चुनाव स्थल के दृश्य का वर्णन निबन्ध – An Election Booth Essay In Hindi

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चुनाव स्थल के दृश्य का वर्णन निबन्ध – Essay On An Election Booth In Hindi

संकेत बिंदु:

  • भारत एक लोकतांत्रिक देश
  • दिल्ली नगर निगम का चुनाव 2012
  • मतदान केंद्र का वर्णन
  • दो पार्टियों ।
  • में झगड़ा
  • पुलिस द्वारा बीच-बचाव।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

मतदान केंद्र का आँखों देखा वर्णन (Matdan Kendra Ka Aankhon Dekha Varnan) – Polling station eyes seen description

स्वतंत्रता के बाद भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुई। भारत एक लोकतांत्रिक देश बना। लोकतांत्रिक सरकार के गठन में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य निष्पक्ष मतदान का प्रावधान किया गया। जनता अपना बहुमूल्य मत देकर अपने प्रतिनिधि चुनकर राज्य की विधानसभाओं और संसद में भेजती है।

अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोग मतदान करते वर्तमान में दिल्ली को राज्य का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसकी विधानसभा और नगर निगम के लिए प्रत्येक पाँच वर्ष पर चुनाव होते हैं। 2012 में हुए नगर निगम के चुनाव के एक मतदान केंद्र पर मुझे पिता जी के साथ जाने का अवसर मिला, जहाँ मुझे यह विशेष अनुभव प्राप्त हुआ।

मैं चुनाव के दिन लगभग 11 बजे मतदान केंद्र पहुँचा। यह केंद्र द्वारका में स्थित था। मतदान केंद्र के बाहर सड़क पर बहुत से लोग और विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता जमा थे। वे अपनी-अपनी पार्टी के झंडे और बैनर टाँगे थे। कुछ तख्त पर यूँ बैठे थे, मानो दुकानदार हों। वे लोगों को पर्चियों देने का प्रयास कर रहे थे, जिन पर पता, मतदाता क्रमांक, बूध संख्या आदि लिखे थे। मैंने उत्साहपूर्वक पिता जी के नाम की पर्ची ले ली।

मतदान केंद्र के बड़े से द्वार पर सशस्त्र जवान तैनात थे। वे गहन तलाशी के बाद ही अंदर प्रवेश की अनुमति दे रहे थे। उन्होंने पिता जी के अनुरोध पर मुझे भी अंदर जाने दिया। अंदर कई-कई कतारें लगी थीं। सभी कतारों के लिए अलग-अलग बूथ बने थे।

धूप थी, पर मन में उमंग थी, सो मैं भी पिता जी के साथ लाइन में लग गया। इतने में एक बूथ पर अंदर कुछ लोगों के झगड़ने की आवाजें आने लगीं। बाद में पता चला कि किसी पार्टी का एजेंट किसी को विशेष चुनाव-चिहून का बटन दबाने को कह गया था, जिस पर दूसरे लोगों ने आपत्ति की।

मैंने देखा कि सभी कतारों में युवा, प्रौढ़ और वृद्ध उत्साहपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे।

करीब बीस मिनट बाद मैं भी पिता जी के साथ अंदर गया। वहाँ आवश्यक कार्यवाही के बाद कोने में रखी ई.वी.एम. का बटन दबाते ही विप बज उठी और मतदान हो गया। मैं पिता जी के साथ हर्षोल्लास के साथ बाहर आ गया। अभी कैंपस के बाहर निकल ही रहा था कि कुछ कार्यकर्ता अपने नेता के समर्थन में नारे लगाने लगे।

अपने नेता को देख वे जोश में होश खोकर दूसरी पार्टी के नेता को अपशब्द कह बैठे, जिसका उस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी अपशब्दों से ही जवाब दिया। अब तक झगड़ा शुरू हो गया। वे मारपीट पर उतारू हो गए, पर सतर्क पुलिस के जवानों ने स्थिति सँभाल ली और उनके नेता को वहाँ से हटाया, तब स्थिति सामान्य हो सकी। मतदान केंद्र का एक नया अनुभव लिए मैं घर वापस आ गया।

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