पेप्टाइड की परिभाषा क्या है | प्रकार | पेप्टाइडो का नामकरण | अपघटन की विधि | संश्लेषण विधि

पेप्टाइड :

एमीनो अम्लों के अणुओं के अम्लीय -COOH समूह एवं क्षारीय -NH2 दोनों प्रकार के समूह होते है अत: एक एमिनो अम्ल का COOH समूह दूसरे एमीनो अम्ल के -NH2 से अभिक्रिया करके एमाइड या लवण बना लेते है , इसे पेप्टाइड कहते है।

पेप्टाइड में एमीनो अम्ल परस्पर पेप्टाइड बंध से जुड़े होते है।

पेप्टाइडो में पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े एमीनो अम्लों की संख्या के आधार पर इन्हें निम्न भागों में बांटा जाता है –

1. डाई पेप्टाइड   →  इनमे दो एमिनों अम्ल साथ जुड़ते है।

2. ट्राई पेप्टाइड    →  इनमे तीन एमीनो अम्ल जुड़ते है।

3. ऑलीगो पेप्टाइड  →  ये पेप्टाइड 4 से 10 एमीनो अम्लों से बनते है।

4. पॉली पेप्टाइड    →  ये पेप्टाइड 10 से अधिक एमीनो अम्लों से मिलकर बने होते है।

पॉलीपेप्टाइड में दो टर्मिनल होते है

1. N – टर्मिनल  →  Left always

2. C-टर्मिनल    →  Right always

पेप्टाइडो का नामकरण :

पेप्टाइडो के एक सिरे पर मुक्त -NH2 समूह तथा दूसरे सिरे पर मुक्त COOH समूह होते है , पहला सिरा N-टर्मिनल तथा दूसरा सिरा C-टर्मिनल कहलाता है।

पेप्टाइड की संरचना में N-टर्मिनल को सदैव बाई ओर तथा C-टर्मिनल को सदैव दायी ओर लिखा जाता है।  पेप्टाइड के नामकरण में C-टर्मिनल वाले एमीनो अम्लों को छोड़कर अन्य एमीनो अम्लों के नाम के इन को हटाकर इल (-yl) जोड़कर बायें से क्रमानुसार लिखते है।

पेप्टाइड संरचना का निर्धारण : पेप्टाइड की संरचना उसमे उपस्थित एमिनों अम्लों की संख्या एवं उनके जुड़ने के क्रम के आधार पर निर्धारित की जाती है।

एमीनो अम्लों की संख्या पोली पेप्टाइड के अपघटन से ज्ञात की जाती है।

1. पॉली पेप्टाइड का अपघटन :

पोली पेप्टाइड का अम्लीय जल अपघटन करने पर इसमें उपस्थित सभी पेप्टाइड बंध टूट जाते है एवं एमीनो अम्लों का मिश्रण प्राप्त होता है , एमीनो अम्लों के इस मिश्रण का क्रोमेटो ग्राफी , आयन विनिमय व इलेक्ट्रो फोरेसिर आदि के द्वारा एमीनो अम्ल का विश्लेषण करके इनकी संख्या व सांद्रता ज्ञात की जाती है।

2. पेप्टाइड में एमीनो अम्लों का अनुक्रम ज्ञात करना :

पेप्टाइड द्विक्रियात्मक समूह होता है , इसमें एक सिरे पर free NH2 व दूसरे पर free COOH समूह होता है।

इनका अनुक्रम निम्न प्रकार ज्ञात किया जाता है –

(i) N-terminal एमीनो अम्ल निर्धारण की विधि : इस श्रेणी में निम्न दो विधियाँ काम में आती है

(a) सेंगर विधि / DNP विधि : इस विधि में संगर अभिक्रमक 1-फ्लोरो 2,4-डाई नाइट्रो बेंजीन (FDNB) की कमरे के ताप पर सोडियम बाई कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में पेप्टाइड से अभिक्रिया करायी जाती है तो पेप्टाइड का 2,4-डाई नाइट्रोफेनिल व्युत्पन्न (DNP) बनता है।

जिसका अम्लीय माध्यम में जल अपघटन करने पर डाई नाइट्रो फेनिल समूह बंधित N-टर्मिनल एमिनों अम्लों के साथ स्वतंत्र एमीनो अम्लों का मिश्रण प्राप्त होता है , डाई नाइट्रो फेनिल समूह युक्त एमीनो अम्ल पीले रंग का होता है अत: इसकी आसानी से पहचान कर पृथक कर लिया जाता है।

(b) एडमन विधि :

इस विधि में पेप्टाइड की फेनिल आइसोथायो सायनेट के साथ तनु क्षार की उपस्थिति में अभिक्रिया करायी जाती है तो फेनिल आइसो थायो सायनेट पेप्टाइड के Fee NH2 समूह से अभिक्रिया करता है , इसके पश्चात चिन्हित पेप्टाइड का अम्लीय जल अपघटन करने पर फेनिल थायो हाई डेंटाइड बनता है जो चक्रीय एमाइड होता है , इसकी मानक एमिनों अम्ल से प्राप्त हाईडेंटाइड से तुलना कर पहचान कर ली जाती है।

(ii) C – टर्मिनल एमीनो अम्ल निर्धारण विधि : इस श्रेणी में निम्न दो विधियाँ काम आती है

(a) हाइड्रेजीनो ग्लाइसिस विधि : इस विधि में पेप्टाइड को शुष्क हाईड्रेजिन के साथ गर्म किया जाता है जिससे c-terminal एमीनों अम्लों के अलावा अन्य सभी एमीनो अम्ल हाईड्रेजाइड में परिवर्तित हो जाते है , इस मिश्रण को प्रबल धनायन विनिमय रेजिन अधिशोषक युक्त कोलम क्रोमेटो ग्राफी विधि द्वारा पृथक किया जाता है।  प्रबल क्षारीय प्रकृति के कारण हाईड्रेजाईड कोलम में अधिशोषित हो जाते है व C टर्मिनल एमीनो अम्ल कोलम से प्रवाहित होकर मिश्रण से अलग हो जाते है एवं आसानी से पहचाने जा सकते है।

पेप्टाइडो का संश्लेषण

पेप्टाइड संश्लेषण में स्वतंत्र NH2 या -COOH समूह का रक्षण करना आवश्यक होता है ,अन्यथा एमीनो अम्ल में उपस्थित दोनों क्रियात्मक समूह उसी एमिनों अम्ल के दूसरे अणु के साथ संघनित हो जाते है।

पेप्टाइड का संश्लेषण तीन पदों में सम्पन्न होता है –

(1)  NH2 या -COOH समूह का रक्षण : (protection)

(2) एमीनो अम्लों का संघनन

(3) रक्षित समूह को हटाना अर्थात (deprotection)

ठोस प्रावस्था पेप्टाइड संश्लेषण विधि :

R.B मैरी फिल्ड ने पेप्टाइड संश्लेषण की इस विधि को विकसित किया।

यह विधि मुख्यत: बड़ी पेप्टाइड श्रृंखला जैसे इन्सुलिन आदि के निर्माण में काम में आती है।

इस विधि में एमीनो अम्ल जो की पेप्टाइड के C-टर्मिनल पर होता है , एक ठोस बहुलक जैसे पॉली स्टाइरिन रेजीन के साथ एस्टर बंध द्वारा जुड़ जाता है यह उत्पाद सभी सामान्य विलायको में अविलेय होता है , इस प्रकार के पेप्टाइड के स्टेप वृद्धि संश्लेषण में यह एक ठोस आधार प्रदान करता है एवं अंत में पेप्टाइड श्रृंखला बहुलक से पृथक हो जाती है।

इस विधि में एमीनो अम्ल के NH2 समूह को तृतीयक ब्यूटीलोक्सी कार्बोनिल समूह द्वारा रक्षित किया जाता है।

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