पदार्थों का चुम्बकीय क्षेत्र में व्यवहार

एक धारावाही परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह एक दण्ड चुम्बक की तरह व्यवहार करती है
पदार्थों के चुम्बकीय प्रभाव के सन्दर्भ में फैराडे ने बताया की जब भिन्न भिन्न पदार्थों को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो इनका व्यवहार भिन्न भिन्न होता है , इसको समझाने के लिए उन्होंने एक प्रयोग किया
जैसा की हमने ऊपर बताया की धारावाही परिनालिका में धारा प्रवाहित करने पर यह एक चुंबक की भांति व्यवहार करती है

चित्रानुसार फैराडे ने एक परिनालिका ली और इसमें विद्युत धारा प्रवाहित की , जैसे ही इसमें धारा प्रवाहित होने लगी इसके भीतर एक प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो गया|


चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होने के बाद फैराडे ने अलग अलग पदार्थ इसके पास लाये तो उन्होंने पाया की
1. लोहा , कोबाल्ट जैसे कई पदार्थ ऐसे थे जो परिनालिका के भीतर उपस्थित प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र की तरफ आकर्षित होकर गति करने लगे
2. एलुमियम जैसे कई पदार्थ दुर्बल बल से चुम्बकीय क्षेत्र से आकर्षित होते है
3. जिंक , सोना जैसे कई पदार्थ ऐसे भी थे जो प्रबल चुंबकीय क्षेत्र से आकर्षित नहीं होते , बल्कि ऐसे पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र से प्रतिकर्षित भी हो सकते है
उपरोक्त प्रयोग से फैराडे ने यह बताया की चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति में अलग अलग पदार्थों का व्यवहार अलग अलग हो सकता है , इसी प्रयोग के आधार पर फैराडे ने पदार्थों को तीन भागों में विभक्त किया
1. लोहचुम्बकीय – जो चुम्बकीय क्षेत्र से आकर्षित होते है
2. अनुचुम्बकीय – जो चुंबकीय क्षेत्र से कम आकर्षित होते है
3. प्रतिचुम्बकीय – जो पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र से प्रतिकर्षित होते है

Remark:

दोस्तों अगर आपको इस Topic के समझने में कही भी कोई परेशांनी हो रही हो तो आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert हमारे टीम मेंबर आपको जरूर solution प्रदान करेंगे|


यदि आपको https://hindilearning.in वेबसाइट में दी गयी जानकारी से लाभ मिला हो तो आप अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कर सकते है |

हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते है।

Also Read:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *