बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi | बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध

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Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi:

“यत्र नार्यस्तु पुजयन्ते रमन्ते तत्र देवता”

अर्थात् जहाँ नारियों को सम्मान दिया जाता है, वहाँ साक्षात् देवता निवास करते हैं।

प्रारूप:

  1. प्रस्तावना
  2. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का अर्थ और शुरुआत
  3. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या है
  4. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्य
  5. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की जरूरत क्यों पड़ी
  6. बेटी बचाओ बेटी पढाओ जागरूकता अभियान
  7. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के प्रभावशाली कदम
  8. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की आवश्यकता
  9. बेटी बचाओ बेटी पढाओ का उद्देश्य
  10. उपसंहार

 

प्रस्तावना:

आज हमारे 21वी सदी के भारत में जहां एक ओर चांद पर जाने की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत की बेटियाँ अपने घर से बाहर निकलने पर भी कतरा रही हैं। जिससे यह पता लगता है कि आज का भारत देश पुरुष प्रधान देश है।

लोगों की सोच इस कदर बदल गई है कि आए दिन देश में कन्या भ्रूण हत्या और शोषण जैसे मामले देखने को मिलते रहते हैं। जिसके कारण हमारे देश की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि दूसरे देशों के लोग हमारे भारत देश में आने से झिझकने लगे हैं।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि जिस देश में महिलाओं का सम्मान नहीं होता, उस देश की प्रगति कभी भी नहीं हो सकती।

समाज में बेटियों की हो रही दुर्दशा और लगातार घट रहे लिंगानुपात, समाज के लोगों की संकीर्ण मानसिकता का सबूत है। समाज में बेटी-बेटा के प्रति फैली असामनता की भावना का नतीजा ही है कि आज कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है।

हमें समझने कि आवश्यकता है कि पृथ्वी पर मानव जाति का अस्तित्व, आदमी और औरत दोनों की समान भागीदारी के बिना संभव नहीं होता है। दोनों ही पृथ्वी पर मानव जाति के अस्तित्व के साथ-साथ किसी भी देश के विकास के लिए समान रूप से जिम्मेदार है।

 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का अर्थ और शुरुआत:

 

‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ (Beti Bachao Beti Padhao)’ एक ऐसी योजना है जिसका अर्थ “कन्या शिशु को बचाओ और इन्हें शिक्षित करो”  है।  इस योजना को भारतीय सरकार के द्वारा कन्या शिशु के लिए जागरूकता का निर्माण करने के लिए और महिला कल्याण में सुधार करने के लिए शुरू किया गया था।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (BBBP) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास की एक संयुक्त पहल है। लड़कियों की सामाजिक स्थिति में भारतीय समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिये इस योजना का आरंभ किया गया है।

इस योजना का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा राज्य के पानीपत जिले में किया था। हरियाणा में इसलिए क्योंकि हरियाणा राज्य में उस समय 1000 लड़कों पर सिर्फ 775 लड़कियां ही थी।

जिसके कारण वहां का लिंगानुपात गड़बड़ा गया था। इस योजना को शुरुआत में पूरे देश के 100 जिलों में जहां पर सबसे अधिक लिंगानुपात गड़बड़ाया हुआ था वहां पर इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया और आगामी वर्षों में इसे पूरे देश में लागू किया गया।

 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या है:

 

देश में लगातार घट रहे लिंगानुपात पर काबू पाने, बेटियों को सुरक्षा करने और उन्हें शिक्षित करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई है। शुरुआत में जिन जिलों में बेटियों की संख्या बेहद कम थी और उनकी स्थिति बेहद खराब थी उन जिलों में इस योजना की शुरुआत की गई थी ताकि वहां की बेटियों की दशा में सुधार लाया जा सके और बेटियों के प्रति लोगों की संकीर्ण सोच को बदला जा सके।

इस योजना के अनुसार बेटियों की शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था की गई है और लोगों की सोच को बदलने के लिए जगह-जगह इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिससे लोग बेटे और बेटियों में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करें। इस योजना के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि बेटियों को भी अपना जीवन जीने का पूर्ण अधिकार है।

 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्य:

 

1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था में बेटियों के प्रति रूढ़िवादी मानसिकता को बदलना।

2. बालिकाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाना।

3. भेदभाव पूर्ण लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलन कर गांव का अस्तित्व और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।

4. घर-घर में बालिकाओं की शिक्षा को सुनिश्चित करना।

5. लिंग आधारित भ्रूणहत्या की रोकथाम।

6. लड़कियों की शिक्षा और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।

 

बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की जरूरत क्यों पड़ी:

 

हमारा भारत देश वैसे तो हमारी पौराणिक संस्कृति है धर्म-कर्म और  स्नेह और प्यार का देश माना जाता है। लेकिन जब से भारतीय नहीं तरक्की करनी चालू की है |

और नई तकनीकों का विकास हुआ है तब से भारतीय लोगों की मानसिकता में बहुत बड़ा बदलाव आया है। इस बदलाव के कारण जनसंख्या की दृष्टि से बहुत बड़ा उथल-पुथल हुआ है।

लोगों की मानसिकता इस कदर खराब हो गई है की वे बेटे और बेटियों में भेदभाव करने लगे है। वे बेटियों को एक वस्तु के समान मानने लगे हैं। ऐसे लोग बेटे के जन्म होने पर बहुत खुशियां मनाते हैं और पूरे गांव में मिठाइयां बटवाते है|

वही अगर बेटी का जन्म हो जाए तो पूरे घर में सन्नाटा पसर जाता है जैसे कि कोई आपदा या विपदा आ गई हो। वह बेटी को पराया धन मानते हैं क्योंकि एक दिन बेटियों को शादी करके दूसरे घर जाना होता है।

इसलिए गिरी हुई मानसिकता वाले लोग सोचते हैं कि बेटियों पर किसी भी प्रकार का खर्च करना बे मतलब है।  इसलिए वे बेटियों को पढ़ाते लिखाते नहीं और ना ही उनका सही से पालन पोषण करते हैं।

उनको अपनी मर्जी से किसी भी कार्य को करने के लिए आजादी नहीं होती है। कुछ जगहों पर तो बेटियों को घर से बाहर तक नहीं निकलने दिया जाता है।

वहीं इसके विपरीत बेटों को खूब लाड प्यार किया जाता है और उनकी शिक्षा के लिए देश विदेश में भी भेजा जाता है। बेटों को हर प्रकार की छूट दी जाती है। ऐसे लोग मानते हैं कि बेटे हमारे बुढ़ापे की लाठी बनेंगे और हमारी सेवा करेंगे लेकिन आजकल सब कुछ इसके उलट हो रहा है।

बच्चों के लिंग अनुपात (सीएसआर), जो 0-6 वर्ष आयु के प्रति 1000 लड़कों के तुलना लड़कियों की संख्या से निर्धारित होता है। भारत देश के आजादी के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई थी जिसमें पाया गया कि 1000 लड़कों पर सिर्फ 945 लड़कियां ही है लेकिन आजादी के बाद स्थिति और भी खराब होती गई जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं-

वर्षलिंगानुपात प्रति 1000 लड़कों पर
1991945
2001927
2011918

 

लड़कियों की इतनी कम जनसंख्या होना यह किसी आपदा से कम नहीं है। यह बच्चे के लिंग चुनाव द्वारा जन्मपूर्व भेदभाव और लड़कियों के प्रति जन्म उपरांत भेदभाव को दर्शाता है।

इस मानसिकता के दिन प्रतिदिन बढ़ने के कारण बेटियों की जनसंख्या में कमी आने लगी क्योंकि बेटियों को गर्भ में ही मारे जाने लगा है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 5 करोड़ लड़कियों की कमी है

जिसका संज्ञान लेते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत को चेतावनी दी कि अगर जल्द ही लड़कियों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया तो भारत में जनसंख्या के बदलाव के साथ-साथ अन्य कई विपत्तिया सकती हैं।

इसलिए हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटियों की सुरक्षा और बेटियों की शिक्षा दीक्षा के लिए एक नई योजना का प्रारंभ किया जिसका नाम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ रखा गया।

 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ जागरूकता अभियान :

 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ ( Beti Bachao Beti Padhao) एक ऐसी योजना है जिसका अर्थ होता है कन्या शिशु को बचाओ और इन्हें शिक्षित करो। इस योजना को भारतीय सरकार के द्वारा 22 जनवरी, 2015 को कन्या शिशु के लिए जागरूकता का निर्माण करने के लिए और महिला कल्याण में सुधार करने के लिए शुरू किया गया था।

इस अभियान को कुछ गतिविधियों जैसे – बड़ी रेलियों, दीवार लेखन, टीवी विज्ञापनों, होर्डिंग, लघु एनिमेशन, वीडियो फिल्मों, निबंध लेखन, वाद-विवाद आदि को आयोजित करके लोगों में फैलाया गया था। इस अभियान को बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा समर्थित किया गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना देश की बेटियों की आने वाली जिंदगी को सुधारने वाली मुहीम और हमारे देश की भविष्य लिखने वाली अहम कलम है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत ही सुरक्षित वातावरण लाएंगी।

इस अभियान को समाज के हर वर्ग के लोगों ने बहुत ही प्रोत्साहित किया है। हमारे समाज में ऐसे बहुत से घर या परिवार हैं जहाँ पर लडकियों को बराबर नहीं समझा जाता है, लडके-लडकियों में भेदभाव किया जाता है। लडकियों को परिवार में वह दर्जा नहीं मिलता है जिसकी वे हकदार होती हैं।

लडकियों को अपने ही परिवार में अपने पक्ष को रखने का अधिकार भी नहीं दिया जाता है। लडकियों को वस्तु की तरह समझा जाता है जिन्हें स्नेह भावना, प्यार और ममता बस एक सपने के समान लगता है। इन सभी कुरीतियों को खत्म करने और समाज के मनोभाव को सुधारने के लिए ही बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को चलाया गया है।

 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के प्रभावशाली कदम :

 

सरकार द्वारा लडकियों को बचाने और शिक्षित करने के लिए बहुत से कदम उठाए गये हैं। इस विषय में सबसे बड़ी पहल बेटी बचाओ बेटी पढाओ है जिसे बहुत ही सक्रिय रूप से सरकार, एनजीओ, कॉर्पोरेट समूहों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों ने आगे बढ़ाया है।

इसी दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना की शुरूआत की है जिसके तहत लड़कियों की पढाई और शादी के लिए सरकार पैसे मुहैया कराएगी। सन् 1961 से कन्या भ्रूण हत्या एक गैर कानूनी अपराध है और लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात कराना प्रतिबंधित कर दिया गया है।

इन कदमों को समाज के लोगों को यह बताने के लिए लिया गया है कि लडकियाँ समाज में अपराध नहीं होती है अपितु भगवान का दिया हुआ एक बहुत ही खुबसुरत तोहफा होती हैं। कन्याओं को बचाने और उनके सम्मान को बनाने के लिए शिक्षा सबसे बड़ी क्रांति है। लडकी को सभी क्षेत्र में समान अवसर देने चाहिए।

सभी सार्वजनिक स्थानों पर लडकियों के लिए रक्षा और सुरक्षा आयोजित करनी चाहिए। विभिन्न सामाजिक संगठनो ने महिला स्कूलों में शौचालय के निर्माण से अभियान में मदद की है। बालिकाओं और महिलाओं के विरुद्ध अपराध भारत में विकास के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा है।

 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की आवश्यकता :

बेटी किसी भी क्षेत्र में लडकों की तुलना में कम सक्षम नहीं होती है और लडकियाँ लडकों की अपेक्षा अधिक आज्ञाकारी, कम हिंसक और अभिमानी साबित होती हैं। लडकियाँ अपने माता-पिता की और उनके कार्यों की अधिक परवाह करने वाली होती हैं। एक महिला अपने जीवन में माता, पत्नी, बेटी, बहन की भूमिका निभाती है।

प्रत्येक मनुष्य को यह सोचना चाहिए कि उसकी पत्नी किसी और आदमी की बेटी है और भविष्य में उसकी बेटी किसी और की पत्नी होगी। इसीलिए हर किसी को महिला के प्रत्येक रूप का सम्मान करना चाहिए।

एक लडकी अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को भी बहुत ही वफादारी से निभाती है जो लडकियों को लडकों से अधिक विशेष बनाती है। लडकियाँ मानव जाति के अस्तित्व का परम कारण होती हैं।

 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का उद्देश्य :

इस मिशन का मूल उद्देश्य समाज में पनपते लिंग असंतुलन को नियंत्रित करना है। हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या बढती ही जा रही है जिसकी वजह से हमारे देश का भविष्य एक चिंताजनक विषय बन चुका है। इस अभियान के द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध आवाज उठाई गयी है।

यह अभियान हमारे घर की बहु-बेटियों पर होने वाले अत्याचार के विरुद्ध एक संघर्ष है। इस अभियान के द्वारा समाज में लडकियों को समान अधिकार दिलाए जा सकते हैं। आज के समय में हमारे समाज में लडकियों के साथ अनेक प्रकार के अत्याचार किये जा रहे हैं जिनमें से दहेज प्रथा भी एक है। लडकियों को समाज में कन्या भ्रूण हत्या का सामना करना पड़ता है।

लेकिन अगर कोई लडकी पैदा भी हो जाती है तो जन्म के बाद बहुत सारे सामाजिक अत्याचारों का सामना करना पड़ता है जैसे – लडकियों को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रखना, उन्हें समाज में अपने सही अधिकारों से वंचित रखना आदि। इन सभी आत्याचारों को खत्म करने के लिए यह अभियान बहुत हद तक सफल रहा है। बेटियों को पढ़ाकर हम अपने समाज की प्रगति को एक गति प्रदान कर सकते हैं।

हम अपनी बेटियों को पढ़-लिखकर अपने सपनों को हासिल करने का मौका दे सकते हैं जो भविष्य में कन्या भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा को ना कहने की हिम्मत देगा। बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान हमारे देश के प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया एक मुख्य अभियान है। भारत का यह सपना है कि लडकियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहिए।

 

उपसंहार :

भारत के प्रत्येक नागरिक को कन्या शिशु बचाओ के साथ-साथ इनका समाज में स्तर सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए। लडकियों को उनके माता-पिता द्वारा लडकों के समान समझा जाना चाहिए और उन्हें सभी कार्यक्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने चाहिए।

बेटी बचाओं अभियान को लोगों द्वारा एक विषय के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए ये एक सामाजिक जागरूकता का मुद्दा है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। लडकियाँ पूरे संसार के निर्माण की शक्ति रखती हैं।

लडकियाँ भी देश के विकास और वृद्धि के लिए समान रूप से आवश्यक होती है। लडकियाँ लडकों की तरह देश के विकास में समान रूप से भागीदार है। समाज और देश की भलाई के लिए उसे सम्मानित और प्यार किया जाना चाहिए।

“हर लडाई जीतकर दिखाऊंगी, मैं अग्नि में जल कर भी जी जाऊंगी

चंद लोगों की पुकार सुन ली, मेरी पुकार न सुनी

मैं बोझ नहीं भविष्य हूं, बेटा नहीं पर बेटी हूं  |”

यह  Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi Slogan है |

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