्ष के आयु समूह के 11 करोड़ निरक्षर व्यक्तियों के शिक्षित करने का प्रावधान रखा गया। 1976 में औपचारिक शिक्षा कार्यक्रम को स्थापित कर इसमें 15 से 25 वर्ष तक के आयु वर्ग के युवकों को अर्थपूर्ण शिक्षा देने की नीति बनाई गई। उद्देश्य पूर्ति हेतु अलग से महिला शिक्षा परिषद् की भी स्थापना की गई। महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के उद्देश्य से देश में बहुत से महिला पोलीटेक्निक भी स्थापित किये गए।

प्रश्न 26.
सर्वशिक्षा अभियान क्या है?
उत्तर:
राष्ट्रीय साक्षरता मिशन का उद्देश्य देश में निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाना था। इस उद्देश्य हेतु ‘सबके लिए शिक्षा’ नाम से एक आन्दोलन चलाया गया। आन्दोलन में सहभागिता दिखाते हुए 980 लाख व्यक्तियों ने इसमें हिस्सा लिया जिसमें से 971 लाख व्यक्ति साक्षर बन कर निकले।

वर्तमान रिपोर्ट के आधार पर स्वतन्त्रता के 67 वर्ष पश्चात् अथक प्रयासों के फलस्वरूप साक्षर व्यक्तियों की संख्या में चार गुना वृद्धि हुई है। इसी समय काल में स्कूलों की संख्या में चार गुना तथा विद्यार्थियों की संख्या में पाँच गुना वृद्धि हुई है। अब देश की साक्षरता दर 17% से बढ़कर 73% हो गई है।

प्रश्न 27.
क्या शिक्षा भारतवासियों के लिये अभी भी, एक चुनौती बनी हुई है?
उत्तर:
देश में समय की गति के साथ ही शिक्षा ने भी गति पकड़ ली। यह देश के उत्थान हेतु एक शुभ संकेत है। आँकड़ों के अनुसार देश के 80% बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। सरकार द्वारा 6 से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। किन्तु फिर भी देश के 20% बच्चे आज भी स्कूलों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। देश की शिक्षा प्रणाली इस गम्भीर समस्या से जूझ रही है अर्थात् भारत आज भी अशिक्षा जैसी गम्भीर समस्या से जूझ रहा है। इसके कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं  :

  1. जनसंख्या का तीव्र प्रसार।।
  2. लिंगभेद का होना।
  3. निजीकरण का होना।
  4. व्यावसायिक शिक्षा की अपर्याप्तता।
  5. ग्रामीण स्तर पर शैक्षिक संसाधनों का अभाव।
  6. सरकार द्वारा शिक्षा पर पर्याप्त व्यय नहीं।

प्रश्न 28.
स्पष्ट कीजिए शिक्षा एवं साक्षरता शब्द एक रूप नहीं है।:
उत्तर:
साक्षरता की अपेक्षा शिक्षा एक अत्यधिक विस्तृत रूप है। साक्षरता का अर्थ सिर्फ पढ़ने और लिखने की योग्यता से है। परन्तु शिक्षा में निम्नलिखित तीन चरण सम्मिलित होते हैं :

  1. प्राथमिक शिक्षा,
  2. माध्यमिक शिक्षा तथा
  3. उच्चतर शिक्षा।

इसके अन्तर्गत हम कह सकते हैं कि सभी शिक्षित व्यक्ति साक्षर की श्रेणी में आते हैं परन्तु सभी साक्षर व्यक्ति शिक्षित हों यह आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 29.
मानव पूँजी के निर्माण हेतु किन्हीं दो स्रोतों की संक्षिप्त व्याख्या दीजिए।
उत्तर:

  • शिक्षा पर व्यय :
    देश की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए शिक्षा पर व्यय करना मानव पूँजी निर्माण का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। भारत ही नहीं अपितु पूरे संसार में अधिकांशत: परिवार शिक्षा के लिए अच्छी खासी रकम व्यय करते हैं। भले ही इसके लिए उन्हें ऋण ही क्यों न लेना पड़े। अच्छी शिक्षा से इंसान जीवन भर अच्छी कमाई के स्रोत उत्पन्न करता रहता है। शिक्षा के क्षेत्र में किये गए व्यय के प्रथम चरण की तुलना में उससे होने वाली आय अधिक होती है।
  • स्वास्थ्य पर व्यय :
    अच्छे स्वास्थ्य हेतु किया जाने वाला व्यय मानव को और भी अधिक कार्यकुशल एवं निपुण बनाता है। अच्छे उत्पादन हेतु स्वस्थ शरीर का होना अत्यन्त आवश्यक माना जाता है। एक कहावत के तौर पर स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। इसका अर्थ है कि यदि हमारा शरीर स्वस्थ होगा, तो हमारी बुद्धि भी उतनी ही तेजी से विकसित होगी। अतः स्वास्थ्य पर किया जाने वाला व्यय मानव पूँजी निर्माण हेतु अच्छा स्रोत है।

प्रश्न 30.
शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता क्यों पडी?
उत्तर:
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप इसलिये आवश्यक है क्योंकि भारत जैसे विशाल देश में जनसंख्या का एक विशाल वर्ग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। अधिकांश लोग बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर पर्याप्त व्यय नहीं कर पाते। यदि इन क्षेत्रों में सरकारी हस्तक्षेप न हो तो निजी क्षेत्रों का इन सेवाओं पर एकाधिकार होगा और वे इन सेवाओं की ऊँची कीमत वसूल करेंगे। सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों को जो इन सेवाओं का व्यय भार वहन नहीं कर सकते उन्हें यह बुनियादी सुविधायें उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है, यह कार्य सरकार ही कर सकती है, अत: इन सुविधाओं की उचित उपलब्धता हेतु सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक है।

प्रश्न 31.
मानव जीवन पर शिक्षा एवं प्रशिक्षण के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा मानव की सोच में परिवर्तन लाकर उसे प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करती है तथा प्रशिक्षण से मानव की कार्यक्षमता का विकास होता है, अत: यह कहा जा सकता है कि शिक्षा एवं प्रशिक्षणं का मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

RBSE Class 11 Economics Chapter 25 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव पूँजी निर्माण की प्रमुख समस्याएँ बताते हुए उनके समाधान हेतु सुझाव दीजिए। साथ ही शिक्षा का महत्त्व भी स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में मानव पूँजी निर्माण की प्रमुख समस्याएँ मानव पूँजी निर्माण की प्रमुख समस्याएँ निम्न प्रकार हैं :”

  • तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या :
    जनसंख्या विस्फोट मानव पूँजी निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मनुष्य के स्वास्थ्य और शिक्षा से सम्बन्धित सुविधाओं के अभाव में इन सुविधाओं की प्रति व्यक्ति उपलब्धता घटती जाती है, विस्फोटक जनसंख्या उक्त सुविधाओं में कमी करती जा रही है।
  • बुद्धिजीवी अपवाह :
    विकासशील देशों में जन्मे व्यक्ति शिक्षा तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात् अच्छी आय अर्जित करने के उद्देश्य से विकसित देशों की ओर पलायन कर जाते हैं। इस प्रकार लोगों द्वारा प्रस्थान करने की प्रक्रिया को बुद्धिजीवी अपवाह कहा जाता है।
  • अपर्याप्त कुशल और प्रशिक्षित मानवशक्ति :
    विकासशील देशों में कुशल और प्रशिक्षित मानवशक्ति का अभाव है। इन देशों में शिक्षा के मानक स्तर को ऊँचा उठाने तथा श्रम बल की माँग और पूर्ति को बनाये रखने सम्बन्धी कोई प्रयास नहीं किये जाते। जिससे विकासशील देशों, जनसंख्या को बेरोजगारी की समस्या से जूझना पड़ता है।
  • कृषि में काम के मध्य प्रशिक्षण की अपर्याप्तता :
    कृषि विकासशील देशों का मेरुदण्ड है। किन्तु इसके विकास की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। विकासशील देशों में काम के मध्य प्रशिक्षण देने का भी कोई प्रावधान नहीं है। किसानों को कृषि से सम्बन्धित कोई नई तकनीक नहीं समझाई जाती। कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षित कृषि वैज्ञानिकों की अपर्याप्तता इसका प्रमुख कारण है। इस प्रकार विकासशील देशों में मानव पूँजी निर्माण को अनदेखा करना कृषि विकास में रुकावट है।
  • निम्न शैक्षिक मानक :
    उच्च शिक्षा की विस्तार भावना से प्रेरित होकर विकासशील देश बिना शैक्षिक मानकों का ध्यान रखे बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय स्थापित कर रहे हैं। शैक्षिक स्तर में गिरावट से निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में कार्यरत ऐसे संस्थानों से शिक्षित व्यक्ति भी असफलता का कारण बनते हैं।

मानव पूँजी निर्माण की समस्या के समाधान हेतु सुझाव :

  1. जनसंख्या विस्फोट को रोका जाए। जिससे श्रम बल की वृद्धि दर कम, बचत एवं निवेश में वृद्धि तथा जनसंख्या की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
  2. जनशक्ति नियोजन माध्यम से श्रम की पूर्ति श्रम की माँग के अनुरूप की जानी चाहिये।
  3. शिक्षा केवल सिद्धान्त प्रधान न होकर व्यवसाय प्रधान भी होनी चाहिए।
  4. स्वस्थ और शिक्षित जनसंख्या देश का गौरव होती है। अत: जनसंख्या को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएँ एवं पौष्टिक और सन्तुलित भोजन उपलब्ध कराना चाहिए।
  5. मानव पूँजी निर्माण राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम का एक भाग बनाया जाना चाहिए।

शिक्षा का महत्त्व :
शिक्षा से तात्पर्य लोगों के पढ़ने-लिखने और समझने की योग्यता से है भारत जैसे विकासशील देश में साक्षर संख्या 65% है जबकि अन्य विकसित देशों में यह संख्या 90 से 95% तक है।

शिक्षा के महत्त्व के कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्द :

  1. शिक्षा के माध्यम से नागरिकता की भावना का विकास होता है।
  2. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को बल मिलता है।
  3. लोगों के मानसिक स्तर में सुधार होता है।
  4. देशवासियों के सांस्कृतिक स्तर में भी सुधार होता है।
  5. शिक्षा मानवीय व्यक्तित्व विकास में सहायक है।
  6. शिक्षा विकास प्रक्रिया में जनसहभागिता को सम्भव बनाती है।
  7. शिक्षा द्वारा उपलब्ध प्राकृतिक एवं मानवीय साधनों का विवेकपूर्ण सदुपयोग होता है।

प्रश्न 2.
मानव पूँजी निर्माण से क्या आशय है? मानव पूँजी निर्माण के स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव पूँजी निर्माण से आशय ऐसे लोगों की संख्या में वृद्धि से है जो अनुभवी, प्रशिक्षित, कुशल एवं शिक्षित हों। जैसे-एक छात्र को इंजीनियर या डॉक्टर बनाना, मानव पूँजी निर्माण है।
मानव पूँजी निर्माण के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं :

  • शिक्षा में निवेश :
    शिक्षा के द्वारा श्रमिकों को प्रशिक्षित करके कुशल बनाया जा सकता है इससे उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। अत: मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
  • स्वास्थ्य में निवेश :
    किसी भी कार्य को कुशलता से करने के लिये व्यक्ति का स्वस्थ होना अति आवश्यक होता है। अस्वस्थ होने से व्यक्ति की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। अत: उत्पादकता के स्तर को बनाये रखने हेतु एवं उसमें वृद्धि करने हेतु श्रमिकों का स्वस्थ होना अति आवश्यक है। श्रमिकों को सन्तुलित भोजन एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएँ मिल सकें इसके लिए स्वास्थ्य में निवेश अति आवश्यक है।
  • कार्य के दौरान प्रशिक्षण :
    कार्य के दौरान प्रशिक्षण के कई उद्देश्य हो सकते हैं; जैसे-श्रम की कार्यकुशलता में वृद्धि करना, नई प्रौद्योगिकी का ज्ञान प्रदान करना, नई मशीनों के संचालन की जानकारी प्रदान करना आदि। यह सब कार्य मानव पूँजी निर्माण में सहायक हैं। अत: कार्य के दौरान प्रशिक्षण मानव पूँजी निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
  • प्रवसन पर व्यय :
    अच्छे रोजगार की प्राप्ति हेतु श्रम का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना ही प्रवसन कहलाता है। भारत के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर प्रवसन करते हैं तथा कुछ उच्च शिक्षित लोग भी अन्य देशों में जाकर अपनी सेवाएँ देते हैं। एक स्थान से अन्य स्थान पर जाने में व्यय होता है एवं वहाँ रहने आदि पर अतिरिक्त व्यय करना होता है लेकिन इसकी भरपाई रोजगार के प्रतिफल से हो जाती है। अत: प्रवसन पर व्यय भी मानव पूँजी निर्माण का स्रोत है।
  • सूचना प्राप्त करने पर व्यय :
    सूचना के माध्यम से देश-विदेश में उपलब्ध व्यापक अवसरों का पता लगाया जा सकता है, श्रमिकों एवं मानव पूंजी की जानकारी बढ़ती है। जिससे व्यक्ति अपने लिए समुचित कार्य की तलाश कर सकता है। इससे उसकी कुशलता एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। अत: सूचना प्राप्त करने हेतु व्यय करना भी मानव पूँजी निर्माण का एक स्रोत है।

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