Electronic Data Interchange (EDI) In Hindi

हेलो स्टूडेंट्स, इस पोस्ट में हम आज Electronic Data Interchange (EDI) In Hindi के बारे में पढ़ेंगे | इंटरनेट में नेटवर्क सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी के नोट्स हिंदी में बहुत कम उपलब्ध है, लेकिन हम आपके लिए यह हिंदी में डिटेल्स नोट्स लाये है, जिससे आपको यह टॉपिक बहुत अच्छे से समझ आ जायेगा |

EDI का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज(electronic data interchange) है। यह एक ऐसा कम्युनिकेशन सिस्टम है जिसमें कि एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डेटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप में एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर करते है।

क्योंकि डेटा को ट्रान्सफर करने में paperwork नही करना पड़ता है इसलिए इसमें किसी मनुष्य के हस्तक्षेप की आवश्यकता नही पड़ती है।

आजकल EDI का प्रयोग सबसे ज्यादा B2B e-commerce में किया जाता है। EDI के द्वारा बहुत ही अधिक डेटा का ट्रान्सफर किया जाता है जिसके कारण इसमें डेटा को bidirectional फॉर्मेट में व्यवस्थित किया जाता है।

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Fig:-कार्यप्रणाली

Advantage of EDI in Hindi:-

इसके लाभ निम्नलिखित है:-

1:-इसमें डाक्यूमेंट्स को ट्रान्सफर करने में समय बहुत ही कम लगता है क्योंकि डेटा इलेक्ट्रॉनिक रूप में ट्रान्सफर होता है।

2:-क्योंकि data entry कंप्यूटर में होती है इसलिए इसमें गलतियों की गुंजाइश बहुत ही कम होती है।

3:-इसमें डेटा को आसानी से exchange कर सकते है अर्थात् इसमें technical complexity कम हो जाती है।

4:-इसमें डेटा का ट्रान्सफर कम कीमत(cost) में हो जाता है।

5:-इसमें paperwork नही करना पड़ता है।

6:-इसमें डेटा का आदान-प्रदान बेहतर होता है तथा accuracy अधिक होती है।

इसकी कार्यप्रणाली में निम्नलिखित स्टेप्स होते है:-

1:–सबसे पहले जिन डॉक्यूमेंट या डेटा को ट्रांसफर करना होता है उसको हम तैयार करते है अर्थात डेटा को इकट्ठा तथा सुव्यवस्थित किया जाता है।

2:-फिर इन डाक्यूमेंट्स को ट्रांसलेटर सॉफ्टवेयर के द्वारा EDI फॉर्मेट में translate किया जाता है।

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3:-जब हम डाक्यूमेंट्स को EDI फॉर्मेट में ट्रांसलेट कर लेते है तो डाक्यूमेंट्स exchange होने के लिए तैयार हो जाते है। तब हम अपने business सहयोगी से connect करते है और डाक्यूमेंट्स को exchange करते है। डाक्यूमेंट्स का ट्रांसफर HTTP, HTTPS तथा FTP प्रोटोकॉल्स कम्युनिकेशन विधियों के द्वारा किया जाता है।

4:-यह डाक्यूमेंट्स recipient मेलबॉक्स में तब रहता है जब तक कि वह मेलबॉक्स से डाक्यूमेंट्स को देख तथा प्रोसेस नही कर लेता है।

हम आशा करते है कि यह Network Security & Cryptography के हिंदी में नोट्स आपकी स्टडी में उपयोगी साबित हुए होंगे | अगर आप लोगो को इससे रिलेटेड कोई भी किसी भी प्रकार का डॉउट हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूंछ सकते है | आप इन्हे अपने Classmates & Friends के साथ शेयर करे |

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