RBSE Solutions for Class 10 Social Science Chapter 15 भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ

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BoardRBSE
TextbookSIERT, Rajasthan
ClassClass 10
SubjectSocial Science
ChapterChapter 15
Chapter Nameभारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ
Number of Questions Solved43
CategoryRBSE Solutions

Rajasthan Board RBSE Class 10 Social Science Solutions Chapter 15 भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [Textbook Questions Solved]

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ अति लघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वर्ष 2015 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय कितनी थी?
उत्तर:
भारत की प्रतिव्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 2015 में 1590 अमेरिकी डॉलर थी।

प्रश्न 2.
जीवन की गुणवत्ता का माप किन कारकों की सहायता से तय किया जाता है?
उत्तर:
शिक्षा और स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता का माप तय करने वाले प्रभावी कारक हैं।

प्रश्न 3.
स्वतंत्रता के समय भारत की कितनी प्रतिशत श्रम शक्ति कृषि में रोजगाररत थी?
उत्तर:
स्वतंत्रता के समय भारत की 72% जनसंख्या/श्रम शक्ति कृषि में रोजगाररत थी।

प्रश्न 4.
2001-2011 ई० के दौरान भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर कितनी रही?
उत्तर:
2001-2011 ई० के दौरान भारत में जनसंख्या वृद्धि दर 17.64% रही।

प्रश्न 5.
संपूर्ण विश्व के लिए मानव विकास रिपोर्ट कौन-सी संस्था द्वारा तैयार की जाती है?
उत्तर:
संपूर्ण विश्व के लिए मानव विकास रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा तैयार की जाती है।

प्रश्न 6.
भारत सरकार द्वारा आर्थिक सुधार कब लागू किए गए?
उत्तर:
भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति के अनुसार जुलाई 1991 में आर्थिक सुधार लागू किए थे।

प्रश्न 7.
उदारीकरण किसे कहते हैं? बताइए।
उत्तर:
उदारीकरण का आशय आर्थिक नीतियों नियमों तथा कानूनों के सरलीकरण की प्रक्रिया से है।

प्रश्न 8.
निजीकरण का अर्थ बताइये।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका में वृद्धि करने की प्रक्रिया निजीकरण कहलाती है।

प्रश्न 9.
वैश्वीकरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
घरेलू अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण वैश्वीकरण कहलाता है।

प्रश्न 10.
मानव पूँजी किसे कहा जाता है?
उत्तर:
जब श्रम को शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के द्वारा योग्यता तथा कौशल प्रदान कर दिया जाए तो उसे मानव पूँजी कहा जाता है।

प्रश्न 11.
स्वदेशी की अवधारणा का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्वदेशी की अवधारणा भारत की आर्थिक स्थिति को अधिक सुदृढ़ करने की दृष्टि से एक प्रभावशाली आर्थिक रणनीति है। स्वदेशी का अर्थ है-स्वयं देश का।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
जीवन की निम्न गुणवत्ता किस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था के अविकसित स्वरूप को व्यक्त करती है?
उत्तर:
लोगों में शिक्षा द्वारा ज्ञान प्राप्ति तथा स्वस्थ रूप से जीने की क्षमता बढ़ती है तो वह आप में वृद्धि तथा उपयोग करने में भी सक्षम हो पाते हैं। इसलिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे जीवन की निम्न गुणवत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के अविकसित स्वरूप को व्यक्त करता है।

प्रश्न 2.
भारतीय अर्थव्यवस्था के पिछड़ेपन को व्यक्त करने वाली जनांकिकीय विशेषताओं को बताइये।
उत्तर:
अनेक जनांकिकीय विशेषताएँ भारतीय अर्थव्यवस्था के पिछड़ेपन को व्यक्त करती है। भारत में जन्मदर का बहुत ऊँचा होना, मातृ मृत्युदर, बाल मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर का स्तर ऊँचा बना रहना मुख्य है। भारतीय जनसंख्या का विशाल आकार तथा निरन्तर तेजी से विस्तार भी शामिल है।

प्रश्न 3.
भारतीय अर्थव्यवस्था की कृषि पर अत्यधिक निर्भरता को समझाइए।
उत्तर:
आज लगभग 49% रोजगार कृषि तथा सहायक क्षेत्रों में कार्यरत है। कृषि पर अत्यधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था के अविकसित रूप को व्यक्त करता है। दूसरा, उद्योगों एवं सेवा क्षेत्र के धीमे विकास के कारण छिपी बेरोजगारी भी एक जिम्मेदार पहलू है।

प्रश्न 4.
पिछले दशकों में भारत की राष्ट्रीय आय में होने वाले परिवर्तन क्या संकेत देते हैं?
उत्तर:
राष्ट्रीय आय तथा प्रतिव्यक्ति आय में सतत वृद्धि विकासशील प्रारूप का प्रभावशाली लक्ष्य है। पिछले दशकों में अंकित विकास दर 3.5%, 5%, 6.8% तथा 8% क्रमशः रही है तथा राष्ट्रीय आय में उत्तरोतर सतत् तीव्र वृद्धि के साथ-साथ प्रति व्यक्ति आय भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व के तेजी से बढ़नेवाली अर्थव्यवस्थाओं की पंक्ति में लाकर खड़ी करती है।

प्रश्न 5.
उदारीकरण की प्रक्रिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वरूप और संरचना में क्या-क्या परिवर्तन उत्पन्न किए हैं?
उत्तर:
उदारीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था समाजवादी मिश्रित अर्थव्यवस्था से पूँजीवादी मिश्रित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित हो गई है। इसके कारण सरकारी हस्तक्षेप में कमी का आना तथा अर्थव्यवस्था मुक्त बाजार के स्वरूप की ओर उन्मुख हुई। उत्पादन तथा व्यापार की क्रियाओं को सरल बनाकर अर्थव्यवस्था में उदारीकरण दृष्टिगोचर हुआ।

प्रश्न 6.
विनिवेश से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विनिवेश निजीकरण का एक उपाय है। शुद्ध रूप से विनिवेश संपदाओं के तरलीकरण की क्रिया है। सामान्यत: इसका अर्थ राज्य द्वारा सार्वजनिक उद्यमों में अपना अंश निजी क्षेत्र को बेच देने से है।

प्रश्न 7.
वैश्वीकरण के विभिन्न आयातों को समझाइये।
उत्तर:
वैश्वीकरण से आर्थिक खुलेपन तथा देशों के बीच आर्थिक निर्भरता में वृद्धि होती है। इसके विभिन्न आयामों में अनेक राष्ट्रों के बीच वस्तुओं का मुक्त प्रवाह, सेवाओं का मुक्त प्रवाह, पूँजी का निर्बाध प्रवाह एवं समेकित वित्तीय बाजार, श्रम का स्वतंत्र प्रवाह, प्रौद्योगिकी का स्वतंत्र प्रवाह तथा ज्ञान का प्रचार आदि शामिल है।

प्रश्न 8.
वैश्वीकरण के लाभ बताइए।
उत्तर:
वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने संपूर्ण विश्व में संसाधनों के आवंटन में सुधार कर इसे अधिक कार्यकुशल बनाया है। उत्पादन लागतें गिरी हैं। उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

प्रश्न 9.
वैश्वीकरण के दौर में स्वदेशी की अवधारणा किन कारणों से प्रासंगिक बन गई है?
उत्तर:
वैश्वीकरण के दौर में विदेशी कंपनियाँ भी भारत में आकर उत्पादन कर रही है। बदलते परिवेश में स्वदेशी शब्द का उपयोग भारतीय कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के लिए किया जा रहा है। आज इन्हें अपनाए जाने तथा विदेशी कंपनियों द्वारा उत्पादित पर बल देती है।

प्रश्न 10.
उत्तर:
कौशल विकास पर टिप्पणी लिखिए। उत्तर: कौशल एक मानवीय संसाधनों को मानवीय पूँजी में परिवर्तित करने वाला महत्वपूर्ण तत्व है। इससे श्रम की उत्पादकता में वृद्धि होती है। कौशल विकास के द्वारा श्रम शक्ति को अधिक उत्पादक बनाया जा सकता है। कौशल विकास से व्यक्ति की योग्यता उत्पादकता एवं जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। 15 जुलाई 2015 को राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन प्रारंभ किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकासशीलता को दर्शाने वाली विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकासशीलता की विशेषताएँ|

(i) भारतीय अर्थव्यवस्था एक अविकसित अर्थव्यवस्था है, जो सही नहीं है। यह तेज गति से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रही है।

(ii) आर्थिक एवं सामाजिक सुधार के साथ अनेक ऐसे अनुकूल परिवर्तन हुए जिनके कारण विकासशील अर्थव्यवस्था कहना ठीक होगा। संरचनात्मक परिवर्तन अनुकूल दिशा में हो रहे हैं।

(iii) भारत की राष्ट्रीय आय तथा प्रतिव्यक्ति आय में होने वाली सतत् एवं तीव्र वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकासशील स्वरूप का प्रमुख लक्षण है।

(iv) आज भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। सरकार द्वारा किए गए। सुधारों एवं प्रयासों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है।

(v) भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर निरंतर धनात्मक वृद्धि कर रही है। 2007-2012 के दौरान विकास 8% रहा। आर्थिक विकास की दर में सुधार 1980 के दशक में शुरू हो गया था। लेकिन 1990 के दशक से विशेष प्रगति हुई।

प्रश्न 2.
1990 के दशक में आर्थिक सुधार अपनाए जाने के क्या कारण थे? विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर:
1990 के दशक में आर्थिक सुधारों के कारण

(i) 1950 से 1990 ई० के दौरान अर्थव्यवस्था के संचालन एवं प्रबंधन हेतु अधिक नियम बनाए गए कि विकास प्रक्रिया लगभग अवरुद्ध हो गई।

(ii) सरकार को प्रतिरक्षा तथा सामाजिक क्षेत्र पर भी अपने संसाधनों का एक बड़ा भाग खर्च करना पड़ा। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तथा अन्य देशों से उधार ली गई विदेशी मुद्रा को सरकार द्वारा अविवेकशील ढंग से उपभोग कार्यों पर खर्च कर दिया गया।

(iii) सरकार के व्यय उसकी प्राप्तियों से लगातार ऊँचे बने रहे तथा सरकार द्वारा ऋण लेकर व्यय की पूर्ति करती रही।

(iv) खर्चे को नियंत्रित करने हेतु कोई सार्थक कदम नहीं उठाए गए।

(v) सरकारी नीतियों में राजकोषीय अनुशासन का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। इसके अलावा राजकोषीय अनुशासनहीनता के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ते व्यापार घाटे की भी शिकार थी।

प्रश्न 3. नई आर्थिक नीति के अंतर्गत अपनाए गए आर्थिक सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नई आर्थिक नीति के अंतर्गत अनाए गए आर्थिक सुधार

  • भारत ने 1991 में नई आर्थिक नीति की घोषणा की तथा आर्थिक सुधार लागू किए।
  • इन सुधारों के अंतर्गत आर्थिक स्थिरीकरण तथा संरचनात्मक सुधार हेतु उपाय लागू किए गए। आर्थिक स्थिरीकरण के उपाय अल्पकालिक प्रकृति के थे।
  •  इनमें भुगतान संतुलन के संकट तथा मुद्रा स्फीति की समस्या को नियंत्रित करने के उपाय शामिल थे तथा संरचनात्मक सुधार दीर्घकालीन प्रकृति के थे।
  •  इनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की संरचना में सुधार तथा अर्थव्यवस्था की कुशलता में वृद्धि करना था।
  • इन सुधारों में सरकार ने अपनी नीतियों को पुनः परिभाषित किया तथा कई नई नीतियाँ शुरू की। सभी आर्थिक सुधारों को उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण की प्रक्रिया के द्वारा लागू किया गया।

प्रश्न 4.
स्वदेशी उत्पादों को अपनाए जाने से उत्पन्न होने वाले लाभों को बताइए।
उत्तर:
स्वदेशी उत्पादों को अपनाए जाने से उत्पन्न होनेवाले लाभ निम्न प्रकार हैं|

  • स्वदेशी उत्पादों से भारतीय उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुओं की माँग बढ़ेगी। इससे भारतीय उद्योगों के विकास के लिए अच्छे अवसर उत्पन्न होंगे।
  • स्वदेशी उत्पादों को अपनाए जाने से देश के घरेलू उत्पाद तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी।
  • घरेलू उत्पादन बढ़ने से सरकार को अपेक्षाकृत अधिक राजस्व प्राप्त होता है।
  • घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात में कमी आएगी तथा आयात पर खर्च होनेवाली बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलने से आत्मनिर्भरता में वृद्धि होती है। संकटकालीन स्थितियों में आत्मनिर्भरता देश के लिए बहुत बड़ा सुरक्षा कवच होता है।
  • स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलने पर भारत में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है।

प्रश्न 5.
कौशल विकास का क्या महत्व है? कौशल विकास हेतु सरकार द्वारा कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
कौशल विकास का महत्व-कौशल विकास मानवीय संसाधनों को मानवीय पूँजी में परिवर्तित करने वाला एक | महत्वपूर्ण तत्व है। इससे श्रम शक्ति को अधिक उत्पादक बनाया जा सकता है। सरकार द्वारा कौशल विकास के लिए उठाए कदम|

  • कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार-योग्य बनाने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का गठन किया गया।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा पाठ्यक्रमों की सहायता से युवाओं को कौशल प्रदान किया जा रहा है।
  •  कौशल विकास विभिन्न जनकल्याणकारी उपायों में से एक उपाय है।
  • मानव शक्ति की सफलता सदैव राष्ट्र की सफलता की कुंजी होती है।
  • कौशल विकास से भारत की मानव शक्ति को अनेक लाभ तथा अन्य गतिशील अवसर प्राप्त होंगे। इस संकल्पना के क्रियान्वयन से भारत का प्रत्येक नागरिक संपन्नता तथा सम्मान से युक्त जीवन जीने में सक्षम होगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (More Questions Solved)

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
2011 ई० की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर कितनी थी?
(अ) 54.4%
(ब) 74.04%
(स) 78.04%
(द) 58.5%

प्रश्न 2.
2001-2011 ई० के दशक में भारत की जनसंख्या की वृद्धि दर कितने प्रतिशत रही?
(अ) 15.14%
(ब) 17.64%
(स) 27.14%
(द) 16.64%

प्रश्न 3.
मानव विकास सूचकांक में वर्ष 2015 की रिपोर्ट में भारत का कौन-सा स्थान था?
(अ) 125वाँ
(ब) 135वाँ
(स) 130वाँ
(द) 126वाँ

प्रश्न 4.
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) में भारत की विकास दर कितने प्रतिशत रही?
(अ) 6.5%
(ब) 7%
(स) 8%
(द) 7.5

प्रश्न 5.
1961-1971 दशक में भारत में जनसंख्या वृद्धि दर कितनी थी? |
(अ) 28%
(ब) 24.80%
(स) 17%
(द) 21%

उत्तर:
1. (ब)
2. (ब)
3. (स)
4. (स)
5. (ब)

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सुरेश तेंदुलकर ने गरीबी के बारे में क्या अनुमान किया था?
उत्तर:
सुरेश तेंदुलकर के अनुसार 2011-2012 में भारत में 21.92 प्रतिशत लोग गरीब थे।

प्रश्न 2.
गरीबी क्या है?
उत्तर:
गरीबी वह स्थिति जिसमें व्यक्ति अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी असफल हो जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में प्रतिवर्ष होने वाली जनसंख्या की वृद्धि किस महाद्वीप के बराबर है।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या वृद्धि आस्ट्रेलिया महाद्वीप की कुल जनसंख्या के बराबर है।

प्रश्न 4.
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को किसने हिंदू विकास दर कहा है?
उत्तर:
डॉ० राजकृष्ण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को हिंदू विकास दर कहा है।

प्रश्न 5.
भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या कार्यकारी आयुवर्ग में शामिल है?
उत्तर:
भारत की लगभग 65% जनसंख्या कार्यकारी आयुवर्ग (15-64) वर्ष में शामिल है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
गरीबी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती कैसे है?
उत्तर:
भारत गरीबी रूपी शाप का सामना कर रहा है। अभी तक इस समस्या का निवारण नहीं हो पाया है। मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तीव्र गति से योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। समाज के निम्न तथा कमजोर वर्गों तक | पहुँच अभी बहुत कम है। इसलिए 25% जनसंख्या गरीबी के दुष्चक्र में फँसी है।

प्रश्न 2.
भारत में आर्थिक तथा गैर आर्थिक विषमताएँ हैं। वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में विद्यमान आर्थिक तथा गैर आर्थिक विषमताएँ चिंतनीय हैं। यहाँ आय तथा धन का असमान वितरण है। सामाजिक संरचना में व्यापक विषमताए हैं। लिंग के आधार पर असमानताएँ, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता या प्रदाता द्वारा असमानता। विषमताएँ अवलोकित होती हैं। इसी कारण भारतीय अर्थव्यवस्था निम्न उत्पादकता; ऊँची
उत्पादक लागतों तथा धीमी वृद्धि का शिकार रही हैं।

प्रश्न 3.
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण मापदंड है। वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण मापदंड प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि है। 1950-51 से 1990-91 की अवधि के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय 1.6% वार्षिक औसत दर से बढ़ी थी जबकि 1990-91 के बाद के वर्षों में यह दर 5% से अधिक बनी हुई है। 2015-16 में यह 6.2% दर्ज की गयी है। राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय की
सतत तथा तीव्र वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की एक अच्छी उपलब्धि कह सकते हैं।

प्रश्न 4.
भारत के आर्थिक एवं सामाजिक आधार संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत के आर्थिक एवं सामाजिक आधार संरचना में तेजी से सुधार हो रहा है। विद्युत उत्पादन में अब तक कुल 100 गुना वृद्धि हुई है। आजादी के समय 4 लाख कि०मी० थी जो वर्तमान में लगभग 50 लाख कि०मी० हो गयी। बैंकिंग तथा बीमा सेवाओं का बहुत विस्तार हुआ है। साक्षरता दर 18.3% से बढ़कर 74.04% हो चुकी है। तथा जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 1951 में जो 32.1 वर्ष थी 2014 में 68 वर्ष तक हो गयी है। ये सभी सुधार विकास के ठोस आधार स्तंभ हैं।

प्रश्न 5.
महात्मा गाँधी द्वारा स्वदेशी को किस प्रकार प्रयोग किया गया था?
उत्तर:
गाँधी जी ने स्वदेशी को स्वतंत्रता आंदोलन में एक हथियार के रूप में काम में लिया। उन्होंने जन-जन को जागरुक बनाकर स्वदेशी अपनाने की प्रेरणा की तथा गाँधी जी का मत था कि भारत स्वतंत्रता तथा स्वशासित ही नहीं आत्मनिर्भर भी थे। स्वदेशी की अवधारणा भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से एक प्रभावकारी अवधारणा थी।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ एवं नवीन प्रवृत्तियाँ निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत की सभ्यता और संस्कृति में वैश्वीकरण की अवधारणा पहले से ही है। कथन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • भूमंडलीकरण और वैश्वीकरण के नाम पर देश के मानव व प्राकृतिक संसाधनों का शोषण नहीं चाहिए, जिससे भविष्य के लिए कुछ भी शेष न रहे।
  • भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति में वैश्वीकरण की अवधारणा का पालन आदिकाल से ही हो रहा था क्योंकि भारत विश्व को एक परिवार अथवा कुटुम्ब मानता रहा है।
  • प्रत्येक व्यक्ति के निरोग एवं सुखी रहने का आधार दूसरे का ध्यान रखने पर केंद्रित है।
  • यूरोप-अमेरिका से वैश्वीकरण को जिस रूप में प्रतिष्ठित किया जा रहा है वह रूप केवल लाभ कमाने पर केंद्रित है।
  • भारतीय स्वदेशी अर्थव्यवस्था ही वह अवधारणा है जिसके अंतर्गत सभी व्यक्ति, परिवार, समाज और राज्य के कल्याण से समस्त संसार के कल्याण की ओर अग्रसर होने का प्रयास करे।

प्रश्न 2.
भारत में वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • वैश्वीकरण से उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है। क्योंकि उनके सामने पहले से अधिक विकल्प हैं तथा वे अनेक उत्पादों की गुणवत्ता और कम कीमत से लाभ पा रहे हैं।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत में माल और सेवाओं में किया जाने वाला निवेश भी उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है।
  • इस प्रकार की कंपनियों ने उपभोक्ता और सेवाओं में निवेश किया है। विदेशी निवेश भी इस प्रकार के उद्योगों तथा सेवाओं में हुआ है।
  • वैश्वीकरण के कारण नए उद्योग स्थापित होने से रोजगार के नए-नए अवसरों का सृजन हुआ है। उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति करनेवाली स्थानीय कंपनियों का विस्तार भी हुआ है।
  • वैश्वीकरण की अवधारणा ने कुछ बड़ी कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में उभरने को सक्षम बनाया है। टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबेक्सी, अमूल, हीरो आदि अनेक भारतीय कंपनियों ने विश्व स्तर पर अपने कार्यों का प्रसार किया है।
  • वैश्वीकरण से सेवा प्रदाता कंपनियों से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों के लिए अवसरों का सृजन हुआ है

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