Kaal in Hindi

Kaal in Hindi – काल किसे कहते है, प्रकार, उदाहरण

Kaal in Hindi: हेलो स्टूडेंट इस लेख में हम काल के बारे में पढ़ेंगे, कि काल की परिभाषा, काल के भेद कितने होते है | इसलिए इस लेख को अंत तक पढ़े |

Kaal in Hindi – काल किसे कहते है?

Kaal ki Paribhasha : क्रिया के होने या करने के समय को काल कहते हैं।

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काल का अर्थ होता है – समय। क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय का पता चले उसे काल कहते हैं। 

काल के उदाहरण :

(i) सुनील गीता पढ़ता है।
(ii) प्रदीप पढ़ रहा है।
(iii) रमेश कल दिल्ली जाएगा।
(iv) बच्चे खेल रहे हैं।

काल के भेद – Kaal ke Bhed

1. वर्तमान काल
2. भूतकाल
3. भविष्य काल

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1. वर्तमान काल :

क्रिया के जिस रूप से यह पता चले की काम अभी हो रहा है उसे वर्तमान काल कहते हैं। अथार्त क्रिया के जिस रूप से समय का पता चले और क्रिया व्यापर का वर्तमान समय में पता चले उसे वर्तमान काल कहते हैं।

जिन वाक्यों के अंत में ता , ती , ते , है , हैं आते हैं वो वर्तमान काल कहलाता है। क्रियाओं के होने की निरन्तरता को वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे :-

(i) राम अभी-अभी आया है।
(ii) वर्षा हो रही है।
(iii) राजू गाता है।
(iv) मोहन पढ़ रहा है।
(v) पुजारी पूजा कर रहा है।

इसके तीन भेद है।

i. सामान्य वर्तमान :

क्रिया के जिस रूप से कार्य की पूर्णता और अपूर्णता का पता न चले उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं। अथार्त जिस क्रिया से क्रिया के सामान्य रूप का वर्तमान में होने का पता चलता है उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं।

जिन वाक्यों के अंत में ता है , ती है , ते है , ता हूँ , ती हूँ आदि आते हैं उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है। जो क्रिया वर्तमान में सामान्य रूप में पायी जाती है उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है। जहाँ पर क्रिया का प्रारम्भ बोलने के समय होता है।

जैसे :-

(i) राम घर जाता है।
(ii) वह गेंद खेलता है।
(iii) सीता पढती है।
(iv) मैं गाता हूँ।
(v) वह आता है।
(vi) हवा चलती है।

ii. अपूर्ण वर्तमान :– क्रिया का वह रूप जिससे मालूम होता है कि काम शुरू हो गया है और अभी जारी है।

जैसे :-

(i) श्याम गेंद खेल रहा है।
(ii) वह घर जा रहा है।
(iii) अनीता गीत गा रही है।
(iv) रमेश लिख रहा है।
(v) बन्दर नाच रहा है।
(vi) कमल पत्र लिख रहा है।

iii. संदिग्ध वर्तमान :– क्रिया का वह रूप जिससे मालूम होता है कि क्रिया वर्तमान में ही है, किन्तु उसके होने में सन्देह हो।

जैसे :-

(i) सविता पत्र लिखती होगी।
(ii) वह गाता होगा।
(iii) राम खाता होगा।
(iv) रमेश जाता होगा।
(v) गाड़ी आती होगी ।

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2. भूतकाल :

क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि काम बीते हुए समय में पूरा हो गया है।

उदाहरण :-

(i) रमेश पटना गया था।
(ii) पहले मैं लखनऊ में पढ़ता था।
(iii) राम ने रावण का वध किया था।
(iv) नाना जी कहानी सुना रहे थे।
(v) वह खा चूका था।
(vi) वह आया था।

इसके छ: भेद है।

भूतकाल के प्रकार :-


(1) सामान्य भूतकाल
(2) आसन्न भूतकाल
(3) पूर्ण भूतकाल
(4) अपूर्ण भूतकाल
(5) संदिग्ध भूतकाल
(6) हेतुहेतुमद् भूतकाल

i. सामान्य भूत :– क्रिया के जिस रूप से यह मालूम हो कि काम बीते हुए समय में सामान्यतः पूरा हो गया।

जैसे :-

(i) मैंने गाना गाया।
(ii) खिलाडी खेलने गये।
(iii) सीता गई।
(iv) श्रीराम ने रावण को मारा।
(v) मनोज घर गया।
(vi) पानी गिरा।

ii. आसन्न भूत :– क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि काम अभी-2 पूरा हुआ है।

जैसे :-

(i) मैं अभी हिसार से आया हूँ।
(ii) मैंने सेब खाया है।
(iii) अध्यापिका पढ़कर आयीं हैं।
(iv) मैं अभी सोकर उठा हूँ।
(v) उसने दवा खायी है।
(vi) सिपाही ने चोर को पकड़ लिया |

iii. पूर्ण भूत :– क्रिया के जिस रुप से यह ज्ञात हो कि काम बहुत पहले पूरा हो चुका था।

जैसे :-

(i) पद्मा ने नृत्य किया।
(ii) वह दिल्ली गया था।
(iii) भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था।
(iv) बच्चा आया था।
(v) उसने श्याम को मारा था।
(vi) अर्जुन ने कर्ण को मारा था।
(vii) नौकर पत्र लाया था।
(viii) राधा ने गीत गया था।

iv. अपूर्ण भूत :– क्रिया के जिस रुप से क्रिया का भूतकाल में होना पाया जाए, लेकिन पूर्ण हुआ या नहीं ज्ञात न हो, उसे अपूर्ण भूत कहते है।

जैसे :-

(i) मोहन मैदान में घूम रहा था।
(ii) वह हॉकी खेल रहा था।
(iii) सुनील पढ़ रहा था।
(iv) राहुल लिख रहा था।
(v) बच्चे खेल रहे थे।
(vi) सुरेश गीत गा रहा था।
(vii) चिट्ठी लिखी जाती थी।

v. संदिग्ध भूत :– जिस क्रिया के करने या होने में संदेह हो उसे संदिग्ध भूत कहते है।

जिन वाक्यों के अंत में गा , गे , गी आदि आते हैं वे संदिग्ध भूतकाल होते हैं। क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में पूरा होने पर संदेह हो कि वह पूरा हुआ था या नहीं उसे संदिग्ध भूतकाल कहते हैं।

जैसे :-

(i) सुनील हिसार गया था।
(ii) वे क्रिकेट खेले होंगे।
(iii) बस छूट गई होगी।
(iv) तू गाया होगा।
(v) उसने खाया होगा।
(vi) ललिता चली गई होगी।

vi. हेतु हेतुमद भूत :– क्रिया के जिस रुप से कार्य के भूतकाल में होने या किए जाने की शर्त पाई जाए, उसे हेतु हेतुमद भूत कहते है।

इसमें पहली क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर होती है। पहली क्रिया तो पूरी नहीं होती लेकिन दूसरी भी पूरी नहीं हो पाती। जिसमे क्रिया के होने में कोई शर्त पायी जाये उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते हैं।

जैसे :-

(i) मैं आगरा जाती तो ताजमहल देखती।
(ii) सुरेश मेहनत करता तो सफल हो जाता।
(iii) यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
(iv) वह जाता।
(v) यदि मैं आता तो वह चला जाता।

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3. भविष्य काल :

क्रिया के जिस रूप से क्रिया के आने वाले समय में पूरा होने का पता चले उसे भविष्य काल कहते हैं। इससे आगे आने वाले समय का पता चलता है। जिन वाक्यों के अंत में गा , गे , गी आदि आते हैं वे भविष्य काल होते हैं।

जैसे :-

(i) मैं कल विद्यालय जाउँगा।
(ii) खाना कुछ देर में बन जायेगा।
(iii) राजू देर तक पढ़ेगा।
(iv) वह आम लायेगा।
(v) वह किताब पढ़ेगा।
(vi) हम सर्कस देखने जायेंगे।
(vii) राम कल पढ़ेगा।

भविष्य काल के भेद :-

(1) सामान्य भविष्य काल
(2) संभाव्य भविष्य काल
(3) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल

(1) सामान्य भविष्य काल :- क्रिया के जिस रूप से क्रिया के सामान्य रूप का भविष्य में होने का पता चले उसे सामान्य भविष्य काल कहते हैं। अथार्त जिन शब्दों के अंत में ए गा , ए गी , ए गे आदि आते हैं उन्हें सामान्य भविष्य काल कहते हैं। इससे क्रिया के भविष्य में होने का पता चलता है।

जैसे :-

(i) वह खाना खाएगी।
(ii) बच्चे खेलने जायेंगे।
(iii) वह घर जायेगा।
(iv) दीपक अख़बार बेचेगा।
(v) वह पढ़ेगा।
(vi) राम आएगा।

(2) संभाव्य भविष्य काल :- क्रिया के जिस रूप से आगे कार्य होने या करने की संभावना का पता चले उसे संभाव्य भविष्य काल कहते हैं। इसमें क्रियाओं का निश्चित पता नहीं चलता। इसमें भविष्य में किसी कार्य के होने की संभवना होती है।

जैसे :-

(i) शायद कल सुनील आगरा जाए।
(ii) शायद आज वर्षा हो।
(iii) शायद चोर पकड़ा जायेगा।
(iv) परीक्षा में शायद मुझे दो अंक प्राप्त हों।
(v) मैं सफल हऊँगा।
(vi) वह विजयी होगा।

(3) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल:- क्रिया के जिस रूप से एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो उसे हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल कहते है। इसमें एक क्रिया दूसरी पर निर्भर होती है। इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है।

जैसे :-

(i) यदि छुट्टियाँ होंगी तो मैं आगरा जाउँगा।
(ii) अगर तुम मेहनत करोगे तो फल अवश्य मिलेगा।
(iii) वह आये तो मैं जाऊ।
(iv) वह कमाए तो मैं खाऊ।
(v) जो कमाए सो खाए।

काल किसे कहते है Video

Credit: Learn Easy

FAQs

  1. काल किसे कहते हैं काल के कितने भेद होते हैं?

    भूतकाल क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का बोध हो उसे भूतकाल कहते हैं। जैसे- राम ने पत्र लिखा। सामान्य भूतकाल- क्रिया के जिस रूप से साधारणतः क्रिया का बीते समय में होना पाया जाये उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं

  2. भविष्य काल कितने प्रकार के होते हैं?

    सामान्य भविष्यत् काल
    संभाव्य भविष्यत् काल
    आज्ञार्थ भविष्यत् काल

  3. वर्तमान काल की परिभाषा क्या है?

    वर्तमान काल (संक्षिप्त रूप में pres या prs) व्याकरणिक परिभाषा के अनुसार, क्रिया के जिस रूप से वर्तमान समय में मौजूद कोई स्थिति या किसी घटना के होने का संकेत मिलता है उसे ‘वर्तमान काल‘ कहते हैं।

  4. भविष्य काल की पहचान क्या है?

    क्रिया के जिस रूप से क्रिया के आने वाले समय में पूरा होने का पता चले उसे भविष्य काल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में गा, गे, गी आदि आते हैं वे भविष्य काल होते हैं।

  5. वर्तमान काल के तीन भेद कौन कौन से हैं?

    सामान्य वर्तमान
    अपूर्व वर्तमान
    संदिग्ध वर्तमान
    संभाव्य वर्तमान
    आज्ञार्थ वर्तमान

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