जैव विविधता की क्षति अथवा जाति विलोपन का कारण

जैव विविधता की क्षति अथवा जाति विलोपन का कारण :

  1. आवासीय क्षति तथा विखंडन (Residential Damage and Fission)
  2. उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की  क्षति आवासीय शक्ति का सबसे अच्छा उदाहरण हैएक समय वर्षा वन पृथ्वी के  14% क्षेत्र में फैले थे लेकिन अब 6% से अधिक क्षेत्र में भी नहीं है |

विशाल अगेजन  वर्षा  वन को सोयाबीन की खेती व जानवरों के चारागाहों के लिए काटकर साफ कर दिया गया है यह वन पृथ्वी के वायुमंडल को 20% से भी ज्यादा ऑक्सीजन प्रदान करते हैं |

(2) अतिदोहन (Overdose):-मानव द्वारा प्राकृतिक संपदा का अत्यधिक दोहन होने से पिछले 500 वर्षों में स्टेलर समुद्री गाय ,  पैसेंजर कबूतर आदि विलुप्त हो चुके हैं |

(3)  विदेशी जातियों आक्रमण :-नील नदी की मछली नाइल पर्चको पूर्वी अफ्रीका की विक्टोरिया झील में डाला गया तो उस झील की सिकलिन मछलियां कि 200 से भी अधिक जातियां विलुप्त हो गई |

इसी तरह मछली पालन के उद्देश्य से लाई गई अफ्रीकन कैट फिश ,  कलैरियश , गैरिपाईनस मछलियां भारत की नदियों की कैटफ़िश मछलियों के लिए खतरा पैदा कर रही है |

(4)  महाविलुप्तता (Extinction) :-जब एक मुख्य प्रजाति विलुप्त होती है तब उस पर आधारित या उस पर निर्भर जाती भी विलुप्त होने लगती है इसे  सह विलोपन कहते हैं, जैसे एक परपोषी मछली के विलुप्त होने से उसके परजीवी भी विलुप्त हो जाते हैं |

सह विकसित परागणकारी सहोपकारिता : एक पादप के विलोपन से परागकण कारी कीट का विलोपन  सह विकसित परागणकारी सहोपकारिताका अच्छा उदाहरण है |

Remark:

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