RBSE Solutions for Class 10 Science Chapter 18 जीवन परिचय एवं उपलब्धियाँ

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Rajasthan Board RBSE Class 10 Science Chapter 18 भारतीय वैज्ञानिक: जीवन परिचय एवं उपलब्धियाँ

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी से अभियांत्रिकी की कौनसी शाखा में अध्ययन किया?
(क) कम्प्यू टर
(ख) ऐरोनॉटिकल
(ग) विद्युत
(घ) इलेक्ट्रोनिकी

प्रश्न 2.
सर सी.वी. रमन को नोबल पुरस्कार किस वर्ष में मिला?
(क) 1928
(ख) 1930
(ग) 1932
(घ) 1934

प्रश्न 3.
पक्षी विज्ञानी है
(क) डॉ. पंचानन माहेश्वरी
(ख) मेघनाद साहा
(ग) डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र
(घ) डॉ. सलीम अली

प्रश्न 4.
भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (BARC) कहाँ स्थित है?
(क) मद्रास में
(ख) दिल्ली में
(ग) कोलकाता में
(घ) मुम्बई में

प्रश्न 5.
चरक संहिता किस भाषा में लिखी गई?
(क) हिन्दी
(ख) फारसी
(ग) संस्कृत
(घ) उर्दू

उत्तरमाला-
1. (ख)
2. (ख)
3. (घ)
4. (घ)
5. (ग)।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 6.
डॉ. भाभा ने अंतरिक्ष किरणों में किस कण की उपस्थिति को पहचाना?
उत्तर-
कॉस्मिक किरणों को पहचाना।

प्रश्न 7.
सुश्रुत किस ऋषि के वंशज थे?
उत्तर-
विश्वामित्र के वंशज थे।

प्रश्न 8.
चरक के अनुसार आनुवंशिक दोष के क्या कारण थे?
उत्तर-
बच्चों में आनुवंशिक दोष माँ या पिता में किसी अभाव या त्रुटि के कारण होता है।

प्रश्न 9.
डॉ. सी.वी. रमन की प्रथम नियुक्ति किस पद पर हुई ?
उत्तर-
अर्थ विभाग के उपमहालेखापाल पद पर नियुक्ति हुई।

प्रश्न 10.
डॉ. भाभा के निर्देशन में कौन-कौनसे रियेक्टरों की स्थापना हुई?
उत्तर-
अप्सरा, सायरस व जरलीना रियेक्टरों की स्थापना हुई।

प्रश्न 11.
भरतपुर में केवलादेव पक्षी अभयारण्य की स्थापना में किस विज्ञानी का योगदान था?
उत्तर-
डॉ. सलीम अली।

लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 12.
डॉ. कलाम का रक्षा व अंतरिक्ष में क्या योगदान है?
उत्तर-
कलाम ने नासा से रॉकेट प्रक्षेपण की तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त कर भारत का प्रथम रॉकेट ‘नाइके अपाचे’ छोड़ा। इन्हें SLV परियोजना का प्रबंधक बनाया व इनके नेतृत्व में SLV-3 ने सफल उड़ान भरी, जिसने रोहिणी उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। मिसाइल कार्यक्रम के अन्तर्गत पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, नाग व आकाश नामक मिसाइलों का विकास व प्रक्षेपण किया। पोकरण में किये गये परमाणु परीक्षण का नेतृत्व किया। इसी कारण इन्हें मिसाइल मेन कहते हैं।

प्रश्न 13.
रमन प्रभाव क्या है, इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर-
रमन प्रभाव को ‘रमन प्रकीर्णन’ भी कहते हैं। इसके अनुसार जब प्रकाश द्रव माध्यम से गुजरता है तो पदार्थ व द्रव में अन्त:क्रिया होती है जिसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहा जाता है। इन्होंने समुद्र व आकाश का रंग नीला होने का कारण बताया।

प्रश्न 14.
डॉ. पंचानन माहेश्वरी का वनस्पति विज्ञान में क्या योगदान है?
उत्तर-
डॉ. माहेश्वरी ने पादप भ्रूण विज्ञान पर विशेष कार्य किया। इन्होंने भ्रूण विज्ञान और पादप क्रिया विज्ञान के सहमिश्रण से एक नई शाखा का निर्माण कर फूलों के विभिन्न भागों की कृत्रिम पोषण द्वारा वृद्धि कराने में पर्याप्त सफलता हासिल की।

प्रश्न 15.
सुमेलित करो
(i) बर्ड मेन ऑफ इंडिया (a) सुश्रुत
(ii) मिसाइल मैन (b) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
(iii) प्लास्टिक सर्जरी के पिता (c) डॉ. भाभा
(iv) भारतीय परमाणु विज्ञान के पिता (d) डॉ. सलीम अली
उत्तर-
(i) बर्ड मेन ऑफ इंडिया (d) डॉ. सलीम अली
(ii) मिसाइल मेन (b) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
(iii) प्लास्टिक सर्जरी के पिता (a) सुश्रुत
(iv) भारतीय परमाणु विज्ञान के पिता (c) डॉ. भाभा निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 16.
सुश्रुत के जीवनवृत्त एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन करो।
उत्तर-
सुश्रुत विश्वामित्र के वंशज थे। उन्होंने धन्वन्तरि के आश्रम में रहकर प्रारम्भिक चिकित्सीय ज्ञान अर्जित किया। इन्होंने ही सर्वप्रथम प्रारम्भिक चिकित्सीय ज्ञान प्रदान किया। वे पहले चिकित्सक थे जिन्होंने शल्य चिकित्सा का परिष्कार कर अनेक जटिल ऑपरेशन किये व शल्य क्रिया में उपयोग होने वाले यंत्रों का ज्ञान दिया। शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में ‘सुश्रुत संहिता’ नाम की पुस्तक लिखी।।

उन्होंने शल्य क्रिया से पूर्व अपने उपकरणों को गर्म करने के लिए निर्देशित किया ताकि कीटाणु नष्ट हो जायें व किसी प्रकार का संक्रमण (अपूर्ति दोष) न रहे। इन्होंने रक्त का थक्का जमने से रोकने के लिए विषहीन रसायन को उपयोग किया। यही नहीं, इन्होंने नाक, कान व होठों आदि की प्लास्टिक सर्जरी भी की, इस कारण इन्हें प्लास्टिक सर्जरी का पितामह कहा जाता है। शल्य चिकित्सा में 101 यंत्रों का ज्ञान प्रदान किया, उनके यंत्र आधुनिक सर्जन के स्प्रिंग फोरसेप्स या काटने एवं पट्टी के लिए इस्तेमाल किये जाने वाली फोरसेप्स या चिमटियों के पूर्व रूप हैं। इन्होंने चिकित्सालय की साफ-सफाई विषय में भी उपयोगी निर्देश दिए हैं।

प्रश्न 17.
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवनवृत्त एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन करो।
उत्तर-
डॉ. अब्दुल कलाम का जीवनवृत्त एवं विज्ञान में उनका योगदान-डॉ. अबुल पाकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् जिले के धनुषकोडी कस्बे में हुआ था। इनके पिता का नाम जैनुलाअबदीन व माता का नाम आशियम्मा था। रामेश्वरम् में प्राथमिक शिक्षा के बाद कलाम पड़ोसी कस्बे रामनाथपुरम् के खार्टज हाई स्कूल में विज्ञान का। अध्ययन करने हेतु गये। यहाँ हुरै सोलोमन उनके प्रेरणा स्रोत बने। सोलोमन का गुरुमंत्र था कि जीवन में सफलता पाने के लिए तीन मुख्य बातों की आवश्यकता हैइच्छाशक्ति, आस्था व उम्मीद। यही तीनों बातें कलाम के जीवन का आधार बनीं।

सन् 1954 में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के लिए मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी में प्रवेश लिया। 1958 में कलाम रक्षा अनुसंधान व विज्ञान संगठन में हावर क्रॉफ्ट परियोजना पर काम करने हेतु वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में नियुक्त हुए। 1962 में प्रो. एम.जी. मेनन कलाम की लगन व मेहनत से प्रभावित होकर उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में ले गए जहाँ कलाम के जीवन का स्वर्णिम अध्याय का सुनहरा आगाज हुआ।

कलाम ने नासा से रॉकेट प्रक्षेपण की तकनीकी का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा भारत का पहला रॉकेट ‘नाइके अपाचे’ छोड़ा। इन्हें SLV परियोजना का प्रबंधक बनाया तथा इनके नेतृत्व में SLV-3 ने सफल उड़ान भरी जिसने रोहिणी उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। कलाम ने महत्त्वपूर्ण मिसाइल कार्यक्रम समन्वित निर्देशित मिसाइल कार्यक्रम 1983 के तहत ‘पृथ्वी’, अग्नि, त्रिशूल, नाग व आकाश नामक मिसाइलों का विकास व प्रक्षेपण किया। 1998 में पोकरण में किए गये परमाणु परीक्षण का नेतृत्व किया। मिसाइलों में महत्त्वपूर्ण योगदान के कारण इन्हें मिसाइल मेन भी कहा जाता है।

डॉ. कलाम ने 2002-2007 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित किया। भारत सरकार ने इन्हें पद्म भूषण (1981), पद्म, विभूषण (1990) तथा भारत रत्न (1997) जैसे महत्त्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित किया।

27 जुलाई 2015 को IIM शिलांग में भाषण देते हुए इनकी हृदय गति रुक जाने से इनका निधन हो गया जो भारत के लिए ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है।

प्रश्न 18.
सर सी.वी. रमन के जीवन वृत्त एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन करो।
उत्तर-
तमिलनाडु के तिरुधिरा पतली शहर में 7 नवम्बर, 1888 को चन्द्र शेखर वेंकटरमन का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम चन्द्रशेखर अय्यर तथा माता का नाम पार्वती अम्मल था। इनके पिता विशाखापत्तनम के वाल्टेयर कॉलेज में भौतिक शास्त्र के प्राध्यापक थे। रमन ने वाल्टेयर कॉलेज से इन्टर परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की व 1907 में 19 वर्ष की आयु में भौतिक विज्ञान में एम.एससी. परीक्षा उत्तीर्ण की। इसी वर्ष वे अर्थ विभाग की प्रतियोगिता परीक्षा देकर व चयनित होकर अर्थ विभाग के उपमहालेखापाल नियुक्त हुए।

रमन ने वीणा, मृदंग, तानपुरा आदि भारतीय वाद्ययन्त्रों तथा वायलिन, पियानो आदि विदेशी यंत्रों के ध्वनिक गुणों की खोज कर भौतिक सिद्धान्त प्रतिपादित किए। इन्हें राजकीय सेवा में रहते हुए विज्ञान के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाने के कारण महालेखापाल पद से 1917 में त्याग पत्र दे दिया।

रमन बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर बने। इस पद पर रहते हुए रमन ने अपने विश्वप्रसिद्ध ‘रमन प्रभाव’ की खोज की, जो उन्होंने 1928 में पूर्ण किया। ‘रमन प्रभाव’ की खोज पर 1930 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया। ‘रमन प्रभाव’ को ‘रमन प्रकीर्णन’ भी कहा जाता है। इसके अनुसार, ‘जब प्रकाश द्रव माध्यम से गुजरता है तो पदार्थ व द्रव में अन्तःक्रिया होती है जिसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहा जाता है।” रमन प्रभाव खोज की विशेष बात यह थी कि केवल दो सौ रुपये के उपकरणों व न के बराबर सुविधाओं के साथ रमन ने यह खोज की।

भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 1949 में राष्ट्रीय प्राध्यापक नियुक्त किया गया। 1954 में उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया। उनके इन वैज्ञानिक शान्तिपूर्ण कार्यों द्वारा राष्ट्रों के मध्य मैत्री विकसित करने हेतु लेनिन शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया।

रमन ने समुद्र के आकाश का रंग नीला होने का कारण बताया तथा ठोस, द्रव व गैस का अध्ययन किया। इसके अतिरिक्त इन्होंने चुम्बकीय शक्ति, एक्स किरणें, पदार्थ की संरचना, वर्ण व ध्वनि पर वैज्ञानिक अनुसंधान किये। 20 नवम्बर 1970 में इनकी मृत्यु हो गई। उनके सम्मान व रमन प्रभाव की खोज के उपलक्ष में हर वर्ष 28 फरवरी को विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

प्रश्न 19.
डॉ. सलीम अली के जीवन वृत्त एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन करो।
उत्तर-
डॉ. सलीम अली का जन्म बोम्बे के एक सुलेमानी मुस्लिम परिवार में 12 नवम्बर, 1896 में हुआ था। वे प्रकृतिवादी तथा पक्षीविज्ञानी थे। उन्हें भारत का बर्ड मेन के नाम से जाना जाता है। सलीम भारत के ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सम्पूर्ण भारत में व्यवस्थित रूप से पक्षी सर्वेक्षण किया। इनके द्वारा लिखी पुस्तकों से भारत में पक्षी विज्ञान के विकास में काफी सहयोग मिला। 1976 में इनको पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1947 के पश्चात् वे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के मुख्य व्यक्ति बने तथा संस्था के लिए सरकारी सहायता हेतु प्रभावी ढंग से प्रयत्न किया।

डॉ. सलीम ने भरतपुर पक्षी अभयारण्य (केवलादेव नेशनल पार्क) के निर्माण के लिए पक्ष रखा तथा एक बाँध परियोजना को रुकवाने के लिए अधिक जोर दिया क्योंकि इससे साइलेंट वेली नेशनल पार्क को खतरा था। सलीम ने बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के सचिव डब्ल्यू.एस. मिलार्ड की देखरेख में पक्षियों पर अध्ययन किया। युवा सलीम ने असामान्य रंग की गोरैया का अपनी बन्दूक से. शिकार किया था फिर मिलार्ड ने इस पीले गले की गोरैया के रूप में पहचान की। उनकी आत्मकथा द फॉल ऑफ ए स्पैरो में अली ने पतली गर्दन वाली गोरैया की घटना को अपने जीवन का ‘परिवर्तन-क्षण’ माना और इसी से उन्हें पक्षी विज्ञान की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा मिली। मिलार्ड ने सलीम को पक्षियों के संग्रह करने के लिए कुछ पुस्तकें दीं जिनके अन्दर कॉमन बड्स ऑफ मुम्बई भी शामिल थी।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1.
धन्वन्तरि आश्रम पर किसने चिकित्सीय ज्ञान प्राप्त किया?
(अ) चरक
(ब) सुश्रुत
(स) जोसेफ लिस्टर
(द) मण्डूक

प्रश्न 2.
शल्य चिकित्सा यंत्रों का ज्ञान प्रदान करने वाले थे
(अ) चरक
(ब) सुश्रुत
(स) जोसेफ लिस्टर
(द) जेनर।

प्रश्न 3.
पित्त, कफ एवं वात धारणा किसके द्वारा प्रस्तुत की गई?
(अ) चरक
(ब) सुश्रुत
(स) जोसेफ लिस्टर
(द) ल्यूवेनहॉक

प्रश्न 4.
वह चिकित्सक जिसने हृदय को शरीर का नियंत्रण केन्द्र बताया
(अ) रोनोल्ड रोस
(ब) चरक
(स) सुश्रुत
(द) हार्टमेन

प्रश्न 5.
चरक शब्द का अर्थ है
(अ) रोगी की पहचान
(ब) रोग की पहचान
(स) चलना
(द) वात, पित्त व कफ

प्रश्न 6.
वाद्य यंत्रों के ध्वनिक गुणों की खोज कर भौतिक सिद्धान्त प्रतिपादित करने वाले थे
(अ) होमी जहांगीर भाभा
(ब) डॉ. मेघनाथ साहा
(स) डॉ. अब्दुल कलाम
(द) सी.वी. रमन

प्रश्न 7.
पारसी परिवार में जन्मे व टाटा परिवार से सम्बन्धित वैज्ञानिक थे
(अ) डॉ. मेघनाथ साहा
(ब) पंचानन माहेश्वरी
(स) होमी जहांगीर भाभा
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 8.
भारत में पहला परमाणु बिजलीघर कहाँ पर स्थापित हुआ?
(अ) ट्राम्बे
(ब) त्रिवेन्द्रम्
(स) बॉम्बे
(द) तारापुर

प्रश्न 9.
बंगाल कैमिकल एण्ड फार्मास्यूटिकल वर्ल्स का कार्य प्रारम्भ करने वाले थे
(अ) मेघनाथ साहा।
(ब) प्रफुल्लचन्द्र राय
(स) चरक
(द) पंचानन माहेश्वरी

प्रश्न 10.
पुष्पों के विभिन्न भागों को कृत्रिम पोषण द्वारा वृद्धि कराने में किसे सहायता मिली ?
(अ) मेघनाथ साहा।
(ब) प्रफुल्लचन्द्र राय
(स) पंचानन माहेश्वरी
(द) सी.वी. रमन

प्रश्न 11.
भरतपुर पक्षी अभयारण्य के निर्माण में अहम भूमिका किसकी थी?
(अ) अब्दुल कलाम
(ब) सी.वी. रमन
(स) मेघनाथ साहा।
(द) सलीम अली

उत्त्तरमाला-
1. (ब)
2. (ब)
3. (अ)
4. (ब)
5. (स)
6. (द)
7. (स)
8. (द)
9. (ब)
10. (स)
11. (द)।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
भारत का बर्डमेन किसे कहते हैं व इन्हें किस पुरस्कार से नवाजा गया?
उत्तर-
डॉ. सलीम अली को भारत का बर्डमेन कहा जाता है। इन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 2.
डब्ल्यू.एस. मिलार्ड कौन थे?
उत्तर-
ये बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सचिव थे। इनकी देखरेख में डॉ. सलीम ने पक्षियों का अध्ययन किया था।

प्रश्न 3.
भारत में टिशू कल्चर प्रयोगशाला की स्थापना व टिशू कल्चर पर शोध किसने किया?
उत्तर-
डॉ. पंचानने माहेश्वरी ने किया।

प्रश्न 4.
भारत में बना प्रथम रॉकेट को क्या नाम था?
उत्तर-
नाइके अपाचे।

प्रश्न 5.
डॉ. कलाम ने कौन-कौनसी मिसाइलें बनाई थीं?
उत्तर-
पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, नाग व आकाश नामक मिसाइलें बनाई थीं।

प्रश्न 6.
सन् 1990 में भारत के किस स्थान पर परमाणु परीक्षण किया गया?
उत्तर-
पोकरण में।।

प्रश्न 7.
भारत सरकार ने डॉ. कलाम को कौन-कौनसे पुरस्कार प्रदान किये हैं?
उत्तर-
पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा भारत रत्न।।

प्रश्न 8.
डॉ. भाभा किसके अध्यक्ष थे?
उत्तर-
परमाणु शक्ति आयोग के अध्यक्ष थे।

प्रश्न 9.
डॉ. भाभा को किसका पितामह कहा जाता है?
उत्तर-
भारतीय परमाणु विज्ञान का।।

प्रश्न 10.
हवाई दुर्घटना में किस वैज्ञानिक की मृत्यु हुई थी?
उत्तर-
डॉ. होमी जहाँगीर भाभा।

प्रश्न 11.
डॉ. सी.वी. रमन का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर-
तमिलनाडु के तिरुधिरा पतली शहर में 7 नवम्बर, 1988 को।।

प्रश्न 12.
पाचन उपापचय और शरीर प्रतिरक्षा की अवधारणा किसने दी?
उत्तर-
चरक ने।

प्रश्न 13.
सामान्यतः विज्ञान के कितने पक्ष होते हैं ?
उत्तर-
दो पक्ष होते हैं-आधारभूत विज्ञान तथा अनुप्रयोगात्मक विज्ञान।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
विज्ञान के पक्षों को समझाइए।
उत्तर-
सामान्यतः विज्ञान के दो पक्ष होते हैं-आधारभूत विज्ञान तथा अनुप्रयोगात्मक विज्ञान। अनुप्रयोगात्मक विज्ञान देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है तथा इसे गुणात्मक प्रभाव डालने वाला विज्ञान कहते हैं। जबकि आधारभूत विज्ञान से वैज्ञानिक मानसिकता, समझ तथा जानकारी का विकास होता है, इसी की नींव पर तकनीकी विकास होता है और अनुप्रयोगात्मक विज्ञान आगे बढ़ता है।

प्रश्न 2.
चरक के अनुसार बीमारी कब उत्पन्न होती है?
उत्तर-
चरक आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के महान आचार्य के रूप में प्रख्यात रहे हैं। चरक पहले चिकित्सक थे जिन्होंने पाचन उपापचय और शरीर प्रतिरक्षा की अवधारणा दी। इनके अनुसार शरीर को कार्य के कारण तीन दोष होते हैं-पित्त, कफ एवं वात (वायु) । शरीर में विद्यमान तीनों दोषों के असंतुलन से बीमारी उत्पन्न होती है।

प्रश्न 3.
चरक संहिता के लेखक कौन थे, उसमें चिकित्सकों को क्या निर्देश दिये हैं?
उत्तर-
चरक ने चरक संहिता को लिखा था। चरक ने चरक संहिता में चिकित्सकों व चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए कुछ निर्देशों व प्रतिज्ञाओं का भी उल्लेख किया है। चरक के अनुसार चिकित्सकों को रोगियों से किसी भी दिशा में शत्रुता नहीं रखनी चाहिए। रोगी की घर की बातों को बाहर नहीं बताना चाहिए। चिकित्सक को सदैव ज्ञान की खोज में तत्पर रहना चाहिए।

प्रश्न 4.
डॉ. होमी जहाँगीर भाभा के अध्ययन क्षेत्र के विषय में टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
डॉ. भाभा ने अपना उच्च अध्ययन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्राप्त किया। उन्होंने सैद्धान्तिक भौतिकी का विशेष अध्ययन किया व कॉस्मिक किरणों तथा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में विशेष अनुसंधान किया। 1942 में उन्हें अन्तरिक्ष किरणों का प्राध्यापक बनाया गया। | उन्होंने डब्ल्यू. हील्टर के साथ मिलकर कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया और बताया कि कॉस्मिक किरण वे सूक्ष्म कण हैं जो बाह्य अन्तरिक्ष से वायुमण्डल में आते हैं तथा वायु कणों से क्रिया कर इलेक्ट्रॉन के समान कणों का फव्वारा उत्पन्न करते हैं। भाभा ने इन नाभिकीय कणों को खोजा जो बाद में सॉन कणों के रूप में जाने गये।

प्रश्न 5.
प्रफुल्लचन्द्र राय के जीवन में ऐसा कौनसा मोड़ आया जिसके कारण उन्हें व्यवसाय करना पड़ा?
उत्तर-
भारत वापस आने पर उनकी नियुक्ति प्रेसिडेंसी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुई। किन्तु इनसे कम योग्यता के अंग्रेज ऊँचे पदों व कहीं अधिक वेतनों पर उसी कॉलेज में नियुक्त थे। डॉ. प्रफुल्लचंद्र राय ने जब इस अन्याय का तत्कालीन शिक्षा विभाग अंग्रेज डायरेक्टर से विरोध किया तो, उसने व्यंग्य किया कि “यदि आप इतने योग्य केमिस्ट हैं तो कोई व्यवसाय क्यों नहीं चलाते।”

अंग्रेज अधिकारी के व्यंग्य के कारण उनके जीवन में मोड़ आया और उन्होंने 1892 में 800 रुपए की अल्प पूंजी से विलायती ढंग की औषधियाँ तैयार करने के लिए बंगाल कैमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स का कार्य आरम्भ किया। आज यह करोड़ों का कारखाना है।

प्रश्न 6.
डॉ. पंचानन माहेश्वरी पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
डॉ. माहेश्वरी जयपुर के रहने वाले वनस्पति विज्ञानी थे। इन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण कर आगरा, इलाहाबाद, लखनऊ व ढाका विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया व अन्त में दिल्ली विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के अध्यक्ष थे। इनके अधीन शोध कार्य करने वाले भारतीयों के अतिरिक्त अनेक देशों से शोधार्थी आते थे। आपने भ्रूण विज्ञान पर विशेष कार्य किया। भ्रूण विज्ञान व पादप क्रिया विज्ञान के सहमिश्रण से एक नई शाखा का विकास किया एवं इससे फूलों के विभिन्न भागों की कृत्रिम पोषण द्वारा वृद्धि कराने में पर्याप्त सफलता प्राप्त की।

डॉ. माहेश्वरी ने टिशु कल्चर प्रयोगशाला की स्थापना की तथा टेस्ट ट्यूब कल्चर पर शोध के लिए लन्दन की रॉयल सोसायटी ने उन्हें अपना फेलो बनाया।

प्रश्न 7.
निम्न को सुमेलित कीजिए (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18 )
(i) प्लास्टिक सर्जरी के पिता (A) होमी जहाँगीर भाभा
(ii) भारत के बर्ड मेन (B) सुश्रुत
(iii) भारतीय परमाणु विज्ञान के पिता (C) डॉ. सलीम अली
उत्तर-
(i) प्लास्टिक सर्जरी के पिता (B) सुश्रुत
(ii) भारत के बर्ड मेन (C) डॉ. सलीम अली
(iii) भारतीय परमाणु विज्ञान के पिता (A) होमी जहाँगीर भाभा

प्रश्न 8.
‘मिसाइलमेन’ के नाम से किसे जाना जाता है? डॉ. पंचानन माहेश्वरी का वनस्पति विज्ञान में योगदान लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
उत्तर-
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को ‘मिसाइलमेन’ कहा जाता है। डॉ. पंचानन माहेश्वरी के योगदान हेतु पाठ्यपुस्तक लघूत्तरात्मक प्रश्न संख्या 14 को देखिए।

निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
डॉ. हॉमी जहाँगीर भाभा के जीवनवृत्त एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
डॉ. भाभा एक महान वैज्ञानिक, कुशल प्रशासक व कला प्रेमी थे। कला के क्षेत्र में उनके चित्र ब्रिटिश कला दीर्घाओं में आज भी सुरक्षित हैं। इनका जन्म मुम्बई के एक सम्पन्न पारसी परिवार में 30 अक्टूबर 1909 को हुआ था। कैथेड्रल जॉन केनन हाई स्कूल एवं एलीफेन्स्टन कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने के बाद डॉ. भाभा उच्च अध्ययन के लिए केम्ब्रिज विश्वविद्यालय गये। यहाँ से 1930 में स्नातक होने के पश्चात् सैद्धान्तिक भौतिकी का विशेष अध्ययन प्रारम्भ किया व कॉस्मिक किरणों (Cosmic rays) व परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में विशेष अनुसंधान किया तथा 1942 में वे अन्तरिक्ष किरणों के प्राध्यापक बने।।

भाभा टाटा परिवार से सम्बन्धित थे। उन्होंने 1937 में डब्ल्यू. हील्टर के साथ मिलकर कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि कॉस्मिक किरण वे सूक्ष्म कण हैं जो बाह्य अंतरिक्ष से वायुमण्डल में आते हैं तथा वायु कणों से क्रिया कर इलेक्ट्रॉन के समान कणों का फव्वारा उत्पन्न करते हैं। भाभा ने इन नाभिकीय कणों को खोजा, जिसे बाद में सॉन कणों के रूप में जाना गया। सन् 1945 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फन्डामेन्टल रिसर्च (Tata Institute of Fundamental Research) तथा 1948 में परमाणु शक्ति आयोग की स्थापना हुई तथा भाभा इस आयोग के अध्यक्ष बने। इन्हीं के मार्गनिर्देशन में अप्सरा, सायरस व जरलीना रियेक्टर की स्थापना हुई। 1963 में देश के पहले परमाणु बिजलीघर का निर्माण तारापुरा में प्रारम्भ हुआ।

परमाणु विज्ञान में विशेष योगदान देने के कारण इन्हें ‘ भारतीय परमाणु विज्ञान का जनक’ कहा जाता है। सितम्बर 1956 में न्यूयार्क में आण्विक एजेन्सी की स्थापना के लिए 81 राष्ट्रों का सम्मेलन हुआ जिसमें सर्वसम्मति से सम्मेलन का अध्यक्ष डॉ. भाभा को बनाया गया। 24 जनवरी 1966 को डॉ. भाभा की हवाई दुर्घटना में मृत्यु हो गयी। इनके सम्मान व श्रद्धांजलि के रूप में 1967 में परमाणु शक्ति संस्थान ट्राम्बे का नाम परिवर्तित कर भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (Bhabha Atomic Research Centre) रखा गया।

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