RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार

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Rajasthan Board RBSE Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर  

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्ष 2013-14 में भारत के विदेशी व्यापार के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
(अ) माल निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से अधिक था
(ब) माल आयातों का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक था
(स) माल निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से समान था
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) माल आयातों का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक था

प्रश्न 2.
वर्ष 2013-14 में भारत के निर्यातों का कुल मूल्य था। (बिलियन अमेरीकी डालर में)
(अ) 314
(ब) 450
(स) 135
(द) 270
उत्तर:
(अ) 314

प्रश्न 3.
निम्न में से वर्तमान में भारत में आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तु क्या है?
(अ) इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ
(ब) मोती व बहुमूल्य रत्न
(स) पैट्रोनियम उत्पाद
(द) गैर-विद्युतीय मशीनरी
उत्तर:
(स) पैट्रोनियम उत्पाद

प्रश्न 4.
वर्तमान में भारत में निर्यातों में किस वस्तु समूह का सबसे बड़ा हिस्सा है?
(अ) कृषि उत्पाद
(ब) खनिज उत्पाद
(स) विनिर्मित वस्तुएँ
(द) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(स) विनिर्मित वस्तुएँ

प्रश्न 5.
निम्न में से कौनसा वर्तमान में प्रमुख आयात भागीदार देश समूह है?
(अ) ओ.ई.सी.डी देश
(ब) तेल निर्यातक देशों का संगठन
(स) पूर्वी यूरोप देश
(द) विकासशील देश
उत्तर:
(ब) तेल निर्यातक देशों का संगठन

प्रश्न 6.
वर्तमान में निम्न में से किस देश समूह को भारत सर्वाधिक निर्यात करता है?
(अ) ओ.ई.सी.डी. देश
(ब) पूर्वी यूरोप देश
(स) विकासशील देश
(द) तेल निर्यातक देशों का संगठन
उत्तर:
(स) विकासशील देश

प्रश्न 7.
विश्व व्यापार संगठन के अनुसार वर्ष 2013-14 में विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा था?
(अ) 0.8 प्रतिशत
(ब) 1 प्रतिशत
(स) 1.7 प्रतिशत
(द) 2.5 प्रतिशत
उत्तर:
(स) 1.7 प्रतिशत

प्रश्न 8.
निम्न में से कौनसी भारत का निर्यात प्रोत्साहन योजना थी?
(अ) नकद मुआवजा सहायता
(ब) शुल्क वापसी की व्यवस्था
(स) आयात पुन: पूर्ति योजना
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्ष 2013-14 में भारत में माल आयात निर्यात व व्यापार अधिशेष को लिखिए।
उत्तर:
आयात-450200 (अमेरीकी मिलियन डॉलर)
निर्यात-314405 (अमेरीकी मिलियन डॉलर)
व्यापार अधिशेष-135795 (अमेरिकी मिलियन डॉलर)।

प्रश्न 2.
वर्तमान में निर्यात की जाने वाली (भारत द्वारा) पाँच शीर्ष मूल्यानुसार वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. पेट्रोलियम उत्पाद,
  2. इन्जीनियरिंग वस्तुएँ,
  3. रत्न व आभूषण,
  4. रसायन व सम्बद्ध उत्पाद,
  5. सिले हुए वस्त्र।

प्रश्न 3.
भारत द्वारा वर्तमान में आयात की जाने वाली पाँच शीर्ष मूल्य वाली वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. पेट्रोलियम तेल व लुब्रिकेन्ट
  2. अलौह धातुएँ (सोना चाँदी)
  3. इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ गैर विद्युत मशीनरी
  4. मोती व बहुमूल्य रल
  5. खाद्य पदार्थ व सम्बन्धित पदार्थ (अनाज, दालें, खाद्य तेल)।

प्रश्न 4.
भारत के प्रमुख आयात भागीदार कोई दो देश समूह का नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. तेल निर्यातक देशों का संगठन
  2. विकासशील देश।

प्रश्न 5.
नई व्यापार नीति (2015-20) के दो प्रमुख लक्ष्य लिखिए।
उत्तर:

  1. वर्तमान निर्यात 466 विलियन डॉलर से 2019-20 तक 900 विलियन डॉलर तक करना।
  2. विश्व निर्यात में भारत के हिस्से को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत तक करना।

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme) का अर्थ बताइए।
उत्तर:
नकद मुआवजा योजना में निर्यातकों द्वारा जो आगत (कच्चा माल) प्रयोग किया जाता है उस कच्चे माल पर जो कर भुगतान किया जाता है उसके एवज में नगद मुआवजा निर्यातकों को दिया जाता है। इस योजना को सन् 1966 में लागू किया गया।

प्रश्न 2.
भारत से वस्तु निर्यात योजना (MEIS) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
भारत से वस्तु निर्यात योजना (MEIS) के तहत, हैण्डबुक ऑफ प्रोसीजर्स के परिशिष्ट 3 B में अधिसूचित बाजारों में अधिसूचित वस्तुओं/उत्पादों का निर्यात 2 प्रतिशत से 5 प्रतिशत की ड्यूटी पर किया जा सकता है। विदेश व्यापार नीति 2015-20 में इस योजना के अन्तर्गत कृषि व ग्रामीण उद्योगों को 3 प्रतिशत व 5 प्रतिशत की दर से समर्थन उपलब्ध रहेगा तथा कृषि पदार्थों के प्रोसेसिंग पैकेजिंग को भारत से वस्तु निर्यात योजना के तहत उच्च स्तरीय समर्थन दिया जायेगा।

प्रश्न 3.
निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना क्या है?
उत्तर:
निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना में विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन के लिये पूँजीगत वस्तुओं का बिना शुल्क आयात की अनुमति दी जाती है। इस योजना के अन्तर्गत विदेश व्यापार नीति 2009-14 में इन्जीनियरिंग, इलेक्ट्रोनिक उत्पादों, रसायन, वस्त्र, प्लास्टिक, हस्तशिल्प व चमड़े के उत्पादन के लिये पूँजीगत वस्तुओं का बिना शुल्क आयात की अनुमति दी गयी।

प्रश्न 4.
निर्यात प्रोत्साहन की प्रमुख स्कीमों का नाम लिखिए।
उत्तर:
निर्यात प्रोत्साहन की प्रमुख स्कीमें निम्न हैं :

  1. नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme)
  2. शुल्क वापसी योजना (Duty Drawback Scheme)
  3. आयात पुन: पूर्ति योजना (Import Replenishment Scheme)
  4. ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना (Blanket Exchange Permit Scheme)

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के माल निर्यात आयात की संरचना में परिवर्तन को लिखिए।
उत्तर:
निर्यात संरचना (Composition of Exports) :
भारत में पंचवर्षीय योजना शुरू होने से पूर्व जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक, मैंगनीज व खालें प्रमुख निर्यात की मदें थी। सन् 1960 में देश के कुल निर्यातों में कृषि व सम्बद्ध उत्पादों का हिस्सा 44.2 प्रतिशत था जो 2013-14 में घटकर 13.7 प्रतिशत हो गया। अयस्क व खनिज का हिस्सा कुल निर्यात में 1960-61 में 8.1 प्रतिशत था जो घटकर 2013-14 में 1.8 प्रतिशत हो गया। इसी प्रकार विनिर्मित वस्तुओं का कुल निर्यात में 1960-61 में 45.3 प्रतिशत हिस्सा था जो 2013-14 में 61.3 प्रतिशत हो गया। यहाँ भारत की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र का बहुत तेजी से विकास हुआ है तथा कृषि व खनिजों के निर्यात में कमी आयी है।

भारतीय निर्यात संरचना (प्रतिशत में) :
RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार 1
स्रोत :
रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया, हेण्डबुक ऑफ स्टेटिसटिक्स ऑन इण्डियन इकॉनामी।
उपरोक्त तालिका में वर्तमान में प्रमुख भारतीय नियातों के कुल निर्यात के अंश को दर्शाया है। यहाँ पेट्रोलियम उत्पाद सन् 1960-61 में कुल निर्यात 1.1 प्रतिशत था जो 2013-14 में भारत की पेट्रोलियम रिफायनरी क्षमता के कारण कुल निर्यात का 20.6 प्रतिशत हो गया। इन्जीनियरिंग वस्तुओं का हिस्सा कुल निर्यात में वर्ष 1960-61 में 3.4 प्रतिशत था जो 2013-14 में बढ़कर 19.8 प्रतिशत हो गया। रत्न व आभूषण का कुल निर्यात में हिस्सा 1960-61 में 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 13.2 प्रतिशत हो गया। इसी प्रकार रसायन व सम्बद्ध उत्पादों का हिस्सा भी 13.2 प्रतिशत था। 1960-61 में देश के कुल निर्यातों में जूट व चाय का हिस्सा 21 प्रतिशत व 19.3 प्रतिशत था लेकिन वर्तमान में कुल निर्यात में दोनों का हिस्सा 0.5 प्रतिशत हो गया है।

आयातों की संरचना (Composition of Imports) :
स्वतन्त्रता के समय भारत की प्रमुख आयात मदों में मशीनरी, तेल, अनाज, दाल, कपास, वाहन, लोहे. का सामान, उपकरण रसायन व दवाइयाँ रंग, सूती कपड़ा, कागज व लेखन सामग्री तथा द्वितीय पंचवर्षीय योजना में आधारभूत उद्योगों की स्थापना व बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण की विकास रणनीति अपनाने के पश्चात् उपकरणों व मशीनों तथा इनके रखरखाव के लिये सामान के आयात में वृद्धि हुई है।

आयातों की संरचना (प्रतिशत में) :
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स्रोत :
रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया, हेण्डबुक ऑफ स्टेटिसटिक्स ऑन इण्डियन इकॉनामी।
उपरोक्त तालिका में वर्तमान में भारत के प्रमुख आयात मदों के हिस्से में संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाया गया है जिसमें पेट्रोलियम तेल व स्नेहक का हिस्सा सन् 1960-61 में 6.1 प्रतिशत था जो 2013-14 में 36.6 प्रतिशत हो गया जो वर्तमान में प्रमुख आयात मद है। अलौह धातु (सोना व चाँदी प्रमुख रूप में) का हिस्सा कुल आयात में 1960-61 में 4.2 प्रतिशत था जो 2013-14 में 8.6 प्रतिशत हो गया। इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ व गैर विद्युत मशीनरी का हिस्सा 1960-61 में 18.1 प्रतिशत से कम होकर 2013-14 में 5.2 प्रतिशत हो गया। मोती व बहुमूल्य रत्नों का 1960-61 में कुल आयात 0.1 में प्रतिशत अंश था जो 2013-14 में 5.3 प्रतिशत हो गया। खाद्य उपयोग वस्तुओं का आयात सन् 1960-61 में इनका अंश 16.1 प्रतिशत था जो आज लगभग समाप्त हो गया है। पूँजीगत वस्तुओं का आयात 1960-61 में 31.7 प्रतिशत था जो 2013-14 में इनका हिस्सा कुल आयात का 12.1 प्रतिशत हो गया।

प्रश्न 2.
भारत के माल निर्यात आयात की दिशा में लिखिए।
उत्तर:
इग्लैण्ड व अमेरिका 1950-51 में भारत के प्रमुख व्यापार भागीदार थे। भारत के कुल निर्यात का 42 प्रतिशत व कुल आयात का 39.1 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं दोनों देशों के साथ था। व्यापार भागीदार देशों को चार समूहों में विभाजित किया जाता है :

  1. आर्थिक सहयोग संगठन के देश (OECD) इस वर्ग में यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान व स्विदजरलैण्ड आदि देश आते हैं।
  2. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) इसमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब व ईरान आदि देश आते हैं।
  3. पूर्वी यूरोप के देश समूह में रूस व अन्य देश आते हैं।
  4. विकासशील देशों में चीन, हांगकांग, दक्षिणी कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया आदि देश आते हैं।

भारत के निर्यातों की दिशा (Direction of Indian Exports) :
भारत के निर्यातों की दिशा में चार प्रमुख देश समूह के अनुसार परिवर्तन हुए हैं उनको निम्न बिन्दुओं एवं तालिका द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

भारत के निर्यातों की दिशा निर्यात में प्रतिशत हिस्सा
RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार 3
स्त्रोत-रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया, हेण्डबुक ऑफ स्टेटिसटिक्स ऑन इण्डियन इकॉनामी।

  1. आर्थिक सहयोग संगठन (OECD) देशों का भारत के साथ कुल निर्यात में हिस्सा निरन्तर कम होता गया है जो 1960-61 में भारत के प्रमुख भागीदार थे लेकिन वर्तमान में वे प्रमुख भागीदार नहीं है।
  2. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) का हिस्सा 1960-61 में 4.1 प्रतिशत था लेकिन बाद में निरन्तर वृद्धि होते हुए यह 2012-13 में 20.8 हो गया है।
  3. पूर्वी यूरोप के देशों का कुल निर्यातों में 1960-61 में योगदान 7.0 प्रतिशत था जो 2013-14 में 1.3 प्रतिशत हो गया। पूर्वी यूरोप में रूस प्रमुख भागीदार है।
  4. भारत के निर्यातों में विकासशील देशों का 1960-61 में योगदान 14.9 प्रतिशत था जो 2012-13 में तेजी के साथ 41.5 प्रतिशत हो गया है।
  5. वर्ष 2013-14 में भारत के निर्यातों में 18.6 प्रतिशत यूरोप के देशों का हिस्सा था। इसी वर्ष भारत के निर्यातों में अमेरिकी महाद्वीप का योगदान 17.5 प्रतिशत था।
  6. देश के निर्यातों में एशिया के देशों का योगदान 49.4 प्रतिशत था। एशिया में जिन देशों को प्रमुख रूप से भारत द्वारा निर्यात किया उनमें संयुक्त राज्य अमीरात, चीन, सिंगापुर, सऊदी अरब, ईरान व जापान है।

भारत के आयातों की दिशा (Direction of Indian Imports) :
चार प्रमुख देश समूह के अनुसार भारत के आयातों की दशा में भी महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आया है जिसको तालिका में दिये गए आकड़ों एवं बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।

आयात की दिशा (प्रतिशत में) :
RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार 4
स्रोत :
रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया, हेण्डबुक ऑफ स्टेटिसटिक्स ऑन इण्डियन इकॉनामी।

  1. वर्ष 1960-61 में देश के कुल आयातों में 78 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक सहयोग संगठन (OECD) देश समूहों का था जो 2012-13 में घटकर 27.8 प्रतिशत रह गया।
  2. ऊर्जा के लिये तेल पर निर्भरता व तेल की बढ़ती कीमत में तेल आयात में निरन्तर वृद्धि हुई है। 1960-61 में तेल निर्यातकों देशों का हिस्सा 4.6 प्रतिशत था जो बढ़कर 2012-13 में 38.6 प्रतिशत तक हो गया।
  3. कुल आयातों में पूर्वी यूरोप देशों ने वर्ष 1960-61 में 3.4 प्रतिशत था जो 2012-13 में घटकर 1.8 प्रतिशत रह गया।
  4. सन् 1960-61 में कुल आयातों में विकासशील देशों का हिस्सा 11.8 प्रतिशत था जो 2012-13 में बढ़कर 31.33 प्रतिशत हो गया।
  5. वर्ष 2013-14 में भारत के आयातों में यूरोपीय महाद्वीप का हिस्सा 16.8 प्रतिशत था जिसमें भारत के प्रमुख आयात भागीदार देशों में जर्मनी, वेल्जियम, यू०के० तथा स्वीटजरलैण्ड थे।
  6. वर्ष 2013-14 में अफ्रीका महाद्वीप का भारत के आयातों में हिस्सा 8.1 प्रतिशत था। आयातों के हिसाब से अफ्रीका महाद्वीप में भारत के प्रमुख व्यापार भागीदार देश दक्षिणी अफ्रीका, नाईजीरिया, अंगोला व वोल्सवाना है।
  7. भारत के आयातों में अमेरिकी महाद्वीप का योगदान 12.8 प्रतिशत था। इस महाद्वीप में प्रमुख आयातक देश संयुक्त राज्य अमेरिका व वेनेजुएला है।
  8. महाद्वीपीय दृष्टिकोण से भारत के साथ सबसे बड़ा हिस्सा एशिया महाद्वीप का है। कुल आयात में इस महाद्वीप में स्थित देशों का हिस्सा सन् 2013-14 में 60.7 प्रतिशत था। आयात के दृष्टिकोण से एशिया महाद्वीप में भारत के प्रमुख व्यापार भागीदार देशों में चीन, सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमीरात, ईराक, कुवैत, इण्डोनेशिया, कटर, कोरिया व जापान रहे हैं।

प्रश्न 3.
भारत में वर्तमान में विदेशी व्यापार की प्रवृत्तियों पर लेख लिखिए।
उत्तर:
भारत के विदेशी व्यापार की वर्तमान प्रवृत्तियाँ (Current Trends of India’s Foreign Trade) :
भारत में उदारीकरण की नीति व वैश्वीकरण से युक्त आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था के साथ व्यापारिक अन्तक्रिया का आकार व स्वरूप महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित हुआ है जिससे भारत के आयात-निर्यात में विगत वर्षों में तेजी से बदलाव आया है। भारत के विदेशी व्यापार की वर्तमान प्रवृत्तियों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है :

  • भारत के विदेशी व्यापार के आकार में वृद्धि (India’s Foreign Trade Increased in Size) :
    विश्व व्यापार की तुलना में भारत के विदेशी व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई है। विश्व के प्रमुख आयातक देशों में सन् 2004 में भारत का स्थान 23वाँ था जो वर्ष 2013 में 12वाँ हो गया। इसी प्रकार विश्व के प्रमुख निर्यातक देशों में 2004 में भारत का स्थान 23वाँ था जो 2013 में सुधरकर 19वाँ हो गया है। विगत 10 वर्षों में भारत का विदेशी व्यापार विश्व अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार तथा भारत के सकल घरेलू उत्पादन. (GDP) में वृद्धि की तुलना में तेजी से वृद्धि हुई है।
  • निर्यातों में वृद्धि (Increase in Exports) :
    भारतीय निर्यात वर्ष 2004-05 में 375340 करोड़ रुपये का था जो वर्ष 2013-14 में बढ़कर 1905011 करोड़ रुपये का हो गया। सकल घरेलू अनुपात के रूप में भारतीय निर्यात 2004-05 में 12.1 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013-14 में 17.0 प्रतिशत हो गए। भारत के प्रमुख निर्यात वस्तुओं में पेट्रोलियम उत्पाद, जवाहरात मूल्यवान व अर्द्धमूल्यवान रत्न व आभूषण आदि रहे हैं।
  • आयातों में वृद्धि (Increase in Imports) :
    वर्ष 2004-05 के बाद आयातों में तीव्र वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में आयातों का मूल्य 501065 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2013-14 में 2715434 करोड़ रुपये हो गया। भारत के प्रमुख आयात मदों में पेट्रोलियम ऑयल व स्नेहक, स्वर्ण, जवाहरात मूल्यवान एवं अमूल्यवान रत्न आदि हैं।
  • व्यापार घाटे में वृद्धि (Increase in Trade Deficit) :
    आयातों में निर्यातों की तुलना में हुई तीव्र वृद्धि के कारण व्यापार घाटे में निरन्तर वृद्धि हुई है। सन् 2004-05 में व्यापार घाटा 125725 करोड़ रुपये का था जो वर्ष 2012-13 में 1034844 करोड़ रुपये का हो गया। वर्ष 2009 व 2013-14 में व्यापार घाटा पूर्व वर्ष की तुलना में कम हुआ है। इसके अलावा व्यापार घाटा पूर्व वर्ष की तुलना में बढ़ा है।
  • व्यापार की दिशा में परिवर्तन (Changes in Business Direction) :
    भारतीय वैदशिक व्यापार के बाजार में विविधिकरण हुआ है जिससे वर्ष प्रतिवर्ष होने वाले उतार-चढ़ावों से मुक्ति मिली है तथा मन्दी जैसे संकटों से निबटने में सहायता मिली है। वित्त मन्त्रालय, भारत सरकार के वर्ष 2014-15 के आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2004-05 की तुलना में 2013-14 में आयात व निर्यात में यूरोप का अंश कम हुआ है। निर्यातों व आयातों में अफ्रीकी देशों के हिस्से में वृद्धि हुई है तथा एशिया के देशों में भी आयात निर्यात का हिस्सा बढ़ा है।

प्रश्न 4.
भारत की नवीन व्यापार नीति (2015-20) के प्रमुख प्रावधानों का ब्यौरा दीजिये।
उत्तर:
भारत की नवीन व्यापार नीति (2015-20) प्रधानमन्त्री की ‘मेक इन इण्डिया’ ‘डिजिटल इण्डिया’ तथा ‘स्किल इण्डिया’ के अनुरूप है। नई व्यापार नीति के प्रमुख प्रावधान निम्न प्रकार हैं :

  1. पूर्व में चलने वाली विभिन्न योजनाओं के स्थान पर “भारत से सेवा निर्यात योजना” (SEIS) तथा “भारत से वस्तु निर्यात योजना’ (MEIS) को प्रतिस्थापित किया गया। पूर्व की इन योजनाओं की शर्ते, योग्यताएँ उपयोग अलग-अलग थे। इन दोनों योजनाओं के लाभ विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone) में भी उपलब्ध रहेंगे तथा हस्तशिल्प, हथकरघा पुस्तकों आदि के ई-कामर्स की भी इन योजनाओं का लाभ मिलेगा।
  2. ‘भारत से वस्तु निर्यात योजना’ (MEIS) के अन्तर्गत कृषि व ग्रामीण उद्योगों को 3 प्रतिशत व 5 प्रतिशत की दर से समर्थन उपलब्ध रहेगा तथा कृषि व खाद्य पदार्थों के प्रोसेसिंग पैकेजिंग को भारत से वस्तु निर्यात योजना के तहत उच्च स्तरीय समर्थन दिया जायेगा।
  3. भारत से सेवा निर्यात योजना (SEIS) का लाभ भारतीय सेवा प्रदाताओं की अपेक्षा “भारत में अव्यवस्थित सेवा प्रदाताओं’ पर लागू होगी।
  4. जिन वस्तुओं के निर्यात में भारत को परम्परागत दक्षता प्राप्त है उनके निर्यात को बढ़ाने के लिये ब्रांडिग (Branding) अभियान आयोजित किये जाएँगे।
  5. घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये नई नीति में निर्यात बाध्यता को 25 प्रतिशत कम कर दिया गया है। .
  6. ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्ट (Duty Credit Script) स्वतन्त्र हस्तान्तरणीय होगी तथा इसका प्रयोग कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी तथा सेवाकर के भुगतान में किया जा सकेगा।
  7. निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना (EPCG Scheme) के तहत घरेलू वसूली के लिये निर्यात बाध्यता को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
  8. डिजिटल सिग्नेचर के ऑनलाईन प्रक्रिया होगी तथा विभिन्न लाइसेन्सों को जारी करने के लिये अन्तमन्त्रालय परामर्श ऑनलाईन होगा।
  9. निर्यात अधिकरण (Authorisation) के लिये वैध अवधि को 12 माह से बढ़ाकर 24 माह कर दिया गया है।
  10. रक्षा उत्पाद, कृषि उत्पाद व पर्यावरण मित्र उत्पादों के निर्यात के लिये उच्च स्तरीय समर्थन रहेगा।

प्रश्न 5.
स्वदेशी की अवधारणा से क्या तात्पर्य है? लेख लिखिए।
उत्तर:
स्वदेशी की अवधारणा (Concept of Swadeshi) स्वदेशी शब्द का सामान्यतः अर्थ केवल स्वदेशी उत्पाद से लिया जाता है अर्थात् अपने देश में हुए उत्पादन का उपयोग स्वदेशी है। स्वदेशी शब्द का इस अर्थ में प्रयोग इसके अर्थ को सीमित करता है। इसका कारण इस अवधारणा को ठीक प्रकार से न समझना है। स्वदेशी का तात्पर्य समझने के लिये हमे गाँधी जी की इन पंक्तियों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। ये पंक्तियाँ स्वदेशी के सन्दर्भ में गाँधी जी ने “मेरे सपनों का भारत’ में व्यक्त की।

“स्वदेशी की भावना का अर्थ है हमारी वह भावना, जो हमें दूर को छोड़कर अपने समीपवर्ती प्रदेश का ही उपयोग और सेवा करना सिखाती है। उदाहरण के लिये इस परिभाषा के अनुसार धर्म के सम्बन्ध में यह कहा जायेगा कि मुझे अपने पूर्वजों से प्राप्त धर्म का ही पालन करना चाहिए। अपने समीपवर्ती धार्मिक परिवेष्टन का उपयोग इसी तरह से हो सकेगा। यदि मैं उसमें दोष पाऊँ तो मुझे उन दोषों को दूर करके उसकी सेवा करनी चाहिए। इसी तरह राजनीति के क्षेत्र में मुझे स्थानीय संस्थाओं का उपयोग करना चाहिए और उनके जाने माने दोषों को दूर करके उनकी सेवा करनी चाहिए।

अर्थ के क्षेत्र में मुझे पड़ौसियों द्वारा बनायी गयी वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए और उन उद्योगों की कमियाँ दूर करके, उन्हें ज्यादा सम्पूर्ण व सक्षम बनाकर उसकी सेवा करनी चाहिए। मुझे लगता है कि यदि स्वदेशी को व्यवहार में उतारा जाये, तो मानवता के स्वर्ण युग की अवतारणा की जा सकती है।” अर्थात् स्वदेशी का तात्पर्य एक वृत्ति है जो जीवन के प्रत्येक पहलू में स्व के भाव के साथ उद्घटित होती है। स्वदेशी केवल एक स्थिर वृत्ति नहीं है अपितु देश व समाज की परिस्थितियों के अनुकूल परिवर्तन के आह्वान को अपने में समाहित किये हुए है। यह पश्चिम के अन्धानुकरण के खिलाफ प्रतिक्रिया नहीं है। अपितु इसके अन्धानुकरण से सावधान करती है।

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा है कि पश्चिम के ज्ञान विज्ञान के साथ ही पश्चिम देशों के रहन-सहन, बोलचाल, खानपान आदि रीतियाँ भी इस देश में आई। हमें यह निर्णय करना पड़ेगा कि यह प्रमुख अच्छा है या बुरा। यदि यह उपयुक्त नहीं है तो इसके मोह का परित्याग करना श्रेयकर होगा।

गोपाल कृष्ण गोखले के अनुसार स्वदेशी विचारधारा मातृभूमि के लिये त्याग करने का सबक मिलता है। देश समृद्ध होता व देश में भाईचारे की भावना बढ़ती है। स्वदेशी का यह विचार भारत में बहुत प्राचीन काल से प्रचलित है।

स्वतन्त्रता आन्दोलन के समय स्वदेशी न केवल विदेशी सत्ता के विरोध का प्रतीक बना अपितु देश की खराब आर्थिक दशा में समाधान के रूप में प्रस्फुटित हुआ। आर०सी० दत्त की पुस्तक “Economic History of India” के प्रकाशन के बाद स्वदेशी को देश की खराब आर्थिक दशा में समाधान के रूप में माना जाने लगा। स्वतन्त्र विदेशी व्यापार के विरुद्ध विकसित देशों द्वारा अपनाई जाने वाली संरक्षणवादी नीतियों के पक्ष में देश में उत्पादन व रोजगार के लाभ देश से बाहर चले जाते हैं। स्वदेशी ने व्यक्ति, समाज व देशहित समाहित होता है। महर्षि अरविन्द ने भी कहा है कि स्वदेशी का अभिप्राय राष्ट्र की अस्मिता और राष्ट्र की इच्छा शक्ति की पहचान से है। राष्ट्र के लिये समाज की त्याग करने की तत्परता स्वदेशी से झलकती है।

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से अधिक होता है तो व्यापार शेष होता है
(अ) ऋणात्मक
(ब) धनात्मक
(स) न ऋणात्मक न धनात्मक
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) धनात्मक

प्रश्न 2.
वर्ष 1950-51 में भारत के वस्तु निर्यातों का कुल मूल्य था (विलियन अमेरिकी डॉलर में)
(अ) 1.27
(ब) 8.5
(स) 44.6
(द) 314.4
उत्तर:
(अ) 1.27

प्रश्न 3.
सातवीं पंचवर्षीय योजना में व्यापार घाटे का औसत आकार अमरीकी डॉलर था.
(अ) 5.98 अरब
(ब) 5.7 अरब
(स) 3.45 अरब
(द) 8.41 अरब
उत्तर:
(ब) 5.7 अरब

प्रश्न 4.
आधारभूत उद्योगों की स्थापना हुई
(अ) पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में
(ब) प्रथम पंचवर्षीय योजना में
(स) द्वितीय पंचवर्षीय योजना में
(द) सातवीं पंचवर्षीय योजना में
उत्तर:
(स) द्वितीय पंचवर्षीय योजना में

प्रश्न 5.
आजादी से पूर्व प्रमुख रूप से भारत का विदेशी व्यापार था
(अ) जापान से
(ब) चीन से
(स) स्विटजरलैण्ड से
(द) ब्रिटेन से
उत्तर:
(द) ब्रिटेन से

प्रश्न 6.
तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) में सम्मिलित नहीं है
(अ) संयुक्त अरब अमीरात
(ब) अमेरिका
(स) सऊदी अरब
(द) ईरान
उत्तर:
(ब) अमेरिका

प्रश्न 7.
विश्व के प्रमुख आयातक देशों में वर्ष 2004 में भारत का स्थान था
(अ) 23वाँ
(ब) 12वाँ
(स) 19वाँ
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) 23वाँ

प्रश्न 8.
आयात प्रतिबन्ध व आयात की सीमाओं के कारण आयात उदारीकरण को अपनाया गया था
(अ) 1950 के दशक में
(ब) 1970 के दशक में
(स) 1980 के दशक में
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) 1980 के दशक में

प्रश्न 9.
निर्यात प्रोत्साहन हेतु चलायी गयी योजना है
(अ) नकद मुआवजा सहायता योजना
(ब) शुल्क वापसी योजना
(स) ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

प्रश्न 10.
“स्वदेशी का अभिप्राय राष्ट्र की अस्मिता और राष्ट्र की इच्छा शक्ति की पहचान से है। राष्ट्र के लिये समाज की त्याग करने की तत्परता स्वदेशी से झलकती है।” यह कथन है
(अ) गोपाल कृष्ण गोखले
(ब) महर्षि अरविन्द
(स) पं० दीनदयाल उपाध्याय
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) महर्षि अरविन्द

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विदेशी व्यापार से होने वाले दो लाभ बताइए।
उत्तर:

  1. बड़े पैमाने पर उत्पादन
  2. श्रम विभाजन का लाभ।

प्रश्न 2.
एडम स्मिथ के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तुओं का निर्यात करना चाहिए।
उत्तर:
निरपेक्ष लाभ वाली वस्तुओं का।

प्रश्न 3.
रिकार्डों के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तुओं का निर्यात करना चाहिए?
उत्तर:
तुलनात्मक लाभ वाली वस्तुओं का।

प्रश्न 4.
व्यापार शेष ऋणात्मक कब होता है?
उत्तर:
जब आयातों का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक होने पर व्यापार शेष ऋणात्मक होता है।

प्रश्न 5.
आजादी के समय जूट का आयात क्यों करना पड़ा?
उत्तर:
भारत के खाद्यान्न एवं विभाजन के कारण आजादी के समय जूट का आयात करना पड़ा।

प्रश्न 6.
द्वितीय पंचवर्षीय योजना के पश्चात पूँजीगत उपकरणों, मशीनरी व तकनीकी के आयात में वृद्धि क्यों हुई?
उत्तर:
बड़े उद्योगों की स्थापना व औद्योगीकरण विकास को बढ़ावा देने के लिये।

प्रश्न 7.
विकासशील देश मुख्य रूप से किस प्रकार के उत्पादों का निर्यात करते हैं?
उत्तर:
कच्चा माल, खनिज एवं कृषि उत्पादों का।

प्रश्न 8.
पंचवर्षीय योजना शुरू होने से पूर्व भारत की प्रमुख निर्यात मदें क्या थी?
उत्तर:
जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक, मैंगनीज व खालें आदि।

प्रश्न 9.
वर्ष 1960 में देश कुल निर्यातों में कृषि व सम्बद्ध उत्पादों का हिस्सा कितना था?
उत्तर:
44.2 प्रतिशत।

प्रश्न 10.
2013-14 में खाद्य तेल का आयात कुल आयात का कितने प्रतिशत था?
उत्तर:
2.1 प्रतिशत।

प्रश्न 11.
देश के आयात की मदों में पूँजीगत वस्तुओं के अन्तर्गत कौन-कौन सी वस्तुएँ आती है?
उत्तर:
बिजली मशीनरी, अन्य मशीनरी, परिवहन उपकरण व परियोजनागत वस्तुएँ।

प्रश्न 12.
आजादी से पूर्व भारत किसका उपनिवेश था?
उत्तर:
ब्रिटेन का।

प्रश्न 13.
आर्थिक सहयोग संगठन के देश (OECD) वर्ग में कौन-कौन से देश आते हैं?
उत्तर:
यूरोपीय संघ, अमरीका, जापान व स्विटजरलैण्ड आदि।

प्रश्न 14.
तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) में कौन-कौन से देश सम्मिलित हैं?
उत्तर:
संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब व ईरान आदि।

प्रश्न 15.
आयात उदारीकरण व निर्यात प्रोत्साहन के लिये किन-किन समितियों द्वारा सिफारिश की गई?
उत्तर:
1978 में अलैक्जेन्डर समिति, 1982 में टंडन समिति तथा 1984 में हुसैन समिति।

प्रश्न 16.
निर्यातकों को निर्यात साख बीमा व गारन्टी प्रदान करने के लिये कौन-सा निगम कार्यरत है?
उत्तर:
भारतीय निर्यात साख एवं गारन्टी निगम।

प्रश्न 17.
निर्यात प्रोत्साहन हेतु स्थापित दो सरकारी एजेन्सियों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. राज्य व्यापार निगम,
  2. खनिज व धातु व्यापार निगमा

प्रश्न 18.
राज्य व्यापार निगम सरकारी एजेन्सी द्वारा किन किन वस्तुओं का निर्यात किया जाता है?
उत्तर:
कपड़ा, विनिर्मित वस्तुओं, कॉफी, सीमेन्ट व नमक आदि।

प्रश्न 19.
निर्यात प्रोत्साहन के लिये चलायी गयी किन्ही दों योजनाओं के नाम बताइए?
उत्तर:

  1. नकद मुआवजा सहायता योजना,
  2. शुल्क वापसी योजना।

प्रश्न 20.
निर्यात प्रोत्साहन हेतु “नकद मुआवजा सहायता योजना” को कब लागू किया गया था?
उत्तर:
सन् 1966 में।

प्रश्न 21.
‘Economic History of India’ पुस्तक के लेखक कौन है?
उत्तर:
आर० सी० दत्त।

प्रश्न 22.
एडम स्मिथ के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तु का आयात-निर्यात करना चाहिए।
उत्तर:
एडम स्मिथ के अनुसार देश को निरपेक्ष लाभ वाली वस्तु का निर्यात तथा निरपेक्ष अलाभ वाली वस्तु का आयात करना चाहिए। इससे दोनों देशों को लाभ होता है।

प्रश्न 23.
रिकार्डों के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तु का आयात-निर्यात करना चाहिए?
उत्तर:
रिकार्डों के अनुसार देश को तुलनात्मक लाभ वाली वस्तु का निर्यात तथा तुलनात्मक अलाभ वाली वस्तु का आयात करना चाहिए।

प्रश्न 24.
व्यापार का शेष धनात्मक एवं शेष ऋणात्मक से क्या आशय है?
उत्तर:
जब निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से अधिक होता है तो व्यापार शेष धनात्मक होता है तथा आयात का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक होने पर व्यापार शेष ऋणात्मक होता है।

प्रश्न 25.
भारत के व्यापार शेष में घाटा बढ़ने के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

  1. आयतित तेल कीमतों में वृद्धि व आयात शुल्कों में कमी।
  2. आयात उदारीकरण की नीतियों के कारण आयातों में वृद्धि।

प्रश्न 26.
व्यापार की संरचना का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
व्यापार की संरचना का तात्पर्य है कि देश किन वस्तुओं का आयात करता है व किन वस्तुओं का निर्यात करता है। इससे देश के विकास के स्तर की जानकारी होती है।

प्रश्न 27.
विकासशील देशों में मुख्य रूप से कच्चे माल, खनिज व कृषि उत्पादों का ही निर्यात क्यों किया जाता है?
उत्तर:
विकासशील देशों में औद्योगिक पिछड़ापन एवं विनिर्माण का ढाँचा बहुत कमजोर होता है। इस कारण यहाँ कच्चे माल, खनिज व कृषि उत्पादों का ही निर्यात किया जाता है।

प्रश्न 28.
आजादी के समय भारत की प्रमुख आयात की मदें क्या थी?
उत्तर:
आजादी के समय भारत की प्रमुख आयात की मदों में मशीनरी, तेल, अनाज, दाल, कपास, वाहन, लोहे का सामान, उपकरण, रसायन व दवाइयाँ, रंग, सूत व सूती कपड़ा, कागज व लेखन सामग्री, मशीनें तथा इनके रखरखाव के सामान आदि सम्मिलित थे।

प्रश्न 29.
व्यापार भागीदार देशों को कितने समूहों में विभाजित किया गया है? नाम बताइए।
उत्तर:
व्यापार भागीदार देशों को चार समूह में विभाजित किया गया है :

  1. आर्थिक सहयोग संगठन के देश (OECD)
  2. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC)
  3. पूर्वी यूरोप के देश
  4. विकासशील देश।

प्रश्न 30.
आयात प्रतिबन्ध से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आयात प्रतिबन्ध से तात्पर्य है कि गैर-आवश्यक वस्तुओं पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाता है जिससे आवश्यक आयातों के लिये विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बनी रहती है।

प्रश्न 31.
आयात प्रतिस्थापन की नीति का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आयात प्रतिस्थापन की नीति का तात्पर्य है कि विदेशों से आयात वस्तु का घरेलू उत्पादन से प्रतिस्थापित करना है जिससे उनका आयात न करना पड़े व विदेशी मुद्रा की बचत हो तथा वस्तु का देश में उत्पादन कर आत्मनिर्भरता विकसित की जा सके।

प्रश्न 32. आयात प्रतिस्थापन की नीति को कितने चरणों में क्रियान्वित किया गया?
उत्तर:
आयात प्रतिस्थापन की नीति को तीन चरणों में क्रियान्वित किया :

  1. उपभोग वस्तुओं का आयात प्रतिस्थापन,
  2. पूँजीगत वस्तुओं का आयात प्रतिस्थापन,
  3. तकनीक का आयात प्रतिस्थापन।

प्रश्न 33.
आयात प्रतिस्थापन नीति के कारण देश की उत्पादन संरचना में क्या परिवर्तन हुआ?
उत्तर:
आयात प्रतिस्थापन की नीति के कारण अनेक वस्तुएँ जैसे धातु, मशीनों व वाहनों का देश में उत्पादन करने पर बल दिया गया तथा ऊँची लागत के उत्पादन होने के कारण उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो गई।

प्रश्न 34.
1980 के दशक में आयात उदारीकरण को क्यों अपनाया गया?
उत्तर:
आयात प्रतिबन्ध व आयात की सीमाओं के कारण 1980 के दशक में आयात उदारीकरण को अपनाया गया। इसमें आयातों पर मात्रात्मक प्रतिबन्धों को समाप्त किया गया तथा निर्यात प्रोत्साहन लिये रियासतें व छूट प्रदान की गयी।

प्रश्न 35.
आयात उदारीकरण के लिये किये गए किन्हीं दो प्रयासों को बताइए। .
उत्तर:

  1. अग्रिम लाइसेन्स नीति द्वारा वर्ष में 10 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा आर्जित करने वाले पर निर्यातकों को एक वर्ष के लिये आयातों की अनुमति दी गयी।
  2. सरकारी एजेन्सियों के माध्यम से आयात करने की शर्त को हटा दिया गया।

प्रश्न 36.
अवमूल्यन का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
विश्व की अन्य मुद्राओं की तुलना में अपनी मुद्रा (भारतीय मुद्रा) के मूल्य को घटाना अवमूल्यन कहलाता है। इससे निर्यातों की कीमत कम होती है व आयातों की कीमत बढ़ती है।

प्रश्न 37.
भारतीय निर्यात संवर्धन संगठन क्या है?
उत्तर:
भारतीय निर्यात संवर्धन विभिन्न वस्तुओं, उनके निर्यात को उसके बाजारों व खरीददारों के बीच समन्वय का काम करता है तथा भारतीय निर्यात को बढ़ाने के लिये विदेशों से भारतीय उत्पादों के मेलों व प्रदर्शनियों का आयोजन भी करता है।

प्रश्न 38.
निर्यात के लिये स्थापित सरकारी एजेन्सियों के नाम बताइए तथा इनके द्वारा किन-किन वस्तुओं का निर्यात किया जाता है।
उत्तर:
निर्यात के लिये राज्य व्यापार निगम तथा खनिज व धातु व्यापार निगम सरकारी एजेन्सियों की स्थापना की गई। राज्य व्यापार निगम कपड़ा, विनिर्मित वस्तुओं, कॉफी, सीमेण्ट व नमक आदि का निर्यात करता है तथा खनिज व धातु व्यापार निगम खनिज व धातुओं के निर्यात के लिये कार्यरत है।

प्रश्न 39.
आयात पुनः पूर्ति योजना क्या है?
उत्तर:
आयात पुनः पूर्ति योजना निर्यातों के लिये आवश्यक आयातों की सुलभ उपलब्धि के लिये योजना है। इसमें निर्यातकों को उन वस्तुओं के आयात की अनुमति दी जाती है जिनका आयात प्रतिबन्धित होता है। निर्यातक उन वस्तुओं का आयात कर सकते हैं जो देश में उपलब्ध नहीं है।

प्रश्न 40.
ब्लैंककेंट विनिमय अनुमति योजना क्या है? बताइए।
उत्तर:
ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना में निर्यातकों को यह छूट है कि अपनी निर्यात आय का एक निश्चित प्रतिशत का प्रयोग निर्यात संवर्धन के लिये कर सकती है। यह योजना निर्यात प्रोत्साहन हेतु 1987 में लायी गयी थी।

प्रश्न 41.
वर्ष 2004-09 की आयात-निर्यात नीति में प्रक्रिया सरलीकरण करने के लिये कौन-कौन से कदम उठाये गए?
उत्तर:
2004-09 की आयात निर्यात नीति में प्रक्रिया सरलीकरण करने के लिये निम्न कदम उठाये गए :

  1. निर्यातकों द्वारा भरे जाने वाले फार्मों की संख्या कम कर दी गयी।
  2. निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को सेवाकर से मुक्त कर दिया गया।
  3. पाँच करोड़ की ब्रिकी करने वाले निर्यातकों को बैंक गारन्टी से छूट दी गयी।
  4. पुरानी मशीनों के आयात की छूट दी गयी।

प्रश्न 42.
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन उद्देश्यों को बताइए।
अथवा
विदेशी व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्यों को बताइए।
उत्तर:
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के अल्पकालीन उद्देश्यों में निर्यात गिरावट की प्रवृत्ति को रोकना, मन्दी से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों की अतिरिक्त मदद करना व निर्यात वृद्धि को पुनःस्थापित करना तथा दीर्घकालीन उद्देश्य वर्ष 2020 तक विश्व व्यापार में भारत के हिस्से को दुगुना करना था।

प्रश्न 43.
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के किन्हीं दो प्रावधानों को बताइए।
उत्तर:

  1. नाशवान कृषि उत्पादक के निर्यात के लिये एकल खिड़की योजना प्रारम्भ की गयी।
  2. विदेश में प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिये निर्यातकों को अपने साथ 5 लाख डॉलर तक का माल ले जाने की छूट दी गयी।

प्रश्न 44.
निर्यात संवर्धन के लिये कोई दो सुझाव बताइए।
उत्तर:

  1. निर्यातकों को प्रोत्साहन करने के लिये बेहतर साख की व्यवस्था व आयात उत्पादन शुल्क की व्यवस्था होनी चाहिए।
  2. निर्यात में समय एवं लागत कम आये इसके लिये सड़कें, रेल परिवहन, जल परिवहन, बिजली आदि की अद्यः संरचना को बेहतर बनाना चाहिए।

प्रश्न 45.
गोपाल कृष्ण गोखले के अनुसार स्वदेशी विचारधारा को बताइए।
उत्तर:
गोपाल कृष्णा गोखले के अनुसार स्वदेशी विचारधारा मातृभूमि लिये त्याग करने का सबक मिलता है। देश समृद्ध होता है व देश में भाईचारे की भावना बढ़ती है। स्वदेशी का यह विचार भारत में बहुत प्राचीन काल से प्रचलित है।

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“भारतीय अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र का विकास तेजी से हुआ है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पंचवर्षीय योजना शुरू होने से पूर्व जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक, मैंगनीज व खालें प्रमुख निर्यात मद थी लेकिन आयोजन काल में कृषि व खनिज पदार्थों का कुल निर्यात में हिस्सा कम हुआ है तथा विनिर्मित वस्तुओं का हिस्सा कुल निर्यात में बढ़ा है। 1960 में देश के कुल निर्यातों में कृषि व सम्बद्ध उत्पादों का हिस्सा 44.2 प्रतिशत था जो 2013-14 में घटकर 13.7 प्रतिशत हो गया। अयस्क व खनिज का हिस्सा कुल निर्यात में 1960-61 में 8.1 प्रतिशत था जो घटकर 2013-14 में 1.8 प्रतिशत हो गया और विनिर्मित वस्तुओं का कुल निर्यात 1960-61 में 45.3 प्रतिशत हिस्सा था जो 2013-14 में 61.3 प्रतिशत हो गया।

प्रश्न 2.
वर्ष 2013-14 में भारत की प्रमुख निर्यातक मदों को बताइए।
उत्तर:
वर्ष 2013-14 में भारत की प्रमुख निर्यात की मदें निम्न प्रकार हैं :

  1. कृषि व सम्बद्ध वस्तुएँ-चाय, कॉफी, अनाज, मसाले, काजू, फल व सब्जियाँ, समुद्री उत्पाद व कपास आदि।
  2. विनिर्मित वस्तुएँ-दवाइयाँ, रत्न व आभूषण, रसायन धातुओं के उत्पाद, चमड़ा व चमड़े से बने उत्पाद, मशीनरी व उपकरण, परिवहन उपकरण, इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ, सिले हुए वस्त्र आदि।

प्रश्न 3.
व्यापार भागीदार देशों को कितने समहों में विभाजित किया जाता है?
उत्तर:
व्यापार भागीदार देशों को चार समूह में विभाजित किया जाता है :

  1. आर्थिक सहयोग संगठन के देश (OECD), इस वर्ग में यूरोपीय संघ, जापान, स्विटजरलैण्ड व अमरीका आदि।
  2. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) इस वर्ग में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब व ईरान आदि।
  3. पूर्वी यूरोप देश समूह-रूस एवं अन्य देशा 4. विकासशील देश-इस समूह में चीन, हांगकांग, दक्षिणी कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया आदि।

प्रश्न 4.
वर्ष 2013-14 में भारत के राज्यवार निर्यात संरचना को तालिका द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार 5
स्रोत :
आर्थिक समीक्षा, वित्त मन्त्रालय, भारत सरकार 2013-14

प्रश्न 5.
द्वितीय पंचवर्षीय योजना में कल आयातों को तीन श्रेणी में क्यों विभाजित किया गया?
उत्तर:
भारत ने द्वितीय पंचवर्षीय योजना में उद्योगों के प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया। इसके लिये पूँजीगत मशीनरी व तकनीकी का आयात करना था जो उस समय विदेशी मुद्रा सीमित मात्रा में थी इसलिये कुल आयातों को 1956-57 में तीन श्रेणियों में विभाजित किया। जिसमें प्रथम वर्ग में वे वस्तुएँ शामिल थी जिनका आयात पूर्णत: प्रतिबिन्धित था इन वस्तुओं का आयात नहीं कर सकते थे। दूसरे वर्ग की वस्तुओं का आयात केवल सरकारी एजेन्सियों के द्वारा किया जा सकता था। तीसरे वर्ग में वे वस्तुएँ थी जिन्हें खुले सामान्य लाइसेन्स के तहत आयात किया जा सकता था।

प्रश्न 6.
आयात प्रतिस्थापन की नीति पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आयात प्रतिस्थापन की नीति का तात्पर्य विदेशों से वस्तु का घरेलू उत्पादन से प्रतिस्थापन करना है जिससे उनका आयात न करना पड़े व विदेशी मुद्रा की बचत हो तथा वस्तु का देश में उत्पादन कर आत्मनिर्भरता विकसित की जा सके। आयात प्रतिस्थापन की नीति के कारण अनेक वस्तुएँ जैसे धातु, मशीनों व वाहनों का देश में उत्पादन करने पर बल दिया गया। फलस्वरूप इन वस्तुओं का देश में ही उत्पादन होने लगा व देश की उत्पादन संरचना में महत्त्वपूर्ण योगदान आया। आयात प्रतिस्थापन नीति के कारण आयातों में अनावश्यक विलम्ब भी हुआ।

प्रश्न 7.
“शुल्क वापसी योजना” को समझाइये।
उत्तर:
शुल्क वापसी योजना (Duty Drawback Scheme) में निर्यात के लिये उत्पादन करने पर निर्यातकों को वापस किया जाता है। इससे निर्यात की प्रतिस्पर्धा शक्ति बनी रहती है। उच्च कर युक्त आयात के कारण निर्यातों की कीमत ऊँची होती है। इन निर्यात उत्पाद की कीमतों को शेष विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा रखने के लिये इनपुटों पर दिया गया कर निर्यातकों को वापस कर दिया जाता है।

प्रश्न 8.
वर्ष 2001 में कृषि निर्यात क्षेत्रों (Agriculture Export Zones) की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर:
वर्ष 2001 में कृषि निर्यात प्रोत्साहन के लिये कृषि निर्यात क्षेत्रों की स्थापना की गयी। इसके अन्तर्गत यह पहचानने की व्यवस्था की गयी कि कौन-कौन सी वस्तुओं का निर्यात किया जा सकता है तथा इनके उत्पादन के लिये विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की गई। कृषि निर्यात क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में आरम्भिक चरण से लेकर बाजार तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया को एकीकृत किया गया।

प्रश्न 9.
विदेश व्यापार नीति 2015-20 के किन्हीं पाँच प्रावधानों को बताइए।
उत्तर:

  1. घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये निर्यात बाध्यता को 25 प्रतिशत कम कर दिया गया है।
  2. निर्यात प्रोत्साहन “पूँजीगत वस्तु योजना’ के अन्तर्गत घरेलू वसूली के लिये निर्यात बाध्यता को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
  3. डिजिटल सिग्नेचर के लिये ऑनलाइन प्रक्रिया।
  4. निर्यात अधिकरण (Authorisation) के लिये वैध अवधि को 12 माह से बढ़ाकर 24 माह कर दिया गया।
  5. ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्ट (Duty Credit Script) स्वतन्त्र हस्तान्तरणीय होगी तथा इसका प्रयोग कष्टम ड्यूटी एक्साइज ड्यूटी तथा सेवाकर के भुगतान में किया जा सकेगा।

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उदारीकरण से क्या आशय है? इसके अन्तर्गत आयात की दिशा में क्या-क्या प्रयास किये गए?
उत्तर:
उदारीकरण (Libralisation) :
आर्थिक गतिविधियों पर लगाये प्रतिबन्धों को दूर कर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को ‘मुक्त’ करने की नीति को उदारीकरण कहा जाता है।

आयात उदारीकरण के लिये प्रयास (Effort for Import Libralisation) :
आयात उदारीकरण की दिशा में निम्न प्रयास किये गए जो निम्नवत् हैं :

  1. पुर्ननिर्यात व्यापार को उदार बनाने के लिये निर्यातकों को बिना किसी व्यवधान के कच्चा माल उपलब्ध कराने हेतु उन्हें आयात में छूट प्रदान की गयी।
  2. अग्रिम लाइसेन्स नीति द्वारा वर्ष में 10 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले निर्यातकों को एक वर्ष . के लिये आयातों की अनुमति दी गयी।
  3. औद्योगीकरण के लिये पूँजीगत वस्तुओं व कच्चे माल की आवश्यकता होती है। इसके आयात के लिये वस्तुओं को खुले सामान्य लाइसेन्स में सम्मिलित किया गया।
  4. निर्यात गृह, व्यापार गृह, स्टार व्यापार गृह तथा सुपर स्टार व्यापार गृह के लिये आयात सुविधा को उदार किया गया। जिसके अन्तर्गत जिन निर्यातकों ने पिछले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष 12.50 करोड़ रुपये का निर्यात किया उन्हें निर्यात गृह, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष 62.50 करोड़ रुपये का न्यूनतम निर्यात किया है उन्हें व्यापार गृह। जिन निर्माताओं ने पिछले तीन वर्ष प्रतिवर्ष 312.50 करोड़ रुपये का निर्यात किया उन्हें स्टार व्यापार गृह तथा जिन निर्यातकों ने पिछले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष 925 करोड़ रुपये का निर्यात किया उन्हें सुपर स्टार व्यापार गृह नाम दिया गया।
  5. भारतीय वस्तुओं को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु तकनीकी आयात को उदार किया गया तकनीकी आयात व विशेषज्ञ सेवाओं के आयात को सुलभ बनाने के लिये तकनीकी विकास फण्ड बनाया गया तथा इस फण्ड में तकनीकी आयात के लिये विदेशी मुद्रा का प्रावधान किया गया।
  6. जिन वस्तुओं का आयात सरकारी एजेन्सियों के मार्फत किया जाता था उनकी सूची को कम कर दिया गया जिससे आवश्यकता के समय बिना इन एजेन्सियों के माध्यम के आयात किया जा सके।

प्रश्न 2.
निर्यात प्रोत्साहन के लिये चलायी गयी विभिन्न योजनाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
निम्न पर टिप्पणी लिखिए
1. नकद मुआवजा सहायता
2. शुल्क वापसी योजना
3. आयात पुनः पूर्ति योजना
4. ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना
5. विशेष आर्थिक सेल।
उत्तर:
निर्यात प्रोत्साहन के लिये चलायी गयी योजनाएँ निम्न प्रकार है

  1. नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme) :
    नकद मुआवजा योजना में निर्यातकों द्वारा जो कच्चा माल प्रयोग किया जाता है उस कच्चे माल पर जो कर भुगतान किया जाता है उसकी एवज में नकद मुआवजा निर्यातकों को दिया जाता है। इस योजना को सन् 1966 में लागू किया गया था।
  2. शुल्क वापसी योजना (Duty Drawback Scheme) :
    शुल्क वापसी योजना में निर्यात के लिये उत्पादन करने पर प्रयोग में ली गयी आगतों पर आयात पर लगे कर को निर्यातकों को वापस लौटाया जाता है। इससे निर्यात की प्रतिस्पर्धा शक्ति बनी रहती है। उच्च कर युक्त आयात के कारण निर्यातों की कीमत ऊँची होती है। इन निर्यात उत्पाद को कीमतों को शेष विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा रखने के लिये इनपुटों पर दिया गया कर निर्यातकों को वापस कर दिया जाता है।
  3. यात पुन: पूर्ति योजना (Import Replenishment Scheme) :
    आयात पुन: पूर्ति योजना के अन्तर्गत निर्यातकों को उन वस्तुओं के आयात की अनुमति दी जाती है जिनका आयात प्रतिबन्धित होता है। इस योजना में निर्यातक उन वस्तुओं का आयात कर सकते हैं जो देश में उपलब्ध नहीं है। यह निर्यातकों के लिये आवश्यक आयातों को सुलभ उपलब्धि के लिये योजना है।
  4. ब्लैंकेंट विनिमय अनुमति योजना (Blanket Exchange Permit Scheme) :
    ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना के अन्तर्गत निर्यातकों को छूट दी गयी है कि ऊपरी निर्यात आय का एक निश्चित प्रतिशत का प्रयोग निर्यात संवर्धन के लिये कर सकते हैं। यह योजना वर्ष 1987 में लायी गयी थी।
  5. विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones) :
    चीन की तर्ज पर निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 2000 में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना की नीति को अपनाया गया। इन क्षेत्रों में निर्यातकों को विश्व स्तरीय अद्य: संरचना उपलब्ध करायी गयी, विदेशी वाणिज्यिक उधार की अनुमति एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी तथा इन क्षेत्रों में स्थित उत्पादन इकाईयों को सेवा क्षेत्र में ब्रिकीकर व आयकर में छूट प्रदान की गयी है।

प्रश्न 3.
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्य तथा इसके प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्य (Object of Foreign Trade Policy 2009-14) :
विदेश व्यापार नीति 2009-14 का दीर्घकालीन उद्देश्य वर्ष 2020 तक विश्व व्यापार में भारत के हिस्से को दुगुना करना था तथा अल्पकालीन उद्देश्यों में गिरावट की प्रवृत्ति को रोकना, मन्दी से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों की अतिरिक्त मदद करना व निर्यात वृद्धि को पुन: स्थापित करना था।

विदेश व्यापार नीति 2009-14 के प्रावधान (Provision of Foreign Trade Policy 2009-14) :
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु प्रमुख प्रावधान निम्न प्रकार थे :

  1. निर्यात बाजार के विविधीकरण की दिशा में प्रयास हेतु फोकस बाजार योजना में 16 लेटिन अमेरिका व 10 एशिया ओसियाना के नये बाजारों को सम्मिलित किया गया।
  2. फोकस बाजार प्रेरणा को बढ़ाकर 3 प्रतिशत व फोकस उत्पाद योजना में प्रेरणा को बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया।
  3. निर्यात उन्मुख इकाइयों को अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत तक घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र में विक्रय की अनुमति दी गयी।
  4. निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना में इन्जीनियरिंग, इलेक्ट्रोनिक उत्पादों, मूल रसायनों, वस्तु, प्लास्टिक, हस्तशिल्प व चमड़े के उत्पादन के लिये पूँजीगत वस्तुओं का बिना शुल्क आयात की अनुमति दी गयी।
  5. इलेक्ट्रानिक माध्यमों का प्रयोग, आयातित वस्तुओं को सीधे बन्दरगाह से उत्पादन स्थान पर ले जाने की छूट तथा विनिर्माण शुल्क की अदायगी के बाद विनिर्माण अपशिष्ट का निपटान कर सकने आदि की व्यवस्था की गई।
  6. निर्यातकों को डॉलर साख उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से एक अन्त: विभागीय समिति का गठन किया गया।
  7. विदेश में प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिये निर्यातकों को अपने साथ 5 लाख डॉलर तक का माल ले जाने की छूट दी गयी।
  8. नाशवान कृषि उत्पादों के निर्यात के लिये एकल खिड़की योजना लागू की गई।
  9. कृषि निर्यातों के लिये अग्रिम प्राधिकार पत्र के तहत, कीटनाशकों जैसी निविष्टयों के आयातों की अनुमति दी गयी।
  10. हथकरघा निर्यात को प्रोत्साहित हेतु एम.ए.आई./एम.डी.ए. स्कीम के तहत विशिष्ट निधि निर्धारित की गयी।

प्रश्न 4.
भारत को निर्यात वृद्धि के लिये कौन-कौन से प्रयास अपेक्षित हैं?
अथवा
भारत के निर्यात संवर्धन हेतु सुझाव बताइए।
उत्तर:
निर्यात संवर्धन के लिये सुझाव (Suggestions for Export Promotion) :
विकसित देशों में कमजोर आयात वस्तुओं की माँग, चीन की विनिर्माण क्षमता का तीव्र विकास, विदेशों में राजनीतिक अस्थिरता व जलवायु परिवर्तन के सम्बन्ध में बढ़ती चिन्ता आदि भारतीय निर्यात वृद्धि के सन्दर्भ में प्रमुख चुनौतियाँ हैं। भारत में अभी भी विश्व के देशों की तुलना में आधारभूत संरचना का पर्याप्त विकास न होने के कारण निर्यातों की लागते अधिक आती हैं जो विश्व निर्यात में भारत की प्रतिस्पर्धा शक्ति को कमजोर करती है। निर्यात वृद्धि के लिये भारत को निम्न प्रयास करने चाहिए :

  1. देश के आयात व निर्यात में लागत कम आये तथा समय भी कम खर्च हो इसके लिये बेहतर आधारभूत संरचना के निर्माण की आवश्यकता होती है। अत: देश में सड़कें, रेल परिवहन, जल परिवहन, बिजली आदि के विकास हेतु बेहतर प्रयास करने चाहिए।’
  2. जटिल श्रम, कानूनी ऊँची ब्याज दर, ऊँची लागत व देरी से कच्चे माल की उपलब्धता भारत के निर्यात को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही है। भारत में भी कच्चा माल, मध्यवर्ती उत्पाद, श्रम व पूँजीगत आगतों की समय पर व कम लागत पर आपूर्ति की जाये, पूँजी पर ब्याज दर विकसित देशों के समान ही कम की जानी चाहिए।
  3. भारत को अपनी वस्तुओं के निर्यात के लिये कुछ ही देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। नये बाजारों का अध्ययन भारतीय निर्यात वस्तु व क्षेत्रों के अनुसार करना चाहिए जिससे निर्यातों में वृद्धि हो सके व वर्ष प्रतिवर्ष अनिश्चितता में कमी आ सके।
  4. विकसित देश विकासशील देशों के निर्यात के प्रति संरक्षणवादी रवैया अपना रहे हैं जिसको कि विश्व-व्यापार संगठन (W.T.O) की विवाद निपटान प्रणाली भी इसे रोकने में असमर्थ हुई है। पिछले कुछ समय से अमेरिका द्वारा डंपिग रोधी कार्यवाही व यू०के० द्वारा बीजा सम्बन्धी प्रतिबन्ध इसके उदाहरण हैं। विकसित देशों को इन संरक्षणवादी उपायों को रोकना आवश्यक है।
  5. देश में निर्यात किये जाने वाले कृषि उत्पादन व विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है तथा इन वस्तुओं के घरेलू उपभोग को नियन्त्रित किया जाना चाहिए जिससे निर्यात अधिक से अधिक हो सके।
  6. निर्यातकों को प्रोत्साहन हेतु साख व्यवस्था एवं आयात उत्पादन शुल्क की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए तथा देश में कर सुधार को तीव्र गति से लागू किया जाना चाहिए।

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