परागकोश या बीजाणुधानी क्या है | परिभाषा

परागकोश या बीजाणुधानी , पुरागकुटि (Antiquity)  :-

पुष्प में पुष्पासन नीचे से तीसरी पर्णसंधि पर पुभँग पाये जाते है इसके एक अवयव को पुकेंसर कहते है। यह एक वृत (डण्टल) द्वारा पुष्पांसन से जुडा रहता है जिसे पुतन्तु कहते है। इसका उपरी सिरा (अत्तिम सिरा) द्विपालीत संरचना में समाप्त होता है। जिसे परागकोश कहते है। परागकोश की प्रत्येक पाली में दो कोष्ठ होते है इस प्रकार चारो कोनो में चार कोष्ठ पाये जाते है। जिनमे ंपरागकण भरे होते है। इसलिए इन्हे पुरागकुटि या लघु बीजाणुधानी भी कहते है।

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